Crash and Survival in Hindi Thriller by Shaziya Khan books and stories PDF | क्रैश एंड सर्वाइवल (अमेज़न डायरीज़) - 16

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क्रैश एंड सर्वाइवल (अमेज़न डायरीज़) - 16

एपिसोड 11 (सुलगती सुबह और नया रास्ता)



अमेज़न के जंगल में एक और खौफनाक रात गुज़र गई। सुबह की पहली किरण के साथ ही घने पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप ने गुफा के अंधेरे को दूर किया। लेकिन इस सुबह का माहौल बिल्कुल बदला हुआ था। टोनी और बिल की मौत ने पॉल और मैट को अंदर से झकझोर कर रख दिया था। दोनों लड़के चुपचाप घुटनों पर सिर रखे बैठे थे, उनकी आँखों के आंसू सूख चुके थे। भूख और प्यास से सबका शरीर टूट रहा था, लेकिन अब किसी में बहस करने की भी ताकत नहीं बची थी।


लारा सबसे पहले उठी और उसने गुफा से बाहर झाँका। जंगल में सुबह की वही उमस और डरावनी आवाज़ें दोबारा शुरू हो चुकी थीं। लारा ने मुड़कर ग्रुप की तरफ देखा और कहा,

"पॉल, मैट... उठो। हमें आज यहाँ से निकलना ही होगा। अगर हम इसी गुफा में बैठे रहे, तो बिना खाए-पिए दो दिन में हमारे शव भी यहीं मिलेंगे। हमें नदी के बहाव के साथ आगे बढ़ना है।"


पॉल ने धीरे से अपना सिर उठाया। उसकी आँखों में अब लारा के लिए वो नफ़रत नहीं थी, बल्कि एक अजीब सी इज़्ज़त और उम्मीद थी। वह उठा और बोला,

तुम जहाँ कहोगी लारा, हम वहाँ चलेंगे। अब हमें सिर्फ तुम पर भरोसा है।"

मैट ने भी अपनी लकड़ी की बैसाखी संभाली और पॉल की बात पर सिर हिलाया। लड़कों का यह झुकाव देखकर ऐशली और रोज़ी के बदन में मानो आग लग गई।


ऐशली ने रोज़ी का हाथ पकड़ा और धीरे से बुदबुदाई,

"देखा रोज़ी? ये दोनों लड़के इस गरीब लड़की के गुलाम बन चुके हैं। बिल और टोनी मर गए, और इन्हें इस लारा की पड़ी है।

रोज़ी ने अपने नीले पड़े हाथ को देखा, जहाँ लारा के लगाए चीरे का निशान था। रोज़ी के दिल में लारा के लिए एहसान नहीं, बल्कि यह जलन थी कि लारा की वजह से ग्रुप में उसकी अहमियत खत्म हो चुकी थी। वह बोली,

चलने दो इन्हें इसके पीछे, जैसे ही कोई मौका मिलेगा, मैं इस लारा को ऐसा मज़ा चखाऊँगी कि यह अपनी औकात याद रखेगी।" उनकी नफ़रत अब और शातिर हो चुकी थी।


पूरा ग्रुप गुफा से नीचे उतरा और नदी के किनारे-किनारे आगे बढ़ने लगा। लारा और सोफिया सबसे आगे रास्ता बना रही थीं। अमेज़न का यह हिस्सा और भी ज़्यादा घना था। हर कदम पर कँटीली झाड़ियाँ और बड़े-बड़े ज़हरीले कीड़े रेंग रहे थे। करीब दो घंटे चलने के बाद, नदी का पाट अचानक बहुत चौड़ा हो गया और उनके सामने एक नई मुसीबत आ खड़ी हुई।


रास्ता आगे से पूरी तरह बंद था। नदी के उस पार जाने के लिए एक बहुत पुराना, जर्जर और लकड़ियों का बना 'सस्पेंशन ब्रिज' (रस्सी का पुल) लटका हुआ था। उस पुल की कई लकड़ियाँ सड़कर नीचे गिर चुकी थीं और वह सिर्फ दो मोटी रस्सियों के सहारे हवा में झूल रहा था। नीचे नदी का पानी बहुत तेज़ था, और सब जानते थे कि उस पानी में पिराना और ब्लैक केमैन जैसे शिकारी घात लगाए बैठे हैं।


