Pavitra Prem ya Abhishaap ? - 15 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 15

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 15

रात का जंगल…चारों तरफ घना अंधेरा फैला हुआ था। हवा इतनी तेज़ चल रही थी कि पेड़ों की शाखाएँ टूटने लगी थीं। कृष्णा अब भी राधा को अपनी बाँहों में उठाए भाग रहा था। उसकी साँसें तेज़ थीं…कपड़ों पर मिट्टी और खून लगा था… लेकिन उसकी पकड़ ढीली नहीं हुई। राधा काँप रही थी।

राधा बोली - 
कृष्णा… मुझे डर लग रहा है…

उसने पहली बार उसका नाम लिया।और ये सुनते ही कृष्णा एक पल के लिए रुक गया। उसकी आँखों में हल्की चमक आई…क्योंकि बहुत समय बाद उसे लगा जैसे सिद्धिका फिर से उसे पुकार रही हो । तभी राधा के सिर में तेज़ दर्द उठा।

वो चीखी -
आहhh…!

वो कृष्णा की शर्ट कसकर पकड़ने लगी।उसके दिमाग में तेजी से दृश्य चमकने लगे—
👉 मंदिर…
👉 शादी का सिंदूर…
👉 कृष्णा की मुस्कान…
👉 और उसकी अपनी लाल आँखें…

 राधा चीख पड़ी -
नहीं!!
ये सब क्या है?!

कृष्णा तुरंत एक पुराने टूटे मंदिर के अंदर गया…और उसे धीरे से नीचे बैठाया। मंदिर पुराना था…दीवारें टूटी हुई थीं…लेकिन अंदर अब भी भगवान की छोटी सी मूर्ति रखी थी।
जैसे ही राधा उस मूर्ति के पास आई उसकी आँखों में लाल चमक तेज़ हो गई। और उसी पल बाहर से वही काली शक्ति मंदिर के बाहर आकर रुक गई। जैसे वो अंदर नहीं आ सकती थी।राधा जमीन पर बैठी काँप रही थी…।

वो बोली - 
कृष्णा…मुझे कुछ याद आने लगा है…

कृष्णा की साँस अटक गई। वो जानता था अगर उसकी यादें पूरी तरह लौट आईं… तो शायद सिद्धिका भी वापस आ जाएगी।लेकिन उसके साथ अंधकार भी।

अचानक मंदिर के बाहर से डरावनी आवाज़ गूंजी—
उसे हमारे हवाले कर दो…

कृष्णा धीरे-धीरे उठा…और पहली बार उसकी आँखों में डर नहीं—
 गुस्सा दिखाई दिया। उसने मंदिर का दरवाज़ा बंद किया…

और फुसफुसाया—
इस बार…मैं तुम्हें किसी को नहीं दूँगा…

🔥 अब कहानी अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर है—
🩸 सिद्धिका की यादें लौट रही हैं…
❤️ और कृष्णा पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार है…

पुराने मंदिर के अंदर दीपक की लौ काँप रही थी…बाहर तूफान और भी खतरनाक हो चुका था। दरवाज़े पर लगातार काली शक्तियाँ प्रहार कर रही थीं।राधा जमीन पर बैठी थी…उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था।

वो बोली - 
कृष्णा… मेरे साथ क्या हो रहा है…

उसकी आवाज़ काँप रही थी।।अचानक उसकी आँखों के सामने दृश्य तेजी से बदलने लगे—
👉 मंदिर में शादी…
👉 कृष्णा की बाहें…
👉 उसकी अपनी लाल साड़ी…
👉 और खून की प्यास…

वो चीखी -
आहhhh!!

राधा चीख उठी। और अगले ही पल—
👉 उसकी आँखें पूरी तरह लाल हो गईं।
👉 लंबे नुकीले दाँत बाहर आ गए।
👉 पीठ के पीछे काले पंखों की परछाई उभरने लगी।

कृष्णा ने ये देखा…लेकिन वो डरा नहीं। उसकी आँखें भर आईं।

उसने बहुत धीरे से कहा -
सिद्धिका…

राधा ने काँपते हुए अपना चेहरा छूआ।

वो बोली - 
नहीं...मैं… राधा हूँ…

लेकिन उसी पल उसके अंदर दूसरी आवाज़ गूंजी—
तुम सिद्धिका हो…

धड़ामmm!!मंदिर का दरवाज़ा जोर से हिला।

बाहर से वही डरावनी आवाज़ आई—
उसे बाहर भेजो…वो हमारी बिरादरी की है…

कृष्णा दरवाज़े के सामने खड़ा हो गया।

वो बोला - 
वो कोई बिरादरी की नहीं है…वो मेरी पत्नी है।

ये सुनते ही राधा… या शायद सिद्धिका…एक पल के लिए शांत हो गई। उसकी लाल आँखों में आँसू आ गए।
उसे अचानक सब याद आने लगा—
👉 कृष्णा का प्यार…
👉 उसका सिंदूर…
👉 वो रात जब उसने उसे खो दिया था…
लेकिन साथ ही उसे अपनी असली शक्ति भी महसूस होने लगी।
और उसी के साथ…खून की भयानक प्यास।

