कशिश - 10 in Hindi Love Stories by Seema Saxena books and stories Free | कशिश - 10

कशिश - 10

कशिश

सीमा असीम

(10)

तुम मेरा हाथ देखो और बताओ मेरी जिंदगी में कितनी प्रेमिकाएं हैं ?

हे भगवान ! कितनी ? पारुल हंसी !

हाँ भई ! कितनी ही बता दो आज तक एक भी नहीं मिली है न ?

सही है ! न मिले !

क्यों तुम मेरी खुशी नहीं चाहती हो क्या ?

चाहती हूँ तभी तो कह रही हूँ !

अच्छा यह भला कौन सी खुशी हुई कि तुम मेरे जीवन मे किसी प्रेमिका का दखल भी नहीं चाहती !

मैं हूँ न ! उसने हल्के से कहा ! और मेरे होते हुए किसी और प्रेमिका का होना जरूरी है क्या ?

कुछ कहा तुमने ?

नहीं तो !

लग रहा है आज हम दोनों के कान बज रहे हैं जो बिना कुछ कहे ही एक दूसरे को सुन रहे हैं !

अब मुझे आपका हाथ देखने दो शांति के साथ !

शांति के साथ ? ये शांति कौन और कहाँ की है ? मेरी किसी प्रेमिका का नाम शांति नहीं है ! राघव मुसकुराते हुए बोले !

लो अब मैं नहीं देखती आपका हाथ, पारुल ने नाराजगी दिखते हुए झटके से उसका हाथ छोड़ दिया !

अरे भाई मैं तो मज़ाक कर रहा था ! मैं कसम खाता हूँ कि मेरी कोई प्रेमिका नहीं है और आगे भी नहीं बनाऊँगा ! अब खुश ?

पारुल यूं ही बैठी रही और कुछ नहीं बोली !

अब क्यों नाराज हो भला ?

अच्छा लाओ, अब मैं तुम्हारा हाथ देखता हूँ !

राघव ने उसके कोमल और नाजुक हाथ को अपने हाथ मे लेते हुए कहा !

पारुल के चेहरे पर मंद मंद मुस्कान आ गयी थी ! आपको भी हाथ देखना आता है ?

हाँ क्यों नहीं, मैंने पूरा एक साल का कोर्स किया है हाथ देखने का !

उसकी बात सुनकर पारुल ज़ोर से खिलखिला कर हंस दी !

अरे इसमे हँसने कि कौन सी बात है ? तुम मेरा मज़ाक बना रही हो ?

नहीं नहीं ! ऐसा तो कभी नहीं हो सकता ! मैं आपका मज़ाक क्यों बनाऊँगी !

तब तक एयर होस्टेस ब्रेकफ़ास्ट की ट्रॉली खींचते हुए आ गयी, जिन लोगों की टिकिट के साथ ही बुकिंग थी उन लोगों का ब्रेकफ़ास्ट सर्व कर रही थी !

पारुल चाय पियोगी ?

उसने कुछ सोचते हुए हा बोल दिया ! राघव ने दो चाय के लिए एयर होस्टेस को कहा ! उसने दो कपों में गरम पानी और दो चम्मच और दो चाय के पाउच दिये ! पारुल को कुछ नहीं पता था कि कैसे चाय बनेगी, कभी कहीं फ्लाइट से गयी ही नहीं थी !

राघव ने उससे कुछ कहा भी नहीं बल्कि स्वयं ही पाउच खोलकर उसका पाउडर गरम खौलते कप के पानी मे डाला और चम्मच से हिलाकर उसे देते हुए कहा, लो पियो और पीकर बताओ कि राघव द ग्रेट ने कैसी चाय बनाई है ?

पारुल ने चाय का कप हाथ में पकड़ लिया उसका यह चाय पीने का बिलकुल भी मन नहीं कर रहा था ! घर में मम्मी इतनी अच्छी अदरक लौंग इलायची वाली खूब मीठी करके चाय बनाती हैं फिर भी कभी नहीं पीती और यहाँ यह पाउडर वाली चाय ? उसे नहीं पीनी ! अब मना भी नहीं कर सकती !

राघव ने अपने लिए भी चाय बना ली थी अरे पियो न ? राघव ने उसे टोंका !

हाँ पी रही हूँ ! कहते हुए बड़े बेमन से चाय का एक सिप लिया ! वाओ !! इतनी स्वाद चाय उसने आज तक कभी नहीं पी थी !

बहुत अच्छी चाय बनाते हैं आप ? उसने राघव को छेड़ते हुए कहा ! अगर आप कभी चाय बनाने की दुकान खोलेंगे न, तो देखना दूर तक लाइन लग जाएगी !

