तेरे प्यार की कसम - 6 in Hindi Love Stories by Tanya gauniyal books and stories Free | तेरे प्यार की कसम - 6

तेरे प्यार की कसम - 6

आयशा : अब क्या होगा
अंजली  शरारत से मासूम चेहरा बनाकर : अब क्या कर सकते हैं
आयशा : मैं बात करती हूँ रघु से
तिया : हा हा जा
आयशा : पर वो है कहा
अंजली  : हम्म  पता नही दिखा तो नहीं
प्रिया : हा वो हैंडसम दिखा ही नहीं
वहा से अंजली  की माँ गुजर रही थी
अंजली  की माँ : तुम लड़किया  यहा क्या कर रही हो जाओ अपने कमरे मे
तिया अंजली  के कान मे : अपनी माँ को भेज वरना भांडा फूट जाएगा
अंजली : हा हा भेज रही हूँ
अंजली  की माँ : अरे आयशा बेटा तू भी आ गयी
आयशा : जी आंटी (आयशा ने पैर छूए )
अंजली  की माँ : खुश रहो बेटा जाओ अपने कमरे मे .....
अंजली  बीच मे : माँ वो आपको पापा देख रहे थे
अंजली  की माँ : अच्छा
आयशा : आंटी आपने कही एक लड़का  लम्बा सा गोरे गाल टमाटर जैसे को देखा
अंजली की माँ : वो जो तुम्हारे साथ आया था
आयशा : जी आंटी
अंजली  की माँ : जिसका नाम रघु था
आयशा : जी हा वोयी
अंजली  की माँ : वो बहार लाइटनिंग का काम देख रहा है
आयशा : ठीक है आंटी जी
प्रिया अंजली  के कान मे : अपनी माँ को भेज वरना सब कुछ पता चल जाएगा आयशा को फिर इस हिटलर से हमें कोई नहीं बचा सकता
अंजली  : मा अब आप जाओ पापा बुला रहे हैं
अंजली  उन्हे खीचते हुए ले गयी
आयशा भी बहार आयी वहा रघु इधर उधर देख रहा था वो उसके बगल में खडी़  हो गयी रघु का ध्यान गया
रघु : तुम यहा
आयशा : हा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है
रघु : कहो
आयशा : हम्म्म्म...वैसे तुम यहा क्या कर रहे हो
रघु : लाइटनिंग का काम देख रहा हूँ अब पूरा हो गया
आयशा : अच्छा ...
रघु : यही बात थी
आयशा : नहीं दुसरी बात थी
रघु: कहो फिरो
आयशा : वो.....
रघु: हम्म बोलो मैं सुन रहा हूंँ
आयशा : वो एक गड़बड़  हो गयी है
रघु : क्या गड़बड़ हुई है
आयशा उसे देखते हुए : वो मेरी दोस्त को पता नहीं था की मेरे साथ तुम भी आ रहे हो
रघु : हम्म प्रॉब्लम क्या है
आयशा : तो प्रॉब्लम रहने की है एक ही कमरा खाली है
रघु : अच्छा
आयशा : हा तो हम दोनो को एक ही कमरे मैं रहना पडे़गा तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है
रघु : एक ही रूम फ्री है
आयशा : हा पर अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम है तो...
रघु: मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है और वैसे भी हम तो यहा शादी मैं आए है न
आयशा : हा
रघु: तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं मेरे साथ रहने से
आयशा : नहीं तुम यह मेरी वजह से आए और तुम्हें कोई परेशानी ना हो ये देखना मेरी जिम्मेदारी है
रघु मन मे : तुम्हारे लिए ही तो आया हूँ
आयशा : चलो फिर लगेज ले लेते हैं
रघु : हम्म चलो
आयशा : सिर्फ तीन  से चार दिन की बात है तो प्लीज बुरा मत मानना
रघु : नहीं चलो
दोनो लगेज रूम मे पाहुँचे
उन्होंने  अपना लगेज लिया और अंजली  ने उन्हे रूम की चाबी दी और वो चले गए
अनीता अंजली  से : मजा आ गया
अंजली : तुमने अच्छा  नहीं किया यार अगर उसे पता चल गया तो
अनीता : कुछ पता नहीं चलेंगा
तिया : हा यार हम है न
अंजली : देखते हैं  (वो सब अपने रूम मैं चले गए )
वहा आयशा ने रूम ओपन किया वो दोनों  अंदर आए
आयशा : तुम फ्रेश हो जाओ
रघु: पहले तुम हो जाओ
आयशा : ठीक है (बाथरूम मैं चली गयी)
थोड़ी देर बाद वो बहार आयी रघु बालकनी मे था वो वही चली गई
आयशा : अच्छा है न
रघु : हम्म बेहद ख़ूबसूरत
आयशा : तुम जाके फ्रेश हो जाओ
रघु चला गया थोड़ी देर बाद वो आया बालकनी मे
आयशा चाय पी रही थी
आयशा ने रघु को भी दूसरा कप पकडा़या
रघु चाय की सिप लेते हुए : तुम्हें यहा अच्छा लगता है आयी हो यहा
आयशा : हा आयी हूँ बहुत बार कॉलेज टूर के बहाने तो कभी काम के सिलसिले मैं
रघु : अच्छा
आयशा: हम्म तुम यहा कम्फर्ट हो न बोर तो नहीं हो रहे
रघु : नहीं नहीं हो रहा
आयशा : अब रात हो गयी है तुम आराम कर लो थक गए होंगे
रघु: तुम नहीं थकी
आयशा : हा थक तो गयी हूँ
रघु: तुम भी सो जाओ
आयशा : हा चलो
दोनो कमरे मे  आए
रघु: तुम बेड मे सो जाओ
आयशा : तुम कहा
रघु : कुशन मे
आयशा : नहीं तुम परेशान क्यों हो रहे हो मेरी वजह से
रघु : कोई परेशानी वाली बात नहीं है
आयशा : नहीं तुम बेड में सो जाओ
रघु : तुम कहा
आयशा : कुशन मे
रघु: नहीं मुझे अच्छा नहीं लगेगा तुम बेड मैं सो जाओ बात खत्म
आयशा : पक्का
रघु: हम्म पक्का
आयशा बेड मे जाकर लेट गयी और रघु कुशन मे
आयशा : कल तुम मेरे साथ शॉपिंग मैं चलोगे
रघु: हा वैसे भी मेरे पास शादी वाले कपड़े नहीं है, मैं अमेरिका मैं कहीं जाता नहीं था पंसद नही था
आयशा: तुम्हें यहाँ अच्छा नहीं लग रहा
रघु: मैंने कहा पसंद नहीं था अब पसंद है
आयशा : अच्छा  कोई नहीं अपने लिए भी ले लेना
रघु : हम्म
आयशा : चलो गुङ नाईट
रघु : गुङ नाईट
आयशा  :  ये लाइट ऑफ कर दू या खुली रहने दू
रघु : जैसी तुम्हारी मर्ज़ी
आयशा : ओकए  (लाइट ऑफ कर दी और बालकनी का डोर ओपन कर दिया सुबह से ठकने की वजह से दोनो को नींद आ गयी
सुबह आयशा की नींद खुली उसने देखा की रघु अभी भी सोया है वो उठी और रघु के पास आयी )
वो रघु के सामने घुटने के बल बैठी और उसे देखने लगी
उसने रघु को ऊपर तक चादर उडा़यी और  उसका सर सहलाने लगी फिर उसकी नजर उस खरोच मे पड़ी उसने उसका हाथ पकडा़
आयशा : अपनी चोट नहीं दिखी और मेरी छोटी सी चोट  मे इतना दर्द हो गया तुम्हें
आयशा को वो सब याद आने लगा कैसे रघु ने उसे डाँटा
आयशा उन यादो मे घुम थी आचानक रघु ने करवट ली उसे अपने हाथ मैं किसी का हाथ महसूस हुआ तो उसने अपनी आँखे खोली और वो आयशा को देखने लगा तो कभी अपने हाथ को  जो अभी भी आयशा ने पकडा़ था
थोड़ी देर बाद आयशा ने रघु पर नज़र घुमाई उसने रघु का हाथ एक झटके में  छोडा़  और उठ खडी़  हुई
आयशा रघु से नज़र चुराते हुए : वो .. हम्म मै फ्रेश होके आती हूँ
उसने कपड़े  सूटकेस से निकाले और बाथरूम मे चली गई (रघु कबसे आयशा को ही देखे जा रहा था जब तक वो बाथरूम मे नही चली  गयी थी उस उसे याद आने लगा कैसे आयशा ने उसका हाथ पकडा़ था
थोड़ी देर बाद आयशा बाथरूम से बहार आई उसने देखा की रघु बालकनी मे है )
आयशा मन मे : आज इससे सॉरी बोल देती हूं मैं भी पागल हूं कब क्या कर देती हूं कुछ पता नहीं
वो बालकनी की तरफ चलने लगी
आयशा : कितना प्यारा है यार ये गोल मटोल गाल टमाटर जैसे लाल है.... नहीं मैं क्यों  बोल रही हूं ये सब इसकी तो जीएफ भी है तब भी यार नहीं आयशा मुझे इससे दूर रहना है बस सॉरी बोल देती हूं
आयशा रघु के बगल में खडी़  हो गई और उसे देखने लगी रघु को पता चल गया था की वो बगल में खडी़  है
रघु सामने देखते हुए : कुछ कहना चाहती हो
आयशा मन मे : इसे कैसे पता
रघु : बोलो
आयशा : सॉरी
रघु उसकी तरफ देखकर : क्यों
आयशा : वो कार मे... और अभी सुबह के लिए
रघु सामने देखते हुए : सुबह के लिए क्यों?
आयशा: वो मे सिर्फ  तुम्हे कंबल उडा़  रही थी की कहीं तुम्हें ठंड ना लगे और कुछ नहीं था और तुम्हारे हाथ की खरोच देख रही थी प्लीज मुझे गलत मत समझना
रघु: नहीं कोई नहीं मैं तुम्हें कभी गलत नहीं समझता और सॉरी बोलने की कोई जरूरत नहीं
आयशा : तुम्हें बुरा नहीं लगा
रघु : ना
आयशा : क्यों
रघु : तुमने जानबूझके किया ये सब
आयशा : नहीं वो सब......
रघु : फिर अब मत बोलना सॉरी
आयशा : ठीक है (आयशा पीछे मुड़कर जाने लगी)
रघु : वैसे हमारा रिश्ता क्या है
आयशा रूक गई उसने पीछे देखा
आयशा : रिश्ता ?
रघु : हा बोलो
आयशा हिचकते हुए : दोस्ती का
रघु उसे देखते हुए : रूल्स पता है दोस्ती के
आयशा मन मे : कौनसे रूल होते है ?
रघु : क्या हुआ
आयशा : कुछ नहीं तुम बताओ
रघु : नो सॉरी एंड थैंक यू
आयशा : ओह
रघु : हा और हम दोस्त है तो प्लीज नो सॉरी नो थैंक यू वरना...
आयशा : वरना?
रघु: वरना मैं बात नहीं करुंगा
आयशा : नहीं नहीं पक्का नो सॉरी नो थैंक यू
रघु उसे देखते हुए : ठीक अब तैयर हो जाओ शॉपिंग मे चलना है
आयशा : हम्म
रघु: मैं भी हो जाता हूं
रघु ने कपडे उठाए और फ्रेश होने चला गया
थोड़ी देर बाद वो फ्रेश  होके आया आयशा भी तैयार हो चुकी थी आयशा ने ब्लैक कलर का स्वेटर ब्राउन जैकेट के साथ नीचे से स्टाइल वाली जींस के साथ जूते पहने थे बालो का जुड़ा था
आयशा : चलते हैं
रघु : हम्म
आयशा जाने लगी
रघु : सुनो
आयशा उसे देखते हैं : हा
रघु : अपने बाल खोल लो
आयशा : क्यों  .. मतलब
रघु: वो तुमने बाल धोए है तो सुक जाएंगे
आयशा : अरे कोई बात नहीं
रघु: सर दर्द नहीं होगा
आयशा ने अपने लम्बे  बाल खोल दिए जो उसकी कमर से नीचे थे
आयशा : ये लो खोल दिए अब तो चलो
वो दोनो नीचे चले गए वहा पर सब थे
आयशा : चले
अंजली  : हा
तिया ने टैक्सी रोकी
रघु टैक्सी ड्राइवर के बगल में बैठा था उसके पीछे आयशा आहना अंजली और उसके पीछे तिया प्रिया अनीता
रघु ने मिरर आयशा पे फोकस किया था ये बात आहना ने भी नोटिस की
आहना अंजली  के कान मे : ये कुछ ज्यादा ही नहीं हो गया
अंजली  : अभी और भी बाकी है
आहना : अगर इसने कुछ किया न मेरी बहन के साथ तो मैं इसका मू तोड दूंगी
अंजली : शांत रहे
आयशा : तुम दोनो क्या कर रहे हो
अंजली  : कुछ नहीं बस लहंगे की बातें
आयशा : अच्छा
अंजली  : हम्म
वो लोग एक बड़े सी दुकान के आगे रूके सब गाड़ी से उतरे और अंदर चले गए
वहा अंजली  भी जा रही थी उसने दरवाजा खोला तबतक किसीका फोन आया उसने फोन उठा और बात करने लगी अंजली  : हेलो कौन
कॉलर : मै
अंजली : कौन मै
कॉलर : तुम्हारा .. होने वाला पति
अंजली : तुम.. फोन रखो और दोबारा हिम्मत मत करना फोन करने की
कॉलर : वरना क्या करोंगी
अंजली  : तुम्हें पुलिस के हवाले कर दूंगी
कॉलर : अच्छा  (हाहाहाहा) वो हसने लगा
अंजली  : तुम हसो मत मेरी शादी हो रही है फोन रखो
कॉलर : मैं भी आया हूं यार शादी मे
अंजली : तुम नहीं आओगे
कॉलर : अरे मेरी शादी मैं मुझे ही नहीं बुलाओगी
अंजली  : तुम्हारी शादी ?
कॉलर : हा मेरी शादी तुमसे हो रही है
अंजली  : भूल जाओ
कॉलर : मै तो भूल जाउंगा पर कुछ है जो भूलने नहीं देता
अंजली : क्या
कॉलर: कभी बाद मैं बताऊंगा बाय
उसने फोन रख दिया
अंजली  : हेलो हेलो क्या है वो...
अंजली  मन मे : क्या मुसीबत है क्या है उसके पास ऐसा ......
आयशा उसके कंधे  मे  हाथ रखकर : क्या हुआ  कहा खोयी है किससे  बात कर रही है
अंजली  उसकी तरफ देखकर : किसी से नहीं तू चल
आयशा : हा जल्दी चल कल तेरी मेहंदी और संगीत है यार वरना दुल्हन ही रह जाएगी
अंजली : न ना चल (दोनो अंदर गए )
अंजली  ने सारी तैयारी कर ली थी क्योंकि  वो दुल्हन थी बाकी सब अपने लिए लहंगे ज्वैलरी देख रहे थे
आयशा भी अपने लिए लहंगे देख रही थी
अंजली : कोई पसंद आया
आयशा : ना यार
तिया अंजली के कान मे : इसके लिए तो लहंगा रघु को ही पसंद करना चाहिए
प्रिया उन दोनो मे शामिल  होकर : हा हा रघु को ही कहते हैं
अंजली  हसँ दी
आयशा : क्या है यार आजकल
अंजली  : क्या हुआ
आयशा : तुम लोगो का कुछ समज नहीं आया
तुम लोग आज कल क्या एक दुसरे के साथ खुशर पुशर करते रहते हो
तिया: हम तेरी और......
अंजली  बीच मे : लहंगे की बात कर रहे थे
आयशा : पक्का
अंजली  : हा
वहा रघु अपने लिए शेरवानी देख रहा था
आयशा देखने लगी
प्रिया अंजली  से: मैं जाती हूं उस मिस्टर हैंडसम के पास
अंजली  : तू क्या करेगी
प्रिया : पटाने की कोशिश
वहा सब कपड़े देखने में बीजी थे वो चुपके से रघु के पास आई
प्रिया : हाय हैंडसम
रघु कपडे़  को देखते हुए : हैलो
प्रिया : मै कुछ हेल्प करू
रघु ध्यान ना देते हुए : नहीं मैं कर लुंगा
प्रिया मन मे : ये तो भाव ही नहीं दे रहा .. क्या करू आयशा का नाम लेती हूँ
रघु ने एक पल उसे देखा फिर शेरवानी देखने लगा
प्रिया : कुछ समज ही नहीं आ रहा क्या?
रघु : ना
प्रिया : आयशा को भेजु कुछ मदद के लिए
रघु ने उसे देखा: अगर वो बीजी नहीं है
प्रिया : वो देखो वहा आयशा को खुद कुछ समज नहीं आ रहा
रघु ने देखा वहा आयशा परेशान होके सब देख रही थी
प्रिया : तुम उसकी मदद करदो
रघु : हम्म  तुम्हें नहीं करनी शॉपिंग
प्रिया : हा (वो वहा से चली गई)
आयशा को बड़ी मुश्किल से लहंगे पसंद आए यहा रघु भी आयशा के लिए देख रहा था उसकी नज़र एक गुलाबी रंग के लहंगे  मे पडी़  वो बेहद ही खूबसूरत था उसका दुपट्टा पारदर्शी होने के साथ सुंदर था ऊपर से उस दुपट्टे में सितारे थे रघु ने उस चुन्नी  को हाथ मैं पकडा़  और आयशा को
सोचने लगा उस लहंगे मैं वो मुस्काराय जा रहा था वहा एक लड़की आई लड़की रघु से: सर
रघु ध्यान मे आया : हा
लड़की : आपको ये पसंद आया
रघु: जी हा इसे  पैक कर दिजिये और इसका बिल मेरे नाम से बनाना रघु मल्होत्रा
लड़की : जी सर
लड़की जाने को हुई रघु पीछे से उसे रोका : सुनो
लड़की : जी सर
रघु : इसके मैचिंग ज्वेल्स लेने हैं तो
लड़की : ऑफकोर्स सर वहा से राइट  मैं जाकर
रघु: ठीक है थैंक यू
वहा रघु पाहुँचा वहा पर आयशा और तिया भी थी
रघु भी आ गया वहा और ज्वैलरी भी देखने लगा
आयशा रघु को देखकर : तुम यहाँ
रघु: हा वो तुमसे मिलने आया हूं
आयशा : मतलब
रघु : वो मेरा मतलब है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की मैं कौनसी शेरवानी लू
आयशा : मैं आती हूं मदद करने
रघु : हम्म
तबतक रघु का फोन बज उठा वो वीर का फोन था।
रघु : एक मिनट हा
आयशा : हा
वो  दुसरी तरफ  जाकर बात करने लगा
रघु : हा छोटे बोले
वीर : क्या भाई कहा हो एक कॉल भी नहीं कर पाए
रघु : सॉरी यार वो टाइम नहीं मिला
वीर : हा अपने भाई को याद करने का भी नहीं मिला
रघु : सॉरी कहा तो सही
वीर : हा हा बस रहने दो आप
रघु : अभी बता क्या करू
वीर : क्या करोंगे हहह रहने दो
रघु : ये सब छोड तू बता क्या हो रहा है
वीर : क्या होगा भाई वाट लगी है आप तो मस्त  रहो भाभी के साथ
रघु हसँते हुए : हा
वीर : हा भाई रहने दो आप
रघु : वैसे तुने कोई बहाना बता दिया था न
वीर : हा बड़ी मुश्किल से
रघु: ऑफिस का काम कहा तक पहुंचा
वीर: अभी आधा हो गया आपका इंतजार है
रघु : हम्म  मे कुछ चेंज करूंगा
वीर : क्या चेंज
रघु : वो आके बताता हूं बाय
वीर : ठीक है बाय
रघु ने देखा की वहा आयशा नहीं थी
उसने जल्दी से अच्छी सी ज्वैलरी   खरीदी और ऊपर आ गया
आयशा : कहा थे कब से ढूँढ़  रही हूँ
रघु : वो मेरे भाई का फोन था
आयशा : चलो मैं तुम्हारे लिए कुछ खरीदती हूं
रघु : हा चलो
आयशा ने रघु के तीन  से चार शेरवानी ली
लगबग चार बज गए थे सबकी शॉपिंग हो चुकी थी
दुकानदार ने आयशा को पैकेट दिए और बिल भी
आयशा : अंकल मेरे सिर्फ चार पैकेट है ये पैकेट किसका है (रघु वहा आया और इससे पहले आयशा उसे खोल पाती रघु ने उसके हाथ से पैकेट ले लिया )
रघु : ये मेरा है
आयशा : अच्छा ठीक है
रघु : तुम गाडी़ मे जाओ मैं पे कर दूंगा
आयशा : नहीं मैं करूंगी पे
दोनो ने कार्ड निकलाके पे किया और निकल गए
वहा सामने भेलपुरी वाला था प्रिया और आहना और बाकी सब खा रहे थे आयशा भी खाने लगी
ऐसी ही सबने बहार खाया और घुमे
शाम के 6 बज गए थे सब होटल पहुचे और अपने कमरे मैं चले गए आयशा तो आते ही बेड  मैं लेटकर सो गई
रघु ने वो पैकेट उठाया जिसमे आयशा के लिए लहंगा और ज्वैलरी थी वो आयशा के पास बेड मैं बैठ गया
रघु आयशा को देखते हुए: तुम्हारे लिए लाया हूं पर दू कैसे
वो उठा पैकेट के साथ बहार रिसेप्शन मे आ गया
वहा उसे अंजली  की माँ मिली
रघु अंजली  की माँ से : आंटी अंजली  कहा है
अंजली  की माँ : बेटा वो अपने रूम मे होंगी
रघु : रूम नंबर
अंजली की माँ: तीनसो चार
रघु: ठीक है
रघु वहा से तीनसो चार  रूम मे गया
रघु ने दरवाजे की घंटी बजाई अंजली  ने दरवाजा खोला
अंजली : तुम यहा क्या हुआ
रघु: तुमसे कुछ काम था
अंजली  : हा बोलो
रघु ने वो पैकेट आगे किया : ये
अंजली : क्या है ये
रघु : ये मैं लाया हूं आयशा के लिए
अंजली  : अच्छा तो
रघु : वो तुम उसे दे देना पर मेरा नाम मत लेना
अंजली : तुम खुद देदो
रघु: नहीं वो..
अंजली : हिम्मत नहीं है
रघु : वो कही गलत ना समज ले
अंजली  : खुद दे देना
रघु मासूम सा चेहरा बना कर : तुम देदो ना प्लीज
अंजली  ने हसँते  हुए रघु से पैकेट लिया : मैं दे दूंगी कोई नहीं अब जाओ
रघु : थैंक यू उसमे ज्वैलरी भी है वो भी दे देना
अंजली : ठीक है
रघु अपने कमरे मे आ गया आयशा अभी भी सोयी  थी वो फ्रेश होके बालकनी मे जाकर कुशन मे बैठ गया थोड़ी देर मे वो भी सो गया
करीब नो बजे आयशा की नींद खुली पानी पीने के लिए
आयशा ने बगल से पानी पिया फिर उसे याद आई की वो बिना कपडे़ चेंज   किए जो गई थी
आयशा : कल ही चेंज करुंगी
उसने सोफे मे देखा तो वहा रघु नहीं था
आयशा : ये कहा चला गया
आयशा उठी उसने बालकनी मे देखा तो वो वहा सोया था
आयशा : ये बालकनी मे ही सो गया
उसने कंबल उठाया और बालकनी मे आ गई
आयशा उसे देखकर : कौन सोता है यार बालकनी मे ये लड़का भी न
उसने रघु को कंबल उड़ा दिया वो रघु का सोया हुआ चेहरा देखने लगी आयशा रघु के चेहरे के करीब  आई उसके बाल रघु के चेहरे मैं गिर गए वो उन्हें  प्यार से हटाने लगी
आयशा : सोते हुए कितना प्यारा लगता है यार
आयशा पीछे मुड़कर जाने लगी पर उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसीने उसके बाल खींचे हैं वो हड़बडा़ गयी : वो मै तुम्हें कंबल उडा़ने...
उसने पीछे देखा तो रघु सोया ही था आयशा के बाल रघु
की शर्ट के बटन मे  फस गए थे
आयशा : ये बटन मुझे मरवायंगा वैसे ही बहुत कुछ कर चुकी हूं मैं इसके साथ कभी इसे चाट देती हूं तो कभी कुछ
(वो अपने बाल छुड़वाने लगी) भगवान  बचा ले प्लीज वरना ये मेरे बारे क्या सोचेगा  कहीं ये उठ गया तो
ना ना प्लीज रघु मत उठना प्लीज
आयशा के बाल निकल ही नहीं रहे थे
आयशा खुद से : और जा इसके करीब ना ना घुस जा इसके अंदर ही.., छी यार कितनी नींद आ रही है क्या करू
आयशा थक हार के रघु के पास बैठ गई
कुछ देर बाद आयशा घूरके रघु को देखा : क्या जरूरत थी यहा सोने की सोफा नहीं था क्या  पता नहीं क्या इंसान है
कहा फस गई, यार मैं खुद से क्यों बात कर रही हूं
ऐसे करते करते आयशा को नींद  आ गई
सुबह आयशा की नींद खुली
आयशा को कल की बात याद आई
आयशा : थैंक गॉड ये उठा नहीं वर्ना आज मैं जाती काम से
आयशा अपने बाल निकालने लगी
आयशा : निकल जा प्लीज
उसकी कोशिश रंग लायी बाल निकल गए
आयशा : थैंक यू शिवजी अच्छा  हुआ ये उठा नहीं
वो उठी और बालकनी का दरवाजा खोलने लगी
पीछे से आवाज आई : तुम यहां
आयशा ने पीछे देखा और कहा : वो.....
रघु : ये कंबल तुमने उडा़य मुझे
आयशा : वो न तुम यही सो गये थे तुम्हें  ठंड ना लगे इसलिय मैने ये कंबल उडा़ दिया
रघु : अच्छा  थैंक यू
आयशा : हम्म अब तुम फ्रेश हो जाओ
रघु ने वो कंबल उठाया और बहार रख दिया उसने अपने कपड़े उठाये
रघु : मैं फ्रेश होके आता हूं
आयशा : आज तुम ये पहन रहे हो आज तो  संगीत है ना
रघु: ठीक है (रघु ने पैकेट से कपड़े निकाले और बाथरूम जाने लगा)
आयशा : तुम्हें  कपड़े पसंद तो आए ना
रघु : हा बहुत अच्छे हैं
आयशा कुछ बोलने को हुई तबतक दरवाजे की घंटी बजी
आयशा : मैं देखती हूं तुम जाओ
रघु: ठीक है (चला गया)
आयशा ने दोर  खोला सामने अंजली  थी
आयशा अंजली  से : तू इतनी सुबह सुबह
अंजली : हा कुछ काम था
आयशा : बता क्या काम था
अंजली  ने वो पैकेट आयशा को पकडा़या
आयशा : ये क्या है
अंजली : देखले खुदी
आयशा ने वो पैकेट देखा : ये तो लहंगा है  कितना प्यारा है
अंजली  : तुझे अच्छा लगा
आयशा : हा बहुत ब्राइट कलर है  वैसे  है किसका ये
अंजली  : तेरा
आयशा : पर मैंने तो ये खरीदा ही नहीं मुझे दिखा ही नहीं है वरना मैं खरीद लेती
अंजली : अब ले ले (उसने पैकेट आयशा को पकडा़  दिया)
आयशा : पर ये मेरा नहीं है
अंजली : पर तेरे लिए हैं
आयशा : किसने दिया
अंजली  : किसी खास ने
आयशा : किसने बता न
अंजली : रघु ने दिया है ये मुझे
आयशा : क्या उसने क्यों और कब
अंजली : कल रात को आया था कह रहा था की बताना मत तुझे
आयशा : पर किस लिए
अंजली : पहनने के लिए यार
आयशा : हा पर मैं तो लायी हूं अपने लिए
अंजली  : तू पहनना ये उसे अच्छा लगेगा और एक तो वो तेरे लिए गिफ्ट लाया तुझे पसंद नहीं आ रहा (आयशा की तरफ हाथ बड़ाकर ) ला दे मुझे मैं पहन लेती हूं
आयशा : नहीं यार ऐसा नहीं है पर उसने सीधे मुझे क्यों नहीं दिया मार थोड़ी ना देती यार
अंजली : उसे डर था की कही तू ले ना और गलत समज ले उसे
आयशा : उसे मुझे देना चाहिए था और ये मैं नहीं ले सकती
अंजली  : क्यों
आयशा : क्योंकि .....( नज़र चुराने लगी )
अंजली : रघु ने दिया है
आयशा : ऐसा नहीं है
अंजली : ऐसा ही है आयशा रख ले उसे अच्छा लगेगा
आयशा : पर
अंजली  : पर वर कुछ नहीं कितने प्यार से उसने तेरे लिए लिया है सोच यार और तुझे दिया भी नही डर के मारे उसके गिफ्ट  की कद्र  होनी चाहिए उसका दिल मत दुखा तू हिटलर जैसा व्यवहार मत कर
आयशा : मैं हिटलर नहीं हूं यार खाली तुम लोगो ने
अंजली : वो सब छोड़ तू रख ले इसे
आयशा : ठीक है तू तैयर हो जा
अंजली  : हा तू भी जल्दी आ जाना
आयशा : हम्म बाय
अंजली  वहा से  चली गई। आयशा ने एक पल उस लहंगे को देखा और उसे कार वाली बात याद आ गई
उसने दरवाजा बंद किया और अंदर आ गया
रघु बाथरूम से : कौन था
आयशा : वो..वेटर था
रघु : अच्छा
आयशा : हम्म (आयशा ने वो पैकेट बाकी पैकेट से अलग रख दिया)
थोड़ी देर बाद रघु बहार आया आयशा उसके सामने खडी़  थी
रघु : क्या हुआ
आयशा ने एक पल उसे देखा फिर कहा : कुछ नहीं
रघु : तुम तैयार हो जाओ मैं थोड़ी देर मैं आता हूं  आयशा : तुम कहा जा रहे हो किसीको भी नहीं जानते
रघु : नीचे  जा रहा हूं किसी से तो जान पहचान हो जाएगी
आयशा : ठीक है मैं तैयर होके अपनी दोस्त के पास चली जाऊंगी
रघु: ठीक है
रघु जाते हुए अपने मन मे : अंजली  ने कपड़े तो दे दिए होंगे आयशा को
आयशा ने कपड़े निकाले और बाथरूम चली गई
वहा रघु नीचे आया वहा संजय भी था
रघु संजय से : हाय
संजय : हैलो
संजय ने ज्यादा भाव नहीं दिया इसलिय रघु भी वहा से चला गया रघु को अंजली के मां पापा दिखे जो एक दुसरे से बात कर रहे थे
रघु : क्या हुआ आंटी कुछ काम है
अंजली  की मां : अरे बेटा तुम
अंजली  के पापा : अभी इतना सारा काम पड़ा है अब तुम बात करने लग जाना
अंजली  की मां: मैं बात कहा कर रही हूं
रघु : मैं आप लोगो की कुछ मदद करू
अंजली  के पापा : देखो न बेटा अभी थोड़ी देर मे बेटी का संगीत है कुछ काम नहीं हुआ है
रघु : आप चिंता मत किजिये मैं मदद करता हूं
संजय भी आ गया वहा : जी अंकल जी मैं भी करता हूं मदद (रघु और संजय हेल्प करने लगे )
करीब आधा घंटा हो गया था काम खत्म हो गया था लोग आना भी शुरू हो गए थे
अंजली  के पापा : थैंक यू बच्चों अगर तुम नहीं होते तो ना जाने सब कैसे होता
रघु : अंकल जी शुक्रियादा मत बोलिए
संजय : हा अंकल अंजली  हमारी भी दोस्त हैं अभी आप दोनो भी तैयार हो जाए दोनो वहा से काउंटर मे चले गए और ड्रिंक पीने लग गए
रघु कोल्ड ड्रिंक का सिप लेते हुए : तुम क्यों नहीं आए शॉपिंग
संजय : मेरे पास कपड़े थे और वैसे भी लड़कियों  के बीच में क्या करता
रघु : हम्म...
संजय : तुम गए थे
रघु : हा मेरे पास कपड़े नहीं थे इसलिए
संजय : अच्छा  या किसी और की वजह से
रघु उसे देखकर : किसकी वजह से
संजय : कुछ नहीं
रघु सीढी़यो  को ही देखे जा रहा था चारो तरफ धमाल मचा हुआ था सब खुशी से नाच रहे थे प्रिया तिया अनीता नीचे आ गए उन्हे आते हुए रघु ने देखा रघु उनके पास आने लगा
प्रिया : हाय ये हैंडसम खुद हमारे पास चलके आ रहा है
तिया: हा यार सपने जैसा लग रहा है कितना हॉट लग रहा है
अनीता : सही कहा नशीली आंखे पर क्या फायदा
तिया : क्यों
अनीता : भूल गई ये तो आयशा का दीवाना है
तिया : हा यार
प्रिया : नहीं देख मुझे देख रहा है शायद मेरे लिए आ गया है वैसा ही मैं आज कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही हूं
तिया: सपनों में भूल जा
प्रिया ने उसे घूरके देखा
रघु प्रिया से : हाय
प्रिया : हाय हैंडसम
रघु: तुम्हारी दोस्त नहीं आई
तिया : आ रही है
प्रिया : तब तक मैं हूं ना
रघु : कब आएगी
अनीता : क्यों  कुछ काम था क्या
रघु: नहीं वो ऐसी ही
तिया : आ रही है आयशा
रघु : नहीं मैं अंजली  की बात कर रहा हूं
तिया : हा हा हमें पता है कि किसकी बात कर रहे हो
रघु झेप गया तिया प्रिया को खींचते हुए अनीता के साथ हसँते हुए निकल गई
प्रिया: क्या है मैं उससे बात कर रही थी
प्रिया : क्या है मैं उस्सई बात कर रही थी ना
अनीता : तुझे दिख नहीं रहा था वो आयशा को पूछ रहा था उसे हममे कोई दिलचस्पी नहीं थी
तिया: हा सही कह रही है बूल जा उसे
प्रिया : कैसे यार कितना हॉट है बॉडी देख  उसकी मसस्ल देख और गाल मन करता है की खा जाऊ
वहा रघु सीढी़यो  को ही निहारे जा रहा था। थोड़ी देर बाद अंजली  आई उसके राइट मे आयशा और लेफ्ट मे आहना थी रघु को तो एक करेंट सा लग गया था उसे देख कर दिल मे हलचल मची थी सब तालिया बजा रहे थे
