श्री अब अपनी बात गुरुदेव को बताती है ..
श्री — गुरुदेव , हमने आज एक स्वप्न देखा उस स्वप्न में हमने प्रभु नारायण के दर्शन प्राप्त किए 🙂 गुरुदेव प्रभु नारायण ने हमसे कुछ ऐसा कहा जिसके बाद हमारे सोचने समझने का तरीका ही बदल गया
गुरुदेव — पुत्री , ऐसा क्या कहा प्रभु नारायण ने स्वप्न में 🙏🏻
श्री — गुरुदेव , उन्होंने कहा कि
"प्रेम त्यागकर भक्ति नहीं मिलती बल्कि,
सच्चे प्रेम से ही भगवान मिल सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि प्रेम तो मेरी सबसे सुंदर रचना है प्रेम के बिना तो इस संसार का आधार ही नहीं ...
गुरुदेव 😔 प्रभु नारायण स्वयं ही हमे प्रेम के साथ भक्ति मार्ग का आदेश देकर गए है 🥲
और मैं तो सदैव से आपके और प्रभु नारायण के मार्गदर्शन पे चल रही हु 🙂
गुरुदेव— ये तो उत्तम बात है पुत्री 🙌🏻 अब आपका निर्णय क्या है फिर 😌
श्री— गुरुदेव 🥹आपके आशीर्वाद और प्रभु नारायण की कृपा से अब मेरी आत्मग्लानि पूर्णतह समाप्त हो चुकी है और अब मैं ये भी समझ चुकी हु कि गृहस्थी का अर्थ ये नहीं कि मैं प्रभु नारायण की भक्ति से दूर हो जाऊंगी सही मायने में तो प्रभु के सच्चे भक्त वही है जो गृहस्थी में रहकर प्रभु का स्मरण करे 🥹
गुरुदेव— 😊यही तो हम आपको समझाना चाहते थे पुत्री 😌
श्री— हम समझ गए है गुरुवर 🥹 अब क्या आज्ञा है मेरे लिए
गुरुदेव — अब गृहस्थ आश्रम अपनाओ पुत्री 🙌🏻 😌
श्री— जी गुरुदेव 🥹🙏🏻
गुरुदेव— जाइए पुत्री अब हरि जी को अपने हृदय की बात भी बता दीजिए 🙌🏻 आप तीनों की परीक्षा सफल हुई 😌
श्री— गुरुदेव परीक्षा ? 🤔
गुरुदेव — हंसते हुए 😂 हाँ पुत्री हम आप तीनों की परीक्षा ले रहे थे
श्री — कैसी परीक्षा गुरुवर 🙂
गुरुदेव — हरि की परीक्षा ये थी कि कही उनका प्रेम स्वार्थी तो नहीं कही ये तो नहीं कि वो आपको अपनाने के चक्कर में आपको भक्ति मार्ग से दूर कर दे , या ये कि अगर आप उन्हें नहीं मिले या आपको कोई और मिल जाए तो हरि का क्या प्रतिक्रिया होगी परंतु हरि हमारी परिक्षा में सफल हुए 😌 वो आपसे सच्चा प्रेम करते है पुत्री उनके प्रेम में जरा भी स्वार्थ नहीं 🙌🏻 यहां तक जब उन्हें पता चला कि सार्थक आप से प्रेम करते है तब भी वो आपकी प्रसन्नता के बारे में सोच रहे थे। 🙌🏻
श्री— 😳 गुरुवर और सार्थक जी और हमारी कैसी परीक्षा थी?