हम्म ! आइडिया बुरा नहीं है ! वे मुस्कुराते हुए बोले !

वैसे चाय बनाने और बेचने वाले बड़े बड़े लोग हुए हैं ! कहकर वो ज़ोर से हंसी फिर खुद पर ही झेंपती हुई चुपचाप चाय पीने लगी ! प्लेन के अंदर स्वादिष्ट खाने की खुशबू फैल गयी थी ! उसका मन किया कि वो भी ऑर्डर करे पर साथ में राघव थे और उनके सामने बच्चों की तरह हरकत करते अच्छा भी तो नहीं लगेगा !

पारुल नाश्ते मे कुछ लेना है ? न जाने कैसे राघव उसके मन की बात समझ गए थे !

नहीं नहीं ! अभी भाई के साथ ब्रेड बटर खाई थी ! आपको चाहिए तो ले लीजिये !

मैं भी घर से खा कर ही चला था !

कुछ देर उन दोनों के बीच शांति छा गयी !

राघव ने न जाने क्या सोचकर एयर होस्टेस को चॉकलेट लाने को कहा ! वो चॉकलेट के दो पैकेट लेकर आ गयी !

चलो पारुल यह खाओ हल्की सी पेट पूजा हो जाएगी ! राघव ने पैकेट को खोलकर उसे देते हुए कहा !

एकदम अलग स्वाद वाली बेहद टेस्टी ! मुंह में डालते हुए ऐसा लग रहा था मानों कोई नई दुनियाँ में है वो और हर चीज बहुत ही अच्छी है ! क्या वाकई सब कुछ इतना स्वाद है या फिर उसे ही लग रहा है कहीं यह राघव के साथ का असर तो नहीं ?

राघव ने उससे पूछा, पारुल चॉकलेट टेस्टी है न ?

हाँ बहुत !

उसने प्लेन की खिड़की से बाहर की तरफ देखा वो बादलों के बहुत ऊपर थी और सूर्य देव उसके साथ साथ चल रहे हैं जैसे उसे आशीर्वाद देते जा रहे हैं कि मैं हूँ न हमेशा तेरे साथ !

सफ़ेद रुई के फाये से वे बादल ऐसे लग राग रहे थे मानों किसी ताजी गिरी बर्फ के ढेर हैं कभी देखा नहीं था बल्कि कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह से बादलों के पार जाएगी वो भी अपने प्रिय दोस्त और शायद जिंदगी के साथ यूं दूर उड़ जाएगी ! उसका मन आज बिलकुल भी वश में नहीं था वो राघव के गले लगना चाहती थी अपने प्यार का इजहार करना चाहती थी ! उसने एक बार फिर से राघव का हाथ कसकर पकड़ लिया !

अरे क्या हुआ पारुल ? शायद वे घबरा गए थे !

कुछ नहीं बस बादलों के ऊपर हूँ ये देखकर थोड़ा डर लगा !

वे हल्के से मुस्कुराए ! तू क्यों खामखाँ दर रही है, मैं हूँ न ! उन्होने अपने दूसरे हाथ से उसके हाथ को पकड़ लिया !

उनके इस तरह से हाथ पकड़ने के कारण शरीर में न जाने कैसी तरंगे प्रवाहित हो रही थी ! शरीर मे मानों कोई करंट सा दौड़ रहा था ! पूरा शरीर झनझना सा रहा था ! अब उसका मन कर रहा था कि वो अपना हाथ राघव से छुड़ा ले पर राघव ने अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को बड़ी कोमलता के साथ थम रखा था ! बड़ा मुलायम अहसास था फिर भी दिल भीतर से घबरा था ! उसने अपनी नजरें उठाकर राघव कि तरफ देखा, वे जैसे कह रही हो, राघव यह हाथ तुम हमेशा के लिए थाम लेना पर अभी छोड़ दो ! मुझे घबराहट हो रही है लेकिन राघव उसकी मन की भावनाओं से अंजान मुस्कुराते हुए अपने पुराने हवाई यात्रा के किस्से सुनाने में मगन थे, कैसे कहे वो उनसे कि मेरा हाथ छोड़ दो क्या वे उसकी नजरें नहीं पढ़ सकते ! तभी एयर होस्टेस कि खनकती मधुर धुन गूंजी, कृपया आप लोग अपनी सीट बेल्ट बांध लें .......! चलो अब उसका हाथ तो राघव के हाथ से छुट जायेगा ! पर वे अभी भी अपने किस्से सुना रहे थे ! उसने कहा राघव बेल्ट तो बाँध लो !

अरे हाँ ! कहते हुए उसने उसका हाथ छोड़ दिया !

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