Incompleteness - 12 in Hindi Motivational Stories by Falguni Dost books and stories PDF | अधूरापन - 12

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अधूरापन - 12

अध्याय - १२

राजेश और अमृता डॉक्टर के पास पहुँचते तब तक दोनों मन ही मन विचारों में उलझे हुए थे। दोनों के मन में एक अनजाना डर भी था। राजेश का तो मानो पूरा व्यक्तित्व ही बदल गया था। अमृता ने अब तक जो कुछ भी उसके परिवार के लिए किया था, वह सब एक के बाद एक मानो किसी फिल्म की रील की तरह उसके अंतर्मन में चलचित्र की भांति उभर रहा था। इन सभी बातों के कारण राजेश के मन में एक सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो गया था। इधर अमृता भी राजेश में आए इस बदलाव से खुश तो थी ही, लेकिन रिपोर्ट की थोड़ी चिंता भी थी और वह गुमसुम होकर रास्ते पर नज़रें टिकाए बैठी थी।

अस्पताल के दरवाजे के पास कार जैसे ही रुकी, दोनों वर्तमान में लौट आए। राजेश को अमृता के चेहरे पर थकान साफ झलकती दिखाई दे रही थी। अमृता कार का दरवाजा खोलने ही वाली थी कि दरवाजा अपने आप खुल गया। दरवाजा अपने खोलने से पहले ही खुल जाने पर उसने देखा कि राजेश का हाथ उसकी ओर बढ़ा हुआ था। उसने राजेश का हाथ थामा और कार से बाहर निकली। राजेश का हाथ पकड़ने के बावजूद कार से बाहर निकलते समय अमृता अपने शरीर का संतुलन नहीं बना पाई, लेकिन राजेश ने उसे संभाल लिया और अमृता गिरने से बच गई।

डॉक्टर राजेश को देखकर हल्की मुस्कान के साथ बोले, "अमृता की रिपोर्ट्स आ गई हैं।" इतना कहकर उन्होंने अमृता को सभी दवाइयां दीं और खान-पान के जरूरी निर्देश दिए। फिर अमृता को थोड़ी देर बाहर बैठने के लिए कहा। अमृता के बाहर जाते ही डॉक्टर ने थोड़े चिंता भरे स्वर में राजेश के साथ रिपोर्ट की चर्चा शुरू की, "राजेश, मुझे यह बात कहते हुए बहुत दुख हो रहा है, लेकिन कहना जरूरी है इसलिए कह रहा हूं कि अमृता की रिपोर्ट्स बिल्कुल भी अच्छी नहीं हैं। अमृता एक बहुत गंभीर बीमारी का शिकार है।"

डॉक्टर की बात बीच में ही काटते हुए राजेश बोला, "क्या हुआ है अमृता को? आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?" राजेश से इतना मुश्किल से बोला गया कि उसके माथे पर पसीना आ गया। उसे लगा मानो उसके पैरों तले से जमीन खिसक रही हो। मानो कुदरत ने उसे अभी-अभी तो सारी खुशियां दी थीं और वह उन्हें जी पाता, उससे पहले ही... यह सब? उसने खुद को संभालने की नाकाम कोशिश की। उसकी आंखों में अनगिनत सवाल थे, लेकिन शब्द गले में ही घुटकर रह गए थे।

डॉक्टर बोले, "आपको बहुत हिम्मत रखनी होगी, चिंता करने से कुछ नहीं बदलेगा। आप घबराइए मत और मन मजबूत करके सब ध्यान से सुनिए। अमृता के गर्भाशय की दीवार पर गांठ है और वह गांठ कैंसर की है। उसे गर्भाशय के मुख का तीसरे स्टेज का कैंसर है। कई महिलाओं को ऐसा कैंसर होता है। जब तक कैंसर की कोशिकाएं शरीर में बहुत ज्यादा फैल न जाएं, तब तक वे बीमारी के लक्षणों पर ध्यान नहीं देतीं या सीधे कहें तो सहती रहती हैं और घर में किसी को अपनी तकलीफ नहीं बतातीं। इस वजह से कैंसर जब बहुत बढ़ जाता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है... अमृता भी उन्हीं महिलाओं में से एक है।"

