Shri: Struggle and Love - Chapter 30 in Hindi Spiritual Stories by Shiv putri books and stories PDF | श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 30

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 30

श्री अब सार्थक और प्रिया को सुना रही थी ..
श्री— बताइए किस बात पे हो रही थी इतनी बहस 😑
सार्थक— सखी जी ये प्रिया जी आई हमारे पास की अब सिखा दो ध्यान करना हम भागवत पाठ के अध्ययन में व्यस्त थे 🥲 और ये यहां आ कर मुझे बुद्धू जी बोल रही थी 🥹 
श्री— तो😑
सार्थक — श्री कभी किसी ने ऐसे बात नहीं की मुझसे जैसे ये प्रिया करती है 🥲 
श्री— सार्थक जी 😑 क्या आप जानते है कि हमने बचपन से क्या क्या सुना है , केवल अपने ऐसे शरीर के कारण 😓तब भी हम विचलित नहीं हुए प्रभु के ध्यान से हमे सहनशक्ति मिली 🙌🏻 और गुरुदेव के आशीर्वाद से आज हम अपने जीवन में कामियाब है 😔 अगर हमने आपकी तरह हर बात की प्रतिक्रिया दी होती तो आज हम यहां नहीं होते सखा 😔
सार्थक— सखी हमारा ये अर्थ नहीं था 😔
श्री— जानती हु 🙌🏻 सार्थक जी किसी के कह देने से तो आप बुद्धू नहीं हो सकते आप तो विद्वान है ब्राह्मणीष्ठ ज्ञानी है और सबसे बड़ी बात गुरुदेव के सबसे प्रिय शिष्य भी है आपको ऐसा व्यवहार शोभा नहीं देता सखा 😓 

(श्री की बात सुन सार्थक और साथ ही प्रिया को भी अब अपनी गलती का आभास हुआ)

प्रिया— श्री हमे माफ कर दीजिए 😔 सच्ची में हम शायद सार्थक जी को परेशान करने ही आए थे 🥲 हमे ऐसा नहीं करना चाहिए था 😔 लेकिन आप सार्थक जी से बात करना बंद मत करो श्री इसमें इनकी कोई गलती नहीं है 🥺

श्री— आपको आपकी गलती का आभास हुआ इतना ही पर्याप्त है प्रिया परंतु हमारी बात का सम्मान कीजिए हमने सुबह भी कहा था दुबारा बोल रहे है अगर मुझे सखी मानती हो तो सार्थक जी को भी सखा मानिये क्यूंकि ये हमारे सखा है 😑🙌🏻

प्रिया— जी श्री 🥺 परन्तु आप सार्थक जी से बात बंद मत करना please 🥺 

श्री— ठीक है 😑 

(सार्थक को तो अचंभा हो गया कि tape recorder तो उसका साथ दे रही है 😅)

तभी सार्थक बोला— श्री माफ कर दीजिए आखिरी बार हम दोनों को अब नहीं होगा ऐसा हम दोनों अब नहीं लड़ेंगे 🥹 

श्री— ठीक है 😔यही आशा करती हु कि आप मेरी बात की एहमियत रखेंगे 

(हरि भी वहां आ जाता है 😌)

(हरि को देख कर श्री को याद आता है आज तो उसे महत्वपूर्ण विषय पे बात करनी है 🥲 श्री की तो सास अटक गई , 😅)

हरि— क्या हुआ श्री , कही ये दोनों दुबारा तो नहीं लड़ रहे 😂

श्री — हां, नहीं , 🥲पता नहीं ... (श्री कुछ बोल ही नहीं पा रही थी😂 ) 

(श्री वहाँ से जल्दी जल्दी चली जाती है 🥲)

