कशिश - 8 in Hindi Love Stories by Seema Saxena books and stories Free | कशिश - 8

कशिश - 8

कशिश

सीमा असीम

(8)

इस बार पापा ने भाई को बुला लिया था और उसके ऊपर यह ज़िम्मेदारी डाली थी कि वो पारुल को छोडकर आए ! भाई दो दिन की छुट्टी लेकर आए थे एक दिन घर में सबके साथ बिताया ! भाई के आने से घर का माहौल थोड़ा खुशनुमा हो गया था ! अगले दिन भाई उसे छोडने के लिए एयर पोर्ट तक गए कैब से उसका समान निकाल कर बाहर रखा और उसे समझाते हुए बोले कि देखो अपना सामान ट्रॉली में रख कर ले जाओ और अपनी फ्लाइट के काउंटर पर जाकर चैक इन करवा लेना !

ठीक है भाई, आप जाओ मैं सब सही से करा लूँगी ! उसने भाई को आश्वस्त किया ! उनकी वापस जाने की ट्रेन का समय भी हो रहा था ! वे उसी कैब से वापस चले गए अगर थोड़ी देर और रुकते तो ट्रेन निकल जाती !

पारुल ने अपना सारा सामान उठाकर ट्रॉली में रखा और उसे खींचते हुए लेकर चल दी ! उसने ब्लैक और येलो कांबिनेशन वाला लेगी सूट पहना था ! उस येलो कलर में उसका रंग निखर कर बेहद खूबसूरत हो आया था !

चेहरा एकदम निखरा हुआ सफेद और ऊपर से बेहद खुशी जो मन में फूट रही थी उसकी वजह से पूरे शरीर में एक खनक सी थी, हल्का फुल्का सा तन मन मानो हवा में उड़ने को आतुर हो रह हो !! वैसे देखा जाये तो वो हवा में उड़ने ही तो जा रही थी किसी आजाद पंछी कि तरह, जिसे न घर कि परवाह होती है और न ही दुनिया या समाज की, बस एक ऊंची उड़ान, बेफिक्री के साथ और अगर साथ में मन का साथी मिल जाये तो यह उड़ान और भी ज्यादा ऊंची, सुखद और मनभावन हो जाती है ! यही सब बातें सोचती हुई पारुल इंडिगो एयर लाइन के काउंटर तक आ गयी थी ! उसे राघव कहीं पर नहीं दिखे वे यही तो मिलने वाले थे फिर साथ साथ एक ऊंची उड़ान ! वो चारो तरफ नजरें दौड़ा कर उनको ही देख रही थी कि कहीं दिख जाएँ लेकिन उनका कहीं पर कोई आता पता ही नहीं ! राघव से मिले हुए भी करीब 7 मंथ हो गए थे उनकी छवि मन से थोड़ी धुंधली सी हो रही थी कहीं नहीं पहचान पाई तो ? चलो फोन करती हूँ ! वो फोन मिला रही थी ! कि सामने से किसी ने हाथ हिलाया ! अरे यह राघव हैं नहीं यह राघव नहीं हो सकते ? रंग सावला दुबले पतले हल्के नीले रंग की हाफ बाहों की शर्ट और काले रंग की पैंट पहने हुए राघव एकदम से बहुत बेकार से लगे थे ! राघव ने तेजी से अपनी ट्रॉली उसकी तरफ घुमाई और उससे भी तेज चाल चलते हुए उसके करीब आकर खड़े हो गए ! वो एकदम से उन्हें देखती रह गयी, करीब सात महीने पहले मिले थे राघव और आज के राघव में कितना अंतर आ गया था वो खुशी से निखर आई थी और राघव इंतजार में मुरझा से गए थे !

हेलो, क्या सोच रही हो ?

वो राघव की इस आवाज से चौंक गयी !

राघव का दायाँ हाथ उसकी तरफ बढ़ा हुआ था, उसने भी अपना दायाँ हाथ आगे बढ़ाया और राघव के हाथ पर रख दिया पारुल के चेहरे पर खुशी की एक और रेखा खींच आई जबकि राघव यूं ही अपनी बातों में मस्त रहे जैसे कोई बात ही न हुई हो !

पारुल को समझ ही नहीं आया कि राघव उससे मिलने से खुश हैं या फिए उन्हें कोई फर्क ही न पड़ा हो ! ये लड़के लोग ऐसे ही होते हैं या फिर इन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता ? फर्क तो पड़ता होगा, जरूर पड़ता होगा ! बस ये लोग दिखाते नहीं और हम लड़कियां कुछ छिपा नहीं पाते ! चलो कोई बात नहीं अभी सब कुछ थोड़ी देर में ही सब सही हो जाएगा शायद मन मे झिझक होगी !

राघव अपनी आदत के अनुसार वैसे ही बोलते चले जा रहे थे ! हर बात बताते हुए समझाते हुए ! उसे खुद पर फक्र हो रहा था कि इतने प्यारे और बुद्धिमान राघव उसके हैं ! न जाने कैसे उसके मन में भाव पैदा हो गए ! अपने आप से ही आए थे मन में ! वो खुशी से फ़ूली नहीं समा रही थी और यह चेहरे की रक्तिमा को बढ़ाए जा रही थी ! उसके हाथ अचानक से ऊपर की तरफ उठ गए वो उस रब का शुक्रिया करना चाहती थी ! बार बार करना चाहती थी !

उसे आजतक कभी भी इतनी खुशी का अहसास नहीं हुआ था ! वो एयर पोर्ट पर चलती हुई सोच रही थी कि क्या ईश्वर ने ही उसे इस दुनियाँ भेजा है किसी खास मकसद के लिए ! तभी तो मम्मी हमेशा कहती रहती हैं कि तुझे तो आना ही नहीं था न जाने कैसे आ गयी और आई भी तो पुर्णिमा के दिन ! तुझे ईश्वर ने भेजा है अपने किसी खास मकसद के लिए जिसे पूरा करने के लिए तुझे निमित्त बनाया है !

अभी तक तो उसे कुछ समझ नहीं आता था लेकिन उसे आज अहसास हुआ था कि हाँ वो दुनिया में कुछ नए मुकाम जरूर बना के जाएगी कुछ अलग और सबसे हटकर क्योंकि वो इस दुनियां की नहीं है ! देख पारुल वो सामने की सीट पर बैठे दो बुजुर्ग ! एक सी शक्ल के लग रहे हैं न ?

हाँ ! ऐसा कैसे हो जाता है क्या साथ साथ रहने से आदतों के साथ साथ शक्लें भी मिलने लगती हैं ?

ऐसा ही होता है क्योंकि फिर वे खुद को नहीं जीते बल्कि एकदूसरे को जीने लगते है और यह होता है पूर्ण समर्पण भाव ! यही इन्हें इस उम्र में भी जीने का जज़्बा पैदा किए रहता है !

आप सही कह रहे हैं ! उसे अपनी मम्मी की याद आई कि कैसे पापा की हर बात में हाँ मे हाँ मिलती हैं और पापा भी बिना मम्मी की राय के कोई भी काम नहीं करते उन दोनों का एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण भाव ही उन दोनों के बीच के प्रेम को बनाए हुए है ! तभी तो पापा मम्मी के बिना कभी कहीं नहीं जाते और मम्मी नानी से मिलने भी जाएंगी तो शाम तक वापस आ जाएंगी और पापा ऑफिस का कोई लंबा टूर कभी नहीं लेते ! सच में प्यार वही सच्चा होता है जो हर परिस्थिति में टिका रहे ! कभी न डगमगाये और जरा भी डगमगाये तो समझो प्यार था ही नहीं !

पारुल क्या सोच रही हो ? चैक इन नहीं कराना ?

ओहह ! सॉरी !

अरे सॉरी की क्या बात है !

वहाँ पर चैक इन के लिए बैठी वो लड़की उनकी बातें सुनकर मुस्कुरा दी !

राघब ने अपना टिकट और आई कार्ड उसे दिया !

लो भाई कर दो यार जल्दी से, पारुल अपना टिक़ट दे ! सुनो भाई जरा विंडो सीट दे देना !

ओके ! वो लड़की बराबर मुसकुराती जा रही थी !

देख यार, मैं तो ट्रेन से सफर करने वाला बंदा हूँ पर आज मैडम जा रही हैं तो इनको इतना लंबा सफर ट्रेन से कैसे कराता ! ट्रेन पूरे 48 घंटे ले लेती, और फिर इनका दमकता चेहरा मुरझा जाता !

जी ! उसने अपना काम करते हुए और मुस्कुराते हुए संक्षिप्त सा जवाब दिया !

