रात का वो पल एक गहरी खामोशी में खो गया…कमरे में सिर्फ हल्की साँसों की आवाज़ थी…और फिर सब कुछ शांत हो गया।
वो रात थी जब कृष्णा सिद्धिका के बाद राधा के इतना करीब आया था। दोनों उस रात एक दूसरे के हो गये थे पूरी तरह। Room में सिर्फ राधा की हल्की हल्की सिसकियों की आवाज थी।
और कृष्णा की फुसफुसाहट—
आज रात सिर्फ मैं और तुम....अब तुम हमेशा मेरी हो....।
वहीं राधा सिसकियां लेते हुए फुसफुसाई -
हां! मैं हमेशा आपकी ही रहूँगी...मुझे आज रात अपना बना लीजिए...।
दोनों ने उस रात एक दूसरे पर खूब सारा प्यार लुटाया था। सारी दूरियां खत्म कर दी थीं। उनके बीच अब कोई बैरियर नहीं थी जो उन्हें एक होने से रोक दे।
अगली सुबह…खिड़की से सूरज की हल्की रोशनी कमरे में आ रही थी। राधा की आँख धीरे-धीरे खुली…और उसने खुद को कृष्णा की बाहों में पाया। एक पल के लिए वो ठिठक गई…कल रात की धुंधली यादें उसके मन में घूम गईं…और उसका चेहरा हल्का साओ लाल हो गया। उसने खुद को देखा फिर कृष्णा को वो और भी ज्यादा शर्मा गई और खुद को कंबल में ढक लिया। वो धीरे से सिर झुका लेती है…कृष्णा उसे ऐसे देख रहा था…जैसे उसे पहले से ही सब समझ आ रहा हो।
वो हल्का सा मुस्कुराया—
अब भी वैसे ही शरमाती हो…
राधा कुछ नहीं बोलती…बस उसके दिल में एक अजीब सा एहसास था अपनापन भी…और एक अधूरी याद भी…जैसे कुछ बहुत पुराना फिर से जुड़ रहा हो…कृष्णा की आँखों में भी एक गहराई थी…।
वो मन ही मन सोचता है—
क्या ये सच में नई शुरुआत है… या पुराने दर्द का ही एक और रूप?
🔥 कहानी अब एक नए मोड़ पर है—
🩸 अतीत पूरी तरह मिटा नहीं है…
❤️ और रिश्ता अब पहले से भी ज्यादा गहरा हो चुका है…
पिछले कुछ दिनों से राधा की तबीयत ठीक नहीं थी…कभी चक्कर…कभी कमजोरी…और बार-बार उल्टी जैसा एहसास।
एक दिन सुबह…राधा जल्दी से बाथरूम की तरफ गई। कुछ देर बाद वो बाहर आई…उसका चेहरा थोड़ा परेशान था।
उसने खुद से कहा—
ये मुझे क्या हो रहा है…?
दिल में एक अजीब सा डर और उम्मीद दोनों साथ थे।
कुछ देर बाद…जांच के बाद उसे पता चला वो प्रेग्नेंट है।
कुछ सेकंड तक वो बस खड़ी रही…दिमाग जैसे रुक गया हो।
फिर धीरे-धीरे उसकी आँखों में आँसू आ गए…जब कृष्णा को ये बात पता चली…तो पहले वो कुछ पल चुप रहा…जैसे यकीन नहीं हो रहा हो।और फिर…उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई।
धीरे से उसने कहा—
सच में…?
उसकी आँखों में खुशी भी थी…और डर भी। खुशी इस नई जिंदगी की डर उस अनजाने अतीत का। राधा अब भी थोड़ा उलझी हुई थी…लेकिन उसके चेहरे पर एक नई चमक आ गई थी। जैसे जिंदगी ने उसे एक नया कारण दे दिया हो जीने का।
समय धीरे-धीरे बीतता गया…और देखते ही देखते नौ महीने गुजर गए। इन महीनों में कृष्णा ने राधा का बहुत ख्याल रखा। वो उसे अकेला नहीं छोड़ता था…हर दवा…हर जांच…हर छोटी जरूरत…
सब कुछ खुद संभालता।
राधा अब पहले से ज्यादा शांत हो चुकी थी…उसके चेहरे पर माँ बनने की चमक साफ दिखाई देती थी। कभी वो बच्चे की हलचल महसूस करके मुस्कुरा देती…तो कभी कृष्णा उसका पेट छूकर चुपचाप उस एहसास को महसूस करता।
लेकिन कृष्णा के अंदर कहीं न कहीं एक डर अब भी छुपा था—
अगर इस बच्चे में भी अंधकार हुआ तो…?