रघु ने देखा की आयशा ने दुसरे रंग का लहंगा पहना है तो उसे बहुत बुरा लगा
रघु उदास होकर : शायद अंजली  ने दिया नहीं है पूछूंगा उसे
रघु उन तीनो के पास आया
आयशा ने देखा की वो कुछ उदास  है उसे समझते हुए देर नहीं लगी की ऐसा क्यों  है
अंजली  को मंच मे बिठाया गया और फंक्शन जोर शोर से शुरू हुआ
अंजली आयशा के कान मे : देख वो उदास है पता है तुझे किस वजह से
आयशा रघु को देखकर जो उसे ही देख रहा था : हा पता है
अंजली मन मे : कितना परेशान करेंगी बेचारे को
वहा तिया अनीता और प्रिया संगीत का रंग जमा रहे थे
आयशा रघु के पास आई : ​​हाय
रघु : अच्छी  लग रही हो
आयशा : थैंक्स वैसे तुम उदास लग रहे हो
रघु: नहीं तो
आयशा : हँसो  फ़िर
रघु झूठ मूट का हसँने  लगा
आयशा : डांस करते हैं आओ
वो उसका हाथ पकड़के डांस करवाएने लगी रघु भी उसकी खुशी देखकर सब भूल गया ऐसी ही सब नाचते गाते गए रघु ने देखा की सब मग्न  है वो चुपके से अंजली  के पास गया
रघु अंजली  से : कांग्रेचुलेशन अंजली
अंजली :  थैंकस (वो समज गई थी की रघु क्यों आया है)
अंजली  ने जानभूझकर उससे नजर फेर ली
रघु उसे ही देख रहा था
अंजली  तिरछी  नजरो से : मैं आयशा नहीं हूं मुझे घूरना बंद करो बात क्या है बोलो
रघु : तुमने आयशा को...
अंजली : नहीं दिया सॉरी भूल गई
रघु का मूड खराब हो गया : कोई नहीं
वो वहा से एक कोने में खड़ा हो गया
अंजली  ने बहार देखा वहा कोई नहीं था
आहना उसके पास आई : किसे  ढूंढ रही है नज़र
अंजली : किसी को नहीं
आहना  : हर्षित जीजू को
अंजली  हसँ गई
आहना : आते ही होंगे चिंता मत करो
अंजली : हा (अंजली  ने रघु को देखा जो अभी भी उदास था) बेचारा
आहना : कौन
अंजली : रघु और कौन
आहना  : क्यों
अंजली  ने सारी बात बता दी
आहना उसे घूरकर : मखन लगा रहा है और क्या
अंजली : नहीं यार असल में प्यार करता है वो
आहना : अच्छा  कैसे पता
अंजली  : उसकी आंखों  मे सच्चाई  दिखती है
आहना : मुझे तो नहीं दिखता कुछ भी
वो वहा से चली गई
अंजली  रघु की हलात को देखकर मुस्काराय जा रही थी। अंजली  को किसी का कॉल आया तो वो अपनी मां से बोलकल कमरे मे चली गई वहा पर हर्षित आ गया सगाई के लिए
तिया: आओ जीजाजी
हर्षित : कैसी हो तुम सब
अनीता : हम बडी़या  है
हर्षित स्टेज की तरफ देख रहा था
प्रिया : अपनी होने वाली को देख रहे हैं
हर्षित : है कहा वो
आयशा : मैं बुलाके आती हूं आयशा बुलाने चली गई
तिया : ऐसे नहीं दिखेंगी वो
हर्षित : कैसे दिखेंगी
अनीता: दुल्हे राजा दुल्हन को बुलाओ अपनी आवाज से (वो सब हर्षित को सेंटर मे ले गए और गाना बजवाया। आहना तिया अनीता प्रिया गाने के साथ गाने लगे
कब से आए हैं तेरे दूल्हे राजा अब देर न कर जल्दी आजा कब से आए हैं तेरे दूल्हे राजा अब देर न कर जल्दी आजा
हर्षित गाने लगा हो .... हो ..हो ..हो ....
तेरे घर आया मैं आया तुझको लेने दिल के बदले में दिल का नज़राना देने मेरी हर धड़कन क्‌या बोले है सुन सुन सुन साजन जी घर आए साजन जी घर आए
साजन जी घर आए साजन जी घर आए दुल्हन क्यों शरमाए  साजन जी घर आए
वहा आयशा अंजली को लेकर आई अंजली हर्षित को देखकर खुशी से गाने लगी
ऐ दिल चलेगा अब ना कोई बहाना गोरी को होगा अब साजन के घर जाना माथे की बिंदिया क्‌या बोले है सुन सुन सुन साजन जी घर आए … साजन जी घर आए साजन जी घर आए
हर्षित को उसे देखकर खुशी हुई हर्षित ने उसे देखा पर अंजली ने उसे इग्नोर कर दिया और आगे गाने लगी
दीवाने की चाल में फंस गई मैं इस जाल में ऐ सखियों कैसे बोलो बोलो
हर्षित ने ये सब नोटिस किया वो भी अकड़ के गाने लगा
मुझपे तो ऐ दिलरुबा तेरी सखियां भी फ़िदा
ये बोलेंगी क्‌या पूछो पूछो
अंजली को उसपर गुस्सा आया वो आगे गाने लगी
जा रे जा झूठे तारीफ़ें क्‌यूं लूटे जा रे जा झूठे तारीफ़ें क्‌यूं लूटे
हर्षित बडे़ प्यार से अंजली के पास आया
तेरा मस्ताना क्‌या बोले है सुन सुन सुन
साजन जी घर आए …साजन जी घर आए
साजन जी घर आए साजन जी घर आए
दुल्हन क्यों शरमाए  साजन जी घर आए
हर्षित ने अंजली का हाथ पकडा़ पर अंजली ने झटक दिया हर्षित को कुछ समझ नही आया अंजली उसे घूरके
ना समझे नादान है ये मेरा एहसान है चाहा जो इसको कह दो
हर्षित आगे गाने लगा
छेडे़ मुझको जान के बदले में एहसान केदे दिया दिल 
तेरा दीवाना क्‌या बोले है सुन सुन सुनसाजन जी घर आए …
अंजली की माँ भी इमोशनल हो गयी
मेंहदी लाके गहने पाके हाय रो के तू सबको रुला के
सवेरे चली जाएगी तू बड़ा याद आएगी तू जाएगी तू बड़ा याद आएगी तू बड़ा याद आएगी याद आएगी
