Saat fere Hum tere - 29 books and stories free download online pdf in Hindi

सात फेरे हम तेरे - भाग 29

अरे दीदी सब के लिए भगवान ने ही सब कुछ सोच कर रखा है ये हमें पहले से पता नहीं होता है क्योंकि सबकुछ तो भगवान के हाथ में है। तभी तो आप देख लिजिए बस मैं आज यहां पर हुं। ये सब विक्की ने कहा। और हां मुझे यहां पर शायद निलेश ने ही मुझे यहां भेजा वरना निलेश जाता क्यों इसलिए सब कुछ वो बैठ कर तय करता है और क्या।।


माया ने कहा हां ठीक कहा तुमने। बिमल ने कहा हां ठीक है अब चलते हैं बहुत देर हो गई है।
फिर वहां से सब निकल गए। माया ने कहा क्या शानदार जगह है बहुत ही अच्छा लगा।

फिर सब टैक्सी में बैठ कर घर के लिए निकल गए।

एक घंटे बाद सब घर पहुंच गए। सभी थक कर चूर हो गए थे। फिर सभी गुड नाईट कह कर सो गए।

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर दोनों तैयार हो गई।
माया ने कहा मैं जल्दी आने की कोशिश करूंगी।
विक्की ने मुस्कुराते हुए कहा क्या आप कभी निलेश के लिए जल्दी घर आ गई थी।
माया ने कहा नहीं कभी नहीं। विक्की ने कहा तो फिर मेरे लिए क्यों दीदी।पराया कर दिया है ना। प्लीज़ आप अपने समय पर आइए। मैं सब कुछ सम्हाल लूंगा।
अतुल ने हंसते हुए कहा सच यार।
विक्की ने कहा तो और क्या।
नैना ने कहा हां ठीक है देखते हैं। फिर दोनों निकल गई। फिर तीनों दोस्तों ने मिलकर चाय और नाश्ता किया माया ने नाश्ते में चिल्ला बना दिया था।

फिर खाना खाने के बाद तीनों मिलकर कैरम बोर्ड निकाल कर खेलने बैठ गए।
अतुल ने कहा वाह यार ये तो निलेश की तरह खेल रहा है।हम हमेशा निलेश से हार जाते थे और अब विक्की से भी।


विक्की ने कहा अच्छा निलेश भी अच्छा खेलता था।मैं तो बचपन से ही मेरी मम्मी और डैडी को एक साथ नहीं देख पाए और शायद आज मेरे पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है।


अतुल ने कहा अरे तुम तो इमोशनल हो गए। विक्की ने कहा हां थोड़ा सा।
फिर दो बजे नैना आ गई। और उसने देखा कि तीनों मिलकर किचन में है। नैना ने कहा अरे वाह खुशबू अच्छी आ रही है पर तीनों लोग मिलकर।।
विक्की ने कहा नहीं ये लोग बस साथ दे रहे हैं किसी की तरह साथ छोड़ा नहीं है। नैना बिना कुछ बोले चली गई।

कुछ देर बाद ही माया आ गई।

अच्छा तो क्या खिचड़ी पक रही है तीनों आज किचन में।

विक्की ने कहा हां दीदी चलिए फेश् हो कर आइए।
माया ने कहा हां पर क्या बनाएं?

विक्की ने कहा वेज बिरयानी और दम आलू और रायता।।

सब इधर उधर देखने लगें।


फिर सभी बैठ गए। माया ने खाना सबको दे दिया और खुद भी लेकर बैठ गई और फिर बोली वाह क्या बात है बहुत ही स्वादिष्ट बना है।सब बहुत ही चाव से खाने लगे।

नैना ने कहा सच बहुत ही अच्छा बना है।


फिर सभी एक लम्बी नींद के लिए चले गए।

इसी तरह से उनके दिल्ली जाने का समय भी आ गया था।
विक्की ने कहा दीदी इस बार दिल्ली में जाकर बहुत घमाका होने वाला है।