हरि— अरे, श्री को क्या हुआ 🥲 जवाब तो ठीक से दे के जाती 
सार्थक— पता नहीं हरि जी, अभी तो मेरी और प्रिया जी की क्लास लगा रखी थी अब आप के आने बाद कहां चली गई 😅 
प्रिया — हाँ आज तो बहुत डॉट पड़ी श्री से और सिर्फ आपकी वजह से 😑 सार्थक जी 
सार्थक— मेरी वजह से , तुम यहां न आती तो लड़ाई होती न श्री देखती न ही हमे डॉट पड़ती तुम्हारी गलती है 😑 
प्रिया— चुप चाप अगर ध्यान करना सिखा देते तो लड़ाई होती ही  नहीं आपकी गलती है सार्थक जी 😑और क्या बोला था आपने की उठा के पटक दूंगा 😑 श्री न आती तो आप सच में उठा के पटक देते मुझ मासूम को 🥹

सार्थक— 😂तुम और मासूम अच्छा मजाक है जब देखो tape recorder की तरह बोलती रहती हो 
खैर ...जाने दो मैं लड़ना नहीं चाहता हमारी सखी श्री को हमारा ऐसा व्यवहार पसंद नहीं 

प्रिया— 🥺 आप बहुत बुरे है 😑 जाइए हम अब बात ही नहीं करेंगे आप से .. श्री के सामने मैने आपकी side ली थी 🥺 फिर भी मैं ही गलत हु 🥺 जाइए बात ही नहीं करनी मुझे आप से ... 

प्रिया को आज बहुत  बुरा लगा था , वो वहां से रोते हुए चली जाती है ... अपने कक्ष में 


(प्रिया को ऐसे रोते हुए जाने से सार्थक को भी बुरा लगा ..)

सार्थक अपने मन में — मैने कुछ ज्यादा ही बोल दिया लगता है 😔 श्री के दुबारा समझाने के बाद भी मैं ऐसा कैसे बोल सकता हु प्रिया जी को 😔 अब मैं माफी मांग लूंगा उनसे गलती हुई है तो माफी मांगने में कैसे शरम 🥹

तभी हरि सार्थक से बोला— 
हरि— सार्थक जी मैं प्रिया की तरफ से माफी मांगता हु , वैसे ...प्रिया मन की बुरी नहीं है नादान है थोड़ा ज्यादा बोलती है बस लेकिन कभी किसी का बुरा नहीं सोचती मेरी बहन 🥹 आप उसे गलत न समझे 😔 

सार्थक— नहीं नहीं हरि जी आप माफी मत मांगिए 😔 मेरी भी गलती थी मैं समझता हु मैं अब प्रिया जी से माफी मांग लूंगा 😓 उन्हें मेरी बात का बुरा लगा ... 

हरि — ☺️ आपको जैसा सही लगे सार्थक जी 
सार्थक—जी 🥹 

(हरि वहां से चला जाता है .. )

(सार्थक अपने भागवत पाठ में लग जाता है..) 

यहां श्री अपने कक्ष... 
श्री खुद से ही बात कर रही थी — ये ये क्या था इतनी तेज धड़कन हो गई थी  जैसे अभी हृदय निकल के गिर जाता 😳 हम कैसे बात करेंगे हरि जी से .. अब तो केवल देखने मात्र से हमारा हृदय बेकाबू हो रहा है बात करूंगी तो कही प्राण ही न निकल जाए हमारे 😐 क्या हो रहा है ये हमारे साथ ..  आज तक ऐसा नहीं हुआ 🙂 

तभी श्री की माँ गीता जी वहां आती है ,, 
गीता जी— बेटा श्री क्या हुआ.. 
श्री— माँ वो.. दरअसल 🥲 हमें कुछ समझ नहीं आ रहा ... 
गीता जी— क्या समझ नहीं आ रहा मेरी बच्ची को ☺️ 
श्री—माँ 🥹 गुरुदेव ने आज्ञा दी है कि अब गृहस्थ आश्रम चुनना है और ..
गीता जी — और क्या ?? 
श्री— माँ वो .. कैसे बताऊं 🫣🤭
गीता जी — अरे.. आज तक कोई ऐसी बात नहीं जो तुमने मुझे नहीं बताई ..अब ऐसी क्या बात है जो इतना हिचकिचा रही हु बेटा 😅 बताओ बेटा सुन रही हु मैं 

श्री— जी माँ बताती हु .....

क्या बताएगी श्री गीता को कैसे श्री अपने मन की बात हरि को बताएगी जानने के लिए बने रहे मेरी कहानी श्री में 🫶🏻