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मे और महाराज - ( हमला_२) 34

सिराज समायरा को सीधा अपने कमरे में ले गया। उसने उसे वहा आराम करने की सलाह दी, और खुद अपने अध्ययन कक्ष में चला गया। वहा रिहान पहले से ही मौजुद था।

" मेरे महाराज।" रिहान ने सर झुकाते हुए कहा।

" तुम्हारे और हमारे मौजूद होने के बाद भी एक दिन में किया गया ये दूसरा हमला था। तुम्हे क्या लगता है, इतनी हिम्मत कौन कर सकता है ?" सिराज ने पूछा।

" आप को अपने सवाल का जवाब पता है मेरे महाराज। कौन है, जो आठवें राजकुमार पर हमला कर आसानी ने से बच के निकल सकता है।" रिहान ने सर झुकाए हुए कहा।

" सही। लेकिन हम वजह ढूंढ रहे हैं। बड़े राजकुमार को जो भी करना होगा वो यकीनन हमारे साथ करेंगे। राजकुमारी शायरा को निशाना बनाके उन्हे कोई फायदा नहीं है। अब बचे वजीर साहब। लेकिन कोई भला अपनी औलाद के साथ ऐसा क्यों करेगा ? या फिर यूं कह लीजिए कोई अपनी गोद ली हुई बेटी के साथ ये सब कर रहा है। ताकि उनकी असली औलाद खुश रह सके। इन सारी सुरतो में सबसे ज्यादा जरूरी वजह शायरा की बड़ी मां के पास ही है। लेकिन इन सब इल्जामों को साबित करने के लिए हमारे पास सबूत होना जरूरी है।" सिराज ने अपने कक्ष के चक्कर काटते हुए कहा।

" हुक्म कीजिए महाराज। सेवक आपके लिए जान भी दे सकता है।" रिहान ने घुटनों के बल जाते हुए कहा।

अपने पक्के सेवक को देख सिराज के चेहरे पर मुस्कान छा गई। उसे रिहान की ईमानदारी पर पूरा भरोसा है। उसने उसे उठाया, " हमे तुम्हारी यहां जरूरत है रिहान। आज से तुम साए की तरह राजकुमारी के साथ रहोगे। उनके शरीर पर आई एक भी खरोच हमारे दिल पर घाव करेगी। ये बात हमेशा याद रखना।" सिराज ने कहा।

रिहान को हुक्म दे कर सिराज फिर अपने कमरे में लौट आया।

" तुम आ गए ?" समायरा।

" आपको कोई काम था ? आप हमारा इंतज़ार कर रही थी ?" सिराज ने आश्चर्य के साथ पूछा।

" मौली कहा है ? कुछ देर पहले वो हमारे लिए पानी लाने गई थी। उसके बाद तुम कमरे में आए और वो हमला हुवा। बताओ मुझे की मौली ठीक है ?" समायरा की आवाज में उदासी थी।

सिराज उसे घुरे जा रहा था। उसे पहली बार मौली से जलन हो रही थी। " मौली बिल्कुल ठीक है। जब हम अंदर आए तब हमने उसे आराम करने उसके कक्ष में भेज दिया था। इसलिए जब हमला हुवा वो वहा मौजूद नहीं थी।" सिराज की बाते सुन समायरा ने चैन की सांस ली।

" अब मुझे नींद आएगी। " इतना कह वो जैसे ही बिस्तर पर गिरी सिराज उसके ऊपर आ गया। " ये क्या कर रहे हो तुम ? पता है ना अभी अभी मुझ पर हमला हुवा है।"

" हा। जिस में हमने अपनी जान पर खेल कर आपको बचाया।" सिराज ने उसके गले को चूमने से शुरुवात की।

" हा। क्यों की तुम बस वहा मौजूद थे इस लिए। हम अभी भी डरे हुए हैं।" समायरा ने मौली और शायरा को दिए वचन के लिए अपने आप को सिराज से दूर रखने की पूरी कोशिश की।

" हमारे साथ होते हुए आपको डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आपको खरोच आने से पहले सीना हमारा टूटेगा।" सिराज ने उसकी आखों में देखते हुए कहा।

कोई अंधा भी उसके प्यार को समझ लेता। उसकी आंखे एक आयने की तरह थी। जिसमें समायरा डुबती जा रही थी। किस हद तक सही था ये ? सिराज शायरा का पति है। सिराज समायरा से नही शायरा से प्यार करता है। क्या होगा जब उसे समायरा की असलियत पता चलेगी ? समायरा के दिमाग में अनगिनत सवाल थे। लेकिन सब गायब हो गए जैसे ही सिराज ने अपने होठ समायरा के होठ पर रखे।

उसके हिसाब से उसके सामने जो लड़की थी, वो उसकी प्रेमिका है। ना शायरा, ना समायरा सिर्फ उसकी प्रेमिका। जिस के लिए वो मर मिट जाए फिर भी कम है। ऐसा खीचाव उसने कभी किसी की तरफ नही महसूस किया।

धीरे से शुरू किए हुए चुम्बन ने जल्द ही हवस का रूप ले लिया। कुछ देर के भीतर दोनो के शरीर से कपड़े की हर परत अलग हो गई। रात भर एक दूसरे को बेपनाह प्यार करने के बाद दोनो दूसरे दिन दोपहर तक सोते रहे।

दोपहर को उठने के बाद सिराज ने समायरा को तैयार होने के लिए कहा। क्यो ? पूछने पर उसे जवाब मिला के, उसका पति आज उसे घुमाने ले जाना चाहता है। तैय्यार हो कर जैसे ही समायरा बग्गी के पास पोहचि मौली वहा उसका सामान ठीक कर रही थी।

" मौली" उसने पुकारा। जैसे ही मौली उसकी तरफ घूमी, उसने मौली को गले लगा लिया। समायरा की आखों में आसूं थे। उसने मौली के सर पर हाथ फेरा।

" सैम में बिल्कुल ठीक हूं। फिक्र मत करो। अब मुझे छोड़ो राजकुमार देख रहे हैं।" मौली ने मुस्कुराते हुए कहा।

समायरा अपने माता पिता की इकलौती संतान थी। मौली को उसने हमेशा अपनी छोटी बहन समझा था, इसलिए कल के हमले ने उस एहसास को और ज्यादा बढ़ा दिया था। जैसे ही सिराज ने पास आकर समायरा के कंधे पर हाथ रखा, उसने मौली को अपने से दूर किया।

" हमने कहा था ना, मौली बिल्कुल ठीक है।" सिराज ने मुस्कुराते हुए कहा।

समायरा ने अपनी आंखे पोछी। " महाराज आपने ये भी कहा था के हम घूमने जा रहे हैं, एक दिन के लिए इतना सामान क्यों ?"

" हमने ऐसा जरूर कहा था की हम घूमने जा रहे हैं। लेकिन हमने आपको दिन तो बताएं ही नही।"