कहाँ गईं तुम नैना - 16


            कहाँ गईं तुम नैना (16)


संजय नैना को अपने मन की बात नहीं बता सका था। लेकिन औरतों को लेकर मन में जो कड़वाहट थी वह दूर हो चुकी थी। बांग्ला न्यूज़ चैनल में उसके काम की सराहना हो रही थी। उसकी माँ उस पर शादी के लिए ज़ोर डाल रही थीं। उसने शादी करने का फैसला कर लिया। 
सागरिका उसके एक कुलीग की बहन थी। बेहद आकर्षक थी। संजय अक्सर उसके घर जाता रहता था। उसे सागरिका अच्छी लगने लगी। किंतु खुद पहल करने की बजाय उसने अपनी माँ से कह कर उसके माता पिता के पास रिश्ता भिजवाया। सागरिका के घर वाले जानते थे कि संजय एक अमीर घर का लड़का है। उन्हें कोई ऐतराज नहीं था। जब सागरिका से पूँछा गया तो उसने भी हाँ कर दी। 
संजय और सागरिका की शादी हो गई। संजय बहुत खुश था। सागरिका को खुश रहने की पूरी कोशिश करता था। दो साल उनका रिश्ता अच्छी तरह से चला। संजय को अपने काम से फुरसत कम ही मिल पाती थी। सागरिका हाई प्रोफाइल पार्टियों में अपना वक्त बिताती थी। ऐसी ही एक पार्टी में उसकी मुलाकात विक्टर पॉल से हुई। विक्टर के पिता राजनीति में रहे थे। देश भर में उसकी बहुत सी जायदाद थी। विक्टर का लंदन में व्यापार था। 
सागरिका विक्टर की तरफ आकर्षित हो गई। समय के साथ दोनों एक दूसरे को दीवानों की तरह चाहने लगे। सागरिका अब संजय से छुटकारा चाहती थी। वह बात बात पर उससे लड़ने लगी। संजय नहीं चाहता था कि उसकी शादी टूटे। वह सागरिका को समझाने की कोशिश करता था। लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थी।
विक्टर अब और इंतज़ार नहीं करना चाहता था। उसने सागरिका से कहा कि वह दोनों भाग कर लंदन चले जाते हैं। बाद में जो होगा वह संभाल लेगा। उसकी बात मान कर सागरिका विक्टर के साथ चली गई। सागरिका के छोड़ कर चले जाने के कारण संजय को बहुत धक्का लगा। पर इस बार संजय ने खुद को संभाल लिया। उसने अपने आप को पूरी तरह काम में झोंक दिया।
संजय दिन पर दिन तरक्की करने लगा। उसके चैनल वालों ने उसे हिंदी चैनल का मैनेजिंग एडिटर बना कर दिल्ली भेज दिया।  यहाँ उसे फिर से नैना के करीब आने का मौका मिला। नैना उस समय परेशान थी। किसी का साथ चाहती थी। वह भी उससे खुल गई। संजय के मन में एक बार फिर सोया हुआ प्यार जाग उठा। लेकिन जब उसने नैना के सामने उसका इज़हार किया तो उसने मना कर दिया। 
संजय को बहुत बुरा लगा। उसे लगा कि यह तो धोखा है। नैना ने उसका प्रयोग खुद का गम भुलाने के लिए किया। जब वह सामान्य हो गई तो उसका प्यार ठुकरा कर उससे किनारा कर लिया। औरतों के लिए उसका गुस्सा फिर भड़क उठा। लेकिन उसने बहुत चालाकी से काम लिया। उसने माफी मांगते हुए दोबारा दोस्ती आगे बढ़ाई। घमकियों से डरी हुई नैना फिर से उस पर यकीन करने लगी। 
संजय को अपनी चाल सफल होती लग रही थी। उसका मानना था कि आदित्य से अलग परेशान व डरी हुई नैना एक ना एक दिन उसे स्वीकार कर लेगी। लेकिन महक ने सच्चाई बता कर सब चौपट कर दिया। 
वह किसी भी कीमत पर नैना को आदित्य के पास नहीं जाने देना चाहता था। नैना जब कोर्स बीच में छोड़ कर उसके फ्लैट में आई तो उसके मन में एक प्लान ने जन्म लिया। अपने फ्लैट में आकर उसने नैना को कैद कर लिया। वह सोंच रहा था कि ज़ोर जबरदस्ती से उसे तोड़ने में कामयाब हो जाएगा। लेकिन नैना को तोड़ना आसान नहीं था।
दो तीन दिन तक संजय ने नैना का फैसला बदलवाने का प्रयास किया। लेकिन उसकी ज्यादतियों के बावजूद नैना डटी हुई थी। इससे संजय और अधिक चिढ़ गया। उस पर एक जुनून सवार हो गया था। वह किसी भी कीमत पर नैना को तोड़ देना चाहता था। 
