Avni ek Atut Vishwas in Hindi Love Stories by RAAHULL SHARMA books and stories PDF | अवनि एक अटूट विश्वास - 11

Featured Books
Categories
Share

अवनि एक अटूट विश्वास - 11

अवनि ने अपनी नज़रें झुका लीं, पर उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यमन का स्पर्श उसे केवल सुरक्षा ही नहीं दे रहा, बल्कि उसके अस्तित्व को स्वीकार कर रहा है।




रूहानी जुड़ाव


आर्यमन ने अवनि के उस कोमल हाथ को बड़े ही सम्मान के साथ अपने दोनों हाथों के बीच सुरक्षित कर लिया, जैसे वह कोई कांच का कीमती खिलौना हो। वह अवनि के चेहरे की मासूमियत को निहारते हुए बोला:




"अवनि, यह हाथ... जिसने कल मेरी डूबती हुई सांसों को थाम लिया, मैं आज वादा करता हूँ कि अब ताउम्र इस हाथ को कभी नहीं छोड़ूँगा। मुझे माफ़ कर दो कि मैंने इस कोमलता के पीछे छिपी हुई वज्र जैसी मज़बूती को नहीं पहचाना।"




अवनि के दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। उसे महसूस हुआ कि यह सिर्फ दो हाथों का मिलना नहीं था, बल्कि दो भटकती हुई रूहों का एक-दूसरे के करीब आना था। 




वह सुंदर अहसास अवनि के रग-रग में बस गया, और उसे पहली बार लगा कि जिस आर्यमन से वह डर रही थी, वही उसका सबसे बड़ा हमसफर बनने जा रहा है।




प्रेम की मूक भाषा


पहाड़ी की ताजी हवा और सुबह की सुनहरी धूप उस पल की गवाह बन रही थी। अवनि ने अपनी पलकें उठाकर जब आर्यमन की आँखों में देखा, तो वहाँ अब शक का कोई साया नहीं था। वहाँ सिर्फ और सिर्फ समर्पण और एक अनकही मोहब्बत थी।




अवनि के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई और उस सुंदर अहसास ने उसके पिछले सारे जख्मों पर मरहम लगा दिया। वह समझ गई थी कि आज का सूरज उनके जीवन में नफरत का अंधेरा मिटाकर विश्वास का उजाला लेकर आया है।




आर्यमन ने अवनि के कोमल हाथ को अपने हाथों में और भी मज़बूती से भींच लिया। उसकी आँखों में एक ऐसी सच्चाई थी जो अवनि के दिल की गहराइयों तक उतर रही थी।




एक अधूरा इकरार


आर्यमन ने गहरी साँस ली और बहुत ही भावुक होकर कहा, "अवनि, मैं तुम्हें अपनी ज़िंदगी के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ... एक ऐसा सच जिसे मैंने अब तक दुनिया से छिपाकर रखा। 




पर आज, तुम्हें करीब से जानने के बाद, मुझे पूरा विश्वास है कि तुम मेरी बात बहुत प्यार से सुनोगी और मेरा पूरा साथ दोगी। मैं अब तुम्हारे और मेरे बीच कोई पर्दा नहीं रखना चाहता।"




अवनि ने उसकी आँखों में छुपी उस तड़प को महसूस किया और धीमे से कहा, "बताइए आर्यमन जी, क्या बात है? आप जो भी कहेंगे, मैं उसे पूरी श्रद्धा से सुनूँगी।"




आर्यमन ने अभी अपनी बात शुरू करने के लिए होंठ खोले ही थे कि अचानक नीचे सड़क से कई गाड़ियों के दरवाज़े बंद होने और लोगों के चिल्लाने की आवाज़ें आने लगीं।




हवेली के लोगों का आगमन


आर्यमन का वाक्य अधूरा ही रह गया। अवनि और आर्यमन दोनों ने मुड़कर देखा, तो उनके होश उड़ गए।

सामने से आर्यमन की भाभी नीलम, उसके माता-पिता, और अवनि के पिता-माता के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य (चाचा-चाची) तेज़ी से उनकी ओर आ रहे थे।



दरअसल, पुलिस और कुछ स्थानीय लोगों के ज़रिए परिवार को जानकारी मिली थी कि इस नंबर की गाड़ी कल शाम इस सुनसान पहाड़ी की ओर गई थी। रात भर गायब रहने की वजह से घर वालों की जान हलक में अटकी हुई थी।



नीलम का षड्यंत्र और परिवार का डर


नीलम भाभी सबसे आगे थीं, उनके चेहरे पर चिंता का मुखौटा था लेकिन आँखों में एक अजीब सी बेचैनी। उन्हें डर था कि कहीं आर्यमन और अवनि के बीच सब कुछ ठीक न हो गया हो।



अवनि के माता-पिता: अवनि को इस हाल में देखकर—उसके फटे हुए कुर्ते, हाथ पर बंधी पट्टी और चेहरे पर धूल को देखकर—उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े। "अवनि! बेटी, तू ठीक तो है?"



