Shri: Struggle and Love - Chapter 14 in Hindi Spiritual Stories by Janshi Saroha books and stories PDF | श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 14

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 14

अब हरि को श्री राधावल्लभ जी का आशिर्वाद मिल चुका था और अब उसे ये विश्वास था कि श्री उसे मिल जाएगी ।

सभी लोग अब होटल पहुंचते है और दोपहर का भोजन करने के लिए रेस्टोरेंट आते है ।

सभी लोगों से पहले श्री और हरि आ जाते है खाना खाने।

श्री जब अपनी कुर्सी पे बैठी तभी हरि उसके बगल वाली कुर्सी पे बैठ गया । श्री वहां से अब उठना चाहती थी लेकिन हरि ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसने कहा कि चुप चाप यही बैठो प्रिय नहीं तो सब के सामने अभी हमारी शादी का विषय छेड़ दूंगा ।😌
श्री – क्या ? नहीं .... 
हरि – तो बैठो प्रिय मेरे पास 🥰

श्री ने हरि को घूर के देखा और कहा कि हरि जी आप अब अपनी हद पार कर रहे है ।🤨 आप हमारे सखा है हम आपको बहुत मानते है लेकिन ये प्रेम जैसी चीजें हम से नहीं होगी समझे 😑 क्या आपको ये बात समझ नहीं आती कि अब हम ट्रेनिंग पे चले जाएंगे और ट्रेनिंग पूरी होते ही हम अपने गुरुदेव से संन्यास दीक्षा लेंगे😑 । आप हमारे विषय में जो भी सोच रहे है अभी खत्म कर दीजिए इस भाव को कृपा करो हम पे । मत लाओ मेरे लिए ये सब  भाव हरि जी हाथ जोड़ती हु आप के आगे🙏🏻 । मेरे भक्ति और संन्यास मार्ग के बीच में मत आइए हरि जी please 🙏🏻 ।  

और हरि भी भावुक हो गया उसने श्री से कहा श्री मैं प्यार करता हु तुमसे शादी करना चाहता हु श्री तुम मेरे जीवन की पहली और आखिरी लड़की हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु । क्या तुम्हारा संन्यास लेना जरूरी है श्री । मैं वादा करता हु तुम्हारे भक्ति के मार्ग में कभी नहीं आऊंगा । मैं तो मौका चाहता हु तुम्हारी भक्ती से मैं भी तर जाऊंगा श्रीं 🥹। हम दोनो साथ में नारायण की भक्ति करेंगे तुम्हारे तपोबल से मैं भी भगवान को जान पाऊंगा मैं भी नारायण को प्राप्त हो जाऊंगा श्री। मेरा हाथ थाम लो श्री नहीं रह सकता मैं तुम्हारे बिना । 


श्री का भी मन भर आया उसने हरि का हाथ थामा और कहा – हरि हम आपके साथ है हमेशा लेकिन बस एक दोस्त की तरह 🥹प्यार या पत्नी के तौर पे मुझे मत देखिए हरि जी कोई अर्थ नहीं है अब इन सब का मेरे जीवन में 🥲। हम अपने गुरुदेव से आज्ञा ले चुके है मुझे संन्यास ही चाहिए मुझे केवल नारायण ही चाहिए ।🥹
मुझमें आसक्त न होकर आपको भी केवल नारायण की भक्ति का मार्ग चुनना चाहिए क्योंकि वहीं सच्चे साथी है हरि जी । 🙌🏻

हरि कुछ कहता तभी सारे परिवार के लोग वहां पे आ गए सबने अपनी अपनी कुर्सी ली और बैठ गए सब इतने भूखे थे कि किसी ने भी हरि और श्री को ध्यान से नहीं देखा । 
श्री और हरि ने अपनी आसूं पोछे और अपनी जगह पे बैठ गए । 

सब ने भोजन किया और फिर सब लोगो ने बरसाना जाने का सोचा । सभी लोगों ने अपनी पैकिंग की क्यूंकि अब वो तीन दिन बरसाना में श्रीजी (राधा रानी) के सानिध्य में रहने वाले थे।

सब लोगो ने पैकिंग की अपनी अपनी कार में बैठे और चल दिए बरसाना की तरफ । 

अब सब लोग बरसाना पहुंच चुके थे । 
हरि की अब हिम्मत नहीं थी कि वो श्री को कुछ कहे लेकिन उससे राधावल्लभ जी का आशिर्वाद याद आया । और उसने कसम खा ली कि वो श्री को इस आशीर्वाद के बारे में बताएगा 

सब लोग कार से उतरे सब ने अपने अपने समान अपने अपने कमरों में रखे । अब रात हो चुकी थी सबने श्रीजी (राधा रानी)के दर्शन अगले दिन करने के सोचे । 
लेकिन आज रात में सब कीर्ति मंदिर (बरसाना) में गए । सब ने वहां श्रीजी (राधा रानी) को उनकी माता कीर्ति की गोद में बैठा देखा सब कुछ उस मंदिर में इतना सुंदर था सब वहां पे फोटो खिंचवाने लगे ।
श्री अलग ही बैठी थी उसे फोटो खिंचवाने का शोक नहीं था । हरि ने मौका पाया कि आखिर कार श्री अब अकेली है । हरि चुप चाप श्री के साथ आ कर बैठ गया। 