गुरुदेव — सार्थक की परीक्षा थी कि वह अपनी और आपकी मित्रता का सम्मान करता है या नहीं 😌 या फिर वो प्रेम के भाव के कारण हरि से बदला तो नहीं लेगा क्या सार्थक हमारा शिष्य होकर ईर्ष्या त्याग कर आपकी मित्रता को प्रथम स्थान दे पाता है या नहीं 🙌🏻 परन्तु सार्थक भी हमारी परिक्षा में सफल हुए 😌 पुत्र सार्थक ने मित्रता को महत्व दिया और आपकी इच्छा का संपूर्ण सम्मान किया और त्याग का मार्ग चुना 🙌🏻
श्री— और मेरी परीक्षा गुरुवर?😳
गुरुदेव— पुत्री आपकी परीक्षा ये थी कि आप अपनी आत्मग्लानि से बाहर आ पाएंगी या नहीं 😌 और आपका मार्ग क्या होगा संन्यास जहां वैराग्य है या गृहस्थी के साथ नारायण भक्ति 😊 और आपने वही मार्ग चुना जिसकी मुझे अपेक्षा थी आप भी मेरी परिक्षा में सफल हुई 😊🙌🏻🙏🏻
श्री— ☺️ गुरुदेव धन्यवाद आपने हम सब को सही मार्ग दिखा दिया
गुरुदेव— अब आपको डॉट मिलेगी 😑
श्री — क्यों गुरुदेव 🥲
गुरुदेव — क्यूंकि आप अपने पिता गुरुदेव को धन्यवाद बोल रही है 😊 पुत्री आप हमारी प्रिय शिष्य है , ये हमारा फर्ज था
श्री— जी गुरुदेव 🥹
गुरुदेव— अब जाइए पुत्री 😊
श्री — जी गुरुदेव 🥹🙏🏻
श्री गुरुदेव से बात कर के अपने कक्ष में पहुंचती हैं ...
श्री मन में — ये सब तो ठीक है ... परन्तु मैं हरि जी कैसे बात करूं इस बारे में मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा 😳 क्या बोलूंगी उनसे ☺️ ये सब बहुत अजीब है 🥲 कभी इन चीजों में पड़ी नहीं और अब इन सब के बारे में कुछ पता ही नहीं 😅 नारायण भगवान अब जरा इसने भी सहायता कर दीजिए 🙂
(😂😂 प्रभु नारायण सोच रहे होंगे हां पुत्री अब तुम्हारे मन की बात तुम्हे कैसे बोलनी है ये भी मैं बताऊं वा पुत्री 😂)
😅 खैर.. श्री अपने मन में बात करते हुए बाहर की और निकली और अब श्री देखती है अब भी प्रिया और सार्थक लड़ रहे थे 🤪
वहां
प्रिया— अरे बुद्धू जी आप बुद्धू ही रहेंगे श्री ने ना बोला होता तो अभी बताती मैं आपको 😤
सार्थक— हा हा मैं भी इसलिए चुप हु क्यूंकि श्री ने कहा है नहीं तो 😠
प्रिया — नहीं तो क्या कर लेते हा 😑
सार्थक— तुम्हे उठा के पटक देता
श्री— अच्छा 😑 ....
अब श्री की आवाज सुन के सार्थक का मुंह खुला का खुला रह गया उसकी तो सास ही अटक गई 😂
सार्थक पीछे श्री की तरफ मुड़ के बोलता है —
सार्थक— सखी हमारा मतलब था
श्री— क्या मतलब था 😑
सार्थक— ये tape recorder बार बार बुद्धू बोलती है मुझे 😭
श्री— 😡 सुबह ही समझाया था हमने और फिर भी क्या कहा था मैने कि मुझे आपसे उम्मीदें ज्यादा है क्या मेरी बात की कोई एहमियत नहीं है सार्थक जी की आप प्रिया को कहे कि आप उसे उठा के पटक देंगे ये क्या तरीका है किसी स्त्री से बात करने का आप तो ऐसे नहीं है कहा गया आपका ब्रह्मचर्य, शांति, वैराग्य कहां गया ये सब तेल लेने 😤 हम अब आपसे कभी बात नहीं करेंगे आपने तो हमारा भरोसा ही तोड़ दिया 😤😑
सार्थक एक दम चुप shock 🫨
सार्थक— नहीं ...सखी 😭 आखिरी बार माफ कर दीजिए अब कभी नहीं लड़ूंगा प्रिया जी से 😭 वादा करता हु सखी माफ कर दीजिए
प्रिया— नहीं श्री आप ऐसा मत कीजिए 😞
श्री— चुप एकदम तुम कौनसा हमारी बात मानती हो अभी भी लड़ रही थी न सार्थक जी से मतलब मेरी बात की कोई एहमियत ही नहीं आप दोनों के अंदर
प्रिया — नहीं श्री ऐसा नहीं है सच्ची 🥺
श्री— तो कैसा है किस बात पे हो रही थी इतनी लड़ाई बताओ आप दोनों मुझे अभी 😑
श्री की बात के सुन के सार्थक और प्रिया दोनों की रोने वाली हालत हो गई थी
क्या होगा अब आगे जानने के लिए बने रहे मेरी कहानी श्री में 🫶🏻