आर्यमन के पिता: "आर्यमन! यह क्या हाल बना रखा है? तुम दोनों रात भर यहाँ क्या कर रहे थे? फोन क्यों नहीं लग रहा था?"



नीलम ने मौका ताड़ते हुए ज़हर उगलने की कोशिश की, "अरे बाप रे! अवनि, तुम्हारे कपड़े... और आर्यमन, तुम सिर्फ बनियान में? यहाँ रात को आखिर हुआ क्या था?



कहीं वही सब तो नहीं जो..." उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी ताकि घर वाले गलत अंदाज़ा लगा सकें।


अवनि और आर्यमन की स्थिति


अवनि और आर्यमन एक-दूसरे का हाथ पकड़े अब भी साथ खड़े थे। उस भीड़ को देखकर अवनि का संकोच फिर से जाग उठा, लेकिन आर्यमन ने उसका हाथ नहीं छोड़ा। उसने अपने परिवार की नज़रों में झाँका और फिर अवनि की ओर देखा।




वह जो सच अवनि को अकेले में बताना चाहता था, अब वह पूरे परिवार के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा था। नीलम भाभी की चालाकी और परिवार की साख के बीच, क्या आर्यमन अब अवनि के सम्मान के लिए सबके सामने खड़ा होगा?




पहाड़ी की उस सुनहरी सुबह में, जहाँ अभी कुछ देर पहले रूहानी सुकून का वास था, अब वहाँ तूफ़ान खड़ा हो चुका था।


अवनि और आर्यमन एक-दूसरे का हाथ थामे उस चट्टान के पास खड़े थे, जब पूरा परिवार किसी सेना की तरह उनके सामने आ खड़ा हुआ।



सन्नाटे को चीरते हुए नीलम भाभी के कड़वे शब्द हवा में गूँजे:


"आर्यमन! यह तुम क्या कर रहे हो? और यह तमाशा... इस लड़की का हाथ थामे सबके सामने खड़ा होना, क्या शोभा देता है तुम्हें?" नीलम ने अपनी आवाज़ में बनावटी हैरानी और तीखापन भरते हुए कहा।




आर्यमन ने अवनि का हाथ और कसकर पकड़ लिया, पर नीलम रुकी नहीं। उसने अवनि की ओर एक हिकारत भरी नज़र डाली और फिर आर्यमन की आँखों में झाँकते हुए बम फोड़ा:



"तुम्हें अंदाज़ा भी है कि श्रद्धा तुम्हें पूरे शहर में पागलों की तरह खोज रही है? कल रात उसका फोन आया था मेरे पास... वह बेचारी इतनी घबरा गई थी कि मैंने उसे बता दिया कि हम सब यहाँ कानपुर में हैं। 



और जानते हो उसने क्या किया? वह फौरन पहली फ्लाइट की टिकट कराकर कानपुर आ गई है!

पिछले दो दिनों से वह पागलों की तरह तुमसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रही है, और तुम्हारा मोबाइल भी स्विच ऑफ आ रहा है और तुम यहाँ... इस हाल में?"



सन्नाटा और बिखराव


नीलम के इन शब्दों ने अवनि के पैरों तले से ज़मीन खिसका दी। 'श्रद्धा' और 'फ्लाइट पकड़कर आना'—इन शब्दों ने अवनि के मन में विश्वास की जो कच्ची दीवार खड़ी हुई थी, उसे ढहा दिया।




अवनि की स्थिति:


अवनि ने झटके से अपना हाथ आर्यमन की पकड़ से छुड़ा लिया। उसकी आँखों में जो अभी कृतज्ञता थी, वह अब गहरे अपमान की आग में बदल गई। उसने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा,



अवनि का टूटता विश्वास


अवनि, जो अब तक बड़ी  शालीनता और श्रद्धा के साथ आर्यमन का हाथ पकड़कर खड़ी थी, इन शब्दों को सुनते ही जैसे पत्थर की हो गई। उसके कानों में 'श्रद्धा' का नाम किसी ज़हरीले डंक की तरह लगा।



एक पल... बस एक पल लगा और अवनि ने झटके से आर्यमन का हाथ छोड़ दिया। वह हाथ, जिसे उसने अपनी जान दांव पर लगाकर रात भर गर्म रखा था, अब उसे पराया लगने लगा। अवनि की आँखों में अविश्वास और गहरा दर्द भर आया। उसने फटी हुई आवाज़ में पूछा: