Shri: Struggle and Love - Chapter 36 in Hindi Spiritual Stories by Shiv putri books and stories PDF | श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 36

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 36

हरि और श्री आपस में बात कर रहे थे 
हरि — मेरे जीवन में क्या विरह ही लिखा है प्रियतमा जी 🤭 
श्री— हरि जी ... हमे जाने दीजिए ये सब 
आप क्या बोल रहे है 😳
हरि—मैं क्या बोल रहा हु आपको
समझ नहीं आ रहा क्या प्रिय🤭
श्री— नहीं 🥴 मुझे जाना है 🥲 
हरि श्री के ओर करीब आते हुए श्री से बोलता है  ... 
क्यो जाना है आपको  ? 

श्री— देखिए ... आप .. आप हम से दूर होके बात कीजिए पहले तो 😳 और हमने कहाँ न जाना है हमे अभी यहां से 🫣
हरि— अच्छा 🤭 चली जाना मैं कहा रोक रहा हु 🤭 वैसे कुछ भी कहिए प्रिय आप तो शर्माते हुए इतनी प्यारी लगती है 🫶🏻🥰क्या ही बोलूं 🫠
श्री— 🫣हरि जी ...आप कैसी बात कर रहे है 🫣
हरि— कैसी बात कर रहा हु 🤭 मुझे तो आपको ऐसे शर्माते हुए देख कर बहुत अच्छा लग रहा है 🤭 
श्री— 😳हरि जी .. आप मुझे जान पूछ के परेशान कर रहे है 
हरि— 😂क्या करूं आपको ऐसे देख के इतना अच्छा लग रहा है आप शर्माती रहे मैं आपको देखता रहूं यू ही जीवन बीत जाए हाय 🫠🥰
श्री— हरि जी 🫣 हमे जाने दीजिए प्लीज़ 🥲 
हरि— 😂ठीक है जाओ लेकिन एक बात बताओ कब तक भागेगी मुझसे 🤭 
श्री— पता नहीं 🥲😳 हम जा रह है अब
हरि— 😂 जाओ प्रिय ज्यादा परेशान नहीं करूंगा तुम्हे नहीं तो तुम अभी शर्मा शर्मा कर यही पिघल जाओगी 😂🥰 
श्री— जी 😳ऐसा ऐसा नहीं है 😐 
हरि— तो फिर कैसा है, अभी केवल बात ही कर रहा हु और तुम्हारा चेहरा शर्म से इतना लाल हो गया 😂🤭
श्री— आप.. आप हमे परेशान कर रहे है 🥲 
हरि— हाँ क्यूंकि अब तो आपको परेशान करने का लाइसेंस मिल गया है मुझे अब तो शादी होने वाली है हमारी 🤭☺️ 
श्री— 😳 बस बहुत हो गया आपका ,
🫣जा रहे है हम अब 😐
हरि— ठीक है , प्रियतमा अभी तो जाओ 😂 आपसे बाकी की बाते शादी के बाद ही होंगी 🫶🏻😂
श्री— 😳आपको बिल्कुल शर्म नहीं आती हमसे ऐसी बात करते हुए 
हरि— नहीं 😅 क्यूंकि अब आप हमारी होने वाली धर्मपत्नी है 🤭और शर्माने का काम आप ज्यादा अच्छे से कर लेती है प्रियतमा 🤭🥰🫶🏻
श्री— 😳 

(श्री वहाँ से भाग खड़ी हुई 😂और यहां हरि पेट पकड़ के हंसे जा रहा था 😂 श्री की हालत देख के उसे भी हंसी आ रही थी )

अब रात हो चुकी थी सब भोजन के पश्चात सो गए ...
अगले दिन... 
पूरे आश्रम में सजावट हो रही थी ... 
सार्थक सबको गाइड कर रहा था .. अरे वहां वो फुल लगाओ ये करो वो करो ... 

