Devil ki Daastaan in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Devil की दास्तान - 50

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Devil की दास्तान - 50

( एक हल्की सी नीली रोशनी कमरे में फैली हुई है।
कबीर अपने लैपटॉप पर तेज़ी से कोड टाइप कर रहा है। स्क्रीन पर कुछ अजीब प्रोग्राम्स और डीएनए जैसे सिग्नल्स दिखाई देते हैं।)

कबीर (धीरे से खुद से) बोला - 
"बस थोड़ा सा और... ये कोड अगर चल गया, तो सीया को फिर कभी दर्द महसूस नहीं होगा..."

(उसी वक्त कमरे के बाहर दरवाज़े की आवाज़ आती है। जैसे कोई ग़ुस्से में बाहर गया हो। पर कबीर अपने काम में इतना डूबा है कि उसे कुछ सुनाई नहीं देता।)

(थोड़ी देर बाद वो पीछे मुड़कर बोलता है —)

कबीर बोला - 
"सीया! ज़रा ये रिपोर्ट्स ले आना, जल्दी!"

(चुप्पी...)

कबीर (थोड़ा ज़ोर से) बोला - 
"सीया! सुन रही हो न?"

(अब भी कोई जवाब नहीं। कमरे में सिर्फ़ टाइपिंग की आवाज़ रुक जाती है। वो धीरे-धीरे खड़ा होता है और बाहर निकलता है।)

(कबीर नीचे आता है। सोफ़े पर सीया का फोन रखा है, जो अब भी चालू है। टेबल पर उसकी चाय ठंडी हो चुकी है।)

कबीर (हैरानी से) बोला - 
"फोन यहीं है... तो वो कहाँ गई?"

(वो कमरे-दर-कमरे जाता है — रसोई, बाथरूम, बालकनी... कहीं नहीं। फिर सीढ़ियाँ चढ़कर छत पर जाता है। वहाँ हवा तेज़ चल रही है। पर सीया का कोई निशान नहीं।)

कबीर (बेचैनी में) बोला - 
"सीया!! सुनो... बाहर ठंड है... मज़ाक बंद करो!"

(वो चिल्लाता है, पर जवाब में बस हवा की आवाज़ आती है।
उसकी सांसें तेज़ हो जाती हैं।)

(कबीर का चेहरा, जिस पर चिंता और डर दोनों हैं। उसकी आँखें हल्के से चमकती हैं, जैसे उसके अंदर का ‘वैंपायर इन्स्टिंक्ट’ जाग रहा हो।)

कबीर (धीरे से खुद से) बोला - 
"कहीं वो... फिर से यादों के पीछे तो नहीं चली गई?"

(एक सुनसान पार्क। हल्की बारिश हो रही है। सीया बेंच पर बैठी है, उसके कंधे झुके हुए हैं, हाथ उसके मुंह पर। बारिश उसकी साड़ी को गीला कर रही है।)

सीया (धीरे से खुद से, टूटे स्वर में) बोली - 
"कबीर जी... आप हमेशा मुझसे सच छिपाते रहे... मैं अब क्या करूँ?"

(वो अचानक अपने हाथ को मुंह से हटाती है। उसके हाथ पर थोड़ा सा लाल धब्बा है — खून। वो घबरा जाती है।)

सीया (डरते हुए) बोली - 
"ये... ये कैसे हुआ? मैं... मैं तो... बस..."

(वो रोने लगती है। बारिश की बूंदें उसके चेहरे पर गिरती हैं। वो अपने दर्द में लगभग पागल हो चुकी है।)

(कबीर घर में खड़ा है। घड़ी में 12 बज चुके हैं। कबीर ने पूरी रात सीया की लोकेशन ट्रैक करने में बिताई। उसका चेहरा लाल है, गुस्सा और चिंता दोनों हैं।)

कबीर (गुस्से में, खुद से) बोला - 
"सीया! ये तुम्हारी जिद और मेरी चुप्पी...क्यों हर बार तुम्हें डरना पड़ता है?
अगर तुम्हें कुछ हुआ, तो मैं खुद को नहीं माफ़ करूंगा..."

(वो दरवाज़े के पास खड़ा है। हाथ में उसका मोबाइल, जिसमें सीया की लोकेशन अभी भी ब्लिंक कर रही है। गहरी साँस लेकर वो बाहर निकलने की तैयारी करता है।)

कबीर (धीमे स्वर में, सोचते हुए) बोला - 
"अब बस... मुझे उसे ढूंढना होगा, चाहे कुछ भी हो जाए..."

(बारिश में भीगी सीया, बेंच पर बैठी है। बारिश और उसकी आँसू की बूंदें मिलकर उसके चेहरे पर एक डरावना लेकिन खूबसूरत मिज़ाज बना देती हैं।)

सीया (भीगी आवाज़ में) बोली - 
"क्यों हर बार मैं उसे खोने का डर महसूस करती हूँ...
शायद मैं अब भी वही सिमरन हूँ, जो डरती थी...
पर अब... मैं सीया हूँ, और मैं अपना दर्द खुद सहूँगी..."

(वो आँसू पोंछती है। बारिश की हल्की आवाज़ और चाँदनी वातावरण को और भी सस्पेंस बना देती है। 

(कबीर घर से बाहर निकलने ही वाला है। तभी अचानक घर की घंटी बजती है। कबीर तेज़ कदमों से दरवाज़ा खोलता है।)

(दरवाज़े पर खड़ी है — सीया, पूरी तरह गीली। बारिश की बूंदें उसकी साड़ी और बालों में जमी हैं।)

(कबीर का चेहरा लाल हो जाता है। वो अचानक टूट पड़ता है।)

कबीर (गुस्से में, चीखते हुए) बोला - 
"सीया! तुम फिर से कहाँ गई थी?! इतनी बारिश में अकेली घूमना तुम्हारे लिए खेल नहीं है!"

(कबीर ने उसे जल्दी से खींचा और अंदर खींच लिया। सीया डर के मारे चुप रह गई। वो रो रही थी पर डर के कारण कुछ बोल नहीं पा रही।)

(कबीर गुस्से में उसे कमरे में ले जाता है। सीया का गला पकड़ता है और जोर से डांटता है।)

कबीर (गुस्से में, कड़क स्वर में) बोला - 
"तुम्हें ये समझ में नहीं आता! मैं सिर्फ़ तुम्हारी सुरक्षा चाहता हूँ!
अगर तुम्हें कुछ हुआ, तो मैं खुद को माफ़ नहीं करूँगा!"

(सीया का दिल टूट जाता है। वो रोती है, मगर चुप रहती है। कबीर का गुस्सा अब थोड़ी देर के लिए शांत होता है।)

(कबीर गुस्से में कमरे से बाहर चला जाता है। सीया चुपचाप बाथरूम की ओर जाती है। वो शावर ऑन करती है और पानी की तेज़ धार के नीचे बैठकर बच्चों की तरह रोने लगती है।)

सीया (टूटते स्वर में) बोली - 
"क्यों सब कुछ इतना मुश्किल है... क्यों मुझे कभी भी चैन नहीं मिलता?"

(कैमरा ऊपर से दिखाता है — पानी की बूंदें उसके चेहरे पर गिरती हैं।
वो पूरी तरह अकेली और टूट चुकी है। सिर्फ़ पानी की आवाज़ और उसके रोने की हल्की आवाज़ है।)

( सीया के आँसू और उसके भीगे बाल। )

"कभी प्यार की ताकत ही डर बन जाती है, और डर ही प्यार को तोड़ देता है..."