Bachpan in Hindi Short Stories by Rajeev kumar books and stories PDF | बचपन

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बचपन



रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पीछे लगे हुए थे।
हुआ यह कि एक बच्चा जिस तीतली के पीछे भाग रहा था तो सारे बच्चे भी उसी तीतली के पीछे भाग रहे थे। ’’ मैं पकड़ुं ’’ ’’ मैं पकड़ लूंगा ’’ ’’ मै तो जरूर ही पकड़ लुंगी ’’ बच्चों में होड़ सी लगी हुई थी।
तीतली रानी परेशान हो कर कभी इस पत्ते पर तो कभी उस डाल पर बैठ रही थी। अंत में सुरक्षित समझकर तीतली रानी एक पत्ता पर जाकर बैठ गई।
झपट्टा तो पींकू और बबलू ने एक साथ मारा थाा, मगर लपक कर मधु ने कहा ’’ अब तीतली रानी तो मेरी हुई। ’’ मधु तीतली लेकर दौड़ने लगी। पीछे बबलू और पींकू भी दौड़े। इससे पहले कि दोनों, मधु तक पहूंच पाते मधु ने तीतली उड़ाते हुए कहा ’’ तीतली रानी उड़ चली आकाश। ’’ मधु खिलखिला कर हंस पड़ी।
पास पहूंच कर बबलू ने गुस्सा कर मधु से पुछा ’’ क्यों रे मधुआ, मेहनत तो हम दोनों ने भी किया था, तीतली को तुमने क्यों उड़ा दिया ? ’’
झट से दुसरा सवाल पिंकू ने कर डाला ’’ हमलोग भी तीतली को छु लेते तो तेरा क्या बिगड़ जाता ? बड़ा आयी तीतली को उड़ाने वाली। ’’
मधु के चेहरे से दुविधा स्पष्ट प्रतीत हो रही थी, जवाब दूं कि चुप रहूं वाली स्थिति में थोड़ी देर शांत रहने के बाद, उचित समझकर अवाब देते हुए मधु ने कहा ’’ आलतू-फालतू, बेकार का गुस्सा मत करो। ’’ मधु की बात सुनकर बबलू और पिंकू एक दुसरे का मुंह देखने लगे।
मधु ने कहा ’’ उस दिन तुम लोगों को तीतली पकड़ायी तो तुम दोनों ने क्या किया, एक पंख बबलू ने नोचा तो दुसरा पंख पिंकू ने नोचा और बाद में क्या बोला ’’ तीतली को जमीन में गाड़ देने से पैसा मिलेगा। जा गड्ढा खोद और उस पैसे से चुरण खरीद का खिला तो मानूं । ’’
बचपन की बात आई-गयी हो गई।
तीतली के दिवानों को अब मछली ने आकर्षित किया। नदी किनारे बच्चे पहूंचे तो नदी का जल सुरिली ध्वनी उत्पन्न कर रही थी। पहले तो तीनों बच्चों ने एक-दुसरे पर जल के छींटे फेंके, उसके बाद पत्थर पर तीनों आसीन हुए जैसे कि राजकूमार, राजकूमारी और मंत्री विराजमान हो।
पिंकू और बबली ने बंशी डाल कर शंखनाद किया। अब सामत मछली रानी की आनी थी। पिंकू ने बबलू से कहा ’’ कच्चा आम तोड़ कर लाते हैं फिर चटकारे लेकर आम खाएंगे और साथ में मछली भी फंसाएंगे। ’’
बबलू ने मधु से कहा ’’ मछली रानी फंसेगी तो बंशी को उपर की ओर खिंच लेना। ’’
मधु ने हाँ में सिर हिला कर दोनों को आश्वस्त किया।
पत्थर मार कर तीन आम गिराकर बबलू और पिंकू बहूत खुश हुए। मछली की भी चिंता थी इसलिय तीन आम में ही संतोष कर गए। पिंकू और बबलू लौटे तो देखा कि बंशी में एक भी मछली नहीं फंसी है और मधु का ध्यान शांत जल में गतिशील मछलियों की तरफ है।
मधु को चटकारे लेकर आम खाते हुए देख बबलू ने पिंकू से कहा ’’ कहीं मधु ने तीतली की तरह ही मछली को भी आज़ाद नहीं कर दिया। ’’
पिंकू ने कहा ’’ कितनी डरपोक लड़की है, तीतली और मछली से डरती है। ’’
मधु ने आँख तरेर कर कहा ’’ हाँ, तुम दोनों तो शेर पर सवाशेर हो, मछली और तीतली को मार कर बाहूबली समझते हो। ’’
तीनों एक दुसरे को घुर रहे थे लेकिन अगले ही पल तीनों ठहाका लगाकर हंस पड़े।

समाप्त।