जिन्नात की दुल्हन -10

(अगले पार्ट मे हमने रुक्साना के बारे मे पढा..  जिसे स्कुल के पिछे बंद पडे खंडहर जैसे कमरे मे अपनी सहेलीयां के साथ जाने की वजह से जिन्नात उस पर हावी  हो जाता है...  असगर से ये बाते सुलतान को जानने मिलती है...
..... अब आगे)

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असगर के घर से सुलतान वापस लौटा तब उसके मन मे जो धुंध थी साफ हो गई थी!
आईने की तरह सब कुछ साफ नजर आ रहा था!
सायरा जी कुछ भी बताने से ईनकार कर रही थी.!
मिन्स की वो काफी हद तक डरी हुई थी.!
कही एसा तो नही की..? "
सुलतान के दिमाग मे एक खयाल कोँधा.!
झन्नाका हुवा जैसे!
बिलकुल सटिक खयाल था!
एक सीधा सादा तंदुरस्त आदमी अचानक चला जाए! बात कुछ हजम नही हो रही थी!
मतलब साफ था कि जिन्नात गुलशन के शरीर मे था! वो सायरा जी पहेले से जानती थी!
और शायद उनके शोहर की हत्या जिन्नात ने की होगी.!
अगर एसा ही हुवा है तो कोई बडा मकसद लेकर वो आया है!
ईतनी जल्द वो गुलशन को छोडने वाला नही है.!
जरुर सायरा जी को उसने डरा रखा है.!
वरना पति की मौत को चार दिन गुजरे थे!
एसे वक्त मे सायरा जी गुलशन के रीश्ते की बात क्यो करती भला!
अपनी सेहत का बहाना करके गुलशन की जल्द शादी करवाने के पीछे उनका नही जिन्नात का दिमाग था!
वो तो सोच भी नही सकती थी!
पर उन्होने सब करवाया.!. 
खलिल तो पहेले से ही गुलशन के झांसे मे आ चूका था!
तो सबने सायरा जी की बात मानकर गुलशन और खलिल का सादगी से निकाह करवा दिया.!
एक बडी जीत हासिल करली थी जिन्नात ने..!
सोचता हुवा सुलतान घर पहुंचा तो पता चला की खलिल और गुलशन आगे पीछे बाहर निकले है..!
दोनो ने कुछ नही बताया की कहां जा रहे है.!
सुलतान को खलिल की चिंता होने लगी थी!
बहोत प्यार था उसे अपने बेटे से.. !
और जिन्नात का मक्सद अगर गुलशन से शादी रचाना था तो उसे अब खलिल की जरुरत नही थी!
कभी भी वो खलिल को मार सकता था!
पर एक बात खटक गई सुलतान को.!
जिन्नात को अगर खलिल को मारना होता तो कब का मार चूका होता!
पर उसने एसा नही किया!
सुलतान हडबडाये हुये उनके शयनखंड मे धुस गया
उसने गुलशन के कमरे मे देखा..!  फिर कुछ सोच कर वो बाहर आया जहा वोशिंग मशिन था !
वहीं गुलशन के कपडे पडे थे !
शायद उसने आज ही निकाले थे!
उसमे से गुलशन के कुर्ते को सुलतान ने उठा लिया!
और तेजी से बाहर आकर एक प्लाष्टिक बेग मे उसे छूपाकर वो वापस घरसे बाहर भागा!
उसने सब सोच लिया था!
उसको क्या करना था..!
उसके कदम भैरु घाट की और बढे!
काफी कठीन रास्ता है!
घाटी पर शिव का मंदिर है..!
उस मंदिर मे रहेना वाला एक साघु बडी माया है!
उसकी भी एक कहानी है!
भैरोघाट के ईर्दगिर्द चार गांव बसे हुये है!
कहेते है की इस गाटी पर कुछ लडकियाँ अपनी बकरीयां चराने आया करती थी!
तो कभी कभी शिव मंदिर और बाबा के दर्शन करके चली जाती थी.!
एक बार दुसरे गांव के लोगो ने हल्ला मचाया!
और उस साघु को वहाँसे हटाने के लिये ये अफवा फैला दी की वो..  बकरीया चराने वाली औरतो से अपने पैर दबवाता है ओर गंदी निगाहो से देखता है..!
फिर क्या था.. !
एक साथ चारोँ गांव के लोग ईकठ्ठे होकर घाटी पर पहूंचे..!
समाघि मे बैठे साधु को ललकारा
अय ढांगी..!
तु यहासे अपने बोरिया बिस्तर बांघ और खिसक ले
उसने अपनी आंखे खोले बगैर ही कहा..!
सब अक्ल के अंघे एक जुट होकर आये हो..!
दस मिनिट रुको..!
सबकी शंका को मै निर्मूल कर देता हुं..!
मुजे दस मिनिट दो..  फिर फैसला आपका.. !
लोगोने सहमति मे सिर हीलाये..!
और समाघि मे उस साधु के ओमकार मंत्र को गौर से सब लोग सूनते रहे..!
पूरा माहोल शिव मय था!
पंखी चिंहुक रहे थे..  कोयल बोल रही थी..!
हवाकी ठंडी लहेरो ने सबको वशिभूत कर रखा था..!
कि तभी...!!!"
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घाटी पर ताजा हवाये बह रही थी!
चारों तरफ हरियाली ही हरियाली और तरह तरह के पेड़ पौधे थे उनमे ज्यादातर बांस थे!
जो हवा के चलते सरसराहट पैदा कर रहे थे!
पास में ही एक सुंदर झील थी!
उस दिल के आस पास से न जाने कितने सारे पक्षियों की आवाजे रही थी!
