Mere shabd meri pahchaan - 12 in Hindi Poems by Shruti Sharma books and stories PDF | मेरे शब्द मेरी पहचान - 12

मेरे शब्द मेरी पहचान - 12

आज की कविताएं

1:-) वजह बन जाएँ
2:-) दोस्त नज़र आता है


आशा है आप सभी को ये पसंद आएंगी । उम्मीद करती हूँ आप लोग इसे पढने के बाद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसे पहुँचाएंगे । आप सभी का ये प्यार हमेशा मुझ पर और मेरे लेखन पर बनाए रखना ।।

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---- वजह बन जाएँ ----

* लोगों की सच्चाई ही उनके सवालों के जवाब बन जाएँ ,
किसी की खुशी के लिए माँगी दुआ भी अरदास बन जाए ,
जो कभी ना टूटे लोगों का हम पर एसा विश्वास बन जाए ,
मेरे शब्द लोगों के लिए केवल शब्द नहीं एह्सास बन जाए ।

* मेरे शब्द असहाय लोगों की आवाज़ बन जाएँ ,
मेरे बोल ही मेरा आगाज़ मेरी पहचान बन जाएँ ,
संसार के समस्त प्राणियों की खुशियाँ बेहिसाब बन जाए ,
यही दुआ है की जिंदगी की लड़ाई में हर इन्सान जाँबाज़ बन जाए ।

* की सच्चे और अच्छे लोगों की रहों के काँटे भी फूल बन जाएँ ,
सही राह पर चलना लोगों के उसूल बन जाएँ ,
बिना तेरी रहमत के सतगुरु जीत भी हमारे लिए सजा बन जाए ,
यही अरदास है तुझसे हे वाहेगुरु
की हम किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट की वजह बन जाएँ । ।
हम किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट की वजह बन जाएँ । ।


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---- दोस्त नज़र आता है ----

* हकीकत में ना सही मगर ख्वाबों में ऐसा एक दोस्त नजर आता है ।
हद से ज्यादा मुझ पर अपना याराना जो जाताता है ,
यूं तो हर पल मुझको वो सताता है ,
मगर मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट भी वही लाता है ,
मेरे मुरझाए से चेहरे पर खुशियां वही सजाता है ,
उसे मेरे झूठ का भी न जाने कैसे पता लग जाता है ,
अजी एक दोस्त है मेरा जो हर मुसीबत में मेरा सहारा बन जाता है ।
हकीकत में ना सही मगर ख्वाबों में ऐसा एक दोस्त नजर आता है ।।


* लड़ता है झगड़ा है और वही रुलाता है ,
मगर रुलाने के बाद मुझे मनाने भी वही आता है ,
करता है तू तू मैं मैं मजाक भी वही उड़ाता है ,
जो कोई दूसरा हँस दे मुझ पर
दोबारा हँस ना सके उसका ऐसा हाल कर आता है ,
कितना भी छिपाऊँ दर्द को अपने आंखें मेरी वो कैसे पर पढ़ ही जाता है ,
अजी एक दोस्त है मेरा जिसे मेरे दोस्ती के अलावा कुछ नहीं भाता है ।
हकीकत में ना सही मगर ख्वाबों में ऐसा एक दोस्त नजर आता है ।।


* मेरी जीत पर मेरी पीठ वो थपथपाता है ,
जो उठा लूं गलत कदम तो खींच के तमाचा वो लगाता है ,
कितना भी रूठू उससे कोई हकीकत नहीं ठुकराता है ,
सच है मेरे सच्चे दोस्त होने का फर्ज वो निभाता है ,
होने पर मेरे बीमार सिर पर अपना हाथ वो फहराता है ,
मेरी खुशी के लिए अपने हर दर्द को वो सह जाता है ,
आजी एक दोस्त है मेरा जो सच्चे दोस्त के रुप में फरिश्ता बन आता है ।
हकीकत में ना सही मगर ख्वाबों में ऐसा एक दोस्त नजर आता है ।।


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✍🏻-श्रुति शर्मा