राजेश ने अत्यंत व्याकुलता से पूछा, "देर..." इतना बोलते ही उसे हल्का चक्कर सा महसूस हुआ।

डॉक्टर ने उसे पानी दिया और कहा, "अमृता का तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऑपरेशन के दौरान ही पता चलेगा कि कैंसर ने गर्भाशय के अलावा शरीर के किसी अन्य अंग को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया है... और दूसरी दुखद खबर यह भी है कि उसके गर्भाशय में कैंसर की कोशिकाएं बहुत ज्यादा फैल चुकी हैं, इसलिए अमृता का गर्भाशय निकालना पड़ेगा। इस वजह से वह कभी मां बनने का सुख हासिल नहीं कर पाएगी।"

डॉक्टर के शब्द कमान से छूटे तीर की तरह राजेश के हृदय को चीर गए। राजेश के मुंह से एक गहरी आह निकल गई।

"नहीं डॉक्टर! प्लीज ऐसा मत कहिए। मुझे भी पिता बनना है।" राजेश की आंखों से आंसू छलक कर बहने लगे।

डॉक्टर ने कहा, "बहुत हिम्मत रखिए राजेश भाई! यहां भले ही मन हल्का कर लीजिए, लेकिन अब अमृता को आपको ही संभालना है।"

राजेश को लगा कि उसने अमृता के साथ बिताए समय की कभी कद्र नहीं की और उसका फल आज उसे भुगतना पड़ रहा है। जिंदगी कितनी हसीन, खुशहाल और आनंद से भरी होती, अगर उसने अपनी मां की बातों में आकर अमृता के साथ अन्याय न किया होता! राजेश को बेहद अफसोस हो रहा था, लेकिन समय बीत जाने के बाद सब खत्म हो जाता है। भगवान ने राजेश को उसके कर्मों का फल दिया, लेकिन इस सब में अमृता का क्या कसूर था? अमृता का ख्याल आते ही राजेश सोचने लगा कि वह अमृता को उसकी बीमारी के बारे में कैसे बताएगा? राजेश बेहद बेचैनी महसूस करने लगा। आज उसे सही मायनों में रिश्तों की अहमियत समझ आई। स्त्री के अस्तित्व की कीमत समझ आई। स्त्री के बिना पुरुष अधूरा है, इस बात का अहसास हुआ। कुदरत की रचना में स्त्री और पुरुष दोनों का समान स्थान है, यह बात समझ आई, लेकिन मनुष्यों ने ही स्त्रियों की कीमत को खोखला करके पुरुष प्रधान जीवनशैली बना दी है। दुख तो इस बात का है कि इसमें स्त्रियां ही स्त्रियों की दुश्मन बनी हुई हैं। अब अमृता जीवनभर मां बनने से वंचित ही रहेगी, यह बात बार-बार राजेश को तड़पा रही थी। कुछ ही मिनटों में विचारों का सैलाब राजेश के मन में उमड़ रहा था।

डॉक्टर ने राजेश का नाम पुकारकर उसके सन्नाटे को तोड़ा। भारी दिल से राजेश अमृता की फाइल लेकर बाहर निकला।

अमृता ने राजेश को डॉक्टर के केबिन से बाहर निकलते देखा तो तुरंत पूछा, "क्या कहा डॉक्टर ने? सब ठीक तो है ना?"

राजेश की नजरें अमृता के मासूम चेहरे पर जा टिकीं। वह तुरंत उससे लिपट गया। राजेश का ऐसा बर्ताव देखकर अमृता को थोड़ा डर भी महसूस होने लगा।