rishte in Hindi Women Focused by Vandna Sharma books and stories PDF | रिश्ते

Featured Books
Categories
Share

रिश्ते

लघु कथा रिश्ते 

दोपहर के 2 बजे थे। सुमन ने रसोई का काम खत्म किया और थक कर बेडरूम में आ गई। आंखों में नींद नहीं थी, पर मन में बहुत कुछ भरा था। कल रात फोन पर हुई बात बार-बार याद आ रही थी। 

उसने सोचा अपनी छोटी बहन पूनम से बात कर ले। पूनम ही तो उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी। बचपन से दोनों ने एक-दूसरे से हर बात शेयर की थी। सुमन ने फोन मिलाया। 

"हेलो दी," उधर से पूनम की आवाज आई।  
सुमन ने बिना भूमिका के कहना शुरू कर दिया, "पूनम कल आभी का फोन आया था। बता रही थी कि जब वो छुट्टियों में मम्मी के पास रही थी तो एक रात मम्मी ने गर्मी में भी कूलर बंद कर दिया था। मैं भी हां में हां मिला रही थी कि हां मम्मी कभी-कभी ऐसा कर देती हैं। मेरे साथ भी एक बार..." 

बात पूरी भी नहीं हुई थी कि पूनम भड़क गई। "दी! तुम मम्मी की बुराई कर रही हो? मैं तो अपने मम्मी-पापा की बुराई एक शब्द भी नहीं सुन सकती। तुम जाकर उनकी मम्मी की बुराई करो, तब पता चलेगा।"

सुमन सन्न रह गई। "पूनम मेरी बात तो सुन। मैंने बुराई नहीं की। बस जो हुआ वो बताया। जब कोई अपनी बात कहे तो उसे सुनना चाहिए। मैं भाभी से लड़ती थोड़े ही बात ही तो सुन रही थी उनकी।"  
"तुम्हें भाभी का फेवर नहीं करना चाहिए था," पूनम ने गुस्से में फोन काट दिया।

सुमन का फोन हाथ से छूट गया। सुमन तकिए में मुंह छिपाकर रो पड़ी। "मैंने क्या गलत कर दिया? मैं तो बस बात बता रही थी।" 

उसके दिमाग में पुरानी यादें घूमने लगीं। उसने पूनम के लिए क्या-क्या नहीं किया। पापा जब भी नए कपड़े लाते, पहले पूनम को पसंद करने देती। खुद अपनी पसंद को हमेशा बाद में रखती। पूनम बचपन में आलसी थी, ट्यूशन जाते समय सुमन के ही प्रेस किए कपड़े पहन लेती। परीक्षा के समय रात-रात भर जागकर उसे पढ़ाती। सुलाने से पहले कहानी सुनाती। 

और आज? आज उसी पूनम ने उसे गलत समझ लिया। सुमन को लगा जैसे दिल पर किसी ने पत्थर रख दिया हो। 

सुमन ने खुद को संभाला। वो रिश्ते निभाने वाली थी। कई बार भाभी ने भी उससे ऊंची आवाज में बात की, अपमान किया। पर सुमन ने कभी पलट कर जवाब नहीं दिया। वो सोचती - "थोड़ा झुक जाने से अगर घर बना रहता है तो झुक जाना मूर्खता नहीं है। पूर्ण कोई नहीं होता। जिसकी जैसी सोच, वैसी प्रतिक्रिया।" 

शाम हो गई। उसे पता भी नहीं चला कब आंख लग गई। उठी तो बेटे को ट्यूशन भेजा और खुद बालकनी में आकर खड़ी हो गई। आसमान में काले बादल छाए थे। हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। 

बाहर बादल गरज रहे थे। और सुमन के अंदर भी। पर अब वो बादल बरस चुके थे। रोकर मन हल्का हो गया था। 

सुमन ने गहरी सांस ली और सोचा - "जिंदगी का क्या भरोसा? कब कौन रूठ जाए, कब कौन अपना हो जाए। किसी से नाराज होकर क्या मिलेगा? सबको खुश तो रखा नहीं जा सकता। पर खुद का मन साफ रखना चाहिए।"

उसने तय किया - वो पूनम से फिर बात करेगी। प्यार से समझाएगी। रिश्ते फोन काटने से नहीं टूटते, दिल जोड़ने से बनते हैं। 

गलत को गलत कहना जरूरी है, पर रिश्ते को बचाना उससे भी जरूरी है। शायद आज पूनम गुस्से में है। कल समझेगी। 

सुमन के चेहरे पर अब शांति थी। उसने आसमान की तरफ देखा और मन ही मन कहा - "हे भगवान, सबके घरों में प्यार बनाए रखना।"

रात को सोने से पहले सुमन ने डायरी में लिखा - "रिश्ते कांच की तरह होते हैं। जोर से बोलोगे तो चटक जाएंगे। धीरे से थामोगे तो उम्र भर साथ देंगे।"

*समाप्त*


डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली