हुआंग चाउ की बेटी - 10

हुआंग चाउ की बेटी

10 - लाख का ताबूत

डरहम ने धीरे से हुआंग चाउ के ट्रेज़र हाउस की छत की जाली हटाई। वह किसी तरह के जाल और खतरों के लिए तैयार था। कोई भी सयाना व्यक्ति, उसके - डरहम के मजबूरी में पीछे छोड़े गए प्रमाणों को देखते हुए स्काईलाइट को कसेगा ही जो उनके परिसर में प्रवेश के साधन मुहैया कराती थी।

इसलिए, उसका लौटना स्वाभाविक था। शैतानी प्रणाली उसके स्वागत के लिए तैयार थी। पर उसके अन्दर के कलाकार की मांग थी कि वह अपने हाथों से रहस्य का पर्दाफाश करे।

इसके अलावा उसे संदेह था कि उसके आधिकारिक रूप से वहां जाने का कोई नतीजा निकलेगा बूढा हुआंग चाउ बहुत घाघ था। अगर उसे जानना था कि कोहेन की मौत कैसे हुई तो उसे उसीके रास्ते पर अंत तक चलना था। हालांकि घर के आसपास पुलिसकर्मी थे और उसे लगता था कि उन्हें उसने इस तरह गुप्त तरीके से लगाया है कि चालाक उस्ताद भी धोखा खा सकता था।

उसने प्रक्रिया दोहराया और दीवान पर कूदा। कुछ देर वहां पड़े रहने के बाद, उसने टॉर्च जलाई, खड़ा हुआ और सीढियों की दिशा में बढ़ा।

यहाँ वह कुछ देर के लिए ठिठका, गौर से सुनने की कोशिश करने लगा। लाला हुआंग की छवि उसके जेहन में आई पर उसने उसे झटककर आगे बढ़ता रहा जब तक कि वह लाख के ताबूत तक नहीं पहुंचा।

उसने याद करने की कोशिश की कि चाबी कहाँ थी और एक पल टटोलने के बाद उसने चाबी खोज ली। वह अनजाने डर के प्रति पूरी तरह से सतर्क था। उसे लगा कि उसकी निगरानी हो रही है पर फिर भी यकीन नहीं कर पा रहा था। पुरानी और अप्रिय गंध जो उसने पहले भी महसूस की थी अब प्रत्यक्ष थी,

उसने छिपा ताला ढूँढने की कोशिश शुरू की और ताला मिलने के बाद एक पल ठिठकने के बाद उसने चाबी उसमें डाली। उसने टॉर्च दीवान के कुशन पर रखी जहाँ से रौशनी सीधे ताबूत पर पड़ रही थी। उसके बाद अपनी आटोमेटिक अपने बाएं हाथ में थामे, उसने चाबी घुमाई।

उसने अब ढक्कन उठाना था जैसे उसने हुआंग चाउ को करते देखा था पर नतीजा बहुत ही आश्चर्यजनक था।

ढक्कन, ताबूत के दूसरे फ्रेमवर्क के साथ, तेज़ आवाज़ के साथ झटके से खुला और ताबूत के अन्दर से घिनौनी गंध निकली।

डरहम एक कदम पीछे अत और जो दृश्य उसने देखा वह स्तब्ध रह गया।

ताबूत के सिरे पर एक बड़ी मकड़ी देखी जो उसने अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखी थी! उसका शरीर एक बड़े आदमी की मुठ्टी के आकार का था, रंग काला, पैरों पर बाल जैसे खेखड़े की टांगें हों और लम्बाई एक फुट या उससे अधिक!

एक पल वह वहीँ रहा और वह भयग्रस्त स्तब्ध सा, तब, बिना झिझक वह उसके चेहरे की तरफ कूदी!

वह चीखा और उसने गोली चलायी, चूक गया पर उसकी छलांग की दिशा उसने मोड़ दी थी, इस तरह वह एक डरावनी आवाज़ के साथ उसके पीछे जा गिरी। वह मुडा और सीढ़ी से पीठ लगाई। वह जानता था कि कहीं से रौशनी दिखी थी।

जहाँ वह खड़ा था उससे कुछ ही गज दूर एक दरवाज़ा खुला था और वहां खुले दरवाज़े पर लाला हुआंग खड़ी थी, उसकी आँखें आतंक से फ़ैली हुई थीं और नज़र उस पर टिकी थी।

"तुम!" वह फुसफुसाई। "तुम!"

"वापस जाओ!" वह दबी आवाज़ में चिल्लाया। "वापस जाओ! दरवाज़ा बंद करो। तुम समझ नहीं रही - दरवाजा बंद करो!"

नज़र उस पर टिकाये, लाला आगे बढ़ी, फिर थम गयी, अपनी नंगी एड़ी पर देखने लगी और तब, उस चीज़ को देखकर जिसने उसे जकड लिया था, उसके मुंह से चीख निकली जो उस समूचे स्थल पर गूँज उठी।

उसी पल डरहम के नीचे फर्श खिसक गया और उसने खुद को नीचे गिरता पाया और फिर वह घुप्प अँधेरे में गंदले पानी में था।

हुआंग चाउ के घर के आसपास पुलिस की सीटियाँ बजने लगीं। छिपे हुए लोग भागते हुए प्रांगण में आए।

"तुमने गोली की आवाज़ सुनी थी?" प्रभारी सार्जेंट चिल्लाया। "मैंने उसे अकेले जाने से मना किया था। दरवाज़े पर समय नष्ट मत करो। एक आदमी वहां ड्यूटी पर रहे, बाकी मेरे साथ आओ।"

कुछ पलों में, सार्जेंट के नेतृत्व में, सभी पुलिसकर्मी स्काईलाइट से हांग चाउ के ट्रेज़र हाउस में उतरे, जिसमें अब हर बल्ब जल रहा था। सीढ़ियों के मुहाने पर एक जगह फर्श खुला हुआ था और नीचे से दबी चीखें सुनाई दे रही थीं। सार्जेंट उसी दिशा में गया। खड्ड में देखने लगा।

"हेल्लो, श्री डरहम!" उसने पुकारा। "श्री डरहम!"

