Pavitra Prem ya Abhishaap ? in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 12

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 12

रात गहरी हो चुकी थी…गाँव में चारों तरफ सन्नाटा था…और राधा अपने लैपटॉप के सामने बैठी थी। वो कोशिश कर रही थी काम में ध्यान लगाने की…

लेकिन दिमाग बार-बार उसी चेहरे पर चला जाता—
👉 वो पागलपन में टूटा हुआ लड़का…
👉 कृष्णा…

तभी स्क्रीन पर एक रिकमेंडेशन आया। एक फेमस सीनियर इंजीनियर की प्रोफाइल।
नाम था—
👉 Krishna Agnihotri

राधा का हाथ वहीं रुक गया…

उसने धीरे से नाम पढ़ा -
कृष्णा…?

और एक सेकंड के लिए उसे लगा जैसे दिल रुक गया हो। किसी अनजाने खिंचाव में…उसने प्रोफाइल खोल दी।
स्क्रीन पर उसकी डिटेल्स थीं—
सफल इंजीनियर…टेक कंपनी…पुराने प्रोजेक्ट्स…और नीचे एक फोटो।

राधा की साँस अटक गई। 
 वही चेहरा.... वही आँखें.... वही इंसान…जिसने उसे गंगा किनारे रोते हुए पकड़ा था…
उसके दिमाग में अचानक दर्द उठा…जैसे कोई बंद दरवाज़ा जोर से हिल गया हो।

वो बोली - 
ये… मैं इसे क्यों जानती हूँ…?

कुछ सेकंड के लिए…उसे एक धुंधली सी झलक दिखी—
काले पंख…लाल साड़ी…

और एक आवाज़—
तुम मेरी हो…

राधा ने तुरंत लैपटॉप बंद कर दिया। उसका हाथ कांप रहा था…

वो बोली - 
ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ…?

लेकिन उसका दिल अब शांत नहीं था…कृष्णा का नाम अब सिर्फ एक नाम नहीं रहा था…बल्कि एक ऐसा एहसास बन चुका था जिसे वो समझ नहीं पा रही थी।

🔥 अब दो दुनिया टकराने लगी हैं—
🩸 एक टूटा हुआ कृष्णा जो उसे याद कर रहा है…
❤️ और एक राधा जो धीरे-धीरे खुद को याद कर रही है…

नदी की सीढ़ियों पर कृष्णा चुपचाप बैठा था…बारिश थम चुकी थी, लेकिन उसके अंदर का तूफान अभी भी जारी था। वो धीरे-धीरे साँसें ले रहा था…आँखों में थकान और खालीपन था।

तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा। कृष्णा चौंक गया…और जैसे ही उसने ऊपर पीछे देखा राधा खड़ी थी। राधा धीरे-धीरे उसके पास बैठ गई। उसके चेहरे पर उलझन थी…लेकिन एक तरह की चिंता भी।

कृष्णा ने नीचे देखते हुए कहा—
सुबह के लिए… sorry…

उसकी आवाज़ टूट रही थी।

वो बोला - 
तुम्हें देखकर… मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया…

वो आगे बोला—
तुम… मेरी पत्नी जैसी दिखती हो…बहुत ज्यादा…
इसलिए मैं धोखा खा गया…

ये सुनकर राधा चुप हो गई। उसे नहीं पता क्यों…लेकिन “पत्नी” शब्द सुनकर उसके अंदर हल्की सी चुभन हुई। कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे…सिर्फ नदी की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

राधा ने धीरे से पूछा—
आपकी पत्नी… अब कहाँ है?

