यह श्रद्धा कौन है आर्यमन जी?"
आर्यमन के पास इस सवाल का जवाब तो था, पर ज़ुबान जैसे किसी गोंद से चिपक गई थी। वह अवनि की आँखों में छिपी उस टूटन को देख पा रहा था।
नीलम का कुटिल प्रहार
तभी नीलम भाभी ने एक शातिर मुस्कान के साथ अवनि की ओर देखा और बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में कहा:
"अरे! अवनि... तुम्हें आर्यमन ने अभी तक कुछ बताया नहीं? हद है आर्यमन, तुमने इस बेचारी लड़की को अंधेरे में रखा?"
नीलम ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए ज़हर उगला,
नीलम भाभी की बातों ने अब मर्यादा की सारी हदें पार कर दी थीं। उन्होंने अवनि की आंखों में झांकते हुए, बड़े ही विषैले लहजे में कहा:
"तुम्हें पता नहीं अवनि, श्रद्धा कौन है?
श्रद्धा हमारे आर्यमन का पहला प्यार है! वह प्यार जिसे इसने बहुत ही शिद्दत के साथ चाहा है।
रात-दिन यह सिर्फ उसी के बारे में सोचता है, उसकी तस्वीर अपनी आंखों में बसाए फिरता है।
आज वह दिल्ली से सिर्फ इसके लिए भागती हुई आई है, क्योंकि इनके बीच वो रूहानी जुड़ाव है जिसे तुम जैसी लड़की कभी नहीं समझ सकती।"
अवनि का कलेजा छलनी
नीलम के एक-एक शब्द अवनि के कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रहे थे। 'पहला प्यार', 'शिद्दत', 'रात-दिन सोचना'—इन शब्दों ने उस पवित्र रात की हर याद को अपवित्र कर दिया।
अवनि को लगा जैसे कल रात की वो ठंड बेहतर थी, क्योंकि इस सच की गर्मी तो उसके अस्तित्व को ही जलाकर राख कर रही थी।
अवनि ने कांपते हुए होठों से आर्यमन की ओर देखा, जिसकी नज़रें अब झुक चुकी थीं। अवनि की आवाज़ में एक अजीब सी खामोशी छा गई, "पहला प्यार?
जिसे आपने शिद्दत से चाहा? तो कल रात... कल रात जो आपने मुझसे कहा... वो सब क्या था आर्यमन जी? क्या वो सिर्फ मौत के डर से उपजी एक कमज़ोरी थी?"
आर्यमन की चुप्पी और नीलम की जीत
आर्यमन कुछ बोलना चाहता था, उसके अंदर एक चीख दबी थी कि 'नहीं अवनि, यह सच नहीं है!', लेकिन नीलम भाभी ने उसे मौका ही नहीं दिया। उन्होंने अवनि के माता-पिता की ओर मुड़कर कहा:
"देखिए, अब बेहतर यही है कि आप अपनी बेटी को यहाँ से ले जाएँ। आर्यमन का अतीत और भविष्य दोनों श्रद्धा है।
यहाँ जो कुछ भी हुआ, उसे एक बुरा सपना समझकर भूल जाइए, वरना समाज में बदनामी के सिवा कुछ हाथ नहीं आएगा।"
अवनि का फैसला
अवनि ने अपनी आँखों के आँसू पोंछे। उसकी सादगी अब एक कठोर गरिमा में बदल गई थी। उसने आर्यमन की ओर देखा, जो अब भी बुत बना खड़ा था।
"धन्यवाद नीलम भाभी," अवनि ने बहुत ही ठंडे स्वर में कहा। "आपने मेरी आँखों पर बँधी पट्टी उतार दी।
आर्यमन जी, आपकी जान बचाना मेरा फर्ज़ था, पर आपके 'पहले प्यार' के बीच में आना मेरी फितरत नहीं।
आप खुश रहिए अपनी शिद्दत वाली मोहब्बत के साथ।"
नीलम की ज़हरीली बातों से वहां जो दमघोंटू माहौल बन गया था,
कभी आर्यमान का बड़ा भाई सोहम उन्होंने आगे बढ़कर नीलम का हाथ पकड़ा और उसे पीछे खींचते हुए दहाड़कर कहा:
"नीलम! बस करो! तुम ये क्या बकवास कर रही हो? तुमको शर्म नहीं आती ये सब बातें करते हुए? एक लड़की जिसने अपनी जान पर खेलकर हमारे भाई की जान बचाई, तुम उसके सामने इस तरह का कीचड़ उछाल रही हो?"
सोहन का क्रोध और नीलम की घबराहट
सोहन की आंखों में गुस्सा देखकर नीलम एक पल के लिए सहम गई। सोहन ने सबके सामने नीलम की आंखों में आंखें डालकर कहा:
"शिद्दत? प्यार? श्रद्धा? नीलम, तुम किस रिश्ते की बात कर रही हो?