संजय के लिए दिल्ली जाकर अपना काम संभालना ज़रूरी था। उसके सामने समस्या थी कि नैना को किसकी निगरानी में रखे। उसने अपनी माँ को बहाने से फोन कर लखनऊ बुला लिया। लखनऊ आने पर जब उसकी माँ को सच्चाई पता चली तो वह बहुत गुस्सा हुईं। उन्होंने फौरन नैना को रिहा करने के लिए कहा। 
संजय अपनी माँ की अपने लिए कमज़ोरी को अच्छी तरह समझता था। माँ उसे बहुत चाहती थीं। उसने उन्हें समझाया कि नैना को वह उनकी बहू बनाना चाहता है। नैना भी ऐसा ही चाहती थी लेकिन कुछ गलतफहमी हो जाने की वजह से उससे गुस्सा हो गई है। कुछ ही दिनों में मान जाएगी। लेकिन अगर अभी उसने नैना को छोड़ दिया तो वह उसे पुलिस के हवाले कर देगी।
संजय की माँ उसकी आखिरी बात से डर गई। वह नहीं चाहती थीं कि संजय को पुलिस गिरफ्तार कर ले। ना चाहते हुए वह उसके लिए अपनी कमज़ोरी के चलते उसके गुनाह में शामिल हो गईं। शादी से पहले वह नर्स का काम करती थीं। ताकी नैना को काबू में रख सकें वह उसे बेहोशी के इंजेक्शन लगाती थीं। जब नैना होश में रहती थी उसे संजय की बात मान लेने के लिए समझाने की कोशिश करती थी। 
नैना की शारीरिक स्थिति विरोध कर सकने की नहीं थी। पर उसके भीतर की शक्ति उसे टूटने नहीं दे रही थी। वह संजय की माँ को भी समझाती थी कि वह बेटे के मोह में ना पड़ कर सच का साथ दें। लेकिन संजय की माँ बेटे के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं। 
अपनी उम्र के चलते नैना पर निगरानी रखना और घर के काम अकेले कर पाना उनके लिए कठिन हो रहा था। इसलिए संजय से सलाह कर उन्होंने मीना को काम पर रख लिया। मीना को झूठी कहानी बता दी नैना उनकी बहू है। उसे दीमागी बीमारी है। मीना को अधिक पैसा देकर कहा कि वह यहाँ की बात किसी से ना कहे। 
संजय के लिए नैना गले में फंसी हड्डी बन गई थी। उसने सपने में भी नहीं सोंचा था कि नैना अंदर से इतनी मजबूत निकलेगी। उसके खयाल में तो वह नैना थी जो उसके सामने अपनी परेशानियां बताती थी। कभी कभी भावुक भी हो जाती थी। इसी कारण उसने सोंचा था कि थोड़ा दबाव डाल कर वह अपना काम बना लेगा। पर ऐसा हो नहीं रहा था।
संजय की माँ भी अब ऊब चुकी थीं। नैना जब होश में आती तो उन्हें एहसास कराती कि वह सही नहीं कर रही हैं। संजय की माँ को भी लगने लगा था कि उन्होंने बेटे की बात मान कर बड़ी गलती कर दी है। 
संजय बीच बीच में लखनऊ आकर नैना को धमकाता था कि यदि नहीं मानोगी तो बहुत बुरा होगा। लेकिन उसका बढ़ता दबाव भी नैना को कमज़ोर नहीं कर पा रहा था। मामला सुलझने की जगह उलझता जा रहा था। संजय की माँ भी उसे फोन कर ज़ोर डाल रही थीं कि अब इस मामले को कैसे भी खत्म करो।
संजय की कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। उसी बीच इंस्पेक्टर नासिर उससे मिले। उसे लगने लगा कि अब देर करना ठीक नहीं है। वह लखनऊ इसी इरादे से आया था कि नैना का कुछ किया जाए।
इंस्पेक्टर नासिर और अभिनव ने मुसितैदी दिखाते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
नैना की आपबीती सुन कर सभी की आँखें नम थीं। सबने खड़े होकर नैना के धैर्य व साहस के लिए ताली बजाई। आदित्य ने नैना को गले से लगा लिया। नैना भावुक हो कर बोली।
"मुझे माफ कर दो आदित्य। मैंने तुम पर यकीन नहीं किया। लेकिन तुमने मुझे ढूंढ़ने के लिए कितनी तकलीफ उठाई।"
"तुम अपना दिल मत दुखाओ। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ। मैं वादा करता हूँ कि अब हम हमेशा साथ रहेंगे।"
सबने एक बार फिर ताली बजा कर इस बात का स्वागत किया। 














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