EK KAHANI AISI BHI - 12 books and stories free download online pdf in Hindi

एक कहानी ऐसी भी - भाग 12

आगे  आपने  देखा की  जैसे  उन्होंने  अमरूद  तोडा  तो  जंगल  मे  खलबली  मच  गई  । 

पूरी  जमीन  घूमने  लगी  ओर  देखते ही  देखते  पूरा  जंगल  सिकुड़  गया । 

ओर  उन्हे  बहुत  ऊंचे  उछाल  दिया  । 

जब  ये  चक्रवात  थम  गया । 

तब  वो  एक  तालाब  के  किनारे  थे  । 

 

अब  वो  तालाब  पार  करके  ही  उस  ओर  जा  सकते  थे  । 

तो  उन्होंने  एक  नौका  बनाई  । 

ओर  तालाब  मे  गए  । 

पर  ये  क्या  वो  जैसे  ही  तालाब  मे  गए  । 

तालाब  के  प्रेत  जिंदा  हो  गए । 

 

ओर  उनपे  तराप  मारने  लगे  । 

जैसे  तैसे  करके  वो  उनसे  बचे  । 

ओर  आगे  बढ़े  आगे  जाके । 

उन्हे  तालाब  का  किनारा  स्पष्ट  दिखाई  दे  रहा  था । 

 

वो  किनारे  के  नजदीक  पहुचे  तो  उन्होंने  देखा  की  उनकी  नौका  की  । 

जो  धारे  है  वो  जल  चुकी  थी  । 

इस  बात  से  उन्हे  ये  पता  चला  की  आगे  आग  है  । 

 

उन्होंने  देखा  की  कुछ  पत्थर  की  लकीर  भी  है  । 

तो  उन्होंने  सोचा की क्यू न  इसका  सहारा  लिया  जाए  । 

वो  दोनों  पत्थर  पे  पैर  रखकर  अंत  तक  पहुच  गए । 

लगता  है  जैसे  आज  ही  इस  कहानी  का  अंत  आ  जाएगा  । 

देखते  है  क्या  होता  है । 

 

आगे  जाके  एक  गुफा  आई  उन्मे  कई  दरवाजे  थे  । 

ओर  एक  ही  चाबी  थी  । 

इसका  मतलब  उन्हे  योग्य  दरवाजे  का  चयन  करना  पड़ेगा  । 

तबही  वो  बाहर  जा  सकेंगे  । 

इसलिए  उन्होंने  अपने  आस - पास  देखा  । 

तो  सब  दरवाजे  पर  एक  अजीब  स चिह्न  था  । 

सिवाय  किसी  एक  के  । 

 

वो  समज  चुके  के  यही  दरवाजा  है  । 

उन्होंने  वो  चाबी  ली  ओर  उसमे  लगाई  । 

जैसे  दरवाजा  खुला  एक  लंबी  सुरंग  थी  । 

अंदर  बहुत  अंधेरा  था  । 

वो  अंदर  गए  । 

उनके  पैर  रखते  ही  सुरंग  दोड़ने  लगी  । 

ओर  उनके  पीछे  प्रेत  पड़  गए  । 

 

वो  दोनों  भी  दोड़ने  लगे  । 

तबही  वो  सात  फ़रिश्ते  उनको  याद  आए । 

अभिमन्यु  ने  उनको  याद  किया । 

ओर  एक  रोशनी  हुई  । 

उस  रोशनी  मे  वो  सात  फ़रिश्ते  दिखाई  दीये  । 

 

उन्होंने  अभिमन्यु  को  कहा  । 

बेटे  तुम्हारा  इंतेजार  खत्म  हुआ  । 

यही  वो  सुरंग  है  जो  तुम्हें  इस  दुनिया  से  अपनी  दुनिया  मे  ले  जाएंगी । 

 

इधर  अनुज  के  माता - पिता  भी  अभिमन्यु  ओर  अनुज  के  अंतिम - संस्कार  की  तैयारी  करने  लगे  । 

क्योंकि  उन्हे  लॉट  ने  मे  अब  सिर्फ  एक  घंटा  ही  बाकी  था  । 

सब  तैयारी  हो चुकी  थी  अब  सिर्फ  एक  घंटे  के  बाद  वो  इन दोनों  को  अग्नि - संस्कार  करने  वाले  थे । 

 

अभिमन्यु  ओर  अनुज  दोडे  प्रेत  भी  उनके  पीछे  दोडे । 

एक  प्रेत  ने  अनुज  को  पकड़  लिया  ओर  उसे  नोचने  लगा । 

अभिमन्यु  ने  जैसे - तैसे  उसे  छोड़ाया  । 

अब  सिर्फ  दो  मिनिट  की  बात  थी  । 

मानो  की  प्रेतों  ने  उन  दोनों  को  पकड़  ही  लिया  हो  ऐसा  था  की  । 

तभी  अभिमन्यु  को  दरवाजा  देखा  उसने  छलांग  लगा  दी । 

ओर  वो  अपने  शरीर  मे लौट  आया । 

ओर  उसके  पीछे ही  अनुज  भी  लॉट  आया  । 

दोनों  खड़े  हुए । 

अब  अनुज  फिर  से  पहेले  जैसा  हो गया  । 

ओर  अभिमन्यु  भी  अपने  घर  चला  गया  । 

 

आज  इस  बात  को  बीते  १ साल  हो  गया  है  । 

ओर  अब  सब  राजी - खुशी  रह  रहे  है  । 

अब  मंगल  वीला  मे  सच  मे  मंगल  ही  मंगल  है