निधी घबराते हूए गाड़ी का ब्रेक लगाता है । गाड़ी रुक जाती है । निधी का धड़कन तेज हो जाता है । क्योकीं निधी उसे मारते मारते बच जाती है । निधी गाड़ी से उतरती है , तो दैखती है के रुद्रा गाड़ी के आगे पड़ा था ।
निधी रुद्रा की और धिरे धिरे बड़ती है और उससे कहती है --
निधी :- तुम ठिक हो ? आप अचानक सामने कैसे आ गए? थोड़ा सा भी लेट होता तो…।
निधी वाक्य पूरा नहीं कर पाई के निधी जल्दी से उसके पास घुटनों के बल बैठ गई ।
निधी के कहने पर भी कोई जवाब नही आता है । निधी रुद्रा को अपनी और करती है तो दैखती है के रुद्रा खुन से लथपत था । निधी ये दैखकर डर जाती है । निधी दैखती है के रुद्रा को गोली लगी थी । और रुद्रा की सांसे चल रही थी ।
निधी ने रुद्रा की नब्ज़ पकड़ी—डॉक्टर की आदत और डर से ज़्यादा ज़िम्मेदारी थी ।
निधी (खुद से): - इसका पल्स ठीक नही है… सिर में चोट है और गोली भी लगी है । इसे जल्दी से हॉस्पिटल लेकर जाना होगा वरना इसे बताना मुश्किल हो जाएगा ।
बिजली फिर कड़की उस रोशनी में निधी ने रुद्रा की आँखों में देखा—अजीब-सी शांति थी, जैसे दर्द उसका पुराना साथी हो।
रुद्रा (हल्की मुस्कान के साथ): - लगता है आज मेरी किस्मत में मौत नही लिखी है इसलिए तुमसे टकराना लिखा था…
निधी :- तुम्हें गोली लगी है और तुम हंस रहे हो । ये मज़ाक का वक्त नहीं है! मुझे तुम्हें जल्दी से हॉस्पिटल लेकर जाना होगा । वरना तुम्हारा बचना मुश्किल हो जाएगा ।
इतनी बारिश और अंधेरे मे तुम्हें सड़क के बीच में खड़ा होने का ख्याल कैसे आया ? एक तो तुम्हारी हालत ऐसे ही खराब है अगर कार से टकरा जाते तो तुम्हें कोई बचा नही पाता । चलो अब , मेरे साथ हॉस्पिटल चलो ।
रुद्रा ने जवाब देने से पहले आसमान की तरफ देखा।
फिर धीमे से बोला—
रुद्रा: - कभी-कभी ज़िंदगी खुद रास्ता रोक लेती है, ताकि आप गलत दिशा में आगे न बढ़ जाएँ। शायद किस्मत ने कुछ ही लिखा है , इसिलिए तुमसे टकरा गया ।
निधी एक पल को चुप रह गई। फिर उसने फैसला किया।
निधी: - उठो .. चलो जल्दी । इस हालत में तुम यहाँ नहीं रह सकते। मैं डॉक्टर हूँ— और अभी तुम मेरे पेशेंट हो ।
रुद्रा ने निधी की और गौर से दैखा और फिर उसकी तरफ हाथ बढ़ाया। निधी ने सहारा दिया , दोनों की नज़रें टकराईं— फिर बारिश, अंधेरा और सन्नाटा जैसे किसी नई कहानी की शुरुआत देख रहे हों।
निधी रुद्रा को कार की तरफ ले जाती है। फिर गाड़ी स्टार्ट करके हॉस्पिटल की और वापिस मुड़ जाती है । निधी अपने पापा को फोन करते इसकी जानकारी दे देती है ।
भरत :- ठिक है बेटा मैं आ रहा हूँ ।
निधी गाड़ी चलाने लगती है और फिर पिछे मुड़कर दैखती है , तो रुद्रा अपने पेट पर जहां गोली लगी थी रुद्रा हाथ देकर बैठा था । कुछ दूर गाड़ी जाने के बाद निधी की कार बंद हो जाती है । निधी बहोत बार सेल्फ मारती है पर गाडयी स्टार्ट नही होती । तब निधी रुद्रा की और दैखती है और फिर कार से उतर कर बोरनट खोलकर दैखती है । निधी दैखती है के कार के बैट्री का वायर ढिला था ।
