disorientation in Hindi Social Stories by Rama Sharma Manavi books and stories PDF | भटकाव

भटकाव

जिंदगी के सफ़र में अत्यंत अजीबोगरीब घटनाएं घटती रहती हैं।मैं एक शिक्षित 44 वर्षीय हाउस वाइफ हूँ।ग्रेजुएशन में ही विवाह कर दिया गया था, पति के प्रोत्साहन से विवाहोपरांत मैंने PG कर लिया था लेकिन पति की अच्छी जॉब एवं बेटे की परवरिश अच्छे से करने की चाहत के कारण कभी जॉब करने की मेरी ख्वाहिश नहीं रही।

मेरा इकलौता 22 वर्षीय बेटा BBA के अंतिम साल में है, जो हॉस्टल में रहता है।हमारे घर का माहौल काफ़ी खुशनुमा है, हम तीनों का आपस में दोस्ताना व्यवहार है।इसी कारण बेटे के मित्र भी हमारे साथ घुले-मिले थे, जिससे वे अपनी समस्याओं को हमसे सरलतापूर्वक डिस्कस कर लेते थे।

मैं भी आजकल के समयानुसार फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम इत्यादि सोशल मीडिया पर पर्याप्त क्रियाशील रहते हुए अक्सर विभिन्न अवसरों की अपनी तस्वीरें शेयर किया करती हूँ और पसंद आने वाले पोस्टों पर लाइक-कमेंट देती हूँ।मेरे फेसबुक फ्रेंड्स में मेरा बेटा भी शामिल है।एक बार उसके एक मित्र अमन ने मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा,मैंने बेटे के साथ उसकी तस्वीरें देखी थी, उससे पूछा था तो उसने बताया कि वह उसके ही क्लास में है और उससे उसकी अच्छी मित्रता है, वह एक अच्छे परिवार से सम्बंधित सिंसियर युवक है एवं क्लॉस का सेकेंड टॉपर है,इसलिए मैंने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लिया,इसमें कुछ भी सोचनीय नहीं था।वह मेरे सभी पोस्टों पर लाइक-कमेंट अवश्य करता था।यह बात पिछले साल की थी।

अभी इस साल बेटे के पास गई थी तो अमन से भी मुलाकात हुई थी,क्योंकि वे अब रूममेट भी थे।वह थोड़ा अंतर्मुखी युवक था,उसका व्यवहार बेहद शालीन था,मैं एवं मेरे पति उससे बेहद प्रभावित थे।जब बच्चे बाहर रहते हैं तो उनके कुछेक मित्रों के मोबाईल नम्बर भी रखने आवश्यक हो जाते हैं,अतः अमन का नम्बर हमने ले लिया था।अब कभी-कभार अमन का फ़ोन भी आने लगा था, मैंने एक बार बेटे से कहा भी था तो बेटे ने कहा कि मॉम,इसमें अनोखा क्या है, मेरे अधिकतर फ्रेंड हमेशा आपसे कम्फर्टेबल रहें हैं।वैसे भी उसकी मॉम वर्किंग हैं, अतः अमन से उनकी बॉन्डिंग कुछ खास नहीं है।

अब वे साथ ही MBA कर रहे थे।एक बार दीपावली पर अमन भी बेटे के साथ आया था।लौटने पर बेटे ने ख़ुशी से चहकते हुए बताया कि मॉम, अब तो अमन भी आपका फैन हो गया है, अक्सर आपकी बात करता रहता है।खैर,यह भी कुछ आश्चर्यजनक नहीं था।

एक दिन अमन का वाट्सएप पर मैसेज आया,जिसे पढ़कर मैं वाकई हैरान-परेशान हो गई, मैसेज था,"रेस्पेक्टेड….,मैं जो कहने जा रहा हूँ, मैं जानता हूँ ग़लत है,लेकिन मेरा मन मेरे नियंत्रण में नहीं है।अगर मैं यह बात आपसे शेयर नहीं करूंगा तो पागल हो जाऊँगा,हर समय आपका चेहरा मेरी आँखों के सामने घूमता रहता है, पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा है, प्लीज मुझसे नाराज़ मत होना,I Love you।मुझे माफ़ कीजिएगा।"

अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे इस भटकाव से कैसे बचाऊँ, कैसे समझाऊँ।मुझे वाकई उसकी चिंता हो रही थी, क्योंकि मेरा एक ग़लत कदम एक होनहार युवक को अंधेरे रास्ते पर धकेल सकता था,मेरे लिए वह मेरे बेटे के समान था,इसलिए मैं उसे डांट-डपटकर या बेटे को बताकर शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी, बस किसी तरह सही रास्ते पर लाना चाहती थी।अतः काफी सोच-विचारकर मैंने उससे बात की।

मैंने उसे समझाया कि बेटा,तुम एक समझदार युवक हो,खुद स्वीकार कर रहे हो कि यह ग़लत है।मैं एक सुखी विवाहिता एवं तुमसे दोगुनी उम्र की महिला हूँ।यह प्रेम नहीं मात्र आकर्षण है।तुम मेरे लिए मेरे बेटे जैसे हो,इसलिए उसी दृष्टिकोण से मेरा सम्मान करो,आंटी के रूप में ही प्यार करो।प्यार करना गलत नहीं है लेकिन प्रेमपात्र समवयस्क एवं सुपात्र होना चाहिए, अर्थात शारीरिक एवं मानसिक रूप से लगभग समान होना चाहिये।कभी -कभी कोई किसी को पसंद करता है, किन्तु वह किसी औऱ से प्रेम करता है, वहाँ भी जबरन प्रेम थोपना अनुचित है और न ही ईर्ष्या-क्रोध में कोई ग़लत कदम उठा लेना चाहिए।

उसने पश्चातापपूर्ण स्वर में कहा कि आपकी बात बिल्कुल सही है।असल में हमारे आसपास इतनी समझदार एवं सुलझी हुई लड़कियाँ दिखाई नहीं देतीं,इसीलिए शायद मैं आपकी तरफ आकर्षित हो गया।मुझे माफ़ कर दीजिए।

मैंने पुनः समझाते हुए कहा कि बेटा,तुमने भी तो एक बचकानी हरकत की है।तुम्हारी समवयस्क अधिकतर युवतियाँ भी उम्र के साथ धीर-गम्भीर हो जाएंगी।दुनियादारी एवं मैच्योरिटी उम्र के अनुभवों से ही आती है।अभी तुम सभी को अपनी शिक्षा एवं कॅरियर की तरफ़ पूर्ण ध्यान देना चाहिए।

अमन ने कहा कि आंटी, मैं आपसे वादा करता हूँ कि अब जिंदगी में कोई गलती नहीं करूंगा।

मैंने राहत की सांस लेकर उसका उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बेटा,गलती सभी से होती है, किन्तु किसी के समझाने पर अपनी गलती को स्वीकार करते हुए उसे सुधार कर सही मार्ग का चुनाव करना समझदारी एवं बड़ी बात है।

मुझे तसल्ली थी मैं एक भटकते हुए युवक का मार्गदर्शन कर उसे सही रास्ता दिखा सकी।

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