बिमल ने कहा हां अगले महीने की १७ तारिख को है ना।

अतुल ने कहा परसों हम लोग घर चले जाएंगे और फिर हम दो तीन तारिख को वापस आ जाएंगे।सारा सामान लेकर।।
विक्की ने कहा हां ठीक है पर मैं बोर हो जाऊंगा।
अतुल ने कहा हां ठीक है पर क्या करें।
अच्छा चलो अब हमलोग क्लब चले।
बिमल ने कहा हां ठीक है।
फिर तीनों क्लब में शामिल हो गए। वहां पहले से ही निलेश का नाम था।

सब लोग विक्की को देखते ही एक बार डर गए ‌फिर जब बिमल ने सारी बात बताई तो सब आश्चर्य हो गए कि किताबों में पढ़ा था और आज सच में हो गया।

फिर काफी देर तक क्लब में एन्जॉय करने के बाद सब घर लौट आए।
घर पहुंच कर देखा तो कोकिला आई हुई थी।
विक्की ने कहा नमस्कार आंटी।
कोकिला ने कहा वही चेहरा, वहीं अंदाज।।
विक्की हंसने लगा। माया ने कहा ये लो बेसन का लड्डू खाओ। पता है निलेश को बहुत पसंद था और कोकिला जी हमेशा बनाकर लाती थी।
विक्की ने कहा वैसे मुझे भी पसंद है। देसी घी का बना है बस मज़ा आ गया।

फिर सभी रात के समय खाना खाने बैठ गए।
छोले भटूरे बना था।
विक्की ने कहा वाह क्या छोले भटूरे बना है क्या बात।।

फिर काफी देर तक कोकिला से बात करते हुए समय निकल गया।
फिर कोकिला चली गई।
माया ने कहा पता है विक्की कोकिला जी चाहती है कि नैना और तुम्हारी शादी हो जाएं।

नैना ने कहा क्या दीदी बुई तो हमेशा ये सब बोलेंगी।

विक्की ने कहा हां वो तो ठीक है पर नैना क्या चाहती है?

नैना कुछ बिना बोले चली गई।

फिर सभी जाकर सो गए।
इसी तरह से अतुल और बिमल भी अपने घर के लिए निकल पड़े।

अतुल ने कहा चलो तीन या पांच को आता हूं। विक्की ने कहा मेरे भाई जल्दी आओ हां।

फिर दोनों निकल गए।
माया ने कहा देखो किसी भी चीज की जरूरत हो तो एक फोन कर देना।

नैना और माया भी स्कूल निकल गए।

फिर विक्की अपना नाश्ता करने लगे और फिर टीवी देखने लगे।
इसी तरह दोपहर और फिर शाम हो गई।
नैना के आते ही विक्की ने कहा अरे आ गई यार मैं बोर हो रहा था।
कल से मुझे भी ले चलो अपने स्कूल।। नैना ने कहा हां मजाक कर रहे हो। चलो मैं समोसे लाई हुं।

विक्की ने कहा अरे बाबा कल के बातों का कोई ज़बाब नहीं दिया।।
नैना ने कहा क्या ज़बाब दूं मैं,मैं कौन होती हुं किसी की जिंदगी का फैसला करने वाली।।
विक्की ने कहा अच्छा तो इस चहरे की वजह से तुम पीछे हट गई हो।। मैं पाल्सटिक सर्जरी करवा लेता हूं।
नैना ने कहा तुम मेरे लिए खुद को मिटाना चाहते हों? अपना वजूद नहीं पाएंगे।

विक्की ने कहा देखो प्यार का नाम हमेशा पाना ही होगा ऐसा तो नहीं है। प्यार का नाम बलिदान, त्याग, विश्वास ये सब है। और मैं किसी से जब प्यार होता है तो बस हो जाता है। कोई जबरदस्ती नहीं है हां।।

कमश: