कशिश - 11 in Hindi Love Stories by Seema Saxena books and stories Free | कशिश - 11

कशिश - 11

कशिश

सीमा असीम

(11)

प्लेन अब बादलो के नीचे आ गया था ! अब वो कलकत्ता शहर के ऊपर उड़ रहा था जहां से उसे फ्लाइट बदलनी थी क्योंकि डायरेक्ट फ्लाइट नहीं मिली थी !

यहाँ से घर किसी छोटे खिलौने की मानिंद नजर आ रहे थे !

देख पारुल यहाँ हर घर के पास मे पोखर है !

पोखर ?

पोखर मतलब छोटा सा तालाब !

अच्छा वो क्यों ?

वो इसलिए क्योंकि यह लोग इसमे मछली पालते हैं, जैसे हम लोग अपने घर के बाहर किचिन गार्डन बनाते हैं न ! ताजी सब्जियाँ उगाने के लिए ठीक वैसे ही यह लोग करते हैं मतलब पोखर में मछली उगते हैं !

ओहह अच्छा ! उसे याद आया कि बंगालियों का मुख्य भोजन ही मछली होता है !

पता है यह लोग भले ही प्याज लहसन न खाये पर इनके खाने मे मछली का होना बहुत जरूरी होता है !

उसकी नानी के घर के पास एक तालाब था, जहां पर लोग जाल डाल कर मछली पकड़ते थे और फिर वही किनारे पर बैठ कर उन्हें बेचते थे !मेरी नानी बताती कि यह कहर लोग होते हैं और इनका काम ही मछली को जाल में फसाना !

प्लेन थोड़ा और नीचे आ गया था और अब घर, पोखर थोड़ा साफ नजर आने लगे थे जो दिखने मे बहुत ही सुंदर लग रहे थे ! हरे भरे हरियाली से घिरे हुए घर और पोखर ! वाकई हर जगह का अलग कल्चर होता है अलग रहन सहन अलग खान पान ! अनेक सभ्यताओ को पिरोकर बनाकर बना है हमारा देश, हमारा प्यारा भारत देश !

फ्लाइट कलकत्ता के एयरपोर्ट पर लैंड कर गयी जहां से उसी एयर लाइन की दूसरी फ्लाइट लेनी थी ! पारुल बड़ी खुश चलो इसी बहाने मुझे यहाँ का एयरपोर्ट देखने को मिलेगा यहाँ के लोगो को देखने और मिलने के अवसर के साथ ही यहाँ के कल्चर के बारे में भी पता चलेगा ! लेकिन हमे एयरपोर्ट पर जाने का अवसर नहीं मिला, वहाँ पर दो बसें खड़ी थी एक एयरपोर्ट तक ले जाने के लिए दूसरी फ्लाइट तक ! जिसे यहीं तक जाना था वे एयरपोर्ट वाली बस में बैठ गए और बाकी दूसरी बस में ! वहीं से गुहाटी तक ले जाने वाली फ्लाइट मिल गयी और हम सब लोग उसमें सवार हो गए !

आपने ऐसी फ्लाइट क्यों चूज की जिसे चेंज करना पड़ा मेरी वापसी की तो डाइरेक्ट फ्लाइट है गुहाटी से दिल्ली !

हाँ यार, गलत फ्लाइट ले ली दरअसल उस वक्त ध्यान नहीं दिया बस यह देखा कौन सी चीप पड़ेगी, बस वही ले ली, उधर से मेरी भी डायरेक्ट है !

जी ! फालतू में थोड़े से पैसों की खातिर इतना समय और व्यर्थ की थकान !

सोर्री पारुल गलती तो मेरी थी और तुम्हें परेशान होना पड़ा !

अरे कोई बात नहीं, हो जाता है ! वो मुस्करा कर बोली !

राघव भी हंस दिये ! अरे आप अपने पैसे तो ले लीजिये राघव !

कौन से पैसे ?

फ्लाइट का टिकिट आपने किया था इस साइड से वही वाले !

अरे ले लेंगे, क्यों परेशान होती हो अभी रहने दो !

नहीं पहले पैसे लीजिये हिसाब में क्या रिश्ता !

जब मिलेंगे यहाँ से तभी दे देना !

नहीं पापा ने पूरे पैसे दिये हैं !

पारुल ने पर्स से पैसे निकाल कर राघव को पकड़ा दिये और थोड़े अलग से भी दिये आगे टॅक्सी या बस से जाने के लिए !

रहने दे यार ! हो जायेगा !

ले लो आप मुझे अच्छा लगेगा !!

ना मम्मा, मैं आपके साथ बैठूँगी ! तभी पीछे वाली सीट से किसी छोटी लड़की के बोलने की आवाज आई !

बेटा ज़िद नहीं करते ! तुम आगे वाली पर जाकर बेठ जाओ !

आप भैया को क्यों नहीं बैठा देती !

