Shri: Struggle and Love - Chapter 28 in Hindi Spiritual Stories by Shiv putri books and stories PDF | श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 28

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 28

श्री के आते ही सार्थक और प्रिया तो चुप हो जाते है , और श्री दोनों को ही समझा रही होती है 
तभी प्रिया मासूम चेहरा बनाते हुए बोलती है....

प्रिया — श्री सच्ची में मैं तो बस ध्यान कैसे लगाते है सीखने आई थी याद है आपको मैंने आपको भी बोला था श्री मुझे भी सिखा दो ध्यान करना .. लेकिन आप उस समय अपनी पढ़ाई में व्यस्त थी इसलिए नहीं करा पाई आप मैने सोचा कि सार्थक जी सिखा देंगे तो ये लड़ने लगे हमसे 🥺 हमने बोला कि श्री से बोल दूंगी तो बोले जाओ बोल दो किसी से नहीं डरता मैं 😐

श्री कुछ बोलती उससे पहले ही सार्थक बोल पड़ता है ..
सार्थक — नहीं सखी ये झूठ बोल रही है मैने ऐसा नहीं बोला ये हमें परेशान करने आई थी हम ध्यान में थे तभी ये यह आई और हमारा ध्यान भंग हो गया बाद में भी तो सीख सकती है ये लेकिन जिद्दी है कि अभी सीखना है 

तभी श्री बोलती है — सार्थक जी 🤦🏻 हम सत्य में अचंभित है आपका ये रूप देख के आप तो बहुत विनम्र स्वभाव के है .. क्या हो गया आपको नारायण ही जाने .. और एक बात बताइए आपका ध्यान इतना कमजोर कब से हो गया कि किसी के आते ही आपका ध्यान भंग हो जाए ?? आप तो ध्यान में लीन हो जाते है एकदम ... प्रिया के सामने इतने चिढ़ क्यो जाते है आप 
की बेमतलब के आप लड़े उनसे.. 

(ये सुनने के बाद सार्थक के पास कुछ बोलने को नहीं था कही न कही उसे अपनी गलती का आभास हुआ ) 

श्री तभी प्रिया की और देखते हुए बोलती है — 
और प्रिया आप,  हाँ माना हमने तब हम व्यस्त थे लेकिन अब तो हम सिखा सकते थे और अभी ही क्यों सीखना था आपको जब सार्थक जी पहले ही ध्यान में थे आप बाद में भी तो बोल सकती थी उन्हें या (श्री सार्थक की तरफ देखते हुए) हमे बताती आप हम बोलते सार्थक जी से वो कैसे नहीं सिखाते आपको  😒
(प्रिया को भी अपनी गलती का आभास होता है ) 

सार्थक— क्षमा सखी 😔, अब ऐसा नहीं होगा मैं वादा करता हु आपसे श्री 🥺 
प्रिया सार्थक से — आप भी हमे माफ कर दीजिए हम सच में परेशान करने नहीं आए थे सच्ची 🥺 
सार्थक — मुझे भी माफ कर दीजिए प्रिया जी 😔 

श्री — हाँ हो गया अब आप दोनों का ,हम सही समय पे न आते  तो आप दोनों तो आश्रम सर पे उठा लेते 😑 सार्थक जी अब से ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि अगर आप हमारे सखा है तो प्रिया भी मेरी सखी है अगर आप मेरा सम्मान करते हैं तो आपको प्रिया का सम्मान भी करना चाहिए

सार्थक— जी सखी 🥹 अब गलती नहीं होगी पक्का 

श्री प्रिया से — और प्रिया आपके लिए भी यही बात है अगर मुझे सखी मानती हो तो सार्थक जी का भी सम्मान करना पड़ेगा उन्हें सखा मानना पड़ेगा 

प्रिया — श्री मैं कोशिश करूंगी अगर ये बुद्धू जी .. 😜 मेरा मतलब सार्थक जी हमसे नहीं लड़ेंगे तो हम भी नहीं लड़ेंगे ये अच्छे से बोलेंगे तो मैं भी बोलूंगी 😁 पक्का 

श्री — वा दोनों ने एक दूसरे का नाम निकाल रखा है एक बुद्धू है और दूसरा tape recorder 😑 वा 

तभी हरि भी वहां पहुंच जाता है ,
हरि— अरे आप तीनों यहां इतनी सुबह सुबह क्या हुआ श्री 
श्री — क्या ही बोले हम आप ही निपट लीजिए इन बुद्धू जी और tape recorder से, सार्थक जी आप कब से ऐसा बोलने लगे ?

