द लास्ट हार्टबीट -9

Episode #9

आधे घंटे बाद रिया कमरे से बहार आई ।उसने चारो तरफ देखा पर अजय कही दिखाई नही दे रहा था । आज पहली बार उसकी आँखें अजय को देखने के लिए तड़प रही थी पर जब अजय कही नही दिखा तब रिया ने राधिका से अजय के बारे में पूछा । राधिका ने बताया कि उसे कोई काम आ गया था इस लिए वह चला गया लेकिन रिया जानती थी कि अजय वहां से क्यो चला गया था पर वह चुप रही। शादी सम्पन्न हुई । रिया अपने होस्टल रूम वापिस आई ।

दो दिन तक अजय न ही रिया से मिलने आया और न ही उसने फ़ोन किया और ना ही रिया का फोन उठाया । तीसरे दिन भी जब सुबह अजय नही दिखा तब रिया सीधे अजय के घर पहोच गई । उसने घर का डोरबेल बजाया। वह मन ही मन चाह रही थी कि अजय डोर खोले और यही सोचते हुए उसने अपनी उंगलियों को क्रॉस किया पर जब दरवाजा खुला तो अजय की जगह अजय की बड़ी बहन राधिका ने दरवाजा खोला । रिया के चेहरे पर मायूसी तो आई पर फिर हँसते हुए हाय कहा । राधिका ने भी हाय कहा और उसे अंदर आने को कहा । रिया घर के अंदर आई । उसने घर की सुंदरता को निहारते हुए कहा -

"नाइस हाउस । "

" थेंक्स , कुछ दिनों में तुम्हारा ही होने वाला है "

राधिका की यह बात सुनकर रिया के चेहरे पर एक फिक्की हँसी आ गई । रिया की नजर अजय को ढूंढ रही थी , तभी राधिका गुलाब के पौधों में पानी डालते हुए बोली -

" तुम जिसे ढूंढ रही हो वो तुम्हे यहां नही मिलेगा "

राधिका की आवाज सुनकर रिया चोक गई और उसके मुंह से निकल गया -

"हहह ! ओह्ह ! नही बस यूं ही घर देख रही थी । "

"तुम्हे किसीने बताया नही जुठ बोलने मैं फुद्दू हो । "

"दोनो भाई बहन एक जैसा ही सोचते है । "( रिया ने खुदसे ही कहा )

रिया ने बाल्कनी में रखे अन्य पौधों को देखा जिसमे से कुछ सुख गए थे पर तब भी राधिका उसमे पानी डाल रही थी यह देख रिया ने कहा -

" दीदी यह पौधे तो सुख गए है तब भी आप पानी दे रही है ।"

" दीदी में सिर्फ अजु की हु सो डोन्ट कॉल मी दी और रही यह पागलपन की बात तो यह आपके पागल आशिक की देन है जरा गौर से देखो इन गुलाबो को , यह सारे वही गुलाब है जिन्हें तुमने फेक दिया था तो उनकी डालियो को लगाकर रोज पानी देता है , जबकि यह सब सुखते जा रहे है । जब मैंने तुम्हारी ही तरह इस पागलपंती के बारे में पूछा तो जानती हो उस पागलने क्या कहा ? "अगर किसी को सच्चे दिल से प्यार दो तो वो भी हार कर अपनी फितरत बदल देता है और यह तो है ही मोहब्ब्त की निशानी है इसे तो खिलना ही है । " में भी इस पागल की बात मानना नही चाहती थी पर जब आज सुबह एक गुलाब का फूल इस सूखे डंडे से निकल आया तो उसके यकीन को देखकर मजबूरन उसकी बात पर यकीन करने को दिल करता है । पर वो बेवकूफ यह नही जानता कि लोगो को अपनी सासो का भी भरोसा नही है तो लोग मोहब्बत पर कहा से भरोसा करेंगे । "

रिया उन गुलाबो को कुछ पल के लिए देखती रही और फिर बोली -

"अजय कहा है ?"