मंदिर के इर्द-गिर्द पीपल के वृक्ष है !और उन "वृक्षों पर तरह-तरह के पक्षी बैठकर शोर मचाए हुए थे!
चारों तरफ प्रकृति का जादू पसरा हुआ था!
इन्हीं सौंदर्य के बीच में वह अकेला साधु समाधि लगाए हुए था और लोगों ने उसकी समाधि में विक्षेप डाला!
समाधि में रहते हुए भी उसने आस-पास के गांव के लोगों को महसूस कर लिया था शिव का स्मरण करके उसने 5 मिनट में आंखें खोली.
पूरे गांव के लोग आग बबूला होकर लकड़िया तलवारे भाले और न जाने कितने हथियार लेकर एक सन्यासी को मारने आ पहुंचे थे!
उसके मन में जरा भी घबराहट नहीं थी! वह सन्यासी गांव के लोगों को इस तरह से देख रहा था जैसे किसी पागलखाने में पागलों को देखते हैं..!
उसने सब लोगों को सुनाते हुए कहा
"क्या लगता है आप सबको..?
आप लोगों से दूर रहकर मैं अपना ब्रह्मचर्य भूल जाऊंगा आप लोगों को लगता है कि मैं ढोंगी हूं और अपने चेहरे पर नकाब ओढ़े मैं लोगों को छल रहा हूं
आपकी बहन बेटियों को बुरी निगाहों से देखता हूं..
यही अफवाह सुनी आप लोगों ने जो किसी ने मेरे खिलाफ भड़काई है..
क्या चाहते हो आप मेरा इम्तिहान मत लो..!
आप मंदिर छोड़ दो बाबा !
वरना हमें आप पर हथियार उठाने पर जबरन मजबूर होना पड़ेगा ऐसा ना हो कि आप की हत्या का पाप हम सब पर मढ जाए
चारों तरफ एक एक गांव में यह बात बच्चा बच्चा जानता है कि आप लड़कियों और औरतों से अपने पैर दबाते और न जाने क्या क्या करते होंगे.!
ठीक है फिर आपका यही फैसला है तो हमारा भी फैसला आप सुन लो हम शिव जी के भक्त हैं और अपने मन और लगाव से उनकी पूजा करते हैं !
जब आप लोगों ने हमें अपनी नजरों से गिरा ही दिया है तो हमें भी अपनी पवित्रता का आप लोगों को भरोसा दिलाना होगा यह हमारे लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है..
इतना कहकर वह साधु मंदिर में से एक थाली ले आया दूसरे हाथ में धारदार छूरी थी!
सबकी जबान तालू से जा चीपकी थी!
चारों गांव का एक एक व्यक्ति यह जानने को उत्सुक था! कि यह पट्ठा क्या करने वाला है कौन सा चमत्कार करेगा!
और उसने जो किया वह किसी चमत्कार से कम नहीं था इतने सारे लोगों के सामने उसमें अपने शरीर के उस हिस्से! (जननेद्रिय) को काटकर थाली में रख दिया
उसके शरीर  से खून बह रहा था!
लोगों में हड़कंप मच गया भागदौड़ हो गई! और ज्यादातर लोग उसके सामने सिर झुका कर रह गए और माफी मांगने लगे.
बाबा हमसे बड़ी गलती हो गई माफ कर दो
पर वह इंसान इस वक्त किसी को कुछ कहने राजी नहीं था वह आंखें बंद करके समाधि में लीन हो गया था उसे अपने शरीर की परवाह नहीं थी
गांव वालों ने जब उन्हें अस्पताल ले जाने का आग्रह किया तो उसने दो हाथ जोड़कर मना कर दिया.
उसे शायद अपने ईश्वर पर पूरी आस्था थी.
उस घटना के बाद कभी किसी ने उस साधु तरफ उंगली नहीं उठाई.
आज तलक कोई नहीं जान पाया कि उसकी असली उम्र क्या थी श्वेत लंबी दाढ़ी में और बालों में सालों से वह वैसा ही था.
सुल्तान उसके पास जा पहुंचा.
पीपल के वृक्ष नीचे समाधि ग्रस्त बैठे बाबा के पास सुल्तान बैठ गया.
बहुत परेशान हो बेटे मगर घबराओ मत इसका इलाज करेंगे हम.
बच्ची बहुत परेशान है बहुत तकलीफ में है शायद उसकी जान भी जा सकती है अच्छा किया कि मेरे पास चले आए.
हां बाबा मैं अपने बच्चे को टूटता हुआ नहीं देख सकता हूं आप कुछ करें मेरे बच्चे की तबाह हो रही जिंदगी को बचाने शैतान से पीछा छुड़ाए वरना वह जिंदगी भर जीने नहीं देगा..!
लाओ जो लाए हो वह मुझे दे दो.
सुल्तान ने प्लास्टिक बैग में रहे गुलशन के कपड़े बाबा के आगे रख दिए.
एक डोरी से बाबा के आदेश अनुसार कुछ कपड़े को नापा गया फिर बाबा कुछ मंत्र जाप करने लगे 10 मिनट के बाद फिर वही दोरी से  कपड़े को नापा गया आश्चर्य की बात कपड़ा छोटा हो गया था !
"यह चमत्कार कैसे हुवा..?"
बार बार दूरी से कपड़े को नापा गया और हर बार कपड़ा 1 इंच टूटता गया!
"फिर बाबा ने सुल्तान को बताया जिन्नात हावी है! बच्ची पर फिलहाल तुम जाओ मैं उसको रोकने का बंदोबस्त करता हूं !"
सुल्तान बाबा के चरण छूकर वहां से निकल गया!

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( क्रमश:)
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