Shri: Struggle and Love - Chapter 17 in Hindi Spiritual Stories by Shiv putri books and stories PDF | श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 17

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 17

सभी लोग गुरुदेव के आश्रम में पहुंच चुके थे 🙏🏻🙌🏻
श्री और हरि के परिवार वाले गुरुदेव के आगे नतमस्तक हो गए । सभी ने गुरुदेव को दंडवत प्रणाम किया 🙏🏻🙌🏻


वही पे आज गुरुदेव के एक शिष्य जिनका नाम था (सार्थक) 
दिखने में इतने खूब की क्या ही तारीफ करे उनकी हाइट लगभग हरि जितनी ही थी ... लेकिन हरि और सार्थक दोनों ही दिखने में उत्तम थे दोनों को एक साथ खड़ा किया जाए तो ये नहीं कहा जा सकता कि ये ज्यादा दिखने में उत्तम है या ये 🤭😅 दोनों ही खूब सुंदर थे हरि भी और सार्थक भी 🙌🏻

आज सार्थक ने जब श्री के साथ हरि को देखा तब उसको अच्छा नहीं लगा उसको आभास हुआ जैसे कुछ अजीब होने वाला है ... 🥲 सार्थक ने हरि से नजर हटा के श्री को देखा और बस उसको ही देखता रहा 🫶🏻🫠

हरि ने जब सार्थक को देखा तब उसको भी अजीब लगा हरि को थोड़ा गुस्सा भी आया कि कोई उसकी श्री को देख रहा है 😤 फिर हरि ने भी सार्थक से नजर हटा अपनी श्री को ही देखा 🥰

एक तरफ हमारी प्यारी श्री दोनों लड़कों का हाल अच्छी तरह से जानती थी 😜 लेकिन उसने तो सब गुरुदेव के निर्णय के ऊपर छोड़ दिया था 🙌🏻 
श्री भी भगवान की तपस्या करती थी उसको भी आभास हो जाता था उसको अच्छे से पता था कि हरि और सार्थक दोनों ही श्री से प्रेम करते है 🙃 लेकिन श्री वो तो बस नारायण नारायण 😅 साफ बोल चुकी थी कि उसका खुद का कोई निर्णय नहीं जो गुरुदेव बोल देंगे वही होगा 🙏🏻

और गुरुदेव तो थे (ब्रह्मनिष्ठ ज्ञानी दूरदर्शी हरिद्वार के सबसे बड़े महामण्डलेश्वर अवधेशानंद गिरी जी महाराज) 🙏🏻🙌🏻 
सबके हृदय का हाल बहुत अच्छे से जानते थे 🙏🏻 
अपने प्रिय शिष्य सार्थक का भी , हरि का भी , और श्री का भी 🫠 और उन्होंने रच रखी थी एक परीक्षा जिसमें उन्होंने अपने तीनों बच्चों को परखना था  जीतना प्रिय शिष्य उन्हें सार्थक था उतनी ही प्रिय शिष्या श्री भी थी गुरुदेव के लिए  दोनों के मन का कार्य हो ऐसा गुरुदेव ने सोचा था 😌 

गुरुदेव जानते थे ज्ञान और त्याग में उनके शिष्य से आगे कोई नहीं और वो ये भी जानते थे कि सार्थक श्री से एकतरफा प्रेम करता है अपनी मित्रता तोड़ने से डरता है ... और सार्थक भी श्री की खुशी चाहता है 🙌🏻 और अपना सारा जीवन गुरुदेव के आज्ञा अनुसार जीने वाला प्राणी है 🙏🏻

और श्री ने भी खुद को कई बार गुरुदेव के आगे सिद्ध किया है सार्थक और श्री दोनों ही गुरुदेव के प्रिय शिष्य और शिष्या थे ...

गुरुदेव श्री के मन का भी जानते थे वो जानते थे कि श्री बचपन से ही हरि से प्रेम करती है लेकिन आत्मग्लानि के कारण कभी अपने मन का हाल नहीं बताएगी 😔और अब अपना सारा जीवन गुरुदेव को समर्पित कर चुकी है 🫠 जो गुरुदेव की आज्ञा होगी वही करेगी 🙌🏻 की