"तुम्हे पता है में तुमसे बहोत ही नफरत करती हूं क्योंकि तुम्हारी वजह से मेरा भाई मोत के मुंह में चला गया था मगर अजय की मोहब्बत मेरी नफरत से कई गुना ज्यादा है , इस लिए एक गुजारिश करना चाहूँगी की अजय सिर्फ मोहब्बत पर भरोसा करता है वह सोचता है कि मोहब्बत सब कुछ बदल सकती है उसके भरोसे को कभी मत टूटने देना । बस इतनी सी गुजारिश है और अजय जब भी दुखी होता है तब वह वासिन्ध के अनाथाश्रम चला जाता है वह तुम्हे वही मिलेगा । "

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जगह :वासिन्ध अनाथाश्रम ।

समय : दुपहर के 4 :15 बजे ।

रिया वासिन्ध के अनाथाश्रम में पहोंची । आश्रम के मैदान में कुछ बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे । रिया ने देखा की अजय भी उन्ही बच्चों के साथ फुटबॉल खेल रहा था । रिया ने अजय को देखा और बस निहारती रही , उसने पहली बार अजय के चेहरे के तरफ देखा । वह इतना भी सुंदर नही था कि हर लड़की उसपर जान छिड़के । सामान्य सा चेहरे का , धनी काली और भूरे रंग की मिश्रित आँखे , लंबगोल मुख ,क्लीन शेव फेस और गुलाबी होठ । कद काठी सामान्य और एस .आर. के. हेयर स्टाइल थी । तभी अजय की नजर रिया पर पड़ी जो उसे खेलते हुए निहार रही थी । अजय के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई । वह दौड़ कर रिया के पास आया और बोला -

" तुम और यहां ? लगता है मेरे बिना तुम रह नही पाई इस लिए मुझे ढूंढते ढूंढते यहां तक आ गई हो क्यो ?"

" ओह हेलो ! ज्यादा दिन में तारे मत गिनो , में तो बस यह देखने आई थी कि शर्त हारने के बाद तुम कहा रह रहे हो । बहोत ही फेक रहे थे न कि वैलेंटाइन वीक के 7 दिन में मुझसे आई लव यू बुलवा के दिखाओगे पर 3 दिन में ही लाइन पे ला दिया न , नाम याद रखना - रिया खुराना "

रिया जाने ही वाली थी कि अजय ने उसकी कमर पे हाथ डालके उसे अपने बाहो में लिया । चेहरे को रिया के कानों के पास ले गया और कहा -

"तुम्हे पता है न कि तुम जुठ बोलने में एकदम फुद्दू हो तो क्यो जुठ बोलती हो । और इन 48 घंटे में तुमसे दूर ही कहा था । हर पल तुम्हारी आँखे मुझे ही ढूंढ रही थी । तुम्हारा दिल मेरे बारे मे ही सोचकर बेचेन हो गया था और मैडम इसे भी प्यार ही कहते है । "

रिया अजय की बाहों में से अलग हुई और गुस्से से अजय को देखने लगी , तभी अजय ने फिक्की हँसी के साथ कहा -

"शर्त थी इसलिए मोहब्बत नही है , मोहब्बत है इसलिए शर्त थी । भले ही शर्त खत्म हो गई पर प्यार आज भी में तुमसे ही करता हु ।"

अजय कुछ पल के लिए रुका और रिया की तरफ देखता रहा , फिर हाथ बढ़ाते हुए मुस्कुराकर बोला -

"जीत मुबारक । "

अजय ने यह बात जिस अंदाज में कही की रिया आगे कुछ न बोल पाई और वहां से चुपचाप मुड़कर बस स्टेशन की तरफ जाने लगी , तभी अजय ने कहा -

"बस स्टेशन जा रही हो तो कोई फायदा नही इस समय कोई बस मुंबई नही जाती । "

रिया यह सुनकर चौककर मुड़ते हुए बोली -

" व्हाट ? क्या बकवास कर रहे हो ?"

" बकवास नही हकीकत बया कर रहा हु मोहतरमा , कल सुबह से पहले मुंबई के लिए इस गाँव से कोई बस नही मिलने वाली । "

"ओह माय गॉड ! अब मैं क्या करूँगी । "

"क्या- क्या करूँगी ? इसी आश्रम में मेरे साथ यहां रह जाओ, कल सुबह होते ही चली जाना । "

रिया ने गुस्से में कहा -

"तुम्हारे साथ ? वो भी एक ही छत के नीचे ? नो वे (no way) । "

"तो क्या शादी के बाद पड़ोसी के घर में रहती । "

रिया ने अजय के बाल नोचने वाली हो ऐसी मुद्रा बनाई तभी वहां पर चालीस -पचास साल की औरत आ गई जिसे देखके दोनो ने जगड़ना बन्द कर दिया । वह बूढ़ी औरत असल में उस आश्रम की संचालिका थी । वो अजय की तरफ देखकर बोली -

"अजु यह लड़की कौन है ?"

" जेसिका मैम यह रिया है । " अजय आगे बोलने ही वाला था कि जेसिका मैम ने बात काटते हुए कहा -

"ओह्ह ! तुम्हारी गर्लफ्रैंड है ? "

रिया यह सुनकर तिलमिला उठी और मुह बनाया तभी अजय ने मुस्कुराते हुए कहा -

" नही मैडम सिर्फ अच्छी दोस्त है । ( यह सुनकर रिया ने चौक कर अजय की तरफ देखा ) वो इसकी बस मिस हो गई है । "

जेसिका मैडम ने यह सुनकर रिया के सामने देखा और कहा -

" कोई बात नही बेटा तुम आज रात यही रुक जाओ , सुबह होते ही चले जाना ओके बच्चा ।"

जेसिका मैम की बात में रौब था या प्यार था , यह पता न चला पर कुछ तो बात थी जो रिया ने आनकनी किये बिना ही हाँ कह दिया ।

तीनो आश्रम की तरफ बढ़े और रिया यह सोच रही थी कि अजय ने उसे दोस्त कहा तो उसे बुरा क्यो लग रहा था ।

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जगह : आश्रम

समय : रात के 9:30 बजे

खाना खाने के बाद अजय सभी बच्चों को कहानी सुना रहा था । असल में वह जब पहली बार रिया को कैफ़े में मिला था वो किस्सा सुना रहा था की कैसे उसने रिया के चेहरे पर मुस्कुराहट लाई थी । वो बता रहा था पर उसे यह नही पता था कि अजय की सारी बात रिया सुन रही थी । जब कहानी खत्म हुई तभी एक छोटी बच्ची रिया की तरफ उंगली करके बोली -

"क्या वो लड़की इस दीदी से भी ज्यादा खूबसूरत थी ?"

अजय ने पीछे मुड़कर देखा तो रिया दोनो हाथ अदब में लगाये खड़ी थी । इस समय उसने सलवार कमीज पहना था । अजय ने रिया को देखते हुए ही कहा -

" हाँ वो लड़की इससे भी ज्यादा खूबसूरत थी । ( अजय ने बच्चों की तरफ देखा ) बच्चों अब सो जाओ वरना जेसिका मैम डाँटेगी । "

सारे बच्चें अपने अपने बेड पर चले गए । रिया अजय के पास आई और बोली -

" तो कैफ़े मैं फ्लावर बॉय तुम थे? ( अजय ने मुस्कुराते हुए दूसरी तरफ देखा ) और एक बात बताओ तब मैं तुम्हे ज्यादा खूबसूरत दिख रही थीं तो अब क्यो नही ?"

अजय अपने रूम तरफ जाते हुए बोला -

" क्योकि आखिर में तुम मुस्कुरा रही थी । "

यह सुन रिया पहली बार दिल से मुस्कुराई । उसने अजय की तरफ देखा और कहा -

"कहा जा रहे हो ? "

"कुछ आर्टिकल खत्म करने है वरना लोग भी मुझ पर ग़ालिब मिया का वो शेर अर्ज़ करेंगे कि " मोहब्बत ने निक्कमा कर दिया गालिब वरना आदमी बड़े काम का था । "

"अच्छा एक बात पूछू "

यह सुन अजय रिया के पास आकर बोला -

" कहो ! "

" सपोज की ..... देखो मानना ही है । "

"अब बोलोगी भी । "

"ओके ओके । अगर चैलेंज ऑन होता तो तुम आज क्या करते "

"ओके । "

यह कहकर अजय ने रिया को अपनी बाहों में ले लिया और बोला -

" हैप्पी हग डे ! "

अचानक अजय ने बाहो मैं ले लेने से रिया को गुस्सा आया और अजय को अपने आप से दूर करते हुए बोली -

"यह क्या कर रहे हो ? तुम तो बस मौका मिला तो एडवांटेज लेने की ही सोचते हो । "

"तुम भी न , ट्रस्ट मी कुछ नही करूँगा । इतने दिन साथ थी तो कुछ गलत किया क्या मैंने ? "

रिया ने ना में सर हिलाया ।

"सो हग मी । "

रिया ने थोड़ा अनकंफर्टेबल होते हुए अजय को अपनी बाहों में लिया । फिरसे अजय ने कहा -

"अब अपनी आँखें बंद करो "।

"क्यो ?"

तुम बार बार सवाल क्यों कर रही हो ? जितना कहा है उतना करो ।

"ओके "(रिया ने अपनी आँखें बंद की )

अब आसपास की सभी चीजों को भूलकर बस महसूस करो ।

कुछ देर तक रिया ने वही किया पर उसे कुछ महसूस नही हुआ तब वह बोली -

'अजय कुछ महसूस न... " वह बोलते बोलते रुक गई ।

धक -धक धक-धक धक-धक

उसे दिल की धड़कनें महसुस हो रही थी. उसने कहा-

"यह तो दिल की धड़कनें है । पर .... " उसे एहसास हुआ कि वह धड़कने उसकी खुद की नही बल्कि अजय की है । वह अजय के दिल की धड़कनों को साफ महसूस कर पा रही थी । अजय ने कहा -

"कहते है आप जिनसे प्यार करते हो उनकी दिल की धड़कने सुकून पहोचाती है । यह अहसास दिलाती है कि उसकी हर धड़कन पर बस मेरा नाम है , मेरा हक है और यह मोहब्बत दिल की आखरी धड़कन तक बरकरार रहेगी और मेरी धड़कन पर सिर्फ तुम्हारा नाम है , तुम्हारा हक है और मेरी मोहब्बत भी इस दिल की आखरी धड़कन तक सिर्फ तुम्हारे लिए रहेगी "

रिया सब सुनकर महसूस कर रही थी और उसने अजय को कसकर बाहो में ले लिया हुआ था और अभी भी उसकी आँखें बंद थी । अजय ने रिया को आवाज दी पर रिया अभी भी उसी अहसास में थी । अजय ने खुद को रिया की बाहों से दूर किया। यह रिया को अच्छा नही लगा और अजय ने फिक्की मुस्कुराहट के साथ गुड नाईट कहा और अपने रूम के तरफ चल दिया और रिया उसे जाते हुए देखती रही ।

( क्रमश: )

हेलो दोस्तो सबसे पहले तो माफी चाहता हु की अगले शनिवार को तबियत खराब होने के वजह से एपिसोड 9 पब्लिश न कर सका।  मेरी कहानी को इतना पसंद और प्यार देने के लिए थैंक यू सो मच और आगे भी इसी तरह का प्यार इस कहानी को देते रहिएगा  और आप को यह कहानी कैसी लगी यह भी बताए और क्या पसंद नही आया यह भी बताए मेरे व्हाट्सएप पर और 30 january को मेरा जन्मदिन  है तो अगर आप  मुझे जन्मदिन की बधाई देना चाहते है तो आप मुझे व्हाट्सएप पर दे सकते है  फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए अलविदा ।

WHatsapp no: 8347587193

- Aryan suvada

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Rjpatel 4 months ago

Priya Mangukiya 4 months ago

Sanjana Dwivedi 5 months ago

nice

Gohil Kishor 6 months ago

Komal Tejani 6 months ago