हरि ने श्री से कहा जो भी तुमने कहा था उसका जवाब सुनो श्री। 
पहली बात तो ये कि मैं तुम्हारे गुरुदेव से बात करूंगा और तुम्हारी शादी मुझ से ही होगी । तुम उनकी आज्ञा का पालन करती हो न जब वो कहेंगे तब तुम्हे मुझ से शादी करनी पड़ेगी 😏

श्री कुछ बोलने को हुई हरि ने उसे चुप कराते हुए कहा मेरी बात खत्म नहीं हुई है पहले सुना करो प्रिय।🤫

देखो श्री मैं प्यार करता हु और मुझे तुम मेरे जीवन में चाहिए और किसी भी तरह से मैं बस तुमसे शादी करूंगा अब इसका कारण सुनो –😌
जब हम राधावल्लभ जी के दर्शन के लिए गए थे तुम हाथ छुड़वा कर भाग गई थी । मैने उनसे तुम्हे मांग लिया और तुम्हे पता है उनका संकेत क्या था उनके चरणों की फूल  माला मुझे मिली । सीधा मेरे गले में तंगी थी क्यूंकि नारायण ने मुझे आशीर्वाद दे दिया है तो अब चाहे तुम कितना ही प्रयास करो तुम बस मेरी बन के रहोगी प्रियतमा । 🥰

श्री ने कहा – अच्छा मजाक कर लेते है आप नारायण ने आपको आशीर्वाद दे दिया 😂😂 और ये हम कैसे माने।

हरि – ज्यादा मत हंसो हमपे अभी होटल चलेंगे देख लेना वहां पे मेरे पास उनके चरणों की फूलमाला है जो राधावल्लभ जी ने मुझे दी है उनके आशिर्वाद के तौर पे समझी प्रिय।😌

श्री अब संकोच में आ गई उसने मन में सोचा ऐसा कैसे हो सकता है प्रभु नारायण आप ने सच ने हरि जी को आशीर्वाद दे दिया कि हम उनके हो जाए न प्रभु क्यो माया में दाल रहे हो नाथ बचा लो हमें प्रभु  नारायण । खुद से दूर क्यों कर रहे है आप नारायण 🥺

हरि ने कहा क्या सोचने लगी प्रियतमा यही न कि अब तुम मेरी हो जाओगी 🤗 

श्री – नहीं 🤨हरि जी ऐसा नहीं हो सकता हम अपने गुरुदेव की आज्ञा के बिना कुछ नहीं करेंगे आपको उनसे आशिर्वाद लेना होगा । हाँ यही सत्य है जब आप मेरे गुरुदेव से आज्ञा ले लेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे तभी हम आपको हाँ कहे सकते है।😑

हरि– कमाल हो तुम भी प्रिय भगवान का आशिर्वाद मिल गया फिर भी अपने गुरुदेव की आज्ञा चाहिए तुम्हे।😏

श्री– हाँ  हमे गुरुदेव की आज्ञा ही चाहिए क्योंकि स्वयं भगवान भी जब अवतार लेते है तब अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते है हम तो भगवान की पुत्री है ।😌 हम भी यही मानते है जब तक गुरुदेव आज्ञा न दे हम आपकी कोई बात नहीं मानेंगे हरि जी।😑

हरि– ठीक है प्रिय भगवान का आशिर्वाद मिल गया तो तुम्हारे गुरुदेव की आज्ञा भी मिल जाएगी 😌। तब तुम मुझ से भाग नहीं पाओगी और तुम्हे मुझ से शादी करनी पड़ेगी प्रियतमा । 🥰


श्री अब हरि की बात सुन कर गुरुदेव का स्मरण करने लगी 😔उसने मन में अपने गुरुदेव से कहा कि हे गुरुदेव अब आप ही बचा सकते हो हमे ।शादी के बंधन में फंस कर नारायण को खोने का डर है मुझे गुरुदेव रक्षा कीजियेगा । 

सब लोग हरि और श्री के पास आए । शेष ने अपने भाई हरि को छेड़ते हुए कहा अरे भाई आप तो अब पूरे दिन बस श्री से बात करते रहते हो आप इतनी बात करते हो कि अब श्री मुझ से भी बात नहीं करती भैया ।

उसकी ये बात सुनके सब हंसने लगे 
श्री असहज हो गई । हरि ने एक चपत शेष को लगाई और कहा ज्यादा मत बोल मेरे भाई मैं बस जरूरी बात ही करता हु श्री से तेरी तरह बकवास नहीं करता ।

श्री मन में हंसते हुए – ये और जरूरी बात 😂 ये बस हमसे बकवास करते है सबसे ज्यादा ।😏

हरि ने श्री को इशारा करते हुए क्यों श्री बस जरूरी बात ही करता हु न मैं।😜
श्री बोल ही नहीं पाई हरि के इशारे से उसने बस गर्दन हाँ में हिला दी 😳
सब लोग कार में बैठे होटल पहुंच गए फिर सब सो गए 

धन्यवाद 
🙏🏻🙌🏻🕉️