मिट्ठू बेटा भैया छोटा है न ! आप तो अपने भाई को प्यार करते हो !

पीछे वाली सीट से इन आवाजों को सुनकर पारुल मुड़कर देखने लगी !

देखा एक करीब 10 दस साल की लड़की और करीब छह साल का गोल मटोल सा लड़का और उनके मम्मी पापा ! लड़की मम्मी के साथ बैठने की ज़िद कर रही थी जबकि उसकी सीट हमारे बराबर वाली थी उसकी ज़िद पर उसके मम्मी और पापा दोनों मुस्करा रहे थे और भाई चुपचाप भोला सा मुंह बनाकर मासूमियत से उसका चेहरा देख रहा था ! पारुल को वो बच्ची बहुत प्यारी लगी !

बेटा आप हमारे पास आकर बैठ जाओ ! पारुल ने प्यार से उसे बुलाते हुए कहा !

जाओ अब तो दीदी भी बुला रही है न !

वो लड़की मुंह फुला कर बैठ गयी क्योंकि उस तीन सीट वाली जगह पर बस तीन लोग ही बैठ सकते थे तो उसके मम्मी पापा और भाई ही बैठ गए ! अगर इस लड़की की जगह मेरे पापा होते तो वे स्वयं दूसरी सीट पर बैठते और उसे भाई और मम्मा के साथ, जबकि यहाँ उसके पापा मम्मी के गले में बाह डाल कर बैठे थे और मम्मी यूं बिहाईव कर रही थी मानो अभी बिलकुल नई नवेली हो ! कहीं उनने दूसरी शादी तो नहीं कर ली ! उसके मन में एकदम से यह ख्याल आया !

राघव की आदत है सबसे प्यार से बात करने की तो वे उस बच्ची से भी बात करने लगे ! बेटे जी क्या अपना यह हैयर बैंड हमे दे देंगी ?

नहीं ! उसने अपने बैंड पर हाथ रख लिया !

क्यों ?

यह मेरे नाना जी ने लाकर दिया है ! उसके गुस्से वाले चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी !

आपके नाना जी आपको बहुत प्यार करते हैं न ?

हाँ ! बहुत सारा ! वो मुस्कराई !

तो आप अपने नाना को घर पर क्यों छोड़ आई ? उनको भी साथ लाना था !

मम्मा कहती हैं कि नाना जी पहाड़ पर चढ़ नहीं पाएंगे इसलिए उनको नानी जी के साथ ही रहने दिया ! आपको पता है अंकल ? जबसे मेरी मम्मा की शादी हुई मैं अपने नाना जी के साथ ही रहती हूँ ! वे मेरे लिए रोज रसगुल्ला लाकर देते हें !

और आपका भाई ?

उसे मम्मा अपने साथ ही रखती हैं न, तो शादी के बाद भी साथ ही ले गईं ! मेरे पापा बहुत प्यारे थे लेकिन भगवान जी उनको आपने साथ ले गए !

उसका अंदाजा लगभग सही ही था !

यह आपके पापा नहीं है ? पारुल से रहा नहीं गया और उसने पूछ लिया !

नहीं, यह मेरे मम्मा के पति हैं !

दुख हमे कितनी जल्दी समझदार बना देते हैं यह बात उसे आज समझ आई ! शायद यह सच ही था तभी वो प्यारी सी बच्ची जो मेरे पास बैठी थी उदास सी पिंक कलर की खूब घेर और फ्रील वाली फ्रॉक और बालों में फूलो वाला हेयर बैंड लगाकर ! अपनी उम्र से कितनी बड़ी लग रही थी !

आपका नाम तो अपने बताया ही नहीं ?

मेरा नाम मिट्ठू है ! मेरी मम्मा बताती थी कि मेरा नाम मेरे पापा ने रखा ! वो मुझे बहुत प्यार करते थे !

उसके चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान आ जाती थी वो जब भी अपने पापा या नाना की बातें बताती !

दीदी एक बात बताओ ?

हाँ ! पुछो न !

जो लोग बहुत प्यारे होते हैं या बहुत प्यार करते हैं वे भगवान के पास क्यों चले जाते हैं ? उन्हें भगवान अपने साथ क्यों ले जाते हैं ?

नहीं ऐसा नहीं है ! देखो आपके नाना जी भी तो आपको प्यार करते हैं वो आपके साथ हैं न !

भगवान जी मेरे नाना को भी ले जाएंगे क्योंकि वो भी मेरे पापा की तरह बीमार रहने लगे हैं ! वो अपनी काली चमकती आँखों मे आँसू भरकर बोली !

नहीं बेटा, वो ठीक हो जाएंगे ! उसकी बात सुनकर पारुल की आँखें भी डबडबा आई थी !

उसे अपने पापा की याद आ गयी वो उसे कितना प्यार करते हैं, उसकी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं !

दीदी आप क्या सोच रहे हो ?

कुछ भी नहीं बेटा !

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