"हमें यह पुल पार करना होगा। नदी के इस तरफ का रास्ता आगे दलदल में खत्म हो रहा है। उस पार जाने के बाद ही हम किसी सुरक्षित जगह पहुँच सकते हैं," लारा ने पुल की रस्सियों को जाँचते हुए कहा।


"तुम पागल हो गई हो क्या लारा? इस टूटे हुए पुल पर पैर रखते ही यह नीचे गिर जाएगा! मैं इस पर कभी नहीं जाऊँगी!"

ऐशली चिल्लाई। लेकिन इस बार पॉल ने उसे डाँट दिया,

"तो क्या यहीं खड़ी रहकर मगरमच्छों का इंतज़ार करना चाहती हो ऐशली? चुपचाप चलो!"

पॉल की डाँट सुनकर ऐशली का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया, लेकिन वह चुप रह गई।


लारा ने नियम तय किया,

"पुल बहुत कमज़ोर है। इस पर एक बार में सिर्फ एक ही इंसान जाएगा। पैर बहुत संभाल कर रखना।"

सबसे पहले लारा खुद उस पुल पर बढ़ी। पुल हवा में बुरी तरह झूल रहा था, नीचे तेज़ आवाज़ के साथ नदी बह रही थी। लारा ने बहुत सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ाया और करीब तीन मिनट की सांस रोक देने वाली मशक्कत के बाद वह सही-सलामत दूसरी तरफ पहुँच गई।


उसके बाद सोफिया गई, फिर मैट अपनी चोट के बावजूद धीरे-धीरे पुल पार कर गया। अब इस तरफ सिर्फ पॉल, रोज़ी और ऐशली बचे थे। लारा ने उस पार से चिल्लाकर कहा,

पॉल, अब तुम आओ!

पॉल ने रोज़ी की तरफ देखा, जो डर के मारे कांप रही थी। पॉल ने कहा,

"रोज़ी, तुम मेरे पीछे-पीछे आओ, डरो मत।


पॉल जैसे ही पुल पर बढ़ा, ऐशली ने रोज़ी के कान में फुसफुसाया,

"रोज़ी, यही मौका है। लारा उस पार अकेली खड़ी है और मैट-सोफिया उसके साथ हैं। अगर हम इस पुल को पार करते वक्त कुछ ऐसा करें कि लारा मुसीबत में आ जाए, या फिर..." ऐशली के दिमाग में एक बहुत ही गंदी और शातिर साज़िश चल रही थी। वह लारा को नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थी।


रोज़ी ने ऐशली की तरफ देखा, उसकी आँखों में भी वही शातिराना चमक थी। पॉल अभी पुल के बीच में ही पहुँचा था कि अचानक पुल की एक मुख्य रस्सी में से 'चर्र-चर्र' की आवाज़ आने लगी। वह रस्सी पुरानी होने की वजह से तान बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।


"पॉल! तेज़ी से आगे बढ़ो, रस्सी टूट रही है!"

लारा उस पार से चिल्लाई। लेकिन तभी ऐशली ने जानबूझकर पुल पर ज़ोर-ज़ोर से कूदना शुरू कर दिया,

"ओह माय गॉड! पुल टूट रहा है, बचाओ!

उसके इस तरह कूदने से पुल इतनी भयानक तरीके से झूलने लगा कि पॉल का संतुलन बिगड़ गया। उसका पैर एक टूटी हुई लकड़ी के बीच में फंस गया और वह हवा में उल्टा लटक गया। नीचे भूखे शिकारियों की हलचल पानी में साफ़ दिखने लगी थी। ऐशली की इस जानबूझकर की गई हरकत ने पॉल की जान आफ़त में डाल दी थी, और उस पार खड़ी लारा समझ चुकी थी कि ऐशली ने यह सब जानबूझकर किया है... (जारी है)