Her Silent Secret - 21 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Her Silent Secret - 21

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Her Silent Secret - 21

पार्टी पूरे जोश में चल रही थी। संगीत बज रहा था और ऑफिस के कर्मचारी डांस फ्लोर पर आकर मस्ती कर रहे थे।
तभी विवान की नजर डांस फ्लोर पर गई। उसने तुरंत विराट का हाथ पकड़ लिया।

विवान बोला - 
पापा! आप और मम्मा साथ में नाचोगे।

विराट हँस पड़ा।

विराट बोला - 
अरे बेटा, पापा को डांस करना नहीं आता।

विवान ने संयोगिता का हाथ पकड़ लिया।

विवान बोला - 
मम्मा को तो आता होगा!

संयोगिता हँसते हुए बोली —
मुझे भी नहीं आता।

विवान ने दोनों के हाथ पकड़ लिए।

विवान बोला - 
झूठ! आप दोनों नाचोगे। मैं भी नाचूँगा!

काजल दूर खड़ी ये सब देखकर मुस्कुरा रही थी।

काजल बोली - 
भैया, आज तो आपको अपने बेटे की जिद माननी ही पड़ेगी।

वर्षा भी हँसते हुए बोली—
हाँ, वरना ये छोटा साहब पूरी पार्टी सिर पर उठा लेंगे।

विवान ने खुशी से कहा—
मम्मा-पापा… प्लीज़!

संयोगिता ने विराट की तरफ देखा। विराट ने हल्की मुस्कान के साथ हाथ आगे बढ़ा दिया।

विराट बोला - 
चलिए, मैडम CEO। आज आपके बेटे की फरमाइश पूरी कर देते हैं।

संयोगिता ने उसका हाथ पकड़ लिया। तीनों डांस फ्लोर पर आ गए। विवान बीच में था और दोनों के हाथ पकड़कर अपनी ही धुन में नाच रहा था। संयोगिता और विराट एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। दूर खड़े कुछ पुराने कर्मचारियों की आँखें नम हो गईं। क्योंकि कुछ पलों के लिए उन्हें ऐसा लगा जैसे संपूर्णा फिर से उनके बीच लौट आई हो। लेकिन संयोगिता के दिल में एक अलग ही हलचल थी। विराट का हाथ उसके हाथ में था…और पहली बार उसे इस एहसास से डर नहीं लगा।

बस एक सवाल उसके मन में उठा—
क्या मैं सच में इस परिवार का हिस्सा बनती जा रही हूँ?

संगीत धीमा हो चुका था। विवान उनके बीच में खड़ा होकर अपनी ही धुन में नाच रहा था। विराट का एक हाथ संयोगिता की कमर पर था और दूसरा उसके हाथ में। संयोगिता का दिल तेजी से धड़कने लगा। वो हल्का-सा सिहर उठी। उसने नजरें उठाईं तो विराट की आँखें उसी पर थीं। कुछ पल के लिए दोनों की नजरें मिलीं। संयोगिता तुरंत नजरें झुका गई। उसके भीतर एक अजीब-सी हलचल थी।

वो खुद को समझाने लगी—
ये क्या हो रहा है मुझे?

उसने गहरी साँस ली।

वो मन में बोली - 
नहीं… मुझे इन एहसासों के बारे में नहीं सोचना चाहिए।

फिर उसके मन में अपनी असली पहचान कौंध गई चार साल का अंधेरा…वो अपराधी…वो खून…वो दीवारों पर लिखे मुहावरे…और उसका दूसरा चेहरा।

उसने खुद से कहा—
एक साइको किलर की कोई लव स्टोरी नहीं होती।

उसने धीरे से विराट से दूरी बनाने की कोशिश की। लेकिन तभी विवान ने दोनों के हाथ और कसकर पकड़ लिए।

विवान बोला - 
मम्मा-पापा, ऐसे नहीं! साथ में नाचो!

विराट मुस्कुरा दिया। संयोगिता ने विवान की तरफ देखा। उस मासूम चेहरे को देखकर उसके चेहरे की कठोरता पिघल गई।
उसने खुद को रोक लिया। और फिर…वो विराट के साथ उसी तरह नाचती रही। उसे पता नहीं था कि वो अपने अतीत से भागते-भागते…धीरे-धीरे उसी परिवार के करीब आती जा रही थी, जिसे उसने कभी अपना समझने की हिम्मत भी नहीं की थी।

विराट बिल्कुल चुप था। उसका हाथ अभी भी संयोगिता के हाथ में था, लेकिन उसकी नजरें कहीं और खो गई थीं। उसे संयोगिता में बार-बार संपूर्णा दिखाई दे रही थी।वही चेहरा…
वही कद-काठी…वही अंदाज…बस एक चीज़ अलग थी—
संपूर्णा की आँखों में हमेशा हँसी होती थी, जबकि संयोगिता की आँखों में एक गहरी खामोशी थी। विराट की आँखें नम हो गईं।
सयोगिता ने उसे देखा।

संयोगिता बोली - 
क्या हुआ?

विराट ने तुरंत नजरें हटा लीं।

विराट बोला - 
कुछ नहीं।

वो आगे कुछ नहीं बोला। लेकिन उसके मन में संपूर्णा की यादें उमड़ने लगीं। उसे याद आया संपूर्णा भी कभी इसी तरह उसके साथ डांस किया करती थी। और विवान भी तब छोटा-सा होकर दोनों के बीच में आ जाता था। विराट ने विवान की तरफ देखा। विवान खुशी से उछल रहा था।

विवान बोला - 
मम्मा-पापा! देखो, मैं कितना अच्छा डांस कर रहा हूँ!

विराट ने उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने की कोशिश की।

विराट बोला - 
हाँ बेटा… बहुत अच्छा।

विवान खिलखिलाकर हँस पड़ा। उसकी खुशी देखकर विराट के चेहरे पर भी थोड़ी मुस्कान आ गई। संयोगिता दोनों को देख रही थी। उसके दिल में एक अजीब-सी गर्माहट थी। उसे नहीं पता था कि विराट उसे देखकर संपूर्णा को याद कर रहा है।
और विराट को नहीं पता था कि उसके सामने खड़ी ये लड़की…
जिसे देखकर उसे अपनी पत्नी दिखाई देती है…उसी संपूर्णा की आखिरी इच्छा को अपने दिल में लेकर जी रही है। विवान ने दोनों के हाथ पकड़ लिए।

विवान बोला - 
अब हम तीनों हमेशा ऐसे ही रहेंगे ना?

विराट और संयोगिता एक-दूसरे को देखने लगे। कुछ पल के लिए दोनों के पास कोई जवाब नहीं था।

डांस खत्म हुआ। विवान अभी भी बेहद खुश था। वह कभी विराट का हाथ पकड़ता, कभी संयोगिता का। तभी काजल उनके पास आई।

काजल बोली - 
भैया, आप दोनों को तो यहीं रुकना होगा ना? रात तक काम है। हम विवान को घर ले जाते हैं।

विराट ने विवान की तरफ देखा।

विराट बोला - 
ठीक है… ले जाओ।

फिर उसने काजल को समझाते हुए कहा—
लेकिन विवान को अपने पास सुलाना। इसे अकेले सोने में डर लगता है।

विवान तुरंत संयोगिता की तरफ देखने लगा। उसकी आँखों में हल्की उदासी आ गई।

विवान बोला - 
मम्मा… आप नहीं जाओगी?

संयोगिता का दिल पिघल गया। वो उसके पास बैठी और उसके गाल पर हाथ रखा।

संयोगिता बोली - 
बाबू… मम्मा का काम है। आज मम्मा को यहीं रुकना पड़ेग।

विवान ने कुछ पल उसे देखा। फिर मासूमियत से सिर हिला दिया।

विवान बोला - 
अच्छा…

संयोगिता ने उसके माथे को चूम लिया।

संयोगिता बोली - 
और चाची के साथ अच्छे से रहोगे?

विवान बोला - 
हाँ।

काजल ने उसका हाथ पकड़ लिया।

काजल बोली - 
चलो छोटे साहब, अब घर चलते हैं।

विवान जाते-जाते फिर पीछे मुड़ा।

विवान बोला - 
मम्मा! सुबह मिलोगी ना?

संयोगिता मुस्कुराई।

संयोगिता बोली - 
बिल्कुल।

विवान खुश होकर काजल के साथ चला गया। दरवाज़ा बंद हुआ तो संयोगिता कुछ पल उसी दिशा में देखती रही। विराट उसके पास आकर खड़ा हो गया।

विराट बोला - 
आपको विवान से बहुत लगाव हो गया है।

संयोगिता ने हल्की मुस्कान दी।

संयोगिता बोली - 
वो है ही इतना प्यारा।

विराट कुछ नहीं बोला। उसकी नजर संयोगिता के चेहरे पर थी।
उसके मन में फिर वही एहसास जागा संपूर्णा के जाने के बाद विवान पहली बार किसी के जाने पर इतना उदास होता है।
और शायद…विराट भी।