वो ये सवाल किसी से नहीं कहता था…यहाँ तक कि खुद से भी नहीं। फिर आखिरकार…वो दिन आ गया। बारिश हो रही थी…
और घर के अंदर बेचैनी फैली हुई थी। राधा दर्द से कराह रही थी…
कृष्णा उसके पास बैठा उसका हाथ पकड़े हुए था। कुछ औरतें भी घर आ गईं।
वो बार-बार यही कह रहा था -
मैं यहीं हूँ…
कुछ देर बाद—
पूरे घर में एक नन्ही सी रोने की आवाज़ गूंजी। और उसी पल…कृष्णा की सांस जैसे रुक गई। जब उसने अपने बच्चे को देखा…
तो उसकी आँखें भर आईं। बच्चा पूरी तरह इंसान था।ना लाल आँखें…ना नुकीले दाँत…ना कोई अंधेरी शक्ति…बस एक मासूम सा छोटा बच्चा।
कृष्णा ने पहली बार खुलकर सांस ली…जैसे उसके दिल से सालों पुराना डर उतर गया हो। राधा ने बच्चे को अपनी गोद में लिया…
और धीरे से मुस्कुरा दी।
बोली -
देखिए…ये बिल्कुल आपकी तरह है…।
कृष्णा उनके पास बैठ गया…और पहली बार उसे लगा शायद अब सच में सब खत्म हो गया है। शायद अब उन्हें सामान्य जिंदगी मिल सकती है।
लेकिन…रात को…जब बच्चा सो रहा था…उसकी बंद पलकों के नीचे एक पल के लिए हल्की लाल चमक दिखाई दी…और फिर गायब हो गई।
कहानी खत्म नहीं हुई…
🩸 अंधकार शायद खत्म नहीं हुआ…
❤️ वो बस अगली पीढ़ी में छुप गया है…
सुबह की सुनहरी रोशनी मंदिर की सीढ़ियों पर फैल रही थी…घंटियों की आवाज़ हवा में गूंज रही थी…और उसी मंदिर में—
👉 कृष्णा
👉 राधा
👉 और उनकी गोद में छोटा सा बच्चा खड़े थे।
कुछ महीने बीत चुके थे। अब उनके जीवन में एक नई मुस्कान आ चुकी थी उनका बेटा।
छोटे-छोटे हाथ…मासूम सी आँखें…और चेहरे पर अजीब सी शांति।
दोनों ने उसका नाम रखा था—
✨ “रितांश”
👉 राधा और कृष्ण की प्यारी जोड़ी का एक सुंदर अंश।
राधा बच्चे को गोद में लिए मुस्कुरा रही थी…कृष्णा उसके पास खड़ा उन्हें देख रहा था। वो पल बिल्कुल एक साधारण खुशहाल परिवार जैसा था। लेकिन कृष्णा की आँखों में कहीं न कहीं अब भी एक डर छुपा था…क्योंकि कभी-कभी…जब रितांश हँसता…उसकी आँखों में एक हल्की लाल चमक दिखाई देती थी। बस एक पल के लिए…फिर सब सामान्य हो जाता।
उस दिन भी मंदिर की घंटी बजते ही…रितांश ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। और कृष्णा ने देखा उसकी पुतलियाँ एक पल के लिए लाल हो गईं। कृष्णा का दिल धड़क उठा…लेकिन अगले ही पल—
रितांश फिर से मासूम बच्चे की तरह मुस्कुरा दिया।
राधा को कुछ दिखाई नहीं दिया…वो बस प्यार से बच्चे के माथे को चूम रही थी। उसे नहीं पता था अंधकार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मंदिर के बाहर हवा तेज़ चली…दीपक की लौ काँपी…
और कहीं दूर एक धीमी आवाज़ गूंजी—
कहानी अभी बाकी है…
🔥 SEASON 1 END 🔥
🩸 “पवित्र प्रेम या अभिशाप?”
❤️ The Devil Girl and the God-Fearing Boy
Guys agar is story ka agla SEASON chahiye to comment jaroor karen.... kyunki next season isase bhi jyada intresting hone vala hai....