जिन्नात की दुल्हन-1

(मेरे हिंदी पाठकों को ध्यान में रखते हुए उनकी उम्मीदों को नजरअंदाज ना करके एक और कहानी लेकर हाजिर हूं आशा करता हूं की यह नई कहानी जिन्नात की दुल्हन को आपका बेइंतहा प्यार मिलेगा)

पार्ट -1

'महफूज विला'की रोशनी चकाचौंध कर देने वाली थी!

रात के बढ रहे अंधेरे में जगमगाता वह बंगला शहर की कोई आलीशान अजायबी जैसा प्रतीत हो रहा था!

आज की बात और थी!

बंगले के साथ आसपास के सारे इलाके को रोशनी से जगमगाया गया था!

क्यों ना हो..?

सुल्तान की जागीरी के एकमात्र वारसदार 'खलील' का आज निकाह हूआ!

पूरे शहर में एक सन्माननीय व्यक्ति माना जाने वाले सुल्तानने अपने शौक से आर्मी जोईन की थी!

न जाने कितनी बार मौत को चकमा देकर

वापस वो लौट आया था !

जब वह रिटायर हुआ तो उसके शरीर पर गोलियों के 40 साबुत निशांन थे!

खलील जैसे सुल्तान की ही प्रतिकृति था!

साँवला सा रंग गोल चहेरा और झील सी आंखे कयामत ढा रही थी !

उसकी लाइफ स्टाइल सबसे हटके थी!

अपनी मर्जी के मुताबिक वो जीता था!

एक राजकुमार जैसी उसकी जिंदगी थी!

बीन मांगे सबकुछ उसे हासिल था!

गुलशन से निकाह भी उसकी अपनी मर्जी थी!

सबकुछ कितना जल्दी हो गया था!

वो तो न जाने कितने दिलो का अरमान था!

जब वो अपनी खूली बोडी की लिनिया लेकर लोंग ड्राइव पर निकलता था तो लडकियाँ उसकी एक जलक को तरस जाती थी!

सुनहरे घूघराले बाल उसके आकर्षण मे ईजाफा कर रहे थे !

मगर सबका दिल तोडकर उसने गुलशनको चूना था !

गुलशन खुदा के दरबार से निकाल वो नायाब हीरा थी जिसे तराशने मे मेरे रबने कोई कसर नही छोडी थी!

उसके बदनमे संगमरमर सी लज्जत थी !

चंद्रमा के तेजपूंज जैसी चमक उसके रुपमे थी!

कोई अप्सरा की भांति गजब का नूर थाउसके चहेरे मे!

और उस नूरानी चहेरे ने खलिल के दिलो दीमाग मे एसी खलबली मचाई की आखिर उस नूरेनजर को अपनी नजरो का सुकून बना लिया !

रात काफी हो चुकी थी!

अबतक खलिल को अपने दोस्तों ने नहीं छोडा था!

सब तरह तरह की उससे माँगे कर रहे थे!

वह कोई राजकुमार से कम नही लग रहा था!

बहोत ही महंगी सुवर्ण के तारो से बनी जाली वाली शेरवानी उसने पहनी थी!

उसके हाथों मे किसी ब्रान्डेड कंपनीका महंगा स्मार्ट फोन था!

जिससे वो बार बार विडीओ कोल करके गुलशन को परेशान कर रहा था!

एक बार गुलशन का मेसेज भी आ गया था!

'अब कितना तरसाओगे मेरे राजा..!"

खलिल ने रिप्लाय दीया था!

"बस सब्र से काम लो मेरे दिल की सूखी धरा मे बहने वाले झरने..!"

जानते हो न मै झरना हू और आपने मुझे अपने दिलमे बाँधा!

नही तो.. गुलशन तूम वो झरना हो जो मेरी सूखी जमी को भीगोकर ताउम्र रख्खोगी..!

रख्खोगी.. ना ?

हा, जी आप चले आईए आपको भीगोने की शुरूआत करलु..!

दोस्तों के बीच भी गुलशन की बाते पढकर उसका दिल पसलियाँ से टकरा रहा था!

उसके होठो पर शरारती हँसी उभर आई थी!

भारी भरकम जेवरों में घूम रही औरतें किसी रजवाड़ी ठाठ की झलक दिखा रही थी!

खलील अब गुलशन के पास जाने को बेकरार था! मगर दोस्तों को छोड़ कर कैसे निकलता!

कुछ सोच ही रहा था कि उसकी चचेरी बहने गुलाब की तरह खिला हुआ मुंह लेकर उसके सामने पेश हूई

अब कितनी देर बैठे रहेना है..?

चलो दोस्तों से कल बातें कर लेना..!

भाभी इंतजार कर रही है..!"

केहकर दोनों ने खलील का एक-एक हाथ पकड़कर उन्हे खडा कर दीया!

खलील ने अपने दोस्तों पर एक शरारती निगाह डाली और वह चल पड़ा!

उसके दिल में खलबली मची हुई थी!

गुलशन के दीदार को तरसता अपनी बेहया आंखों को झुका कर वह चल रहा था!

दोनों बहनों ने बेडरूम के पास लाकर उसे अंदर धक्का दे दिया!

जरा सा लड़खड़ाकर खलील संभाल दरवाजा लोक करके वो बेडरुम में दाखिल हुआ!

फूलों से सारा कमरा सजाया गया था

तरह-तरह के परफ्यूम से हवा महक रही थी!

अपने बेड गुलाब के फूल बिछा दिए गए थे और उस पर मोगरे के श्वेत फूलों से दोनों के नाम अच्छी तरह लिखे गए थे!

खलील देखता ही रह गया!

जोधपुरी चुनरी के घुंघट से दो आंखें शर्म से लाल होती हूई खलिल को देख रही थी!

एक मासूम चहेरा बेसब्रीसे ईन्तजार कर रहा था !

टूकूर टूकूर देखती आँखों में झाँककर खलिल शायराना अंदाजमे बोला!

"कत्लेआम करके रखा है हमारे जिगर को

ईस पहेलू मे समा लो सुकून आ जाये..!"

"एसा है क्या..?"

घूँघट से कोयल की आवाज निकली!

"तो ईतनी देर क्यों लगाई..? "

खलिल उफनते हुये रूपके जलवे को तराशता हूआ उनके करीब बैठा!

"आज कोई शिकायत नही, ना गीला कर!

मिटने दे मेरी हस्ती ईस तरीकेसे मिला कर..! "

शरम से गुलशन लाल हो गई थी!

उसके करीब बैठकर खलिलने जन्नतका नजारा करना चाहा..!

तब उसने अपने मुलायम हाथोसे खलिल को रोकते हुये कहा!

"गुलशन का नजारा देखायेंगे मगर कुछ चाहिए हमेभी चाहिये..!"

"मांगो.. ईस जानसे ज्यादा क्या मागोंगी..?

आपकी जान तो वैसे भी हमारी है.. बस एक वादा करो..! "

"क्या..? " खलिलने हैरत से उस नाचीज को देखा

"आज के बाद आप सिगरेट नही छूओगे.!"

खलिल उसकी मांग पर हैरान रेह गया!

गुलशन का हाथ अपने हाथों लेकर उसने कहा जिस दीन आपका यकीन टूटे हमारी साँसे रूक जाए..!

"हाय अल्लाह..!

एसा मत बोलो..!

आज के दिनभी मूजे रूलाओगे..?

खलिल ने उसे अपने सीने से लगाया..!

चाँद से चहेरे की जलक पाकर उसका रोमरोम अपनी किस्मत पर शुक्रगुज़ार था!

उसने गुलशन की पलकें चूमी !

फिर चहेरे को ईत्मिनान से देखा!

अपने हाथसे वह उसके अलंकार उतारने लगा..!

सारे गहेने बारी-बारी उतारे!

फिर दुल्हन के जोडे को उतारने उसकी पीठ की और झुका..!

साईड पर टेबल पे रखा दुध का ग्लास उठाकर गुलशन ने खलिल के होंठों पर लगाया !

उसकी आंखों में देखता हूआ खलिल दुध पीता रहा..!

दुध पी लेने के बावजूद उसकी आँखोमे प्यास वैसी ही थी..!

गुलशन का जोडा उतार लिया..!

धीमे से उसने उसकी चोली सरका ली!

अब वह सिर्फ़ अंत:वस्त्रो मे थी..!

उसके सब्र का बांध मखमली बदन को देखकर टूट गया..!

उसने अपने होठ वो शरबती होठोपर पर रखकर शिकायत मिटाने झुका.. की..!

एक जबरदस्त धक्का खलिल को लगा

धक्का उसे गुलशन ने दिया था!

एक ही धक्के मे वो उछलकर बेड से नीचे गिरा!

वो अविश्वास भरी निगाहो से गुलशन को देख रहा था

ये कैसा मजाक हूआ..?

वह अपनी जगह से उठने जा रहा था की

गुलशन चिल्लाई !

मुझे छूने की गूस्ताखी भूलसे बी मत करना..!

खाकमे मिला दूंगी तूजे..! "

ये तूम क्या केह रही हो गुलशन..!

तूम मेरी बीवी हो..! "

खलिल की बात पर जैसे उसका मजाक उडा रही हो ऐसे उसने मुह से डरावनी हँसी निकली..!

"खौफ खा बदतमीज..! ये हुस्न तेरा गुलाम नही है..!

धडीभर पहले अपने लिये तडप उठने वाली गुलशन का ये बदला हूआ रुख उसको हैरान कर देने वाला था..!

तेरे नापाक बदनको मूजसे दूर रख..!

छू ना मत मूजे वरना...? "

उसकी चेतावनी से खलिल काँप उठा.!

***

गुलशन ने धक्का देकर खलिल को नीचे पटक दिया था !

और खलिल गुलशन मे आये आकस्मिक बदलाव से काफी हैरान था!

वह समज नही पा रहा था की अभी कुछ देर पहले तो अपने ख्वाबों की मल्लिका उससे अपनी जान लुटा रही थी!

फिर अचानक उसको क्या हो गया..?

क्यों उसने ऐसी बात कही की

ये हुस्न तेरा गुलाम नहीं..?

अपने नापाक जिस्म को मुझ से दूर रख..!

वह खुलेआम धमकी दे रही थी की अगर उसको छुआ तो खाक में मिला देगी!

कुछ तो लोचा था!

गुलशन कभी ऐसा बोल नहीं सकती!

वह तो मेरी जान है !

खलील सोच रहा था!

कब से वह हुस्नकी मल्लिका खलील के आगोश में सिमट जाने को बेताब थी!

अपने यौवन की बेमिसाल दौलत को खलील के कदमों में रख देना चाहती थी!

हुस्न के अमृत कुंभ का कतरा कतरा उसकी तृप्ति के लिए न्योछावर कर देना चाहती थी!

मगर ऐसा हुआ नहीं खलील भोचक्का सा रह गया था!

वह डरते-डरते फूलों से सजी हुई बेड पर बैठा!

" अरे..! तुम मुझ से इतनी दूर क्यों बैठे हो..?"

अचानक गुलशन का रुख पलटा!

"अब किस बात की देरी है?

शर्म आ रही है आपको..?

अभी कुछ देर पहले तो शायराना अंदाज में मुझे अपने आगोश में भर लेना चाहते थे..!

मेरी रुसवाई तो आपसे पल भर भी सही नहीं गई..!

अब आ भी जाओ..!

इन नशीली आंखों मे खो जाओ..!"

एक खुला हुआ रूप कयामत ढा रहा है और आप हैं कि यह शरबती होठों के जाम पीये बगैर बूत बनकर बैठे हो..!"

गुलशन खलील को फिर से खुला आह्वान दे रही थी !

मगर कुछ देर पहले जो जलवा खलील ने देखा था वह हरकत दोबारा होने की संभावना को नजरअंदाज ना करते हुए खलील घबरा रहा था!

उसका गोरा भरा भरा बदन खलील के मन को जला रहा था!

कितना बदनसीब था उसका वक्त..!

एक और शबाबे हुस्न खलिल की रूह से मिल जाने को तैयार था!

खलिल उस उफनते जलवे को छूने से घबरा रहा था !

"क्या हुआ है..? "

खलिल को लगा जैसे गुलशन को कुछ पता ही नही था!

उसने जो हरकत की थी उससे वो बेखबर थी!

फिलहाल वो गुलशन को कुछ केहना भी नही चाहता था!

ईस लिए उसने गुलशन को सिर्फ ईतना कहा!

"आज मेरी तबियत ठीक नही है बेबी..!

जाओ आज का दिन आपको बख्श दिया!

मगर कल आपको नही छोडेंगे !

दो दिन का ईकठ्ठा मजा लूटेंगे..!"

खलिल की बात सूनकर गुलशन का चहेरा फिका पड गया था!

