Wajood - 21 in Hindi Fiction Stories by prashant sharma ashk books and stories PDF | वजूद - 21

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वजूद - 21

भाग 21

इंस्पेक्टर अविनाश डॉक्टर की बातों को सुन भर रहा था। वह डॉक्टर की बातों को सुनकर उदास हो गया था।

वैसे अगर आप बुरा ना माने तो एक बात पूछ सकता हूं ? डॉक्टर ने सवालिया नजरों से अविनाश की ओर देखा।

जी हां, पूछिए डॉक्टर साहब। अविनाश ने जवाब दिया।

यह व्यक्ति कौन है और आपका इससे क्या रिश्ता है ? डॉक्टर ने फिर पूछा।

थ्रश्ता तो बस एक इंसान का दूसरे इंसान से जो होता है वहीं है। और रही बात यह कौन है तो इसका नाम शंकर है। यह पास के एक गांव में अपने भैया भाभी के साथ रहा करता था। बहुत ही खुशहाल जीवन जी रहा था इसका पूरा परिवार। पर शायद इसके परिवार को किसी की नजर लग गई। गांव में छह महीने पहले आई बाढ़ में इसका पूरा मकान बह गया और उसी बाढ़ में इसके भैया-भाभी भी चल बसे। जिस दिन बाढ़ आई थी उस दिन से शहर गया था, इसलिए ये बच गया। ये गांव का एक ऐसा लड़का था, जिसकी तारिफ पूरा गांव किया करता था। गांव के किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का कोई काम हो या उसे कोई मदद चाहिए तो वो सबसे पहले शंकर को याद किया करते थे। इस ने भी गांव के लोगों को कभी निराश नहीं किया। अपना काम और खाना तक छोड़कर यह गांव के लोगों की मदद के लिए गया था। बाढ़ पीड़ितों को सरकार की ओर दो-दो लाख रूपए की सहायता राशि दी गई थी। उस लिस्ट में इसका भी नाम था, पर इसके पास इसकी पहचान का कोई दस्तावेज न होने के कारण इसे वो राशि नहीं मिल सकी। फिर इसकी मुलाकात मुझसे हुई, मैंने इसे पुलिस चौकी में सफाई के लिए रख लिया, रोज के इसे 50 रूपए देता था। मेरे ही कमरे के पास एक स्टोर रूम में इसे रहने के लिए जगह दे दी थी। फिर तीन महीने के लिए मेरा तबादला हो गया। इस दौरान पूरा गांव मिलकर भी इसकी देखरेख नहीं कर सका और आज ये इस हालत में हैं।

शंकर की कहानी सुनाते हुए अविनाश काफी भावुक हो गया था।

ओह बहुत दुख भरी कहानी है इसकी। डॉक्टर ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। वैसे हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि यह जल्द से जल्द ठीक हो जाए और फिर से अपनी जिंदगी को अच्छे से जी सके।

मैं भी यही चाहता हूं डॉक्टर, कि वो जितनी जल्दी ठीक हो जाए वो उसके लिए अच्छा होगा। वैसे बहुत कश्ट सह चुका है वो। इंस्पेक्टर ने डॉक्टर की बात का समर्थन करते हुए कहा।

उसकी तबीयत के बारे में कोई भी अपडेट होगा तो मैं आपको सूचित कर दूंगा। डॉक्टर ने फिर अपनी बात कही।

इसके बाद डॉक्टर चला गया और इंस्पेक्टर अविनाश शंकर से मिलने के चला गया। शंकर अपने बेड पर लेटा हुआ था। उसने इंस्पेक्टर को देखा और एक हल्की सी मुस्कान दी। इंस्पेक्टर अविनाश ने उसके हाथ पर रखा जैसे वो उसे हिम्मत देने की कोशिश कर रहा हो। फिर उसने शंकर से कहा-

तुम जल्दी से ठीक हो जाओ, फिर तुम मेरे ही साथ रहना। हम दोनों मिलकर खूब काम करेंगे और जल्दी ही तुम्हारा घर भी बना लेंगे। तुम्हारे लिए मैं नौकरी की भी व्यवस्था कर दूंगा। फिर तुम अपना जीवन आराम से जी सकोगे।

शंकर ने एक बार फिर हल्की सी मुस्कान दी।

अच्छा अब मैं चलता हूं शाम को फिर आउंगा। शंकर ने बस पलकें झपकाकर हामी भर दी। इंस्पेक्टर ने एक बार फिर शंकर के हाथ पर हाथ रखा और फिर वहां से चला गया। इंस्पेक्टर के जाने के बाद शंकर ने अपनी आंखे बंद कर ली और फिर एक गहरी सोच में चला गया। शंकर की यह सोच उसे उस वक्त में ले गई थी जब उसे भाई की शादी को कुछ ही दिन हुए थे। गांव के एक व्यक्ति का काम करते हुए शंकर घायल हो गया था, उसे काफी चोट आई थी। इस चोट के कारण उसे बुखार भी आ गया था और दर्द के कारण वो तड़प रहा था।

अरे ऐसे भी कोई काम करता है क्या ? काम करते समय ध्यान रखना चाहिए था। अब देखो कितनी चोट लगी है। कुसुम ने गुस्से के साथ शकर को डांट लगाते हुए कहा।

भाभी मेरा पूरा ध्यान था, पर अचानक से वो सीढ़ी पता नहीं कैसे फिसल गई और मैं नीचे आ गिरा।

हां, यही बातें तो ध्यान रखने की होती है सीढ़ी ठीक से लगी है या कहां लगी है, गिरे तो चोट तो नहीं लगेगी। तुम्हें तो जैसे काम का भूत सवार होता है। उसके बाद कुछ ध्यान ही नहीं रहता है।

भाभी बहुत दर्द हो रहा है। शंकर ने कराहते हुए कहा।

ठीक है दो मिनट रूकों में हल्दी वाला दूध लेकर आती हूं, जल्दी से पी लेना। दर्द में कुछ आराम मिल जाएगा। कुसुम ने कहा और दूध लेने के लिए चली गई।

थोड़ी ही देर में कुसुस दूध लेकर आई। शंकर को बैठने में थोड़ी परेशानी हो रही थी तो कुसुम ने ही उसे पकड़कर बैठाया और फिर दूध का गिलास हाथ में दे दिया। फिर कहा- तुम दूध पियो तब तक मैं इसे सेंकने के लिए गर्म कपड़ा लेकर आती हूं। उसमें थोड़ा नमक डाल दूंगी तो जल्दी आराम मिल जाएगा। शंकर ने कुसुम की बात पर दूध पीते हुए एक मुस्कान दी। कुसुम फिर रसोई में चली गई।

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