तेरे प्यार की कसम - 2 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 2

तेरे प्यार की कसम - 2

आयशा की आँखों मे दर्द के साथ साथ आँसू भी बह चले  थे  आचानक उसे किसी की आवाज सुनाई दी  
राज : मैं  आ गया आफिस से 
आयशा ने खुद को संभाला उस फोटो  को वापिस उसी दीवार मे लगा दी और बहार  निकल गयी उसने दरवाजा बंद  किया कडी लगायी  जैसे ही वो  मुढ़ी निचे  से राज उपर देख रहा था आयशा ने एक पल उनको देखा  फिर अपने कमरे मे चली गयी   
राज उसे जाते हुए  देख रहा था 
किचन से आवाज आयी  : आप हाथ मू धो  लिजिए थोड़ी  देर मे खाना बन जाएगा   
राज  आयशा के कमरे की तरफ देखकर :हम्म  
अपने कमरे मे चले जाते है 
आयशा अपने कमरे मे बेड मे बैठी हुई आचानक उसे किसी की आवाज  आयी 
राज : बेटा  मे अंदर आऊ  
आयशा ने बहार देखा : पापा आप आयीए ना आपको    परमिशन की क्या  जरुरत है    
राज अंदर  आके आयशा  के बगल मे बैठ  गया   
राज आयशा से :  बताओ बेटा  क्यों  परेशान हो  
आयशा झूठा  मुस्कराते  हुए : नही पापा मे परेशान नही हूँ  
राज:  देखो बेटा  मे तुम्हारा बाप हूँ  मुझे सब पता है  
आयशा फीकि तरह मुस्कराते हुए  : जब आपको पता है डेड फिर क्यों  पूछा  
राज : बेटा जो हुआ उसे भूल जाओ आगे बडो़    , जरुरी नही है जो उसके साथ हुआ वो तुम्हारे साथ भी हो सबके साथ  अलग होता है     
आयशा : भूलने  की बहुत कोशिश करती हूँ  मेरी वजह से किसी की जान गयी है कैसे  भूल जाऊँ
राज : बेटा जो भी हुआ  उसमे तुम्हारी गलती नही थी 
हम भी भूल गए है तुम्हें  भी उन सब चीजों को भूला कर आगे बड़ना चाहिए   
आयशा : जी पापा 
राज : हम्म  मेरी बेटी  बहुत  मजबूत है चलो निचे खाना खाने 
आयशा : जी पापा
दोनो  खाना खाने नीचे चले गए
सबने खाना खत्म किया और अपने कमरे की तरफ चले गए
आयशा पेंटिंग रूम मे चली गयी  उसके   हाथ मे माचिस थी उसने दक्खि  हुई पेंटिंग  को निकाला अपने  सामने रखा और जाला दी
आयशा ने जलती हुई पेंटिंग को देकर : बकवास है ये सब
कुछ देर तक वो उस  पेंटिंग को देखती रही फिर अपने कमरे मे चली गयी 
आहना जानती  थी की आयशा ने कौनसी पेंटिंग जलाई है
आहना अपने मन मे : दी कब तक आप ऐसे जीती रहोगी जो होना था वो हो गया अब आपको समजना ही होंगा ऐसे हर रोज पेंटिंग बना कर फ़िर उसे  जला कर क्या मिलेगा
कोइ तो ऐसा होगा जो मेरी दी को इस दर्द  से बहार निकालेगा कोई  तो  होगा जो दी को दुबारा  प्यार करना सिखाएगा
आयशा अपने कमरे मे  आयी और लेट गयी
तब तक किसी का फोन आ गया
आयशा ने फोन उठाया
आयशा: हाँ अंजली
अंजली : याद  है ना तुझे कल मेरे मामा को लेने जाना है
आयशा: हाँ याद है
अंजली: हम्म ठीक है
आयशा: तैयारी कैसी चल रही है
अंजली: अच्छी  चल रही  है सुन आयशा मै  डांस प्रैक्टिस के लिए आऊँगी  और कॉम्पिटिशन मे भी आऊँगी
आयशा: नही  यार कोई बात नहीं तेरी शादि है तू  मजे कर आहना है ना तेरे बदले
अंजली : ना मै तो  आऊँगी  ये मेरा भी सपना है  तेरे अकेले का सपना नहीं है हम सब का है
आयशा: पर
अंजली उसे तोकते हुए :  कहा ना मै आऊँगी और वैसे भी शादि बाद मे  कॉम्पिटिशन  पहले अब कुछ मत बोलना
आयशा: ठीक है
अंजलि: हम्म
अंजली (बडे़ प्यार से  )  थैंक यू
अंजली: किसके लिए  थैंक यू
आयशा: उसी के लिए
अंजली : देख मै तेरे लिए  कुछ  नही कर रही हूँ  जो तू  थैंक यू बोल रही है समझी बडी़ आई थैंक यू  बोलने वाली, हहहह
आयशा: अच्छा अच्छा  महारानी नही  बोलती बस
अंजली: हा तू तो चुप ही रहे   चल बाय  ख्याल रखना जागना बंद  कर ऊल्लू की तरह सो जा
आयशा: हाँ हाँ ठीक है बाय
फोन कट गया
आयशा सो गयी
लड़की (आँखों मे आँसू  लिए ): हम मिलेंगे जरूर मिलेंगे
लड़का (रोते हुए): हाँ मिलेंगे लड़के ने लड़की को अपनी बाहो मे पकडा़ हुआ था
लड़की  के पैठ के पास गोली लगी थी
लड़की: मे तुम्हारा इंतेजार करुंँगी
लड़का (रोते हुए): तुम कुछ मत बोलो तुम्हें कुछ नहीं होगा
लड़की की सांसे अटक रही थी
लड़का (रोते हुए): हम डॉक्टर के पास जायेंगे
लड़की (साँस अटकते हुए) नही मेरे पास .. समय नही है मे तुमसे ...  कुछ  कहना चाहती हूँ
लड़का (रोते हुए) कुछ मत बोलो
लड़की: मे ... तुम ... से बहुत ........
आचानक आयशा  नीन्द से उठी 
आयशा (हाफ़ते हुए): फ़िर से वोइ सपना कौन है  ये दोनो और  क्यो आते  है ये  मेरे सपने मे  क्या रिश्ता है इनका मेरे साथ क्यों बार बार दिखते है  सपनो मे जो लड़की है वो मै हूँ नही वो मै नही हो सकती पर वो कहती थी कि ये  मै हूँ
आयशा को यह  सपने  बचपन से आते थे जिनकी वजह से उसका सर दर्द भी हो जाता था
आयशा ने  बगल मे  देखा तो घडी़ मे 8: 00 बज गए थे वो उठी और  फ्रेश होने चली गयी
फ्लाइट 10:00 बजे  की थी
करीब 9 : 00 बजे थे
सब डाइनिंग टेबल मे  बैठ  कर नास्ता कर रहे थे 
आयशा: माँ पापा मे  अंजलि के साथ एयरपोर्ट जा रही हूँ 
औरत: ठीक है बेटा
सबने खाना खतम किया और निकल गये अपने  काम पे
राज: चलिए भाग्यवान हम भी चलते हैं
औरत: जी ठीक है शाम को जल्दी आ जाना
राज: जी
राज कार  मे बैठ  कर निकल गया
आयशा ने अंजली को फोन लगाया : अंजली कहा है तू
अंजली : तेरे पीछे
आयशा ने पीछे देखा : तू यहाँ  है तो फोन क्यों उठाया चल जल्दी वरना लेत हो जाएँगे 
अंजली  और आयशा दोनो गाड़ी मे बैठे
आयशा ने दरवाजा बंद  किया
अंजली : आयशा तेरा दुपट्टा फश गया
आयशा ने अपना  दुपट्टा अंदर ले लिया
आज आयशा ने पीले रंग  का सूट पेहना था साथ में लाल बॉर्डर जिसकी चुन्नी पारदर्शी होने के साथ साथ बेहद खूबसूरत थी  उसके  साथ सिल्वर कलर की चुडिया
उसने अपने लंबे बाल खोल रखे थे
  गाड़ी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी रास्ते  मे ट्रैफिक
जैम लगा था जिसकी वजह से उन्हें वहाँ  रुकना पडा़
थोड़ी देर बाद  वो  पहुँच गए
करीब  9: 45 हो गया था
गाड़ी एयरपोर्ट के सामने रुकी
आयशा और अंजलि बहार निकले और एयरपोर्ट के अंदर
जाने लगे  उसी दौरान  अंजली के  नीचे  आयशा का दुपट्टा आ गया  
अंजली (दुपट्टे को पैर से  दुपट्टे को  निकालते हुए   ): लगता है तेरा दुपट्टा आज बडा़ कांड  करेगा  
आयशा : कैसा  कांड
अंजली : अरे  तुने देखा नही है फिल्मों मे हिरोइन का दुपट्टा  उड़ता है और हीरो के पास आ जाता है...
(आयशा उसे घूरने लगी ) तो वो चुप हो गयी   
अंजली :  अच्छा सॉरी  
अंजली : अब चले अंदर 
आयशा  :  हाँ चल 
वो दोनों  अंदर चले गए फ्लाइट लैंड होने वाली थी   
कुछ देर बाद अनाउंसमेंट हुई
यातिरिगन कृपया ध्यान  दे अमेरिका से आने वाली फ्लाइट लैंड हो चुकी है ... धन्यावाद
वहा बहार आयशा और अंजलि को अंजली के मामा मिल गए और वो एयरपोर्ट  मे बाते करने  लगे
यहाँ  रघु का परिवार भी बहार आ गया
राजेश : पहुँच  गये हम इंडिया मेरे वतन मे
दादी : हाय कितने सालो के बाद हम यहाँ आये है
राजेश : चलो बच्चो तुम्हें मे अपना हिन्दुस्तान दिखाता हूँ 
मेरे वतन हिन्दुस्तान की बात ही अलग है
कही भी जाऊ पर यहाँ  की  संस्कृति  कही नहीं
वीर : ये फिर चालू  हो गए अमेरिका मे भी चैन से नही जीते थे अब इंडिया मे भी चालू हो गए
अभिनव  : ऐसा मत बोल पापाजी की फीलिंग जुडी है
  वीर : उनकी  फीलिंग के वजह से ही तो हम यहाँ सो कॉल्ड इंडिया  मे आए है
राजेश जी ने वीर की बाते सुन ली
राजेश जी ने उसे घूरके देख कर बोले  : वीर तुने क्या कहाँ  वीर हकलाते हुए  : क ..क...कुछ ना... ही.. पापा
राजेश  जी :  सुना मैंने  सो  कॉल्ड  इंडिया बेटा तुम ऐसे इसलिए बोल रहे  हो क्योंकि तुमने अभी इंडिया नही देखा  आओ तुम्हें दिखाता भी  हूँ और खिलाता  भी हूँ   
सब राजेश  के पीछे पीछे बहार चल  दिए   
वीर (रघु से): अब पता नही  क्या  गास पूस खिलायेंगे
रघु: चुप रहे चुपचाप चल
वीर: क्या भाई आप भी ना 
वीर की नजर इधर उधर देख रही  थी कही सुंदर  लड़की मिल जाए
अभिनव आगे  निकल चुका था
पीछे रह  गये थे  वीर और रघु
वीर आचानक रूक गया
रघु: अब तुझे क्या हो गया
वीर: भाई वो देखो कितनी सुंदर लड़की है
रघु ने उस  डायरेक्शन  मे  देखा जहाँ वो बता रहा था
वहा अंजली अंजली के मामा और आयशा खडे़ थे
वीर: दिखी आपको
रघु एक तक आयशा  को देखता ही रह गया
रघु: हा वोइ ना  जिसने  पीला  सूट पेहना है
वीर: नहीं वो नहीं, वो कुछ दूर खड़ी है ना वो (वहाँ आयशा से कुछ दूर एक लड़की खड़ी थी रेड  गाउन मे
  रघु आयशा को देख रहा था
आयशा खिलखिला के हँस  रही  थी
उसकी पीठ रघु की तरफ़ थी इसीलिए रघु को सिर्फ  उसके  बिखरे सुनहरे  घने लम्बे बाल दिखाई दे रहे थे और उसकी खिलखिलाती हँसी साथ मे उसकी चुडियो की आवाज़ 
उसे दुनिया दारी का कोई होश नहीं  था वो सिर्फ  आयशा को ही देखते रह गया
वीर: मुझे  तो लगा इंडिया मे हॉट लड़किया नहीं मिलेंगी  पर हे यार
भाई बात करु इससे पटेंगि या नही भाई बताओ ना
एयरपोर्ट के बहार
राजेश: कहा रह  गये ये दोनो
पता नही अब किसको  देख रहे  होगें अभिनव बेटा जाओ  दोनो को बुला के लाओ
अभिनव: जी पापाजी ( और चला गया )
दादी राज से: राज रघु ऐसा  नहीं है वो तो मेरा राम है
राजेश: हा पर वो वीर है ना वो ऐसी  वीरता कर सकता है
दादी: सही कह रहा है तू वो है  ही ऐसा
रंजना : हा बेटा किसका है तो जाएगा तो अपने  पापा पे ही ना
राजेश (रंजना को देखकर ): मतलब मुझपर गया है वो रघु है  मेरी तरहा  वो वीर पता  नहीं किसपे चला  गया 🤔
दादी रंजना को : मेरा बेटा ऐसा नहीं है  और पोता भी  समझी 
रंजना बड़बडा़ते हुए  : हाँ हाँ बोल तो ऐसे रहीं है जैसे मुझ पर गया हो   
दादी : कुछ  बोला तुने  
रंजना :  नही नही मे क्या बोल सकती हूँ  
राजेश उन दोनो को तोकते हुए  : आप दोनो चुप रहोगे कही भी चालू हो जाते है  
रंजना और दादी  ने एक दुसरे को घूरके देखा
एयरपोर्ट के अंदर  
रघु  तो आयशा को ही देखे जा रहा था उसने महसूस किया की उसका दिल  💕💖💖तेजी से दड़क रहा था  ऐसा  उसके साथ पहली बार हुआ था उसकी नज़र आयशा  से हठ ही नही रही थी एक पल के लिए उसकी दुनिया रूक सी गयी  थी  वो बस वही रूकना चाहता था  
रघु उसे बिना पलके  झपकाए देखे जा रहा था  उसके दिल को एक सुकुन सा मिल रहा था जबकी उसने  आयशा  का चेहरा भी  नही देखा था फिर भी  दिल  दड़के ही जा रहा था   उसे ना तो दुनिया का  होश था ना दुनिया वालो का  वो तो यहाँ  तक भूल गया था की वो  एयरपोर्ट मे है और उसका छोटा भी उसके  साथ है
वहाँ वीर उस लड़की के पास गया और बोला  : हैलो मिस  ब्यूटीफुल
लड़की ने एक पल के लिए उसको देखा फिर बोला  : हैलो 
वीर : मै अभी अभी  आया हूँ  इंडिया अमेरिका से क्या तुम मुझसे दोस्ती  करोगी 
जब तक वो अपना  सेंटेंस  कंप्लीट करता तब तक उस लड़की के पास एक लड़का आया  ओर लड़की के गले लग गया  लड़की ने उसे गालो मे किस किया  और निकल गयी 
वीर : हठ यार इसका तो बायफ्रेंड है  पोपट हो गया आते ही अब आगे पता नही  क्या होगा  आया ही क्यों 😣  इससे  अच्छा मे अमेरिका मे ही रहता अपने फैनस के साथ ( वो रघु के पास चला गया )
वीर : भाई  चलो मेरा  आते ही पोपट हो गया  😖😖  
रघु  तो एक तक आयशा  को देखे जा रहा था उसे कोई होश नही था की उसका भाई कुछ कह रहा है
वीर ने जब पीछे देखा तो वहाँ  पर  रघु  एक  जगह खडा़ था
वीर ( रघु को देख कर   ) : भाई  चलो ना अब आपको कौनसा भूत चढ़ गया है  
वहाँ  पर  अभिनव भी आ गया
अभिनव  :  तुम  दोनों कहाँ  रह गए  चलो जल्दी  
वीर : आ रहे है  (  रघु को देख कर  )भाई चलो  
अभिनव : रघु चल 
रघु ने  कुछ  नही कहाँ  वो बस देखे जा रहा था      
दोनो  ने उस  डायरेक्शन मे देखा जहाँ रघु देख रहा था पर वहाँ  पर कोई  नही था  
आयशा  वहाँ  से जा चुकी थी 
अभिनव ने  रघु को हिलाया पर फिर भी उसे होश नही आया   
रघु उस डायरेक्शन मे देखकर  मुस्कराय जा रहा था  
वीर जोर से बोला   : भाई  क्या  हुआ किसको देखके मुस्करा  रहे हो  
रघु  टस से मस नही हुआ  
अभिनव रघु के सामने  आया और उसे हिलाते हुए  बोला :   जागजा कहाँ खोया है   
रघु को होश आया  उसने देखा अभिनव सामने  खडा़ है      
रघु : तुम लोग यहाँ  
अभिनव :  फिर हमे कहाँ होना चाहिए था 
रघु : मै कहाँ  हूँ  
वीर:  जरा आस पास देखो अपने  
रघु  आस पास देख बोला  :  ओ ...  हाँ हम तो एयरपोर्ट मे है  भूल गया था 
अभिनव : अब चलो जल्दी पापाजी वेट कर रहे है   
वीर : भाई आप कहा खो गए थे   
रघु  ने उस  डायरेक्शन मे  देखा जहाँ  आयशा थी मुस्कराते हुए  बोला - कही नही चलो   
दोनो  को उसकी  मुस्कराहट अजीब सी लगी क्योंकि  आजतक वो  इस तरह  नही हँसा था और ना ही ऐसे एक  जगह पुतला बनकर  खडा़ था 
तीनों बहार चले गए  
लगेज एरिया  मे
आयशा: मामाजी आप बहुत हँसाते हो
अंजली के मामा : बेटा मे  दुखी  रहता हुँ ना इसलिये हँसाता हूँ
आयशा: कैसा  दुख
अंजली: हा मामाजी आपने  कभी  बताया नहीं आप को किस बात का  दुख  हो गया
अंजली के  मामा : अरे तेरी मामी मुझपर  बहुत जुलम करती  है दुख ही रहता हूँ  इसलिए सोचता हूंँ अपना दुख  कम करने के लिए  तुम लोगो की  हँसाऊ
अंजली: आप भी ना आपने  तो डरा ही  दीया था
चले अब
अंजली के मामा: हा बेटा चलो
वो सब बहार आए
बहार
राजेश  :  कहाँ  रह गये थे तुम दोनो 
वीर  :  कही नही पापा
राजेश :  अच्छा  अब आओ यहाँ मे तुम्हें गोलगप्पे खिलाता हूँ  
वो सब  गोलगप्पे वाले के पास चले गए 
राजेश :  भाईसहाब बडी़या से  गोलगप्पे   खिला दो 
गोलगप्पे वाले ने सबको दोने दिए पर रघु ने खाने से मना   कर दिया
राजेश :  क्यो बेटा क्यो  नही खाने तुम्हें   
रघु :   फ्लाइट मे खा लिया था भूख मित गयी 
दादी : भाई  मै तो खाँऊगी 
(गोलगप्पे वाले से  ) :  भैय्या जल्दी लाओ मू मे पानी आ रहा है  
(गोलगप्पे वाले ने उन्हे  एक  गोलगप्पा दिया और उन्होंने खा लिया  
राजेश :   माँ संभल के खाओ 
दादी ने कुछ सुना ही नही वो लगी थी ठुसने मे सब गोलगप्पे खाने मे व्यस्त थे वीर ने पहली बार खाया था
वो भी लगा था खाने मे एक के बाद एक 
  रघु कुछ  सोचे जा रहा था उसे आयशा की हँसी  ही  सुनाई  दे रही थी वो चाहाता था उसका चहरा  देखना वो यही  सब सोच  रहा था की  काश किसी तरह उस लड़की से बात हो जाती  
वहाँ पर  आयशा लोग  बहार निकल गए थे सब कार मे बैठ गए  
ड्राइवर समान रख रहा था
आयशा और अंजली  पीछे वाली सीट मे बैठे थे और मामाजी आगे वाली मे  बैठे थे  
अंजली  आयशा से : आयशा अब मेरी मेंहदी भी होगी उसके लिए कोई थीम सोच ना उसने नेट खोल दिया और 
सर्च करने लगी  
अंजली :  ये देख कैसा है 
आयशा : ना अच्छा नही है  दुसरा देख
अंजली :  ओकए 

वहाँ रघु  आयशा के ख्यालो मे ही खोया था
रघु : आप सब आ जाना मै कार मे हूँ ( वो रोड पार करके कार के अंदर बैठ गया 
वहाँ ड्राइवर  ने समान रख के गाडी़ स्टार्ट करने लगा पर गाडी़ स्टार्ट ही नही हुई
अंजली के मामा ड्राइवर से   : क्या हुआ गाडी़ स्टार्ट नही हो रही
ड्राइवर : नही सहाब लगता है खराब हो गयी है
अंजली : अब क्या करे
अंजली के मामा  :  क्या कर सकते है चलो ऑटो से ही चलते है
अंजली : हम्म ( वो सब बहार निकल गए )
मामा : गाडी़ ठीक करवा के ले आना हम जा रहे है समान गाडी़ मे ही है
ड्राइवर : जी सहाब
वो सब ऑटो को देखने लगे पर खाली ऑटो आ ही नही रहे थे
वहाँ रघु  गाडी़ मे बैठे बैठे आयशा के बारे मे सोच रहा था
उसने नोटिस किया की आगे हल्की अवाज मे गाना बज रहा था उसने ड्राइवर से वोलयूम तेज करने को कहा  
ड्राइवर ने वोलयूम तेज कर दी
वहाँ आयशा गोलगप्पे दिखे
आयशा : चल ना गोलगप्पे खाते है
अंजली : हाँ चलते है
मामा : ठीक है तुम दोनो खा लो ( वो दोनो रोड पार करके गोलगप्पे वाले के पास चले गए
अंजली : भईया गोलगप्पे हम दोनो को
गोलगप्पे वाला  : जी
वहाँ पर राजेश रंजना  वीर और दादी भी गोलगप्पे खा रहे थे वीर ने एक नज़र आयशा और अंजली को देखा फिर गोलगप्पे खाने लगा
गोलगप्पे वाले ने आयशा और अंजली को डोने  दिए
दादी गोलगप्पे खाते हुए बोली : भाईसहाब मुझे दो
बोलते  बोलते  उनको  खासी आ गयी
राजेश ( उनकी पीठ मसलते हुए ):  माँ क्या करती हो आप
आयशा ने अपना डोना साइड मे रखा पानी का लोटा पकडा़ और भागते हुहे दादी के पास आई  अंजली भी आई  उसके पीछे
आयशा दादी की पीठ मसले हुए : दादी जी यहाँ  पे बैठीए
उसने दादी को बेंच मे  बैठा दिया और हाथ मे  पानी दे दिया
थोड़ी  देर मे  दादी शान्त हो गयी
आयशा: दादी आप ठीक  है ना
अंजली ने   भी पूछा
दादी (आयशा की तरफ़ देखकर): हाँ बेटी मै ठीक हूँ 
रंजना : क्या जरूरत  थी खाते समय  बोलने की किसने कहाँ था बोलने को
दादी : तुझे तो सिर्फ  डाँटना ही आता है यहाँ  मेरी जान निकल गयी थी
अभिनव : दादी  माँ जी ठीक ही तो कह रही थी आपको संभलके खाना चहिए था ना
दादी: तू चुप कर मम्मी का चमचा
(आयशा की तरफ़ देखकर) शुक्रिया बेटा
आयशा: दादी  शुक्रिया मत बोलो बस अपना ध्यान रखो
दादी (आयशा को प्यार से देखते हुए )
हाँ बेटा मे ध्यान  रखुंगी
रंजना  (मू बनाते हुए ): हाँ  किसी और ने  समझाया तो समज गयी  मैने  बोला तो  मू  बना  लिया
दादी: तुने  बोला नही  ताने मारे  और इस लड़की ने  समझाया
रंजना: इनको तो  मेरी हर बात से  प्रॉब्लम है
दादी कुछ बोलने को  हुई तब तक राजेश ने तोक दिया: क्या आप दोनो कही भी  शुरू हो जाते है आप दोनो चुप रहिए 
दादी मू बनाते हुए : इससे  बोलो
रंजना : हाँ हाँ बस रहने ही दो , हहहह
राजेश: चुप हो जाओ यार
आयशा की तरफ़ देखकर: बेटा थैंक यू
आयशा:  इतनी छोटी सी बात के लिए थैंक यू मत कहिए   अंकल जी
राजेश: तुम्हारा नाम क्या है बेटा
आयशा: आयशा नाम है मेरा और ये मेरी दोस्त है अंजली
राजेश: बहुत प्यारा नाम है बेटा
आयशा: थैंक यू  अंकल जी हम चलते है
राजेश: ठीक है बेटा
आयशा दादी से: दादी  आप अपना ख्याल रखना खाते समय बोलना मत ( आयशा वहाँ से चली गयी )
राजेश उसे जाते हुए  देख रहे थे 
रंजना न पूछा :  क्या हुआ आपको
राजेश: कुछ नहीं कितनी प्यारी बच्ची थी मेरे दोस्त की बेटी की याद दिला दी
मै अपने यार से मिलने जा रहा हूँ अभी
वीर: अभी  क्यों  अभी  नही  डेड  अभी मै ठक गया हूँ
रंजना : नही आभी नही शाम  को चलेंगे
दादी: हाँ शाम को अभी घर चलते है
राजेश: ठीक है
सब सड़क पार करके गाडी़  की  तरफ आने लगे
रघु क धान जब उस  तरफ गया तो उसने  देखा  वहाँ पार आयशा खडी़  है
रघु: ये  तो वोही लड़की है ना आज इसका चेहरा देख कर रहूंगा
वो गाडी़ से उतरा और रोड पार करके उस तरफ चला गया
बाकी सब गाडी़ मे बैठ  चुके थे
वीर: भाई कहा जा रहे  हो घर नहीं चलना
कुछ दूर आयशा और अंजली खडे़ थे वहाँ एक  ऑटो रुका और वो   तीनो उसमे बैठ गए   रघु ने  अपनी रफ्तार  तेज करी आटो स्टार्ट हुआ और तेजी से चलने की वजह से  आयशा का  दुपट्टा उड़  गया वो रघु के चेहरे मे आ गिरा
रघु ने उस दुपट्टे को प्यार से देखा और सोचते हुए बोला :  तुम्हारा चेहरा नही देख पाया  ना सही पर तुम्हारा दुपट्टा है ना हमेशा मेरे साथ रहेगा
वहाँ गाडी़  शुरू हो चुकी थी
वीर: चलो भाई जल्दी आओ हम जा रहे है
रघु ने उम दुपट्टे को पकड़के अपने साथ  ले गया और  गाड़ी मे बैठ गया और निकल गया
वहा आयशा  ने ऑटो से बहार देखा तो वहाँ  कौई नही दिखा  उसने ऑटो रुखवाया ऑटो रुख गया आयशा बहार निकली और इधर  उधर देकने लगी की कही उसका  दुपट्टा दिख जाए पर कही नही दिखा
अंजली  भी बहार निकली
अंजली : क्या हुआ आयशा दुपट्टा मिला
आयशा: नही यार सायद बहुत दूर  उड़  गया छोड़ चलते है क्या कर सकते है
आयशा  उदास मन से  ऑटो मे बैठ गयी 😔
अंजली  भी बैठ  गयी और वो लोग  निकल गये घर को
वहा पर रघु सबसे पीछे वाली सीट मे बैठ गया हाथ मे आयशा का   दुप्पटा लिए उसके  बगल मे  वीर और अभिनव भी थे वीर ने रघु के हाथ में दुपट्टा देखा तो  पूछा :
ये दुपट्टा आपके पास कैसे आया
रघु: उड़ के
वीर: आपको पता भी  है किसका है
रघु: पता  नही बस उड़  के आ गया तो ...
वीर: आपने रख  लिया हना
रघु: हाँ
अभिनव : ये तो उसकी का है जिसने दादी को पानी  पिलाया
वीर: हाँ ये उसीका का है
रघु  : कौन
वीर: दादी खाते खाते खास गयी थी इसलिये ये पीले दुपट्टे  वाली ने उन्हें पानी पिलाया
रघु उस दुपट्टे को देखते हुए : अच्छा
अभिनव : पापा जी को भी पसन्द आई वो नाम भी  पूछा था उन्होने 
रघु: क्या .... क्या नाम बताया
वीर (सोचे हुवे): क्या था ... वो  आ . य .
रघु: बता ना जल्दी
अभिनव: आयशा यार
रघु: आयशा (उस दुपट्टे को देखकर )  कितना प्यारा नाम है   ।।
वीर अभिनव से : इन्हें  क्या हुआ है
अभिनव :  लगत है इसे  वो लड़की पसन्द आ गयी
वीर: हाँ देखो कैसे इस  दुपट्टे को घूरे जा रहे हैं
अभिनव: एयरपोर्ट मे  भी उसे ही देख रहा होगा
वीर: हा सही  कह रहे हो
वीर ने शरारती अंदाज मे पूछा : भाई आपको लड़की पसन्द तो  नही आ गयी
रघु (दुपट्टे से नजर हताते हुए  नहीं मतलब ...
वीर अपनने (दांत फाड़ते हुए ) मतलब ...
रघु: मतलब मैने उसका नही देखा
वीर हैरान हो गया अभिनव से: भाई ने उसकी शकल नही   देखी फिर भी कुछ कुछ हो गया दिल मे तो  फिर जब वो देखेंगे तो क्या करेंगें
अभिनव: लगता है ये  मजनू बन गया
वीर: चलो भाई ने किमसीको तो भाव दिया
हमे हमारी  भाभी मिल गयी
वीर (ख़ुशी से) अब मेरी भी शादी होगी
रघु: तुम दोनो क्या खुसर फुसर कर रहे हो
वीर: कुछ नही भाई बस ऐसे  ही
रघु: हम्म (खिड़की  से  बहार देखने लगा) वो बडे़  प्यार से  उस  दुपट्टे को देखता  जा रहा था और  सोचे जा रहा था   
रघु (अपने मन मे ) आयशा .. (एक बडी़  सी मुस्कान देकर और उस  दुपट्टे को छूकर) : काश तुमसे  मिल पाता
मिलना चहाता हूँ जानना चहाता  हूंँ   क्यों तुम्हें देखकर हलचल मची
सारे रासते  रघु आयशा का दुपट्टा देखे  जा रहा था
(वो लोग घर पहुँचे )
एक बडा सा बंगला चारो तरफ  पेड़ पौधे लगे थे एक बडा़ सा  गेट जहाँ से रघु की कार अंदर आई
सब बहार निकले
राज : आ गए हम अपने घर
राज रंजना दादी अंदर चले गए
वीर अभिनव उस बंगले को देखने लगे ( रघु  भी देखेंने लगा
वीर और अभिनव रघु  को देखकर एक दुसरे से : भाई के हाथ से ये दुपट्टा छूट  ही नही रहा
अभिनव : हाँ यार एक बार के लिए भी नही
वीर रघु  से : भाई आप इस दुपट्टे का क्या करोगे 
रघु   : क्या करूँगा
वीर : मतलब, आप इसका क्या करोगे दोगे वापिस या फिर ..
रघु  : उसे वापिस दूंगा    
वीर ( शरारत से   ): उससे मिलकर
रघु   (उस चुन्नी को देख कर): हाँ
वीर : और क्या बात करोगे
रघु  ( फ्लो मे   ) :  की मै उससे 
वीर  बीच मे : प्यार करने लगा हूँ हना
रघु  को होश आया : नही नही ..
वीर : अब छुपाने से कोई फायदा नही है भाई हमे सब पता चल गया है रास्ते मे देखा हमने सब कैसे घूरे जा रहे थे
रघु  हसँते हुए : हा छोटे सही कह रहा है तू मुझे उससे प्यार हो गया है
अभिनव : पर तूने तो उसे देखा ही नही
रघु  : पता नही यार जब उसकी हँसी सुनी एक अपनापन सा लगा  जैसे मै उसे जानता हूँ मैने उसका चेहरा नही देखा फिर मेरा दिल अपनेआप तेजी से धड़क उठा
वीर : आप तो पुरे दिवाने हो गए हो
रघु :  हाँ अब चलो अंदर
वहाँ आयाशा अंजली के घर पहुँची अंजली के मामा सबसे मिले वहाँ अंजली के ससुराल वाले भी थे
सबने रोके की रशम पूरी की
अंजली की माँ : पंडित जी  शादि की तारीख निकाल दीजिए
पंडित जी ने शादि की तारीख निकाली और सबने हामी भरी
अंजली  की माँ: हम कल निकलते है  शिमला के लिए
अंजली : हा माँ
आयशा: शिमला क्यों
अंजली : क्योंकि शादी शिमला मे है यहा  नही और तुझे भी कल हमारे साथ जाना है
आयशा: मै कल नही आ पाऊँगी
अंजली : क्या यार चलना ही   पडे़गा मैने वैन बुक करी है कल निकलना है सबने  तिया  अनीता प्रिया सबने
आयशा: अहाना भी आ जाएगी तुम्हारे साथ मै  पक्का कुछ  दिनो मे आ जाऊंगी
अंजली  ( उदास मन से  ): ठीक है आ जाना हा
आयशा उसे समझाते हुए  : मै आ जाऊँगी वैसे भी  फंक्शन शुरू होने  मे टाइम है मै टाइम से आ जाऊँगी  तुम  तैयारियाँ  करो
अंजली : पक्का ना देख अगर तू नही आई  ना तो मै  फंक्शन शुरू  नहीं करुंगी
आयशा: अरे हा हा आ जाऊँगी पक्का
अंजली : बडी़या पर किसके साथ
आयशा: संजय  के साथ आ जाऊँगी
संजय आयशा का बचपन  का दोस्त है जो उनके  साथ ही
इंस्टीट्यूट चलाता था
अंजली: ठीक है पर आ जाना वरना
आयशा: हा हा आ जाऊँगी
अंजली ने  बाकि सब को फोन करके बता दिया सबने हा बोल दिया
अंजलि: अहाना  को भी बता देना
