Jinnat ki dulhan-13

 

श्याम का वक्त था..!
सुल्तान के चेहरे पर 12:00 बजे हुए थे!
उसे लग रहा था कि खलील की परेशानी का हल ढूंढ निकालेगा!
मगर !
उसकी यह सोच बचकानी साबित हुई थी.!
खलील ने जब उसे आगाह करते हुए कहा! कि आप जिन्नात के रास्ते में रुकावट नहीं बनेंगे..!
और मैं आपको खोना नहीं चाहता..!
तब सुल्तान अपने आप को कितना लाचार समझने लगा.!
चाह कर भी वह बेटे की मदद नहीं कर सकता था.!
हर एक कदम पर जिन्नात निगाहे गड़ा कर बैठा था.!
मगर फिर भी सुल्तान को खलील की बात अच्छी नहीं लगी.!
अपने खून को इस तरह हालात से जूझता हुआ सुल्तान नहीं देख सकता था.!
फिलहाल उसने खलील की बातों को नजरअंदाज कर दिया था.!
मन ही मन वह चाहता था !
कुछ तो जरूर करना है.!
फिर चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए.!
इस जिन्नात को गुलशन के शरीर से अलग करके ही छोडूंगा..!
क्योंकि अभी गुलशन के कमरे का नजारा देखकर आई उनकी बेगम ने बताया!
पूरा कमरा उत्तर की खुशबू से महक रहा है!
जमीन पर दस्तरखान बिछाया गया है.!
सुराही में गुलाब जल रखा है पानी का एक बड़ा जग भी.!
एक थाली में गोश्त की तरकारी परोसी गई है..! नमक की गुड सब रखा है.!
और दस्तरखान पर गुलशन नजरें झुका कर इंतजार कर रही है..!"
बेगम की बात सुनकर सुल्तान से रहा न गया.!
वह घर से बाहर निकल गया.!
परेशान सा खलील इस वक्त अम्मी के पास बैठा था..!
वह नहीं चाहता था कि अम्मीजान किसी बात को दिल पर ले..!
उनका दिल बहुत ही कमजोर था.!
खलील समझ गया था गुलशन को छेड़ने का मतलब था !
अपनी ही जान अपने ही हाथों से गवा देना.!
अब वह हार गया था!
शायद अपनी किस्मत में यही लिखा था! गुलशन का होकर भी वह उसका नहीं था.!
और जिया उसकी होकर भी उसके साथ नहीं थी.!
सर भारी हो गया था थकान महसूस हो रही थी !
खलील ने अम्मी जान के अंक में अपना सर रख दिया.!
गहरी सोच में डूबी उसकी मम्मी खलील को सहेलाती रही.!
परेशान मत हो बेटा अल्लाह कुछ न कुछ रास्ता जरूर दिखाएगा..!
उस पर यकीन न होना अच्छी बात नहीं! दुनिया में शैतान है ,उसका मतलब यह नहीं है की शैतान पर किसी का बस नहीं.!
उसकी भी मर्यादाए होती है कुछ ना कुछ उसकी भी कमी होगी.!
खुदा की बनाई सल्तनत पर वह अपनी मर्जी के मुताबिक बुराइयों का ढेर नहीं लगा सकता..!
उस पर भरोसा रख मेरे बच्चे !
दो हाथ जोड़ कर उससे मदद मांग..!
जैसे नमाजो में मैं सब की हिफाजत मांगती हूं..!
अम्मी जान की बात सुनकर खलील का मन हल्का हो गया था!
सुल्तान कुछ कदम ही चला था कि एक चरवाहा दौड़ता हुआ आया.!
उसने 4 कीले देते हुए कहा.!
यह किले अपने घर के चारों कोनों पर लगा दो.!
फिर एक छोटी सी प्लास्टिक बैग आगे करते हुए कहा!
" इसमें जो दाने हैं उनको अपने घर के हर कमरे में बिखेर देना.!
याद रहे एक भी दाना घर से बाहर गीरे..!
"यह सब तुम्हें किसने दीया..?"
सुल्तान ने चरवाहे को पूछा!
"छीस... स..! "
उसने अपने होठों पर उंगली रखकर चुप रहने का इशारा किया.!
उसका अंदाज ऐसा था सुल्तान जैसे ठीठक गया.!
देखते ही देखते चरवाहा गायब हो गया!
उसने सरसों के दाने वाली प्लास्टिक बैग को घर में ले जाकर अलमारी में रखा.!
हथौड़ी ढूंढ कर वह सीधा चुपचाप बाहर आ गया.!
और तेजी से घर के पिछले हिस्से की तरफ भागा.!
पिछले हिस्से के एक कोने पर उसने कील ठोकना आरंभ कर दिया.!
अपना काम तेजी से कर रहा था फिर भी लगातार वह इधर उधर देख रहा था.!
उसका मन बहुत उचाट में था!
दूसरी किल दरवाजे के राइट कोने पर ठोकने लगा.!
हथौड़ी की आवाज गूंज रही थी!
खलील दौड़ता हुआ बाहर आया.!
"अब्बा क्या है यह सब..?"
खलील की आंखों में साफ-साफ खौफ महेसूस सो रहा था..!
अब्बा प्लीज आप रहने दें कुछ ना करें..!"
सुल्तान ने खलील के सामने आंखें तरेरी! और चुप रहने का इशारा दिया!
खलील  अब्बा के मन का इरादा भाग गया था!
वो जानता था, अब्बा के इरादों को बदल ने का मतलब था,
पहाड़ को अपनी जगह से हिलाना.!
सुल्तान जब घर के लेफ्ट कॉर्नर पर कील ठोकने लगा!
तब..!
एक दर्दनाक चिख सुनकर बाप बेटे दोनों का कलेजा जैसे निकल गया.!
चीख अपने कमरे से आई थी.!
सुल्तान ने चीखते हुए कहा!
जा अपनी मां को संभाल..! आखरी किल ठोककर मैं आता हूं..!
अब्बू पर धुआपुंआ सा होकर खलील माँ के कमरे की ओर भागा!
सुल्तान की सांसे तेज हो गई थी!
वह समझ गया थी, जिन्नात ने अपनी हरकतों को अंजाम देना शुरू कर दिया है!
और तब सुल्तान जान की बाजी तक लगाने को तैयार था!
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चिख सुनते ही खलिल की मानो जान निकल गई.!
एसे हालात मे अम्मीजान को अकेले छोडने पर उसे अपने आप पर बहोत गुस्सा आया.!
वैसे भी वो सारा राज जान चूकि थी.!
यकिनन उनके दिमाग मे खलबली मची हुई होगी.!
जिन्नात का हमला उनपर नागवार गुजरेगा..!
खलिल मानो उनके कमरे मे एसे आया जैसे कोई छलावा.!
कमरे मे अम्मीजान को न पाकर सख्ती से उसके जबड़े भीच गये.!
"कहा गई.. अम्मी..?  चीख तो ईसी कमरे में गुंजी थी.?"
खलिल का दिल धाड धाड से बज रहा था.!
  खुद को उसने ईतना परेशान कभी नही पाया था.!
बस एक पल के लिये ठीठका था वो.!
कुछ सोचा!
दुसरे ही पल फस्टफ्लोर पर ले जाने वाली सिढीयां पर तेजी से भागा!
गुलशन के शरीर पर हावी जिन्नात अम्मी को किस कमरे मे ले गया होगा  खलील के लिये वह ताडना मुश्किल था!
ऊपर आमने-सामने दो कमरे थे !
अनायास ही कुछ सोच कर उसने राइट कमरे के डोर को हल्की सी जुंबिश दी!
सामने ही एक बड़े मखमली सोफे पर खलील की मम्मी आराम से बैठी हुई थी!
"आजा मेरे बच्चे इतना घबराया हुआ क्यों है..?"
"मां तुम यहा पर..? मैंने तो..?"
"तुमने क्या..?"
"बेटे..! गुलशन वाले कमरे मैं अचानक मैं गई तो वहां कहीं मुझे गुलशन नजर नहीं आई..!
वैसे भी तुम दोनों बाप बेटे की बात सुनकर मैं काफी परेशान थी..!
ऊपर से गुलशन को ना देख कर मेरा सिर फटने लगा !
गुलशन को ढूंढती हुई मैं ऊपर चली आई !
इधर उधर दोनों कमरे में देख लिया!
और वह कहीं न मीली !
आखिर थकान की वजह से बैठ गई यहां पर..!
पर मुझे बोल देती मां तुम क्यों इधर-उधर भागी..?
मेरी तो जान ही निकल गई थी..!
फिर तुम कह रही हो गुलशन अपने कमरे में नहीं थी तो फिर..?
समीर आगे की बात मन में ही घटक गया, क्योंकि उसको लगा अम्मी कहीं डर न जाए..!
तो फिर क्या मेरे बच्चे..!
"कुछ नहीं मां तुम नीचे चलो उसको मैं ढूंढ लूंगा..!"
तुम्हें एक बात बतानी है बेटे..!
"क्या बात है बोलो..?"
तुम्हारे अब्बा जी को मना करने के बावजूद वह जिन्नात के खिलाफ जालसाजी कर रहे हैं नतीजा यह निकला है कि गुलशन गायब है..!
खलील को अब्बा जान का यह कार्य अच्छा नहीं लगा !
उसके चेहरे पर नाराजगी छा गई..!
मेरे बच्चे मैंने भी उनको मना किया था कि तुम अब इस लफड़े में मत पड़ना,
इससे दूर रहकर अपनी जान बचाना,
मगर उन्होंने मेरी एक न मानी..!
कुछ किले अभिमंत्रित करके ले आए और अपने मकान के कोने कोने में लगाने लग गए हैं !
दूसरी एक प्लास्टिक बैग में अभिमंत्रित सरसों के दाने हैं.!
जो उन्होंने फ्रिज के ऊपर या फिर अलमारी में रखे हैं..!
तू एक काम कर मेरे बच्चे..!
बात आगे बढ़े और मामला अपने हाथ में ना रहे उससे पहले वह प्लास्टिक की थैली को बाहर फेंक दें..!"
"ठीक है माँ, वह मैं फेंक देता हूं ,मगर तुम मेरे साथ नीचे चलो..!
"मैं चल रही हूं तुम्हारे साथ, मेरा हाथ पकड़ लो तुम..!"
खलील अम्मी का हाथ पकड़कर सिढीया उतारने लगा!
काश उसने ठीक सामने वाले कमरे  में देखा होता है.!
उसको इतनी बात समझ में आ जाती की फिलहाल हम जिन्नात के साए में हैं!
तो पूरा माजरा समझ मे आ जाता!
जिन्नात ने उसके साथ गेम खेला था..!
अम्मी को नीचे अपने कमरे में लाकर बेड पर बिठाया.
तभी उसकी नजर अलमारी मैं रखी प्लास्टिक बैग पर गई .
तपाक से उसने वह बैग उठा ली
हां वही है उसे बाहर कचरे में डाल दो..!
जब खलील प्लास्टिक की छोटी बेग को लेकर कमरे से बाहर निकला तब अम्मी जान की आंखों में गजब की चमक उमड़ आई थी.!
काश उस वक्त एक नजर से उसने अपनी मां का चेहरा देखा होता.!
अलबत वह जिन्नात से टकराव नहीं चाहता था!
इसीलिए उसको अब्बा की हरकतें खटकने लगी थी!
अब बाकी समझ में कुछ आए उससे पहले वह इस प्लास्टिक बेग को  गूम कर देना चाहता था!
जैसे ही वह मेन डोर तक पहुंचा.!,
उसने सामने सुल्तान खडा था!
सुलतान का चहेरा गुस्से से सुर्ख हो गया था!
"अब्बा...?"
खलील का हाथ कांपने लगा था.!
सुल्तान की नजर उसके हाथों में जकड़ी हुई प्लास्टिक बैग पर थी..!
"तुझे क्या लगता है तुम लोगों को खतरे में डालने के लिए मैं यह सब कर रहा हूं?
सुल्तान के शब्द जैसे आग उगल रहे थे!
बोला-
अगर कुछ भी ना किया तो वह गुलशन के साथ साथ हम सबको ले जाएगा.!
मैं बस मेरे परिवार की हिफाजत कर रहा हूं!
फिर चाहे उसमें मेरी जान क्यों ना चली जाए...!
खलील की आंखें बरस पड़ी.!
कि तभी ठीक उसके पीछे गुलशन ठहाका लगाकर हस रही थी!
अपने दोनों हाथों से तालियां बजा रही थी..!
खलील ने गुलशन को देखा!
उस ने एक ही झटके से खलील की गर्दन दबोच ली..!
सुल्तान चीखा था!
"अपने हाथ वाली प्लास्टिक बैग मुझे दे दो..!"
खलील ने छटपटाते हुए ,पैरों को पटक ते हुए छोटी सी बैग को सुल्तान की ओर फेंका.!
सुल्तान ने उसमें से कुछ दाने फर्श पर बिखेर दिए..!
तभी गुलशन खलील को छोड़कर पीछे हट गई.!
और वह खडी दीवार पर चलने लगी.!
दीवार पर चलते हुए देखकर खलील की आंखें फटी सी रह गई!
गुलशन ने इस तरह खलील को देखा जैसे अब वह सीधे चैलेंज दे रही थी..!
सुल्तान बेग मे मौजुद बाकी दानों के साथ सभी कमरों में घूम गया.!
फिर तेजी ऊपर की सीढ़ियां चढ़ने लगा.!
खलिल की अम्मी बेहोश होकर बेड पर लुढ़क गई थी!

                       ( क्रमश:)
साबीरखान
9870063267

           

 

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