कृष्णा की आँखें भर आईं।

वो बोला - 
पता नहीं…वो थी… या अब है भी या नहीं…

ये सुनकर राधा का दिल कस गया…जैसे किसी का दर्द अचानक उसके अंदर उतर गया हो। वो बिना कुछ बोले बस सामने नदी देखती रही…लेकिन पहली बार उसे लगा ये इंसान उसके लिए अजनबी नहीं है…

दूर कहीं…आसमान में हल्की हवा चली…और बहुत दूर किसी अंधेरे में एक हल्की लाल चमक फिर से जाग उठी।

🔥 अब कहानी फिर एक मोड़ पर है—
🩸 कृष्णा जिसे अपनी पत्नी खो चुकी लगती है…
❤️ और राधा जो खुद को उसी कहानी में उलझता महसूस कर रही है…

नदी की हल्की लहरें किनारों से टकरा रही थीं…हवा ठंडी थी, लेकिन कृष्णा की आवाज़ उससे भी ज्यादा ठंडी लग रही थी।

कृष्णा ने नीचे देखते हुए कहा—
वो मुझसे बहुत प्यार करती थी…

उसकी आवाज़ भारी हो गई।

वो बोला - 
…पर अफ़सोस… वो इंसान नहीं थी।

राधा ने उसकी तरफ देखा…उसकी आँखों में सवाल थे।

राधा बोली - 
फिर क्या थी वो…?

कृष्णा ने गहरी साँस ली…जैसे हर शब्द उसके अंदर से खून निकाल रहा हो।

वो बोला - 
वो… वैंपायर थी।

एकदम खामोशी छा गई। नदी की आवाज़ भी जैसे धीमी पड़ गई हो। राधा के चेहरे पर हल्का सा डर आया… लेकिन उससे ज्यादा—
एक अजीब सा खिंचाव।

उसने धीरे से दोहराया -
वैंपायर…?

कृष्णा की आँखें भर आईं…

वो बोला - 
हाँ…और वो सबसे खतरनाक थी…
लेकिन मेरे लिए… सबसे सच्ची।

वो आगे बोला—
मैं जानता था वो मुझे मार सकती है…
फिर भी मैं उससे दूर नहीं गया…

कृष्णा ने राधा की तरफ देखा…उसकी आँखों में एक खालीपन था।

वो बोला - 
और फिर… वो एक दिन…

वो रुक गया।

राधा ने धीरे से पूछा—
क्या हुआ उसके साथ?

कृष्णा ने आसमान की तरफ देखा…

और फुसफुसाया—
मुझे नहीं पता…वो मरी… या मुझे छोड़कर चली गई…

फिर वो चुप हो गया। और दोनों के बीच सिर्फ नदी की आवाज़ बची रह गई। राधा के दिल में एक अजीब सी हलचल हुई…जैसे ये कहानी उसकी अपनी हो…लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था क्यों।
कृष्णा की आवाज़ अब बहुत धीमी हो चुकी थी…जैसे हर शब्द उसके अंदर से टूटकर निकल रहा हो।

वो राधा की तरफ देखे बिना बोला—
बस… उस दिन उसके और उसकी बिरादरी वालों के बीच लड़ाई हुई थी…उसके बाद से… कोई नहीं दिखा।

उसने अपनी मुट्ठी भींच ली…

वो बोला - 
पता नहीं मेरी सिद्धिका कहाँ होगी…

उसकी आवाज़ काँप गई।

कृष्णा ने धीमे से कहा—
कैसी होगी वो…उसे मेरी याद आती होगी भी या नहीं…

राधा कुछ नहीं बोली…लेकिन उसके अंदर कुछ टूट सा गया था।जैसे किसी अनजानी कहानी का दर्द उसके भीतर उतर रहा हो।
उसे फिर वही खिंचाव महसूस हुआ…सीने में हल्की जलन जैसी…
और आँखों के सामने एक पल के लिए काले पंखों की परछाई चमकी…फिर गायब हो गई।

वो बोली - 
ये… क्या हो रहा है मुझे…?

उसने खुद से पूछा। कृष्णा ने आसमान की तरफ देखा…

वो बोला - 
अगर वो जिंदा है…तो मैं उसे ढूंढ लूंगा…

उसकी आँखों में अब भी उम्मीद थी। राधा ने उसे देखा…और पहली बार उसे लगा ये इंसान सिर्फ टूटा नहीं है…ये किसी याद में जिंदा है।

दूर कहीं अंधेरे में…एक हल्की सी लाल चमक फिर से जाग उठी…

और एक आवाज़ गूँजी—
यादें अभी खत्म नहीं हुई हैं…

क्या राधा के अंदर सिद्धिका जाग रही है?
या कृष्णा की यादें उसे ही बदल रही हैं…?