Mera Hero - 9 in Hindi Fiction Stories by Priya Maurya books and stories PDF | मेरा Hero (भाग-9) केचप ऑन मानसी के मुखडे पर

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मेरा Hero (भाग-9) केचप ऑन मानसी के मुखडे पर

कैंटीन के अन्दर---

पाँचो टेबल पर बैठे हुये थे। लेकिन सबके चेहरे के भाव कुछ और ही थे जहा पर रोहित और शौर्य अभी यह सोच रहे थे की आखिर यह सब किया किसने होगा वही पर अंजलि श्रुति का मूड अच्छा करने की कोशिश कर रही थी तो अवीका बस सैंडविच खाए जा रही थी।

और खाते हुये ही शौर्य और श्रुति को इशारा करके बोलती है-" यार सब तो ठीक हो गया अब आराम से खाओ पीयो सब। वैसे शौर्य कितना परेशान हो गया था श्रुति के लिये।" उसकी बाते समझ कर रोहित भी उन दोनो की टाँग खीचने लगता है -" हाँ वैसे शौर्य ने आजतक मेरी भी इतनी फिक्र नही की होगी।" अंजलि बस हसे जा रही थी और शौर्य तो समझने की कोशिश कर रहा था की यह लोग आखिर क्या बात कर रहे है। वही श्रुति को सब समझ आ रहा था और वो आज गुस्सा होने की जगह शर्मा रही थी।

अभी यह लोग बात ही कर रही थे की रोहित का फ़ोन बजाता है रोहित कॉल को स्पीकर पर रख कर बोलता है-" पता चला क्या की किसने श्रुति की ड्रिंक मे अल्कोहल मिलवाया था वेटर से।" दुसरी तरफ से कोई आदमी बोलता है-" येस सर हमने उस वेटर से पूछताच की तो पता चला कोई मानसी नाम की लड़की ने यह सब करवाया था।" इतना कह कर वो कॉल रख देता है।

शौर्य को मानसी पर बहुत गुस्सा आ रहा था। अविका बोलती है-" मुझे तो उस चुडैल पर पहले से सक था लेकिन वो हमेशा श्रुति को ही टारगेट क्यू करती है।" तभी कही से अनिकेत दौडते हुये आता है और उन सबके सामने आकर हांफते हुये बोलता है-" शौर्य यार तूने श्रुति को अपनी गर्लफ्रैंड बताकर अलग ही बवाल खड़ा कर दिया है पूरे कॉलेज मे यह बात जंगल की आग से भी ज्यादा तेज फैल रही है।"

सब आश्चर्य से शौर्य की तरफ देखने लगते है और अंजलि बोलती है-" शौर्य तुमने श्रुति को बचाने के लिये यह कहा है।" शौर्य भी थोड़ा हडबडते हुये बोलता है-" अगर मै ऐसा नही बोलता तो उस किस वाली फोटो के बाद इसे सब कॉलेज मे चैन से रहने देते क्या?" अविका-" वैसे बात तो सही है।" श्रुति बस सबको सुन रही थी। रोहित अनिकेत से -" लेकिन अब क्या हुआ।" अनिकेत-" कुछ लड़कियो ने मानसी को चड़ा दिया है और वो तमतमाती हुई आ रही है।" तभी श्रुति झटके से खड़े होकर गुस्से मे बोलती है।-" आने दो आज उसे मै नही छोडूंगीं। " श्रुति को को इतने गुस्से मे किसी ने पहले नही देखा था वही इस तरह से गुस्सा होने के कारण उसकी छोटी सी नाक लाल हो गयी थी जिसे देख कर शौर्य मुस्कुराने लगता है। रोहित तो अलग ही मन मे सोचे जा रहा है-" शौर्य बोलता है वो कहा और श्रुति कहा लेकिन यह दोनो तो मुझे एक जैसे ही लगते है श्रुति गुस्से मे तो शौर्य से भी ज्यादा खतरनाक लग रही है।"

अभी सब अपनी ही दुनिया मे व्यस्त थे की मानसी गुस्से मे आती है और उसके पीछे सिया और जिया भी दौडते हुये आ रही थी।मानसी आकर सिधे श्रुति के सामने खड़ी होती है और बोलती है-" तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शौर्य के इतने करीब जाने की । तुम्हे पता भी है तुम कहा एक छोटे शहर से आई लड़की और शौर्य कहा शिन्घानिया खानदान का एकलौता वारिस। " श्रुति मन मे सोचती है -" अच्छा तो यह शौर्य के लिये हमेशा मुझसे पन्गे करती है।" फिर मुस्कुराते हुये बोलती है-" तो क्या हुआ मै इतनी खुबसूरत हू की कोई भी मुझे अपनी गर्लफ्रैंड बनाना चाहे और वैसे भी शौर्य मेरा बॉयफ्रेंड है ही हम दोनो एक दुसरे से प्यार भी करते है।" इतना कहना था की शौर्य और रोहित शॉक से श्रुति को देखने लगते है शौर्य के चेहरे की मुस्कुराहट छुपते नही छुप रही थी की रोहित उसको कोहनी मार कर धीरे से बोलता है-" तुझे श्रुति ने अपना बॉयफ्रेंड बोला।" लेकिन शौर्य उसे आंख दिखा कर चुप कर देता है।