सिद्दिका बोली - 
कृष्णा… दूर रहो…

उसकी आवाज़ भारी हो चुकी थी।

वो बोली -
मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही…

लेकिन कृष्णा उसके पास आ गया।

वो बोला - 
अगर तुम्हें अंधेरा बनना होता…तो तुम कभी मुझसे प्यार नहीं करती।

सिद्धिका की आँखों से आँसू बह निकले…और उसी पल मंदिर का दरवाज़ा टूट गया। तीन काली परछाइयाँ धीरे-धीरे मंदिर के अंदर दाखिल हुईं…और उनकी लाल आँखें सीधे सिद्धिका पर टिक गईं।

🔥 अब अंतिम टकराव शुरू हो चुका है—
🩸 अंधकार अपनी रानी को वापस चाहता है…
❤️ और कृष्णा उसे खोने नहीं देगा…

मंदिर के अंदर अंधेरा भारी हो चुका था…तीनों काली परछाइयाँ धीरे-धीरे आगे बढ़ीं। उनकी लाल आँखें सिर्फ सिद्धिका पर टिकी थीं। लेकिन जैसे ही उन्होंने मंदिर के अंदर कदम रखा अचानक तेज़ बिजली जैसी चमक हुई।

तीनों दर्द से चीख पड़े -
आहhh!!

उनके शरीर से धुआँ उठने लगा…जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें रोक रही हो। मंदिर की टूटी दीवारों पर हल्की सुनहरी रोशनी फैल गई।
भगवान की मूर्ति के सामने रखा दीपक अचानक तेज़ जलने लगा।वो काली शक्तियाँ पीछे हट गईं।

उनमें से एक गुर्राया—
ये रक्षा हमेशा नहीं रहेगी…

दूसरी आवाज़ गूंजी—
जल्द ही उसकी प्यास उसे हमारे पास वापस ले आएगी…
और तब…कोई भगवान उसे बचा नहीं पाएगा…।

अगले ही पल तीनों काली परछाइयाँ धुएँ में बदलकर गायब हो गईं।
मंदिर फिर शांत हो गया…लेकिन हवा अब भी भारी थी।

सिद्धिका अब भी काँप रही थी…कृष्णा जमीन पर बैठा था…और उसने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ रखा था। सिद्धिका उसके सीने से लगी रो रही थी। उसकी साँसें ठंडी थीं, आँखें लाल…और शरीर कमजोरी से काँप रहा था।उसे प्यास लगी थी…पानी की नहीं…खून की। उसकी नज़र बार-बार कृष्णा की गर्दन की नसों पर जा रही थी।

उसने सिसकते हुए कहा —
कृष्णा…मुझे डर लग रहा है…मैं तुम्हें नुकसान पहुँचा दूँगी…

लेकिन कृष्णा ने उसे और कसकर सीने से लगा लिया।

वो बोला - 
तुम ऐसा कभी नहीं करोगी…

वो बार-बार उसके चेहरे को चूमने लगा…उसका माथा…उसकी आँखें…उसके आँसू…जैसे वो उसे यकीन दिलाना चाहता हो वो अब भी वही सिद्धिका है जिससे वो प्यार करता है।।सिद्धिका उसकी शर्ट कसकर पकड़कर रोने लगी।

वो बोली - 
मैं बहुत प्यासा महसूस कर रही हूँ…

उसकी आवाज़ टूट रही थी। उसने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया…

और फुसफुसाया—
अगर तुम्हारी प्यास मेरी वजह से शांत होती है…तो मुझे कोई डर नहीं…।

सिद्दिका चीखी -
नहीं!

वो तुरंत पीछे हट गई। क्योंकि वो उससे प्यार करती थी। और उसी वजह से उसका खून नहीं पी सकती थी।

🔥 अब सबसे कठिन लड़ाई शुरू हो चुकी है—
🩸 सिद्धिका अपनी असली प्यास से लड़ रही है…
❤️ और कृष्णा उसके लिए खुद को भी दांव पर लगाने को तैयार है…

👉 क्या सिद्धिका खुद को रोक पाएगी?
या प्यार से बड़ी उसकी प्यास साबित होगी…?