after heavy rain in Hindi Letter by Vandna Sharma books and stories PDF | सुहाना मौसम सबके लिए नहीं होता

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सुहाना मौसम सबके लिए नहीं होता

बारिश आई... पर समस्या वही रहीसुहाना मौसम... पर सबके लिए नहीं आदमी भी क्या अजीब जीव होता है।  पहले धूप, गर्मी से परेशान थे, ईश्वर बारिश कर दो, गर्मी से बुरा हाल हो रहा है। अब प्रभु ने बारिश कर दी तो सड़कों पर इतना पानी भर गया, नदियां बन गईं गली मोहल्लों में। औरतें, बच्चे तो अपने घरों में सुरक्षित हैं लेकिन बेचारा आदमी, कमाना भी जरूरी है, घर में नहीं बैठ सकता। मन तो उसका भी करता है, घर बैठकर मजा ले बारिश का। चाय-पकौड़े का स्वाद ले। लेकिन उसी चाय-पकौड़े के स्वाद के लिए काम पर जाना भी जरूरी है। चाहे तैरकर आओ, या मेंढक की तरह टर्र-टर्र कूद-कूद कर गड्ढों में गिरकर, उछलकर, पर आओ जरूर ऑफिस। ये बारिश भी सबके लिए एक सी नहीं होती। अमीरों के लिए सुहाना मौसम, गरीबों के लिए बड़ी मुसीबत। जिनकी झोपड़ियों में, कच्चे घरों में पानी भर गया होगा तो वो खाने से पहले जान बचाने की सोच रहे होंगे। ये गरीबी भी बहुत बेकार होती है। गरीबों के लिए कोई मौसम सुहावना नहीं होता।दो दिन से लगातार बारिश के कारण पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात, मुंबई में बाढ़ जैसे हालात हैं। गुजरात में तो एक मॉल के ग्राउंड फ्लोर पूरा डूब गया। लगभग 100 करोड़ का नुकसान हो गया। मुंबई की सड़कों के भी बुरे हालात हैं। बारिश तो हर साल होती है। ये समस्या तो हर बार होती है। पूरे साल प्रशाशन करता क्या है।सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये समस्या हर बार होती है तो प्रशासन कुछ करता क्यों नहीं? पानी की निकासी के लिए कोई ठोस प्लान, कोई दीर्घकालीन योजना क्यों नहीं बनती? पूरे साल प्रशासन क्या करता है? किस बात का टैक्स लिया जाता है जनता से जब बुनियादी सुविधा ही नहीं है? गड्ढों में सड़कें हैं। सड़कों पर पानी भरा है। परेशान तो सिर्फ आम जनता है। बाकी अमीरों के लिए तो AC कमरे में बैठकर बारिश का मजा लेना ही "सुहाना मौसम" है।समाधान क्या है?ड्रेनेज सिस्टम का ऑडिट: हर साल मानसून से पहले सभी शहरों की नालियों की सफाई और क्षमता की जांच अनिवार्य हो। जवाबदेही तय हो: जिस विभाग की लापरवाही से जलभराव हो, उस अधिकारी पर कार्रवाई हो। जनता की भागीदारी: हर वार्ड में "जलभराव शिकायत ऐप" बने। फोटो खींचते ही 24 घंटे में समाधान हो।लंबी योजना: शहरों में तालाब, पार्क और खुले स्थान बचाए जाएं ताकि पानी जमीन में जा सके। कंक्रीट का जंगल कम हो।बारिश प्रकृति का वरदान है। उसे अभिशाप प्रशासन की लापरवाही बनाती है। अगर समय रहते जाग गए तो अगली बार 100 करोड़ का नुकसान नहीं, 100% राहत होगी।

बारिश आई बारिश आई, गर्मी से राहत लाई

सुहाना मौसम सबके लिए नहीं होता 

कुछ लोगों के लिए मुसीबत साथ भी लाई 

हाय गरीबी और ये मौसम सुहावना 

खाने की सोचे या जान बचाने की

घर बन गए तालाब और गायब हो गई सड़के 

सोच रहे मजदूर, कैसे पहुंचे काम पर 

रात को चूल्हा तभी जलेगा

जब दो पैसे होंगे जेब भर

हाय हाय ये मजबूरी 

ये मौसम और ये मजबूरी 

बाढ़ जैसे हालात हो रहे सड़कों के 

घर छीन गए कितनों के 

जिंदगी जरूरी है तो कमाना भी जरूरी है 

बारिश जरूरी है तो इसका समाधान भी जरूरी है 

डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली 

डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली