Phir bhi Shesh - 13 by Raj Kamal in Hindi Love Stories PDF

फिर भी शेष - 13

by Raj Kamal Matrubharti Verified in Hindi Love Stories

सुबह छत पर गुनगुनी ‘धूप—छांव' में उन्होंने चाय पी। रितु भी उनके साथ थी, लेकिन पढ़ाई के दो—चार औपचारिक प्रश्नों के उत्तर देकर, ‘सॉरी आण्टी! मुझे जाना है...शाम को मिलती हूं।' कहती हुई जल्दी ही चली गई। सुखदेव तो ...Read More


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