हर्षित ने अंजली की माँ को गले लगाया और खुश करते हुए गाने लगा
तेरे घर आया मैं आया तुझको लेने दिल के बदले में दिल का नज़राना देने मेरी हर धड़कन क्‌या बोले है सुन सुन सुन साजन जी घर आए साजन जी घर आए साजन जी घर आए साजन जी घर आए दुल्हन क्यों शरमाए  साजन जी घर आए
सब ऐसी ही झूम रहे थे और वहा बेचारा रघु ऐसी सबको देख रहा था और आयशा भी वही खडी़ थी उससे कुछ दूर थी रघु उसे खुश होते हुए देख रहा था वो भी खुशी महसूस कर रहा था अब रिंग सेरेमनी शुरू हो गई थी हर्षित और अंजली  मंच मैं बैठे थे
हर्षित अंजली से : तुम नाराज क्यों  हो
अंजली : नहीं तो नहीं हूं
हर्षित : फ़िर
अंजली : कितनी देर लगा दी आने मैं कब से इंतजार कर रही हूं
हर्षित : अपनी प्यारी वाइफ  के टक्कर  का भी तो लगना है ना तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो
अंजली  : थैंक्स तुम भी बहुत अच्छे लग रहे हो
पंडित जी ने पूजा शुरू की अंजली  और हर्षित ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई और चारो तरफ धूम मच गई अंजली ने देखा की रघु और आयशा ऐसे ही खड़े हैं वो उनके पास आ गयी
अंजली : अरे ये क्या तुम दोनो डांस क्यों नहीं कर रहे चलो करो
दोनो मना कर रहे थे पर अंजली  ने उनकी एक नहीं सुनी वो दोनो को स्टेज के सेंटर मैं ले आई और गाना बजवा दिया
बन्नो की मेहंदी क्या कहना बन्नो का जोड़ा क्या कहना
बन्नो लगे हैं फूलों का गहना बन्नो की आंखें कजरारी
बन्नो लगे सबसे प्यारी बन्नो पे जान मैं वारी वारिस
रघु आयशा को देखकर
हो हो.. ओ.. हो..
बन्नो की सहेली..रेशम की डोरी
चुपके चुपके के शर्मिये देखे चोरी चोरी ....
बन्नो की सहेली..रेशम की डोरी
चुपके चुपके के शर्मिये देखे चोरी चोरी....
ये माने या ना माने मैं तो इसपे मर गया ये लड़की हाय
अल्लाह, हाय  हाय रे अल्लाह ये लड़की हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
आयशा जाने को हुई तब ही तिया उसे खीचते हुए ले गई और कहा : डांस तो करले हिटलर दोस्त की शादी है
आयशा डांस करते करते गाने लगी
बाबुल की गलियां..न छढ़ के जाना पागल दीवाना..इसको समझाना
बाबुल की गलियां..न छढ़ के जाना पागल दीवाना..इसको समझाना
देखो जी देखो ये तो मेरे पीछे पड़ गया ये लडका हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह ये लडका हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
रघु उसे देखते हुए
लब कहे ना कहे बोलती है नज़र प्यार नहीं छुपता..यार छुपाने से (प्यार नहीं छुपता..यार छुपाने से)
आयशा गाते हुए
आ..रूप घूंघट में हो तो सुहाना लगे बात नहीं बनती यार बताने से
ये लड़की हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह ये लडका है अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
मांगने से कभी हाथ मिला नहीं जोड़ियां बनती है.. पहले से सबकी (जोड़ियां बनती हैं.. पहले से सबकी)
रघु गाते हुए
हो..लेके बारात घर तेरे आऊगा मैं मेरी नहीं ये तो मरजी है रब की
आयशा गाते हुए :
अरे जा रे जा उन झूठी मुठी बातें न बना ये लड़का हाय  अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह ये लड़की हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
बन्नो की सहेली..रेशम की डोरी, छुपके छुपके के शर्मिये देखे चोरी चोरी
बाबुल की गलियां..न छढ़ के जाना पागल दीवाना..इसको समझाना
ये माने या ना माने मैं तो इसपे मर गया ये लड़की.. ये लड़की हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
ये लडका हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
ये.. ये लड़की हाय अल्लाह, हाय हाय रे अल्लाह
सब मिलके डांस करने लगें
थोड़ी देर बाद सबने खाना खाया फिर दुल्हे वाले चले गए और बाकी सब अराम करने अपने कमरे मे चले गए
संजय ने वो सब देखा था जो संगीत मैं हुआ वो अपने दोस्त के घर मैं था
आयशा आई और कपड़े चेंज करके बेड  मैं लेट गई
रघु भी फ्रेश होके  आया
आयशा : आज मजे आए ना संगीत मे
रघु : हम्म
आयशा : खाना कैसा लगा
रघु: अच्छा था
आयशा बेड मे सो गई रघु भी थक गया था इसलिये वो भी सो गया
हर हर महादेव 

Rate & Review

Usha Dattani Dattani
Akash jaiswar A-26

Ma'am next part jaldi please 🙏🙏

एडवोकेट मदन मोहन गौनियाल
Kiran Jodhani

Kiran Jodhani 6 months ago

Akash Jaiswar

Akash Jaiswar 6 months ago

Ma'am next part jaldi please 🙏🙏