आयशा: हाँ बता  दूंगी मै चलती हूँ
अंजली की मांँ : बेटा रूक जाओ  कभी कबार तो  आती हो
आयशा : आंटी  जी
अंजली की माँ बीतेच मे बोलते हुए : मै कुछ नही  सुनोगी तुम्हें यहा  रुखना होंगा वैसे भी दिन हो गई है  शाम तक चली जाना
आयशा: ठीक है
आयशा ने अहाना को फोन कर दिया बता दिया कि  वो शाम तक आएगी
वहा पर रघु कमरे मे बिस्तार मे लेट कर उस दुपट्टे को देखे जा रहा था थोड़ी देर मे  उसे नींद  आ गयी
3 बजे
राजेश जी ने सबको उठाया और तैयार होने को कहा
सब तैयर होने  लगे
रघु तैयार होके वाशरूम से बहार निकला उसने आयशा का दुपट्टा हाथ मे  पकडा़ : काश मे तुम्हें   देख पाता  पता नही  मिल भी  पाऊँगा या नही
वहा वीर आया: भाई इस दुपट्टे को भी लेके जाओगे
रघु: नही  यार बस देख रहा था सोच रहा था कि काश उसका चेहरा देख पाता
वीर: आपने देखा  नही तो क्या मैने तो देखा अपनी भाभी का चहरा कही  दिखेगी ना मै  बता दूंगा
रघु: ह्म्म्म थैंक यू
वीर वहा  से चला गया
रघु: मिल जाओ एक बार  तुम्हें  जनाना है  मेरे दिल दड़का क्यों था जानना है
थोड़ी  देर मै  सब तैयार होके आ गए और चल दिए
गाडी़  वीर चला रहा था  कुछ देर बाद वीर का ध्यान एक समुद्र तट पै गया वो उसे  देखता ही रह गया वो उसमे खो गया वो बहुत  खूबसूरत बीच था
अचानक से एक लड़की कि तक्कर उस कार से हुई
वहाँ आयशा अंजली कि मदद कर रही थी
आयशा  : तुने सब कुछ रख लिया ना   
अंजली  : हा
आयशा (अंजली के पास आई  ): अंजली हर्षित (अंजली का होने वाला पती ) कैसा है  
अंजली : तू चिन्ता मत कर वो बहुत अच्छा है  सपोर्ट करता है उस मोहित से कही गुना अच्छा है
मोहित ने अंजली का फायदा उठाने की कोशिश करी थी पर आयशा ने उसे बचा लिया  था  )
उसने जो किया मेरे साथ वो अच्छा नही किया पर तुने मुझे  बचा लिया  
आयशा : हम्म सारे लड़कों को यही करना आता है  लड़कियो को फसा कर फिर छोड़ देना एक साल पहले जो हुआ इसकी सजा  अभी तक सह रही हूँ  मेरा तो शादि जैसे पवित्र रिश्ते से विशवास उठ गया
अंजली उसके पास आई और कंधे पर हाथ रखकर बोली : आयशा  जो पहले हुआ वो हो चुका है भुल जा जरूरी नही हर लड़का एसा नही होता जो उसने किया वो
लड़का नही करता हर्षित को ही देख वो मुझसे प्यार करते है और सच मे उसने मुझसे शादि कि कोई दिमांद नही करी
वो मेरी हर बात मानता है जब गलत होती हूँ तो बताता है सबसे चरूरी बात "  मेरी इज्जत करता है " एक लड़की को इससे ज्यादा क्या चाहिए जो दी के साथ हुआ वो तेरे साथ हो वो जरूरी नही तू भी आगे बड़ यकीन है मुझे
तुझे तुझसे भी ज्यादा प्यार करने वाला मिलेगा
आयशा खालीपन से : हम्म  पहले पहले उसने भी एसा ही प्यार दिखाया फिर बीच रास्ते मे छोड़ दिया
रहने दे मेरी बात छोड़  मै दुआ करती हूँ तुझे दुनिया कि हर खुशी मिले
अंजली ने बात पलतते हुए कहा : अपने हाथ का खाना खिला दे बहुत टेस्टी खाना पकाती है
आयशा : क्यों नही ( किचन मे चली गयी )
किचन मे अंजली की माँ थी आयशा वहा काम करने लगी
अंजली की मांँ : अरे बेटा आप  मत करो मै हूँ ना
आयशा : नही आंटीजी कोई नहीं  ये मेरा भी तो घर है ना
अंजली : हा माँ इसके हाथो का खाना खाना  है मुझे
अंजली  की माँ अंजली  से: क्या बोल रही  है
आयशा बीच मे बोलते हुए : आंटी  क्या आप मेरे हाथ का खाना खाना नही चाहती 
अंजली  की माँ : नही बेटा ऐसी बात नही है
आयशा: फ़िर मै  बना लेती हूंँ
आयशा ने खाना बनाना  शुरू कर दिया 

हर हर महादेव