सार्थक — अरे आप तो बस हमे ही बोल रही हो सखी 😔  

श्री — हमने आप दोनों को बोला है , आप से हमारी अपेक्षा ज्यादा है सार्थक जी क्यूंकि आप का स्वभाव ऐसा नहीं है आपके अपने स्वभाव के विपरीत व्यवहार अच्छा नहीं लग रहा हमे और प्रिया नादान है यहां के तोर तरीकों के बारे में नहीं जानती ... इसलिए हम प्रिया को ज्यादा नहीं बोल रहे आप तो समझदार है 

प्रिया— नहीं है न ये बुद्धू जी है इसलिए तो जब देखो लड़ते रहते है मेरे से 
सार्थक — देखा देखा आपने सखी ये हमें चिढ़ाती है .. tape recorder कही की .. बोलती ही रहती है चुप ही नहीं होती 

श्री — हे भगवान कहा फंस गए हम 🤦🏻 सार्थक जी, प्रिया  बस कीजिए आप दोनों इतना समझाने के बाद भी ये हरकत आप दोनों की 😑

सार्थक— ये मजबूर कर रही है 😭 सखी मुझे 
प्रिया— नहीं श्री सच्ची 🥹 मैं नहीं कर रही ... 

श्री — बस हो गया बहुत आप दोनों का बहुत सार्थक जी आपको एकादशी का व्रत पारण नहीं करना क्या जाइए और तैयार होके मंदिर आइए तुरंत 
सार्थक — जी सखी 🥲 
श्री— प्रिया आपको अलग से बताना पड़ेगा जाइए आप भी तैयार होके मंदिर पहुंचिए 
प्रिया— ठीक है श्री 😅 

सार्थक और प्रिया के जाने के बाद .. 
श्री— क्या हो गया सार्थक जी को हम तो हैरान है 
हरि— मत पूछो श्री , ये दोनों कल भी ऐसे ही लड़ रहे थे 
श्री— क्या तो आपने हमें कल ही क्यूँ नहीं बताया ?
हरि— वो प्रिया ने बोला कि वो मेरी शिकायत तुमसे कर देगी 🥲 तो मैं डर गया फिर बीच में नहीं आया इन दोनों के 
श्री— 🤦🏻 सब पागल मेरे ही गले पड़ने थे  🥲 हम क्या आप को पकड़ के मारते, बता देते तो कल ही खबर लेते हम दोनों की 
हरि — मुझे डर लगता है आपकी इन बड़ी बड़ी आंखों से प्रिय 😜 
श्री — अच्छा जी 😑 
हरि — जी प्रियतमा 😁🥰

श्री ज्यादा बात न करते हुए वहां से चली जाती है ... 
सब तैयार होकर मंदिर पहुंच गए..
सबने वहां भगवान नारायण की पूजा की 
नारायण की पूजा कर के एकादशी व्रत का पारण किया गया .. 

गुरुदेव ने श्री को बुलाया 
श्री— गुरुदेव प्रणाम 🙏🏻
गुरुदेव — प्रणाम पुत्री 🙌🏻 चलिए अब बताईये ... क्या निर्णय है आपका गृहस्थी या संन्यास में से 
श्री — हे गुरुदेव , आपकी आज्ञा अनुसार हम आज अपना निर्णय अवश्य सुनाएंगे 😔 परंतु उस से पहले ... हम आपको अपने एक स्वप्न के बारे में बताना चाहते है 🥲 
गुरुदेव — ठीक है पुत्री , आप बताइए 
श्री— गुरुदेव वो..... 


क्या बताया श्री ने गुरुदेव को .. क्या लगता है आगे क्या होगा श्री का निर्णय जानने के लिए बने रहे मेरी कहानी श्री में 🫶🏻