इधर मानसी तिलमिलाते हुये श्रुति को बोलती है -" सकल देखी है तुमने अपनी ।" श्रुति अवीका के सामने रखे सैंडविच के पास का केचप उठकर मानसी के चेहरे पर सिधे पोत देती है और हसते हुये बोलती है-" यह लो तुम भी अपनी सकल देख लेना।" कैनटीन मे बैठे सारे लोग इस मुफ्त के शो का मजा उठा रहे थे। जैसे ही श्रुति मानसी के मुह पर केचप पोतती है सारे लोग हसने लगते है और शौर्य तो आज श्रुति का यह रूप देखकर दंग था और मन ही मन सोच रहा था-" बेटा शौर्य यह तो तेरे टक्कर की क्या तुझसे भी बडकर है शादी के बाद क्या होगा तेरा रब जाने।" शौर्य अपने शादी के ख्यालो मे खोया था की मानसी बोलती है -" श्रुति अभी जो करना है कर लो लेकिन यह मत सोचना की मै तुम्हे छोड दूंगी।" इतना कहकर वो आकड़ते हुये जाने लगती है की श्रुति अपना पैर आगे कर देती है और तभी धडाम की आवाज के साथ मानसी गिर जाती है इस बार तो सब लोग हस ही रहे थे साथ ही सिया और जिया की भी हसी छुट जाती है। फिर दोनो मानसी को उठाकर ले जाती है। सारे बात करने के बाद अपने क्लास मे जाते है और धीरे धीरे सब कुछ पहले की तरह होने लगता है।

कुछ महीने बीत जाते है लेकिन कुछ था जो अब बदल रहा था वो थी श्रुति - शौर्य और रोहित - अविका की नजदीकिया । सारे एक दुसरे के बहुत करीब आ चुके थे।

एक दिन श्रुति अकेले ही कॉलेज आती है क्युकी अंजलि की तबियत खराब थी। छुट्टी के वक्त श्रुति और अवीका कुछ नोटस बनाने के लिये लाइब्रेरी जाती है। दोनो पढते हुये इतने खो जाते है की उन्हे समय का पता ही नही चला। लगभग 3 घन्टे बाद जब दोनो अपना समान पैक कर बुक रो से बाहर आती है तो librarian का पता ही नही था । इसलिये जब वो दरवाजे पर आती है तो देखती है की दरवाजा बाहर से बन्द है और लॉक लगा है । उन्हे कुछ समझ नही आता है की श्रुति का ध्यान लाइब्रेरी मे चल रही घड़ी पर पड़ती है। श्रुति-" वो शिट ..... 5 बज गये है और लाइब्रेरी तो 4 बजे ही बंद हो जाती है ।" अविका रुवासी होते हुये-" अब क्या करे श्रुति।" दोनो परेशान थी की श्रुति बोलती है -" रुक मै कॉल करती हू किसी को।" श्रुति अपना बैग देखती है तो उसमे मोबाइल नही थी। श्रुति-" मेरी मोबाइल शायद क्लास मे ही छुट गयी है तू अपने मोबाइल से कॉल कर। " अवीका-" मेरी वाली तो रोहित के पास ही रह गयी मैने उसे लैब मे जाते वक्त दिया था उसे किसीको कॉल करना था और उसके मोबाइल मे नेटवर्क नही था इसलिये।" धीरे धीरे अन्धेरा होने लगता है और इधर इन सबकी बेचनी भी बढ रही थी।

शिन्घानिया विला मे---

आज नही पता शौर्य को बहुत अजीब लग रहा था और बार बार श्रुति की चिंता हो रही थी और यह सब उसकी दादी जी देख रही थी। दादी -" क्या हुआ शौर्य।" शौर्य -" कुछ नही ।" बोलकर अपने रुम मे आकर इधर-उधर टहलने लगता है। जब उसे रहा नही जाता है तो वो श्रुति को कॉल मिला देता है। रिंग जाती है लेकिन कोई उठता नही है। कम से कम 10 बार ट्राई करने पर भी कोई उत्तर नही मिलता है।