जिसे निधी जल्दी से टाईट करके कार का बोरनट बंद करती है और जैसे ही अपनो कार की और बड़ती है के तभी दूर कहीं…एक काली गाड़ी की हेडलाइट्स बारिश में जलती-बुझती हैं।
निधी इसे इग्नोर करती है और अपने कार की तरफ बड़ती है के तभी निधी के सामने 5 गुंडे आकर निधी को घेर लेती है । निधी उन गुंडो को दैखकर डर जाती है । वो गुंडे सब निधी की और धिरे धिरे बड़ने लगता है ।
निधी घबराते हूए अपने कदम पिछे करने लगती है , और फिर कहती है --
निधी :- क... कौन हो तुमलोग । दैखो मेरे पास मत आना । मुझे जाने दो । गाड़ी मे एक पेसेंट है वो बहोत जख्मी है अगर उसे टाईम पर हॉस्पिटल नही लेकर गया तो वो मर जाएगा ।
निधी के इतना कहने पर वे गुंडे हसने लगे ---
पहला गुंडा :- दैखो रे दैखो , आज तो डॉक्टर मिली है ।
निधी अपना कदम पिछे किये जा रही थी और उन गूडों की कदम भी नही रुके और निधी की और बड़ने लगता है । तभी उनमे से एक कहता है --
गुंडे 1:- आज तो तगड़ा माल फंसा है यार । इसकी हमे मोटी रकम मिलेगी । चल उठा इसे ।
उस गुंडे के इतना कहने पर वो सभी निधी को पकड़ लेता है , निधी जोर - जोर से चिल्लाने लगती है --
निधी :- नही छोड़ो मुझे ... मैं कहता हूँ छोड़ो मुझे। हेल्प ... हेल्प ....
वो लोग निधी को जबरदस्ती अपने साथ खिचंकर ले दा रहे थे और कार मे बैठाना चाह रहा था । निधी और गुडें के बिच कुछ दैर ऐसे ही चलता रहा । निधी किसी तरह से अपने आपको छुड़ाकर फिर से अपने गाड़ी के पास आ जाता है । तो उन गुंडे मे से एक निधी को फिर से पकड़ लेता है और उसके कपड़े फाड़ने लगते है ।
गुडां :- भागकर कहां जाएगी ? आज तुझे कोई बचाने नही आएगा ।
इतना बोलकर वो हंसने लगता है । उस गुंडे को हसता दैखकर बाकी के 4 भी हसने लगते है । तभी वो गुंडा जिसने निधी को पकड़ रखा था , अचानक से उसे मार पड़ती है और वो हवा मे उछलकर कुछ दुर जाकर गिरता है । मार इतनी जबरदस्त थी के वो अपने छाती को पकड़ रखा था और खांसने लगता है तभी उसके मुह से खुन निकलने लगता है ।
सभी उसको ऐसा दैखकर हैरान हो जाता है , सभी उस निधी की और दैखता है । तभी रुद्रा निधी के पिछे से आता है । रुद्रा अपने पेट को पकड़े लंगड़ाते हूँ निधी के पास आकर खड़ा हो जाता है । रुद्रा के आंखे गुस्से से लाल थी , निथी रुद्रा को दैखकर चोंक गई थी क्योकी वो जानती थी के रुद्रा को गोली लगी है और वो बहुत
कमजोर है ।
रुद्रा के हाथ अंगूली से पानी के साथ साथ खुन भी जमीन गिर रहा था । पानी बहोत ज्यादा गिरने की वजह से रुद्रा को वो लोग साफ साफ नही दैख पा रहा था । उसे गिरा हूआ दैखकर उसके कुछ साथी रुद्रा को मारने के लिए सभी वहां पर रखे अपने अपने हथियार लेकर उसकी और भागते हूए आता है ।
जैसे ही वो लोग रुद्रा के करीब करीब आता है के तभी जोरो की बिजली कड़ती है जिससे हल्की रोशनी होती है और रुद्रा का चेहरा दिखता है । रुद्रा का चेहरा दैखने के बाद वो सभी डर से अपने अपने जगह पर रुक गया । सभी रुद्रा के डर से आगे नही बड़ रहा था , उन सबके हाथ पैर कांपने लगते है , वो लोग रुद्रा को दैखकर ऐसे डर रहे थे जैसे सामने यमराज को दैख लिया हो । तभी
To be continue.....