Pavitra Prem ya Abhishaap ? - 10 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 10

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 10

बारिश अब भी हो रही थी…गंगा किनारे टूटी सीढ़ियों पर खड़ा कृष्णा भारी साँसें ले रहा था। उसकी मुट्ठी में अब भी लाल साड़ी का वो फटा हुआ टुकड़ा था…और तभी उसने उसे देखा।

एक सफेद अनारकली वाली लड़की । थोड़ी दूर…एक लड़की खड़ी थी। सफेद अनारकली…खुले लंबे बाल…माथे पर हल्का सा तिलक…और हाथ में छोटा सा घड़ा। शायद वो गंगा से पानी भरने आई थी।

कृष्णा हैरान क्योंकि  वो हूबहू सिद्धिका जैसी दिखती थी। वही चेहरा…वही आँखें…वही मासूमियत…बस इस बार उसकी आँखों में लाल चमक नहीं थी। कृष्णा के होंठ काँप गए।

वो बोला - 
स… सिद्धिका…

वो लड़की उसे अजीब नज़रों से देखने लगी। जैसे पहली बार देख रही हो।

उसने धीरे से पूछा -
आप कौन…?

कृष्णा तेजी से उसकी तरफ बढ़ा।

वो बोला - 
सिद्धिका… मैं हूँ…कृष्णा…तुम्हारा पति…।

उसकी आँखों में उम्मीद थी…डर था…और बहुत सारा दर्द।
लेकिन वो लड़की धीरे से पीछे हट गई। उसके चेहरे पर उलझन थी।

वो बोली - 
मैं सिद्धिका नहीं हूँ…मैं तो… राधा हूँ।

उस पल कृष्णा जैसे पत्थर बन गया। बारिश लगातार उसके चेहरे पर गिर रही थी…लेकिन उसे कुछ महसूस नहीं हो रहा था।
फिर अचानक हवा का एक झोंका आया। राधा के खुले बाल उड़ने लगे… और एक पल के लिए उसकी आँखों में हल्की लाल चमक दिखाई दी। बहुत हल्की…इतनी कि शायद भ्रम लगे।  कृष्णा का दिल धड़क उठा

उसने फुसफुसाया -
सिद्धिका…

राधा कुछ पल उसे देखती रही…फिर बहुत हल्की मुस्कान उसके होंठों पर आई। एक ऐसी मुस्कान…जो बिल्कुल सिद्धिका जैसी थी।
कुछ प्रेम कहानियाँ खत्म नहीं होतीं…वो बस नया नाम ले लेती हैं। ❤️

गंगा किनारे बारिश अब हल्की हो चुकी थी…लेकिन कृष्णा के अंदर तूफान अभी भी चल रहा था। उसकी नज़रें लगातार उस लड़की पर टिकी थीं। वही चेहरा वही आँखें… वही आवाज़…सब कुछ सिद्धिका जैसा। कृष्णा समझ ही नहीं पा रहा था ये सपना है…
भ्रम है…या सच में सिद्धिका उसके सामने खड़ी है।
उसकी साँसें तेज़ थीं…और आँखों में उम्मीद और डर दोनों।

तभी राधा की नज़र कृष्णा की चोटों पर गई।उसके कपड़ों पर खून लगा था…हाथ छिले हुए थे…चेहरा भी घायल था।नराधा तुरंत उसके करीब आई।

राधा बोली - 
अरे… आपको तो बहुत चोट लगी है!

उसकी आवाज़ में सच्ची चिंता थी। बिल्कुल वैसी ही… जैसी कभी सिद्धिका छुपाने की कोशिश करती थी।कृष्णा बस उसे देखता रह गया। उसे लग रहा था जैसे समय वापस लौट आया हो। राधा ने अपना छोटा घड़ा नीचे रखा…फिर अपने दुपट्टे का किनारा फाड़कर उसके हाथ का खून साफ करने लगी।

वो बोली - 
इतनी चोट लगी है…आपको आराम करना चाहिए…

उसकी उंगलियों का स्पर्श महसूस होते ही कृष्णा की आँखें भर आईं। क्योंकि वही ठंडा लेकिन सुकून देने वाला एहसास…उसे फिर महसूस हुआ। कृष्णा ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया।

वो बोला - 
तुम सच में मुझे नहीं पहचानती…?

उसकी आवाज़ टूट रही थी। राधा हल्का सा घबरा गई।

वो बोली - 
न-नहीं…मैंने आपको पहले कभी नहीं देखा…

लेकिन…उसका दिल अचानक तेज़ धड़कने लगा। जैसे अंदर कहीं कोई भूली हुई चीज़ जाग रही हो। उसी पल राधा के हाथ पर पानी की एक बूंद गिरी…और एक सेकंड के लिए  उसकी नसों में हल्की लाल चमक दौड़ गई। फिर सब सामान्य हो गया। कृष्णा की आँखें फैल गईं। उसने साफ देखा था वो साधारण इंसान नहीं थी।
लेकिन राधा खुद इससे अनजान थी।

वो बस धीरे से बोली—
आपकी हालत ठीक नहीं लग रही…चलिए… मैं आपको घर तक छोड़ देती हूँ।

कहानी खत्म नहीं हुई थी…
🩸 अंधकार शायद अब भी जिंदा था…
❤️ और प्यार ने शायद नया जन्म ले लिया था…

गंगा किनारे की हवा अब शांत हो चुकी थी…लेकिन कृष्णा के अंदर सवालों का तूफान था। राधा उसके सामने खड़ी थी इतनी करीब…
फिर भी जैसे बहुत दूर। राधा ने धीरे से कृष्णा का हाथ अपने कंधे पर रखा।

राधा बोली - 
संभलकर…आप ठीक से चल भी नहीं पा रहे…

उसकी आवाज़ में वही नरमी थी…जिसे सुनकर कृष्णा का दिल फिर से टूटने लगा। दोनों धीरे-धीरे घाट की सीढ़ियाँ चढ़ने लगे।
राधा बार-बार उसकी तरफ देख लेती…जैसे उसे अजीब लग रहा हो कि इस अनजान आदमी को देखकर उसके दिल में बेचैनी क्यों हो रही है। कृष्णा बस उसे देख रहा था।उसके खुले बाल हवा में उड़ रहे थे…माथे का छोटा सा तिलक…और आँखों की वही गहराई…
सब कुछ सिद्धिका जैसा।

अचानक चलते-चलते राधा का पैर फिसला। वो गिरने ही वाली थी कि कृष्णा ने तुरंत उसे पकड़ लिया। कुछ सेकंड…दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे। राधा की साँसें अचानक तेज़ हो गईं। और कृष्णा का दिल जोर से धड़क उठा। राधा तुरंत पीछे हट गई। उसने अपना सीना पकड़ लिया।

वो बोली - 
ये… क्या था…?

उसे लगा जैसे  किसी भूली हुई याद ने अचानक उसे छू लिया हो।
उसी पल उसकी आँखों में फिर एक सेकंड के लिए लाल चमक आई। और कृष्णा ने साफ देखा  उसके पीछे बहुत हल्की सी काले पंखों जैसी परछाई बनी…जो अगले ही पल गायब हो गई।
अब कृष्णा को यकीन होने लगा था ये सिर्फ शक्ल नहीं… ये सच में सिद्धिका से जुड़ी हुई है।

राधा बोली - 
आप मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं…?

कृष्णा हल्का सा मुस्कुराया…लेकिन आँखें नम थीं।

वो बोला - 
क्योंकि…तुम्हें देखकर लगता है…जैसे मेरी खोई हुई दुनिया वापस आ गई हो…।

ये सुनते ही राधा का दिल अचानक बहुत तेज़ धड़कने लगा।उसे समझ नहीं आया क्यों…लेकिन  इस इंसान का दर्द उसे अपना लग रहा था।

दूर कहीं…उसी समय…बहुत दूर अंधेरे में…दो लाल आँखें खुलीं।

और एक भारी आवाज़ गूँजी—
तो… वो फिर लौट आई…

🩸 क्या अंधकार ने राधा को पहचान लिया है?
❤️ और क्या कृष्णा इस बार भी उसे खो देगा…?