Her Silent Secret - 12 in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Her Silent Secret - 12

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Her Silent Secret - 12

होटल का conference hall – दोपहर

Conference hall में कई clients और board members बैठे हुए थे। Table के एक तरफ Virat था।
दूसरी तरफ संयोगिता। दोनों के सामने company reports और presentation खुली हुई थीं। Meeting शुरू हो चुकी थी। संपूर्णा के जाने के बाद Virat पूरी तरह बदल चुका था। वो काम करता तो था…लेकिन पहले वाली focus और energy नहीं रही थी। कई projects रुक चुके थे। Company losses में नहीं थी…लेकिन तेजी से नीचे जा रही थी। और ये बात business world समझने लगा था।
संयोगिता ध्यान से सब सुन रही थी। उसने महसूस किया Virat सिर्फ numbers से नहीं हार रहा। वो अंदर से टूट चुका है। उसकी आँखों में हर कुछ देर बाद वही खालीपन उतर आता था।

एक client ने proposal रखा—
अगर Chauhan Infotech और Singh Global Tech partnership करें…तो दोनों companies को फायदा होगा।

कुछ देर discussion चला। फिर आखिरकार दोनों companies ने एक-दूसरे में invest करने का फैसला किया। Hall में हल्की तालियाँ गूंजीं। धीरे-धीरे सारे clients बाहर जाने लगे। Conference hall लगभग खाली हो चुका था।अब वहाँ सिर्फ Virat और संयोगिता रह गए थे। कुछ सेकंड तक दोनों के बीच खामोशी रही। Virat ने धीरे से उसकी तरफ देखा। उसकी नजरों में अब भी confusion था। जैसे वो अब तक तय नहीं कर पाया होकि ये लड़की सच है…या उसके दर्द का भ्रम।

फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा—
क्या हम… personally मिल सकते हैं?

संयोगिता कुछ पल चुप रही। उसने महसूस किया ये सिर्फ business वाली curiosity नहीं थी। Virat उसके चेहरे में बार-बार संपूर्णा को खोज रहा था। फिर भी उसने अपने चेहरे पर वही calm professionalism बनाए रखा।
वो हल्का सा मुस्कुराई।

संयोगिता बोली - 
जी, Mr. Chauhan.

उसकी आवाज़ शांत थी। लेकिन अंदर कहीं…उसका दिल हल्का सा बेचैन हो उठा। Virat कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।

फिर धीरे से बोला—
Thank you…

संयोगिता मुड़ी और बाहर चली गई। लेकिन जाते-जाते उसने महसूस किया Virat की नजरें अब भी उसी पर टिकी थीं।
जैसे वो उसे जाने नहीं देना चाहता। और पहली बार संयोगिता को डर लगा। कहीं वो इस परिवार के बहुत करीब तो नहीं आती जा रही?

शाम का समय था। City की lights धीरे-धीरे चमकने लगी थीं। एक शांत rooftop café के कोने में Virat पहले से बैठा था। उसके सामने coffee ठंडी हो चुकी थी। लेकिन उसका ध्यान दरवाज़े पर था। कुछ देर बाद संयोगिता अंदर आई। आज भी उसने simple suit पहना था। उसकी मौजूदगी में एक अजीब सी शांति थी…और साथ ही ऐसा अंधेरा जो हर किसी को महसूस तो होता था पर समझ नहीं आता था। Virat कुछ पल उसे देखता रह गया। संयोगिता सामने chair पर बैठ गई। कुछ सेकंड दोनों चुप रहे।

फिर आखिरकार Virat ने धीरे से कहा—
आप बिल्कुल मेरी पत्नी जैसी दिखती हो।

उसकी आवाज़ भारी थी। जैसे ये बात वो खुद से बहुत दिनों से छुपा रहा था। संयोगिता ने उसकी आँखों में देखा। वो इस सवाल के लिए तैयार थी।

उसने बिना घबराए शांत आवाज़ में कहा—
I know that.