"रस्सी और सीढ़ी लाओ।" नीचे से एक घुटी आवाज़ आई। "मैं गर्दन तक धंसा हुआ हूँ और मेरा सिर्फ सर पानी से बाहर हूँ पर लहर आ रही है। लड़की को भी देखो, पहले। लडकी को देखो!"

सार्जेंट उस तरफ मुडा जहाँ, आधे खुले दरवाज़े के पास शेर की खाल पर लाला हुआंग पड़ी थी, वह सफ़ेद पड चुकी थी।

उसकी एक एडी के पास एक गहरा निशाँ था।

जैसे सार्जेंट और अन्य लोग उस पर झुके, उनका ध्यान सीढ़ियों पर गया जहाँ लड़खड़ाते हुए बूढा हुआंग, चश्मे के पीछे से अपनी आँखों से कमरे की उस जगह को घूर रहा था, जहाँ उसकी बेटी पड़ी थी।

"हे भगवान!" सार्जेंट फुसफुसाया, वह एक घुटने के बल उसके पास बैठा। उसने बूढ़े को निर्विकार भाव से देखा और कहा, "यह मर चुकी है!"

दो सादे कपड़ों में लोग कुछ चीज़ों को जोड़कर और बांधकर रस्सी बनाने की कोशिश कर रहे थे जिससे कि डरहम को खड्डे से बाहर निकला जा सके। पर इस सबकी तरफ बूढा हुआंग देख तक नहीं रहा था। वह व्याकुल सा कमरे में टहल रहा था जैसे जो उसने देखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा हो। अंत में वह मृत लड़की के एक तरफ पहुंचा, झुका और उसने उसे छुआ, अपना कांपता पीला हाथ उसके दिल पर रखा, और फिर खड़ा हुआ। सबके चेहरे देखने लगा।

अपने हालात की परवाह न करते हुए उसने ताबूत खोला और उसमें पड़ी हड्डियों और फीते को टटोलने लगा। उन्हीं में से उसने लोहे का एक डब्बा नकिाला।

उसे लेकर लौटा और उसने उसका ढक्कन उठाया। डिब्बा सभी प्रकार के तराशे, अतराशे हरे, लाल, सफ़ेद चमकते जवाहरों, हीरों, माणिक-मोतियों, नीलम, पन्नों, पुखराज, बिल्लौरी को मुट्ठियों में उसने लिया और उन्हें मृत लड़की पर उछाला।

"तुम्हारे लिए," उसने चीनी में लगभग रोते हुए कहा, ‘‘यह सब तुम्हारे लिए थे।"

बनाई हुई रस्सी डरहम तक पहुंचाई जा चुकी थी। अचानक

"हे भगवान!" सार्जेंट चिल्लाया, वह हुआंग चाउ के पीछे देख रहा था। ‘‘वह क्या है?’’

उसने बड़ा स्पाईडर देख लिया था, सूरीनाम से लाया गया, जिसे चीनी ने पाला और खिलाया था अपने खजाने की रक्षा के लिए और क्रूरता तथा अनोखेपन की अपनी हवस पूरी करने के लिए। वह कीड़ा, घर की हर चीज की तरह असाधारण था, अनूठा। यह ब्लैक सोल्जर मकड़ियों में से एक था और कुछ तो यह मानते थे कि केवल मिथक था पर वास्तव में सूरीनाम तथा ब्राजील के कुछ हिस्सों में पाया जाता था। मायगेल परिवार का एक सदस्य और उसका डंक तेज हुआ करता था और किसी विषधर सांप की तरह घातक भी। यह उसकी फितरत थी कि जो भी उसके छिपने के स्थान पर उसे छेड़ता वह उस पर हमला करती, चाहे वह बड़ा हो या छोटा।

अब, वह तेजी से कमरे की दूसरी तरफ टेपेस्ट्री की दिशा में बढ़ रहा था।

"दया करना भगवान!" सार्जेंट ने कहा।

अपनी जेब से रिवाल्वर निकालकर उसने कई गोलियां चलाईं। तीसरी गोली उसे लगी पर वह मरी नहीं। वह फिर फर्श पर कूदी और ताबूत की ओर बढ़ने लगी। सार्जेंट भागकर वहां गया और करीब से फिर एक गोली चलाई!

काले शरीर से लाल खून बहने लगा और कालीन पर गहरा धब्बा बनाने लगा।

जब डरहम, गीला पर बिना नुकसान के, ट्रेजर हाउस में लाया गया, उसने कुछ बोला नहीं, कमरे में उदास नज़रों से हुआंग चाउ को बस देखता रहा।

हुआंग चाओ, अपने घुटनों पर बेटी के पास बैठा अमूल्य जवाहर उसके स्थिर षरीर पर डाल रहा था और चीनी में बुदबुदा रहा था।

"तुम्हारे लिए, तुम्हारे लिए लाला! यह सब तुम्हारे लिए थे!’’

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