लगेज को बेल्ट में डाल कर और गेट पास लेकर वे गेट पर आ गए वहाँ पर खड़ी पुलिस ने उनकी टिक़ट आईडी चेक की और अंदर भेज दिया !

पारुल कुछ देर यहाँ बैठेगी या अंदर चले ! राघव ने वहाँ पर पड़े सोफ़ों की तरफ इशारा करते हुए कहा !

जैसे आप कहो !

चल वहाँ रेस्टोरेन्ट में बैठकर चाय पीते हैं !

ठीक है !

राघव ने दो चाय और फ्राइड काजू का ऑर्डर कर दिया ! एयरपोर्ट का वो रेस्टोरेन्ट राजस्थानी थीम पर बना हुआ था ऐसा लग रहा था जैसे किसी राजस्थानी गाँव में बैठे हैं वहाँ पर लोग अधिकतर दाल बाटी चूरमा आदि खा रहे थे !

चाय पीकर राघव को स्मोकिंग की तलब लग गयी ! उन्होने बेटर को बुला कर पुंछा क्या यहाँ पर कहीं स्मोकिंग जॉन है

नहीं सर यहाँ पर कहीं नहीं है, आपको बाहर जाना पड़ेगा !

पारुल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी !

पारुल को हँसता हुआ देखकर बेटर भी हंस दिया और बोला देखिये सर जी यहाँ कहीं स्मोकिंग जोन नहीं है और यह सुनकर मैडम भी देखो कितना खुश हो गयी !

राघव ने मुसकुराती हुई तिरछी नजर से पहले पारुल को देखा फिर बेटर को !

सुन पारुल तू यहीं पर बैठी रहना, मैं अभी आया !

राघव ने अपने हैंड बेग से लाइटर और सिगरेट की डिब्बी निकाली और बेग उसे पकड़ा कर चले गए !

यह जो लत होती है न, बहुत बुरी होती है फिर वो चाहें किसी भी चीज की हो !

वैसे यह प्रेम भी तो एक लत ही है अगर यह लत एक बार लग जाये तो ताउम्र नहीं छूटती ! चाहें जान चली जाये पर यह लत न जाये !

वो गाना है न ...

लागी छूटे न, अब तो साजन चाहें तो जाये जिया .... सोचती हुई पारुल मुस्कुरा दी !

प्राण जाये पर सिगरेट न जाये की तरह ! पारुल को मन ही मन बड़े ज़ोर से हंसी आई !

राघव के जाने के बाद पारुल सोचने लगी कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी इस तरह फ्लाइट मे भी जाने को मिलेगा और वो भी अपने प्रिय साथी के साथ ! लेकिन यह राघव इतने कमजोर कैसे हो गए ! करीब छ सात महीने पहले जब वो राघव से पहली बार मिले थे तब तो अच्छे खासे ठीक थे अब ऐसा क्या हो गया !

क्या राघव को भी उससे सच में प्यार तो नहीं हो गया ? कहीं वो भी तो उसी की चिंता फिकर में तो डूबा नहीं है ? क्योंकि प्यार होते ही सबसे पहले चिंता खाने लगती है क्या वो सामने वाला भी आपको उतना ही चाहता है जितना की तुम खुद उसको या फिर अगर उसने अपने प्यार का इजहार कर दिया तो कहीं ऐसा न हो कि सामने वाला मना कर दे ! चलो, यह सब बराबर से हो तो फिर वे मिलेंगे कैसे क्या जमाना उन्हें मिलने देगा ? कहीं उनका प्रेम दुनियाँ के डर से दम न तोड़ दे ! एक नहीं हजारों चिंतायेँ और फ़िकरें लगी होती हैं !

राघव लौट आए थे उनके हाथ में काले अंगूर का पैकेट था जो दूर से बिलकुल जामुन जैसे दिखाई दे रहे थे !

लो पारुल ग्रेप्स खाओ ! आपको पसंद हैं न ? अंगूर का पैकेट उसे देते हुए राघव बोले !

जी ! आपको मेरी पसंद कैसे पता ?

बस यूं ही हम सब पता कर लेते हैं ! राघव मुसकुराते हुए बोले !!

कितना प्यार आया था राघव की इस बात पर ! आई लव यू राघव, उसने अपने मन ही मन में कहा !

पारुल बड़ा मुस्कुरा रही हो ?

बस यूं ही !

बस यूं ही ! राघव ने दोहराया ! और ज़ोर से हंस दिया !

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