"अब अचानक मेरी जान को क्या हुआ..?

मेरे जिस्म मे आग लगाकर पलटी मारली..!

मार डालोगे मुझे मेरी जान.. एसे तडपा तडपा कर..!

पर ठीक है.. आपकी तबियत नादुरस्त है तो आराम करो..

वैसे भी गुलशन सिर्फ आपकी है..

जब चाहो आप अपनी जिंदगी महेका सकते हो..!"

उसने खलिल के तेजोमय चहेरे को चूमा!

खलिल विवश होकर उस गुलाबी मखमली अंगकी मल्लिका को देखता रहा!

उसके अंत:वस्त्रो से उजागर हो रहे वक्षस्थल की गोलाईया को देखता हुवा वो बेड से उठा!

उसको डर था कि कुछ देर और गुलशन की बगलमे बैठा रहा तो फिर अपने मन को रोक नही पायेगा!

और अब दोबारा वो जलिल होना नही चाहत था!

सामने दीवार को सटाकर एक मखमली सोफा रखा हुआ था!

जिसपर कोई सोना चाहे तो आराम से सो सकता था!

खलिल जब तकिया लेकर सोफे की और बढा तो गुलशन नाराज हुई..!

अपनी नाराजगी उसके शब्दोंमे उभरी!

"जनाब..शायर साब.. आप मेरे पास बेड पर सो सकते हो !

एतबार रखिये रातमे कोई उल्टी सीधी हरकत नही करुंगी !"

"ना रे...! खलिल ने मूस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा!

"कहीं आप मेरा रेप करदोगी तो..?"

खलिल की बात सुनकर गुलशन ने मीठा

गुस्सा जताते हुये तकिया उठाकर खलिल को दे मारा..!"

"रेप करने को जी चाहा तो वहाँ आकर भी करुंगी समजे मेरे बुध्धु मियाँ..!"

फिर वह अपनी बेड पर एसे लेटी की खलिल का चहेरा अपनी निगाहो मे रहे!

खलिल भी न चाहते हुए सोफे पर लेटा था!

दोनो ही एकदुसरे को उलझन के साथ देख रहे थे!

गुलशन समज नही पा रही थी की अचानक खलिल ने उससे दूरी क्या बना ली..!

और खलिल सोच रहा था !

मेरी गुलशन मेरी होकर भी मेरी नही थी..!

आखिर क्या राज था वो.. ?

तकरीबन रात के एक बजे का वक्त था!

अपनी सुहागरात के दिन अपनी बीवी अंत:वस्त्रो मे अबोट यौवन का खुला दिदार कराती लेटी हो , वहाँ उसे नींद कैसे आनी थी?

वह करवटे बदल रहा था!

काफी मशकत के बाद गुलशन अभी अभी सोई थी!

की अचानक उसकी बोडी मे हरकत हुई!

उसने अपने पैरों को मोड़कर घूटनो को उपर उठाया..!

खलिल हैरत से गुलशन को देखने लगा

गुलशन के चहेरे पर नशीली मुस्कान थी!

उसके होठ खुलकर फिर चिपक रहे थे!

उसने अपना हाथ उठाया और अपने चहेरे को सहेला रही थी!

वो बार बार अपनी गरदन उपर उठा रही थी!

एसा लग रहा था कोई उसके बदन के साथ खेल रहा था!

कोई हल्के हल्के उसकी पूरी बोडी को सहेला रहा था!

और गुलशन अपना आपा खो रही थी!

वो अपने पूरे बदन को बार बार मोड रही थी!

फिर उसका मुँह खुला!

उसने दर्द को महसूस किया !

मीठे दर्द को!

जो उसके चहेरे पर साफ जलक रहा था!

वो बार बार अपने पैरो को उठा रही थी!

खलिल उसकी हरकतें देखकर अंदर ही अंदर जल रहा था..! आतंकित हो उठा था!

एसा लग रहा था जैसे गुलशन अपनी बेड पर अकेली नही थी!

कोई संवनन मे उसके साथ था!

और वो मदहोश होकर बाकायदा उसे साथ दे रही थी..!

खलिल को काटो तो खून नही.. एसी हालत हुई उसकी..!

अपनी मलका-ए हुस्न का बदन तृप्ति के आह्ललादक एहसास मे लगा था!

( क्रमशः)

कहानी कैसी लगी अपनी राय जरूर दे

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