Virat की नजरें और गहरी हो गईं। संयोगिता ने coffee cup धीरे से टेबल पर रखा।

संयोगिता बोली - 
क्योंकि मैंने आपकी company की CEO का photo देखा था।

उसने हल्की साँस ली।

संयोगिता बोली - 
शायद इसी वजह से आप मुझे देखकर uncomfortable feel करते हैं।

Virat कुछ पल चुप रहा। उसने नजरें झुका लीं।

फिर धीमी आवाज़ में बोला—
Uncomfortable नहीं…

उसकी आवाज़ टूट गई।

Virat बोला - 
बस ऐसा लगता है… जैसे वो फिर सामने आ गई हो।

ये कहते वक्त उसकी आँखों में वही दर्द लौट आया जो संपूर्णा के जाने के दिन था। संयोगिता चुपचाप उसे देखती रही। वो पहली बार महसूस कर रही थी Virat सिर्फ अपनी पत्नी को नहीं खोया था। उसने अपनी जिंदगी खो दी थी। कुछ पल तक दोनों के बीच सिर्फ खामोशी रही। लेकिन वो खामोशी अजीब तरह से जुड़ी हुई थी। तभी Virat हल्का सा मुस्कुराया।

Virat बोला - 
विवान तो आपको देखकर shocked हो जाएगा…

संयोगिता की उंगलियाँ हल्का सा रुक गईं। उसने नजरें cup पर टिका लीं। क्योंकि उसे याद था—

विवान ने उसे क्या कहा था -
Mumma…

हवा धीरे-धीरे चल रही थी। Virat अब भी उसे देख रहा था।
और संयोगिता पहली बार खुद से सवाल कर रही थी क्या वो सिर्फ एक वादा निभा रही है? या धीरे-धीरे उस जिंदगी की तरफ खिंचती जा रही है जो कभी उसकी थी ही नहीं?

अब Singh Global Tech और Chauhan Infotech officially साथ काम कर रही थीं। Business world में ये partnership काफी चर्चा में थी।नलेकिन असली बदलाव office के अंदर हुआ था। संयोगिता अब ज्यादातर समय Chauhan Infotech में बिताने लगी थी। जब भी कोई पूछता—

वो बस इतना कहती—
यहाँ शांति ज्यादा है।

अपनी company की ज़्यादातर जिम्मेदारियाँ उसने Mr. Khanna को दे दी थीं। Meetings, reports, management सब वो संभाल रहा था। क्योंकि संयोगिता खुद अब अक्सर Virat की company में मौजूद रहती थी।और अजीब बात ये थी।उसे वहाँ सच में एक अलग सुकून महसूस होता था।

Office के एक कोने में glass walls वाला एक खूबसूरत cabin था।
“CEO – Sampurnaa Chauhan”
नाम अब भी वही था। किसी ने उसे हटाने की हिम्मत नहीं की थी। क्योंकि Virat किसी को भी उस cabin में जाने नहीं देता था। वो खुद वहीं बैठा रहता। जैसे अभी भी इंतज़ार कर रहा हो कि कभी door खुलेगा…और संपूर्णा अंदर चली आएगी।

उस cabin में आज भी संपूर्णा की coffee mug रखी थी।
उसकी files…उसका pen…यहाँ तक कि उसकी chair भी वैसे ही थी। Virat ने कुछ भी बदलने नहीं दिया था। कई बार employees ने देखा था वो देर रात तक उसी chair को चुपचाप देखता रहता था। Virat नहीं चाहता था कि संयोगिता उस cabin में आए। क्योंकि उसे डर था अगर वो उस जगह बैठी… तो उसका दिल शायद ये फर्क ही भूल जाएगा कि सामने संपूर्णा नहीं है। इसलिए उसने अपना cabin संयोगिता को दे दिया।

संयोगिता पहली बार Virat के पुराने cabin में बैठी थी।
बड़ी glass window…dark wooden table…और सामने city का view। वो धीरे-धीरे कमरे को देख रही थी।
उसकी नजर टेबल पर रखी एक family photo पर गई।
Virat…संपूर्णा…और छोटा विवान। तीनों हँस रहे थे। संयोगिता ने बहुत धीरे से वो photo उठाई। कुछ सेकंड तक उसे देखती रही। उसकी आँखों में हल्की नमी उतर आई। उसे महसूस हुआ वो धीरे-धीरे इस परिवार की यादों के बीच आ चुकी है। और शायद…अब बाहर निकलना आसान नहीं होगा।

उसी समय cabin का door खुला। Virat अंदर आया। उसकी नजर सीधे संयोगिता के हाथ में पकड़ी family photo पर गई। कुछ पल के लिए दोनों की नजरें मिलीं। और कमरे में फिर वही खामोश एहसास फैल गया जहाँ संपूर्णा मौजूद तो नहीं थी…लेकिन हर जगह महसूस होती थी।