तुम अच्छी तरह जानती हो कि वह रिश्ता क्या था और आर्यमन उस बारे में क्या सोचता है। इस वक्त, जब ये दोनों मौत के मुंह से बाहर आए हैं,
तुम्हें इनके लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए था, पर तुम तो यहां सरेआम नफरत के बीज बो रही हो!"
अवनि और आर्यमन की स्थिति
सोहन की इस डांट ने अवनि को थोड़ा सहारा तो दिया, लेकिन 'श्रद्धा' का नाम अब भी उसके कान में गूँज रहा था। उसने सवालिया नज़रों से आर्यमन को देखा, जो अब भी अपराधी की तरह सर झुकाए खड़ा था।
सोहन आर्यमन के पास आए और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोले, "आर्यमन, कुछ बोल!
क्यों चुप है? क्या तूने अवनि को नहीं बताया कि असलियत क्या है? क्यों इस मासूम लड़की को नीलम की बातों से ज़लील होने दे रहा है?"
सोहन ने आर्यमन के कंधे पर हाथ रखा हुआ था और उसे झकझोरते हुए कह रहा था, "आर्यमन, कुछ बोल!
क्यों चुप है? क्या तूने अवनि को नहीं बताया कि असलियत क्या है? क्यों इस मासूम लड़की को नीलम की बातों से ज़लील होने दे रहा है?"
आर्यमन के होंठ कांपे, जैसे वह कोई गहरा राज़ बताने वाला हो। वह अपनी झुकी हुई नज़रें ऊपर उठाकर अवनि की तरफ देखने ही वाला था, जब...
तभी, उस छोटे से पहाड़ी रास्ते पर एक आकृति उभरती दिखी। सबने उधर देखा। दूर से ही किसी के आने की आहट सुनाई दे रही थी।
जैसे-जैसे वह आकृति नज़दीक आती गई, सबका ध्यान उस पर केंद्रित होता गया।
वह एक बेहद खूबसूरत मॉडल लड़की थी, जिसकी कद-काठी 6 फीट से भी ज़्यादा ऊँची थी। उसने जो कपड़े पहने थे
, वे किसी फैशन मैगज़ीन से सीधे उठकर आए लग रहे थे—एकदम स्टाइलिश और मॉडर्न। उसकी चाल में गजब का आत्मविश्वास और नज़ाकत थी, मानो वह पहाड़ों पर नहीं, किसी रैंप पर चल रही हो।
उसके सुनहरे बाल हवा में लहरा रहे थे और उसकी आँखों पर बड़े साइज़ के धूप के चश्मे लगे थे, जिनसे उसका चेहरा और रहस्यमय लग रहा था।
उसने अपने होंठों पर हल्की सी मुस्कान सजा रखी थी, जो किसी को भी अपनी ओर खींचने के लिए काफी थी।
जैसे ही वह सबके करीब आई,
उसकी मौजूदगी ने वहां के दमघोंटू माहौल को और भी भारी बना दिया। नीलम भाभी, जो अभी तक अपनी जीत पर इतरा रही थीं,
उस लड़की को देखते ही उनका चेहरा सफेद पड़ गया। उनकी शातिर मुस्कान पल भर में गायब हो गई और उनकी आँखों में डर और हैरानी साफ़ दिख रही थी।
उस मॉडल लड़की ने एक पल के लिए सबको स्कैन किया,
जैसे ही उस मॉडल लड़की ने चश्मा हटाकर आर्यमन को देखा, पूरी पहाड़ी पर सन्नाटा छा गया।
उस 6 फिट लंबी मॉडल लड़की ने एक पल के लिए सबको स्कैन किया और उसकी नज़रें जैसे ही आर्यमन पर टिकीं, उसके चेहरे पर एक गहरी चमक आ गई।
बिना एक पल गँवाए, वह तेज़ी से आगे बढ़ी और सबके सामने, अवनि और घर वालों की मौजूदगी में, उसने आर्यमन को कसकर गले लगा लिया।
"आर्यमन! आई लव यू जान! मैं तुम्हें कब से खोज रही हूँ... तुम्हें अंदाज़ा भी है मैं कितनी परेशान थी?"
उसकी आवाज़ में एक अजीब सा हक़ और तड़प थी। यह सुनकर वहां खड़े हर शख्स के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
अवनि, जो पहले ही नीलम भाभी के वार से घायल थी, अब पूरी तरह टूट गई। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।
जिस आर्यमन की जान बचाने के लिए उसने अपनी जान दांव पर लगा दी थी, वह किसी और की बाहों में था।