(आज श्री और हरि की सगाई थी 🫶🏻)

(सार्थक के पास उसका एक मित्र अनिरुद्ध आता है ये भी गुरुदेव का ही एक शिष्य है और सार्थक का दोस्त है ये सार्थक के बारे में सब कुछ जानता है ये भी कि सार्थक श्री से प्यार करता है .... )


अनिरुद्ध— मित्र सार्थक, ये आप क्या कर रहे है 
सार्थक— सजावट करवा रहा हु हमारी 
सखी श्री की सगाई है आज ☺️
अनिरुद्ध — परंतु सार्थक तू तो श्री से प्रेम करता है न 😐

सार्थक अनिरुद्ध के मुंह पे हाथ रखते हुए — धीरे बोलो तुम... और प्रेम करना अलग बात है मित्र, लेकिन प्रेम से बढ़ के भी एक चीज है और वो है मित्रता 🥹 श्री मेरी प्रेमिका बाद में उससे पहले मेरी सखी है और मेरे लिए श्री की खुशी से ज्यादा कुछ जरूरी नहीं 🥹 श्री, हरि जी से प्रेम करती है और हरि भी श्री से सच्चा प्रेम करते है उन दोनों की खुशी ज्यादा महत्वपूर्ण है 🥹 
अनिरुद्ध— और तुम्हारा? तुम्हारा क्या सार्थक 
सार्थक— मेरा ... मेरा कुछ भी नहीं मैं एक संन्यासी और वैरागी जीवन जिऊंगा 😔 
अनिरुद्ध— क्यूँ जियेगा वैरागी जीवन , जब श्री किसी और से विवाह कर रही है ... मैं उसे अभी बता दूंगा तू प्यार करता है उससे 
सार्थक— मैं उन्हें बता चुका हु 🥲 
अनिरुद्ध को झटका लगता है— क्या? आपने बता दिया फिर भी श्री किसी और से शादी कर रही है उसे तेरी भावनाओं की कोई कदर नहीं है क्या 😠
सार्थक — तुम ऐसे मत बोलो वो भी  श्री के विषय में,...तुम्हे क्या पता मित्र ,हमारी सखी श्री ने क्या क्या सहा है 🥺 वो बचपन से हरि जी से प्रेम करती थी फिर भी अपनी भावना किसी को नहीं बताई अपनी आत्मग्लानि के कारण 😓 और अब जब हरि जी भी श्री से प्रेम करते है 🥹 तो मैं उन दोनों के बीच नहीं आऊंगा ऐसा मैने श्री से वादा किया है 🥹 
अनिरुद्ध— ओह भाई त्यागी बनने की जरूरत नहीं है तू प्रेम करता है तो श्री को जताता क्यों नहीं क्यों उसे किसी और का होने दे रहा है तू
सार्थक— बस बहुत हुआ अनिरुद्ध 😑 अब मैं श्री के विषय में तुमसे कोई बात नहीं करना चाहता और सुन  मेरी बात इन सब में श्री की जरा सी भी गलती नहीं है मैं सब कुछ स्वीकार कर चुका हु और यहां जो हो रहा है गुरुदेव की आज्ञा से हो रहा है गुरुदेव के खिलाफ जाने का प्रयास भी मत करना और सुनो श्री मेरी सखी है अगर तुमने हमारी मित्रता को गलत करने की कोशिश भी की तो मैं भूल जाऊंगा कि तू मेरा दोस्त है 😑 हमारी मित्रता बहुत पवित्र है उसे गलत मत बना समझा 😤 
अनिरुद्ध— चल मान लिया जो हो रहा है गुरुदेव की आज्ञा से हो रहा है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तू अपनी खुशी का गला घोट दे 😑
सार्थक— अनिरुद्ध 🥹मेरी खुशी श्री की खुशी में है देखो उसकी तरफ वो कितनी खुश है 🙂
अनिरुद्ध— और तू ?
सार्थक— बोल तो रहा हु वो खुश तो मैं खुश ☺️
अनिरुद्ध— कौनसी मिट्टी का बना है तू यार 🥺 काश तेरी जिंदगी में भी एक जीवनसाथी आ जाए 🙌🏻 
सार्थक— 😅बस कर अब तू भी न 🤦🏻 चल काम करवा ले बहुत काम पढ़ा है ... 

(दूसरी तरफ प्रिया अनिरुद्ध और सार्थक की बात सुन चुकी थी 🥲 प्रिया के पैरों तले जमीन खिसक गई ये बात सुन के)

क्या होगा अब आगे जानने के लिए बने रहे मेरी कहानी श्री में 🫶🏻