और गुरुदेव ने हरि को भी परखा 
हरि अपने जीवन में कामियाब और अपनी बात पहले ही रख देने वाला गुरुदेव जानते थे हरि श्री को पसंद करता था । उसके शरीर से नहीं उसके मन से गुरुदेव हरि की इस बात से प्रभावित थे और प्रसन्न भी की हरि एक ऐसा चरित्र है जो श्री से सच्चा प्रेम करता है और श्री की खुशी का भी पूरा ध्यान रखता है 🙃 श्री के हर निर्णय का सम्मान करने वाला हरि है .. जो श्री का निर्णय हो होगा वही हरि का भी होगा .... अगर श्री संन्यास मार्ग भी चुनेगी तब हरि उसके संन्यास मार्ग में भी उसका साथ देगा और अगर श्री के लिए किसी और को चुना गया तब भी हरि श्री को उसकी खुशी के लिए त्याग कर देगा वो हर हाल में केवल अपनी श्री को खुश देखना चाहता है बस 🙌🏻 

गुरुदेव जानते थे हरि और सार्थक दोनों ही श्री के लिए अपनी अपनी जगह उत्तम है लेकिन देखना ये है कि गुरुदेव क्या आज्ञा देंगे श्री को 🥲

हरि और सार्थक 
दोनों की खूबी अलग अलग 
जहाँ एक तरफ हरि अपनी लाइफ़ में कामियाब और अपने सपनों को पूरा कर चुका है और अब श्री का हाथ मांगने गुरुदेव की आज्ञा लेने आया है 

वही दूसरी तरफ सार्थक....
गुरुदेव का सबसे प्रिय शिष्य ... विद्वान सुंदर संस्कारी बड़े बड़े मंत्रों का उच्चारण करने वाला .. श्री से ये भी प्रेम करते है 🤪 

अब हमारी श्री हैं ही इतनी प्यारी और संस्कारी की किसी को भी प्यार हो जाए 🫶🏻 सार्थक भी हरि की तरह ही श्री के मन से प्रभावित था .... 😌और मन ही मन श्री से प्रेम करता था लेकिन कभी स्वीकार नहीं किया 😔 शायद अपनी सखी को खोने से डरते थे हमारे सार्थक 🥲 

फ्लैशबैक —
5 साल पहले श्री और सार्थक का मिलन —
जब श्री पहली बार अपने गुरुदेव के आश्रम आई थी अपने परिवार के साथ गुरुदेव से मिलने और गुरु दीक्षा लेने के लिए 
सार्थक गुरुदेव का प्रिय शिष्य तब वही था ... 

उसने जब श्री को पहली बार देखा तभी उसने श्री को एकझलक में ही परख लिया । वो एक विद्वान् भी था और दूरदर्शी भी श्री को एकझलक में ही भाप लिया था सार्थक ने ... उसने भी श्री की वेशभूषा और हृदय को देख के श्री के प्रति सम्मान का  भाव रखा 😌 तब श्री और सार्थक की थोड़ी बहुत बात हुई थी  श्री भी सार्थक के ज्ञान और बुद्धि के आगे नतमस्तक थी तभी श्री और सार्थक की मित्रता प्रारंभ हुई 🙌🏻

लेकिन ये मित्रता धीरे धीरे एक तरफा प्रेम में कब परिवर्तित हो गया पता नहीं चला 🫠 सार्थक के मन में श्री के लिए प्रेम उत्पन्न होने लगा था लेकिन मित्रता टूटने के डर से  कभी श्री को बोल नहीं पाया 😓 जब भी श्री परिवार के साथ आश्रम आती सार्थक का तो दिन बन जाता 🙌🏻 श्री से मिलना होगा इतनी सी बात पे बहुत प्रसन्न होता 

फ्लैशबैक end:-

आज का माहौल श्री और हरि का परिवार गुरुदेव के आश्रम में खरा है सार्थक भी वही है दोनों (हरि और सार्थक) श्री को देख रहे है दोनों को नहीं पता आज गुरुदेव क्या कहेंगे दोनों की दिल की धड़कन तेज 
और हमारी श्री शांत उसको कोई फिकर ही न हो ऐसा दिखा रही थी सब कुछ अपने गुरुदेव पे जो छोड़ दिया उसने 🙂कही न कही उसका भी मन भारी था न जाने गुरुदेव की क्या होगी? त्रिलकीनाथ नारायण सहायता करे प्रभु 🥹 बस आपका साथ न छुटे मेरे से और कुछ नहीं चाहिए हे नाथ ! 


धन्यवाद 🫶🏻
देखते है कि अब आगे के पाठों में क्या होगा क्या कभी हरि और श्री एक हो पाएंगे या सार्थक आ जाएगा दोनों के बीच या गुरुदेव देंगे श्री को संन्यास की आज्ञा 😌🙌🏻🙏🏻 बने रहिये मेरी कहानी (श्री ) में🫶🏻🙏🏻