अब शौर्य को सच मे बहुत चिंता हो रही थी। वो अंजलि को कॉल करता है और दो बेल जाने के बाद ही अंजलि फ़ोन उठा लेती है-" हेलो शौर्य क्या हुआ।" शौर्य-" श्रुति कहा है उससे बात करवाओ।" अंजलि-" श्रुति ..... श्रुति तो तुम लोगो के साथ होगी ना वो कॉलेज से अभी नही आई मुझे लगा की तुम सब कही घुमने गये होगे।" शौर्य-" क्या लेकिन हम तो अपने घर है अच्छा कोई खबर मिलती है तो मै तुम्हे बताता हू।" और जल्दी से फ़ोन रख के अविका को कॉल करता है।

दुसरी तरफ से रोहित फ़ोन उठाकर बोलता है-" हा शौर्य क्या हुआ आज अवीका के फ़ोन पर इतने कॉल क्यू आ रहे है।" शौर्य-" अविका का फ़ोन तेरे पास क्या कर रहा है?" रोहित-" अरे वो मुझे लैब जाते वक्त दी थी लेकिन लेना ही भूल गयी।" शौर्य-" यार बहुत बड़ी गड्बड़ हो गयी है श्रुति आज कॉलेज से पीजी ही नही पहुची।" रोहित-" क्या ... लेकिन आज तो अविका भी उसी के साथ निकली थी .... एक मिनट ... इसका मतलब अविका भी घर नही गयी तभी उसके फ़ोन पर इतने कॉल आ रहे थे । "

अब तो रोहित भी परेशान था वो शौर्य का कॉल रख अविका के घर बात करता है और उन्हे अविका को जल्दी घर खोजकर लाने को बोल खुद की कार निकाल के शौर्य के पास आता है। फिर दोनो अपनी अपनी कारों से श्रुति और अवीका की तालाश मे सिधे कॉलेज पहुचते है। कॉलेज गेट बन्द था बस एक वचमेन गेट के पास कुर्सी पर बैठा था।

शौर्य उसे गेट खोलने को बोलता है लेकिन वो नही मानता है। शौर्य गुस्से मे अपनी पॉकेट से बन्दूक निकाल लेता है और सिधे उसके माथे पर लगा देता है और बोलता है-" अब जल्दी खोलो इसे नही तो तुम आज इस दुनिया को अलविदा बोल दोगे।" वचमैन डर से कापने लगता है और गेट खोल देता है शौर्य और रोहित भागते हुये अन्दर जाते है।

इधर लाइब्रेरी के अन्दर से जब श्रुति और अविका बाहर किसी के कदमो की आवाज सुनती है तो जोर जोर से चिल्लाने लगती है-" हैल्प ...प्लीज हैल्प ।" शौर्य और रोहित आवाज सुन लाइब्रेरी के तरफ बढ़ते है और रोहित एक ही झटके मे दरवाजा तोड देता है ।

दौडते हुये अवीका को गले से लगा लेता है इधर श्रुति भी शौर्य को देख कर रोने लगती है की शौर्य प्यार से उसे गले लगा बालों को सहलाने लगता है। रोहित अवीका से-" पागल ऐसा क्यू करती हो तुम पता है मेरी जान ही निकाल गयी थी।" अविका रोते हुये बोलती है-" क्यू तुम्हे क्या मुझे कुछ हो जाये।" रोहित वैसे ही बोलता है-" अभी एक चपत लगेगा ना सही हो जाओगी तुम्हे समझ नही आता की मै तुमसे कितना प्यार करता हूँ ।" अवीका थोडा हसते हुये-" आई आल्सो लव यू टू ।"

इधर जैसे ही श्रुति- शौर्य उनकी बात सुनते है वो दोनो अलग होके हक्के बक्के खड़े थे और एक दुसरे को देख रहे थे । शौर्य मन मे ही-" यह रोहित का बच्चा मेरी टाँग खीचता था और खुद इतना बड़ा कारनामा कर रखा है ... वाह बेटा मुझसे भी आगे निकाल गया तू तो।" फिर कुछ देर बाद रोहित अवीका भी अलग होते है और रोहित सबको फ़ोन करके बताता है की दोनो मिल चुकी है।

शौर्य भी कॉल करके ऐडमिनिस्ट्रेटिव हेड को सारी बात बताता है ताकि बाद मे उन्हे कोई परेशानी ना हो। वो भी श्रुति का हाल चाल लेकर कॉल रख देते है। रोहित अवीका को अपने कार मे बिठा उसे उसके घर छोड़ने चला जाता है। श्रुति भी अपना मोबाइल वापस लेकर शौर्य की कार मे बैठ जाती है। शौर्य श्रुति से-" चलो मै तुम्हे अपनी फ़ेवरिट जगह ले चलता हू।" श्रुति-" पर कहाँ।" शौर्य-" वो तो सरप्राइज है।" फिर दोनो कार मे बैठ चले जाते है।