EK KAHANI AISI BHI - BHAG - 11 books and stories free download online pdf in Hindi

एक कहानी ऐसी भी - भाग 11

आगे  आपने  देखा की  वो  सात  घोड़े  सवार  थे  । 

उन्होंने  अपनी  आप-बीती  कही  । 

ओर  ये  भी  कहा  की  वो  इस  दुनिया  के  रक्षक  है  । 

जो  अनुज  ओर  अभिमन्यु  को  यहा  से  बाहर  लेजा  सकते  है  । 

पर  उसके  लिए  वो  उन्हे  रास्ता  दिखा  सकते  है  । 

पर  जाना  उसको  खुद  ही  पड़ेगा  । 

 

उन्मे  से  जो  पहला  घोड़े  सवार  था  वो  नक्शे  का  रक्षक  था  । 

वो  पहले  उन  लोगों  के  बारे  जानना  चाहता  था  ताकि  बुरे  प्रेत  इस  दुनिया  से  बाहर  न  जाए  । 

अनुज  ने  अपनी  पूरी  कहानी  बताई  ओर  उसे  सच्ची  लगी  । 

इसलिए  वो  सब  नक्शा  लेकर  उनके  साथ  गए  । 

 ओर  आगे  जाके  एक  पेड़  आया  वहा  से  दूसरा  नक्शा  निकाल  कर  उन दोनों  को  दिया । 

ओर  साथ  मे  ये  भी  कहा  की  याद  रहे  ये  । 

छलावे  की  दुनिया  है  । 

जो  दिखता  है  वो  होता  नहीं  । 

ओर  नहीं  दिखता  है  वो  होता  है  । 

 

वो  दोनों  नक्शा  लेकर  । 

वहा  से  निकल  गए  । 

वो  दोनों  बहुत  दूर  तक चलते  रहे  । 

फिर  जाके  एक  पेड़  आया  । 

तो  उन्होंने  सोचा  की  थोड़ी  देर  आराम  करले  बाद  मे । 

वहा  से  आगे  चले  जाएंगे  । 

ये  सोचकर  वो  दोनों  थोड़ी  देर  वही  विश्राम  करने  के  लिए  । 

रुक  गए  । 

पर  जब  उनकी आंखे  खुली  तो  वो  किसी  बड़ी  चटान  पर  थे  । 

वो  दोनों  डर  गए  ओर  सहमे  रह  गए  । 

मन ही  मन  सोच  रहे  थे  की  अब  क्या  करे  । 

 

तब ही  उन्हे  याद  आया  की  जो  दिखता  है  वो  होता  नहीं  । 

ओर  अभिमन्यु ने  अनुज  को  बोला  की  छलांग  लगा दो  । 

अनुज  ने  बोला की  तुम  क्या  पागल  हो  गए  हो । 

यहा  से  छलांग  लगाएंगे  तो  मर  जाएंगे  । 

फिर  अभिमन्यु  ने  कहा  मुज पे  यकीन  करो  । 

मै  तुम्हें  कुछ  नहीं  होने  दूंगा  । 

फिर  दोनों  ने  साथ  मिलकर  छलांग  लगाने  का  सोचा । 

अभिमन्यु  ने  कहा  । 

 

मेरे  तीन  गिनते  ही  हम  साथ  मे  छलांग  लगाएंगे  । 

हा  पर  ये  बात  याद  रहे  की  किसी  भी  हाल  मे  । 

हम  दोनों  का  हाथ  नहीं  छूटना  चाहिए  । 

ठीक  है । 

एक  , दो  , तीन  । 

दोनों  ने  साथ  मे  छलांग  लगा  दी  । 

पर  ये  क्या  । 

वो  दोनों  जैसे  ही  नीचे  गिरे  । 

 

वो  दोनों  किसी  पेड़  पे  जाके  रुके  । 

उन्होंने  नीचे  देखा  तो  वो । 

वही  पहुच  चुके  थे   । 

जहा  वो  दोनों  आराम  कर  रहे  थे  । 

 

वो  दोनों  खड़े  हुए  । 

ओर  आगे  निकल  गए  । 

रास्ते  मे  उन्हे  एक  कुवा  दिखाई  दिया  । 

तो  उन्होंने  उसमे  से  पानी  सिचकर  थोड़ा  पिया  । 

ओर  मुह  भी  धो लिया  ताकि  थाक  कम  हो  जाए  । 

आज  डेढ़  दिन  बाद  उन्होंने  पानी  पिया  था  । 

 

ओर  वो  दोनों  सोच  रहे थे  की  बस  । 

कही  से  कुछ  खाने  को मिल  जाए  । 

ओर  वो दोनों  आगे  चल दीये  । 

बहुत  चल ने  के  बाद  उन्हे  एक  पेड़  दिखाई  दिया  । 

उन्मे  अमरूद  लगे  हुए  थे । 

जैसे  ही  उन्होंने  अमरूद  तोड़ा  । 

पूरे  जंगल  मे  खलबली  मच  गई  । 

धरती  घूमने  लगी  । 

उन्हे  कुछ  समज  नहीं  आ  रहा था  । 

 

की  आखिर  हो  क्या  रहा  है । 

क्या  अब वो  उस  जंगल से  बाहर  निकल  सकेंगे  । 

जानने  के लिए  पढिए  । 

एक कहानी ऐसी  भी  भाग - १२ 

ओर  अपना  प्रतिभाव  आपना  ना  भूलिए